1. 21 Game: तीसरी स्कोरशीट
बारहवीं डील के अंत में दुर्गेश ने घोषणा की और पास का कैमरा उसकी तरफ मुड़ा। नवीन बैठा रहा। गिनती के लिए अपना हारा हाथ लगाता रहा। चौदह दंड अंक।
स्कोरर ने तीसरी शीट में जोड़े, पहली दोनों जाँचीं और चैंपियनशिप कुल बताया: नवीन 112, दुर्गेश 134, ईशा 145, मनीष 152। आखिरी डील जीते बिना नवीन बाईस अंकों से चैंपियन था।
वह अट्ठाईस का था। उसी शाम गोदाम की पाली में पहुँचना था। एक साल दुर्गेश कहता रहा कि लंबे आयोजन से बचता है क्योंकि भोजन के बाद सोचने का दम नहीं रहता।
बारह डील सुबह से देर दोपहर तक चली थीं। हर घोषणा जाँची गई। हर दंड दर्ज हुआ। दिन का ऐसा छोटा संस्करण नहीं था जिसमें दुर्गेश का अंतिम पूरा हाथ ही पूरा परिणाम बन जाए।
नवीन ने स्कोरर को तीन शीट स्टेपल करते देखा। आवाज छोटी थी, लेकिन तालियों से अधिक साफ याद रहने वाली थी।
दुर्गेश ने कुल माँगा। स्कोरर ने दिया। पहले विराम पर नवीन चार आगे था। दूसरे पर दो। अब बाईस।
तीन शीट। प्रतियोगिता के तीन चरण, जो पिछले प्रश्न का उत्तर मिलने के बाद अलग प्रश्न पूछते रहे।
कप्तान के भोज के बजाय वे पन्ने लेकर हॉल से क्यों गया, यह समझने के लिए उन काम की पालियों से शुरू करना होगा जिन्हें दुर्गेश की कहानी में कभी नहीं जोड़ा गया। परिणाम में हर डील का स्थान था। पुराने आरोप में उसके समय का पूरा हिसाब नहीं था।
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2. वह सत्र जो काम में निकला
नवीन और दुर्गेश एक गोदाम के मनोरंजन क्लब में थे। चवालीस साल का दुर्गेश रमी टीम समन्वय करता था। काम पर इतना प्रभाव था कि अनुरोध सुनने में वैकल्पिक लगता, होता नहीं।
कर्मचारी कम होने के महीने में नवीन से कई आपात पालियाँ सँभालने को कहा। वह मान गया। पहले अभ्यास छूटा, फिर स्थानीय आयोजन जिसमें खेलना चाहता था। दुर्गेश ने कहा कि टीम मदद याद रखेगी।
चयन आया तो घोषित किया कि उपस्थिति गंभीरता दिखाती है। नवीन ने पालियों का पूछा। उसने कहा सबकी जिम्मेदारियाँ हैं, कुछ बहाना बनाते हैं।
सबसे खराब बात क्लब भोजन पर हुई। किसी ने लंबे आयोजन में नवीन न होने का कारण पूछा। दुर्गेश बोला, “छह घंटे बाद डिब्बे उठा सकता है। पत्ते अलग हैं।”
लोग हँसे। जिन घंटों में दुर्गेश अभ्यास करता था, नवीन अतिरिक्त डिब्बे उठाता था।
अंत का खाना छोड़े बैठक पूरी की। घर में बिना इस्तेमाल फॉर्म काम की फाइल में रखा और महीनों वहीं रहा।
अगले सत्र में बारह डील की व्यक्तिगत चैंपियनशिप में स्वतंत्र प्रवेश किया। शाम की अपनी पाली मानने से पहले कार्यक्रम जाँचा और पर्याप्त समय वाली यात्रा बनाई।
दुर्गेश ने पूछा कि तीनों स्कोर ब्लॉक तक रुकने का इरादा है क्या।
“फॉर्म में यही है।”
फिर पुराना खाली फॉर्म निकाला और पीछे तैयारी की तारीखें लिखीं। इस बार अभ्यास और काम दोनों का समय पहले से लिखा था। किसी अस्पष्ट वादे पर पूरे सत्र को नहीं छोड़ने वाला था।
3. अच्छे हाथ के बाद गलती
शुरुआती अभ्यास में ऐसी समस्या मिली जिसे मानना अच्छा नहीं लगा। सफल घोषणा के बाद ध्यान गिरता था। भीतर खुशी मनाता, अगला हाथ जल्दी लगाता और छोटा संरचनात्मक विवरण चूक जाता।
