जयहो रमी
भारत की पृष्ठभूमि पर रची गई काल्पनिक कहानियाँ—रमी की मेज़ों के आसपास महत्वाकांक्षा, प्रतिद्वंद्विता और बदलते हालात।
और चाहो
खाली जेब से नफ़रत करो। चमकती ज़िंदगी चाहो।
गरीबी अँधेरा कमरा है — बाहर निकलो। मोटा नकद चाहो, रेशमी रातें चाहो, और वह ख़ूबसूरती जो हर नज़र घुमा दे। बिना शर्म सपना देखो। बिना डर आगे बढ़ो। जो तुम चाहने और करने की हिम्मत रखते हो — वही तुम्हारा हो सकता है।