शुद्ध क्रम को ऐसे समूह से मिलाता जिसे जोकर चाहिए। आकर्षक जोड़ी को तीसरा समान अंक आ चुका है जैसे देखता। नियम जानता था। हर डील पर समान ध्यान से लागू नहीं कर रहा था।
चार डील के ब्लॉक वाले पूरे सत्र किए। उचित विराम रखे, बिना रुके सहनशक्ति का प्रदर्शन नहीं। समीक्षा में जीत के बाद और हार के बाद पहले फैसले तुलना किए। त्रुटि का ढाँचा दिखने लगा।
सरल मौन जाँच बनाई: पूरे समूह, जरूरी क्रम, ढीला मूल्य, वास्तविक रास्ते। नया पत्ता आने पर पुरानी योजना सही मानने के बजाय फिर व्यवस्था देखता।
अभ्यास साथी पत्ते बदलते। खराब व्याख्या से अच्छे परिणाम को पुरस्कार नहीं देते। बड़ा दंड मिलने के बाद पूरे नुकसान को तुरंत वसूलने की कोशिश किए बिना जारी रहना भी परखा।
काम और आराम वास्तविक आयोजन के समय के अनुसार रखे। यात्रा, खाना और कागज एक दिन पहले तैयार किए ताकि सामान्य देरी हॉल में ध्यान न खाए।
एक शाम पूरे अभ्यास के बाद समझ आया कि सबसे अच्छा फैसला हारी डील का शांत डिस्कार्ड था। कॉपी में उसे चिन्हित किया। विजयी घोषणा को विशेष सजावट नहीं दी।
वह उस हाथ में नहीं जीता था, लेकिन अगले हाथ के लिए कम नुकसान लेकर गया था। लंबी प्रतियोगिता में यही छोटा अंतर बाद की सही घोषणा को अर्थ दे सकता था। उसने उस चुनाव को दूसरे विन्यास में दोहराकर देखा।
4. सुबह: बहुत जल्दी छत्तीस अंक
चैंपियनशिप फाइनल में चार खिलाड़ियों की एक मेज पर बारह डील थीं। सही घोषणा करने वाले को शून्य। बाकी का दंड प्रकाशित नियम अनुसार। सभी बारह के बाद कम जमा कुल विजेता। भोजन पर आगे रहने या अंतिम घोषणा करने का अलग पुरस्कार नहीं था।
पहली डील दुर्गेश जीता। नवीन को बारह लगे। दूसरी ईशा ने घोषित की। नवीन चौबीस, दुर्गेश अठारह।
दो बाद नवीन छत्तीस, दुर्गेश अठारह।
सुबह आधी भी नहीं हुई थी कि पूरे दिन टिकने वाला ताना लौट आया। तुरंत खत्म करने का लालच पहचाना। अगला हाथ उससे क्या देता है तय करने से पहले उसे देखना चुना।
तीसरी में दो प्राकृतिक क्रम और बाकी सही समूह बनाकर वैध घोषणा की। दुर्गेश को तीस लगे। नवीन 36, दुर्गेश 48।
बढ़त बदल गई। अगला काम वही आदत थी जो अभ्यास में असफल होती थी: जीत के बाद भी नई डील समान ध्यान से शुरू करना।
किया। चौथी दुर्गेश फिर पहले समाप्त हुआ, लेकिन नवीन के अधूरे पत्ते केवल आठ के थे।
पहली शीट नवीन 44 और दुर्गेश 48 पर बंद हुई। ईशा और मनीष अपने अंक के साथ सक्रिय दावेदार थे।
विराम में नवीन शीट के साथ तस्वीर नहीं बनवाने लगा। प्रविष्टियाँ जाँचीं, जरूरी हस्ताक्षर किए और अगले ब्लॉक से पहले खाने गया। बाहर की आवाज से अलग बैठकर खाना पूरा किया। अगला सत्र शुरू होने का समय सामने था। पहली बढ़त को पूरे दिन की जीत समझने का समय अभी नहीं था।
5. बीच का ब्लॉक
पाँचवीं डील मनीष की थी। नवीन अठारह, दुर्गेश बारह अंक लिए। कुल बासठ और साठ। चार की बढ़त दो की कमी बन गई।
चिढ़ स्पष्ट लगी। अपने बारे में उपयोगी जानकारी थी, अगला हाथ लापरवाही से खेलने का कारण नहीं।
छठी में वैध घोषणा की। दुर्गेश बाईस जोड़कर बयासी पहुँचा। नवीन बासठ पर रहा। आरामदेह दिखता अंतर आया और अगली डील में गया। दुर्गेश ने घोषित किया। नवीन को बीस लगे। बयासी-बयासी।
आठवीं ईशा की थी। नवीन ने ढीला मूल्य घटाया था, छह मिले। दुर्गेश आठ। दूसरी शीट नवीन 88, दुर्गेश 90 पर बंद हुई।
दो अंक। आठ डील की घोषणाओं, निराशाओं और सीमित हारों के बाद अंतर इतना था जिसे एक सामान्य अधूरा पत्ता बदल सकता था।
ईशा ने चारों कुल पढ़ने को कहा। स्कोरर ने पढ़े। मनीष ने एक प्रविष्टि जाँची, सही मिली और हस्ताक्षर किए।
नवीन ने देखा कि भीतर के विचार शांत हुए हैं। हर ड्रॉ से पुराने भोजन वाले अपमान का उत्तर नहीं दे रहा था। वर्तमान हाथ हल करता और उसका परिणाम लंबी प्रतियोगिता के हिस्से के रूप में स्वीकार करता।
दूसरे विराम पर दोनों हस्ताक्षर वाली शीट साथ रखीं। आखिरी ब्लॉक का समय जाँचा। चार डील बाकी थीं।
उँगलियाँ मेज पर नहीं बजाईं। परिणाम को मन में बार-बार नहीं चलाया। कॉपी बंद की और पानी लिया। तीसरी शीट अभी खाली थी। उसमें सही काम करना था, पहली दोनों की कहानी दोहरानी नहीं।
6. भोजन के बाद कुर्सी
दुर्गेश समर्थक से आत्मविश्वास से बात करता लौटा। नवीन कागज लेकर आया, बैठा और कुर्सी सुबह जैसी जगह की। छोटी प्रक्रिया से दोपहर को अलग आयोजन माने बिना फिर शुरुआत हुई।
विराम के बाद पहला हाथ अभ्यास किया था, क्योंकि ध्यान कभी शरीर के कई टर्न बाद पहुँचता है। पहली योजना से पहले तेरह पत्ते जाँचे।
डायमंड का प्राकृतिक क्रम इक्का, 2, 3 था। हार्ट लंबा क्रम बन सकते थे। नौ संभावित सेट देते थे। क्लब में जुड़े बड़े पत्ते थे। पहली व्यवस्था आशाजनक थी, पूरी नहीं।
हर संभावना नहीं रखी। साथ काम कर रहे पत्ते तुलना किए और हाथ विकसित होते अकेले पत्ते छोड़े।
दुर्गेश ने खुला पत्ता लिया। नवीन ने संभावित उपयोग सोचे, पूरा हाथ खुल जाने जैसा नहीं माना। ईशा ने ऐसा डिस्कार्ड नहीं लिया जिसे लेने की उसे उम्मीद थी। याद आया कि खुले चुनाव से आगे जानकारी कितनी कम है।
अंत तक संरचना एक स्पष्ट रास्ते पर आई। आखिरी पत्ता चाहिए था, लेकिन तैयार दिखने के लिए शुद्ध क्रम बलिदान नहीं किया था।
सीमा के पीछे कैमरा पास आया। ऑपरेटर के पैर खिसकने की आवाज सुनकर भी आँख पत्तों पर रही। अगला ड्रॉ क्लब का 9 था।
नवीन ने उसे सीधे जीत के संकेत की तरह नहीं उठाया। पहले पुराने समूहों के साथ रखा। फिर हर पत्ता दोबारा गिना। जिस आदत पर सत्रों में काम किया था, अब वही खुशी से पहले जगह ले रही थी।
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7. नौवीं डील
पूरा हाथ जाँचा: डायमंड इक्का, 2, 3; हार्ट 5, 6, 7, 8; स्पेड, क्लब और डायमंड के नौ; क्लब जैक, रानी, बादशाह।
तीन, चार, तीन, तीन। तेरह वैध पत्ते। क्रम प्राकृतिक और लगातार। नौ अलग सूट के। ढीली हार्ट रानी छोड़कर घोषणा की।
अंपायर ने स्वीकार किया। दुर्गेश को चौबीस अंक लगे। नवीन अट्ठासी पर रहा, दुर्गेश एक सौ चौदह पहुँचा। तीन डील बाकी, छब्बीस आगे।
किसी ने कहा कि प्रतियोगिता लगभग खत्म है। नवीन इतना गणित जानता था कि वाक्य पसंद न आए। खराब हाथ क्रम बदल सकता था। दो और खिलाड़ी दोनों से आगे समाप्त करना चाहते थे।
दसवीं दुर्गेश की हुई। नवीन को दस मिले। अट्ठानवे बनाम एक सौ चौदह। सोलह का अंतर।
डील हारी, दंड सँभालने योग्य रखा। गिनती में जाँचा कि खुले पत्तों का मूल्य सही है। फिर हाथ छोड़ दिया। फैसला बाद में देखेगा। नाराजगी अगली डील में ले जाने से चुनाव कम स्पष्ट होंगे।
दुर्गेश ने पूछा कि थक रहा है क्या। नवीन ने हाथ मेज के किनारे रखे और अगली डील की प्रतीक्षा की।
अंपायर ने अनावश्यक बातचीत खेल से दूर रखने को कहा। दुर्गेश जो उत्तर निकलवाना चाहता था, नवीन को देना जरूरी नहीं था।
उसने गड्डी तैयार होते देखी। अभी दो डील थीं। अपनी बढ़त की रक्षा केवल शांत चेहरा रखने से नहीं होती। अगली गलत व्यवस्था पहचाननी और सही समय पर बदलनी थी।
8. ग्यारहवीं आखिरी नहीं थी
ग्यारहवीं में नवीन को आकर्षक जोड़ी जल्दी छोड़नी पड़ी। रखता तो दूसरे जरूरी क्रम का रास्ता छोटा होता। बाकी हाथ में अधिक उपयोगी योजना थी। वही चुनी, अगले ड्रॉ से सुधार किया और वैध घोषणा हुई। दुर्गेश को बीस लगे।
नवीन 98। दुर्गेश 134। अंतिम डील से पहले छत्तीस आगे।
इस बार प्रशिक्षण का महत्व अलग था। बढ़त लापरवाही बुला सकती है जैसे कमी घबराहट। वैध हाथ खेलना, सही समूह बचाना और अंतिम परिणाम जाँचना बाकी था।
ईशा और मनीष के अपने कारण थे सावधानी जारी रखने के। अंतिम डील से पहले सबके आधिकारिक कुल पढ़े गए।
दुर्गेश ने आखिरी हाथ तेजी से, मगर मूर्खता से नहीं खेला। सही रास्ता खोजा, उपलब्ध जानकारी इस्तेमाल की और पहले पूरा हुआ। नवीन का बाकी समूह अधूरा था। आखिरी घोषणा दुर्गेश की।
नवीन ने खोला। वैध क्रम और सेट एक तरफ थे। अलग एक दस अंक वाला पत्ता और दो अधूरे दो थे। चौदह दंड।
दोनों दो जोड़ी थे, पूरा सेट नहीं। उसने दूसरा दावा नहीं किया। मूल्य गिना और अंपायर की पुष्टि का इंतजार किया।
दुर्गेश ने पत्तों से शीट तक देखा। अंतिम जीत वास्तविक थी। उससे पहले की छत्तीस अंक की कमी भी। चौदह उसे बंद करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
नवीन ने अधूरे पत्ते वहीं रखे ताकि अंतिम बार गिनना आसान रहे। कैमरा अब फिर मुड़ा। इस बार एक घोषणा के बजाय पूरी तीसरी शीट सामने थी।
9. तीन शीट एक साथ
नवीन की बारह प्रविष्टियाँ थीं: 12, 24, 0, 8; 18, 0, 20, 6; 0, 10, 0, 14। कुल एक सौ बारह।
दुर्गेश की: 0, 18, 30, 0; 12, 22, 0, 8; 24, 0, 20, 0। कुल एक सौ चौंतीस।
बाईस अंक का अंतर पूरे दिन का था। नवीन चार डील जीता, आखिरी हारा और हर ब्लॉक में सावधान रहा। ईशा एक सौ पैंतालीस, मनीष एक सौ बावन पर समाप्त हुए।
स्कोरर ने शीट जोड़ीं। वही शुरुआत की आवाज थी।
जोड़ जाँचकर दुर्गेश ने हस्ताक्षर किए। पुरस्कार पर पूछा गया कि अंतिम घोषणा से मुकाबला करीब हुआ क्या। उसने कहा पूरा कुल शीट पर है। इस बार नवीन को विवरण खुद नहीं सुधारना पड़ा।
ईशा ने दोनों विरामों के बाद सही शुरुआत की प्रशंसा की। मनीष ग्यारहवीं की जल्दी तोड़ी जोड़ी देखना चाहता था। नवीन ने मानकर पत्ते लगाने से पहले समय जाँचा।
दुर्गेश ने क्लब के जीत वाले भोज की घोषणा की। नवीन को ऐसे देखा जैसे आने से हमेशा समर्थन देने वाले समन्वयक की कहानी पूरी होगी।
नवीन ने कहा पाली है।
दुर्गेश कहने लगा कि एक शाम बदली जा सकती है। नवीन ने प्रवेश से पहले तय कार्यक्रम दिखाया।
“वहाँ रहने को कहा था।”
फिर मनीष के साथ समीक्षा पूरी की और हस्ताक्षर वाली शीट रखीं। वह जल्दबाजी में भागा नहीं। जितना समय दिया था, पूरा इस्तेमाल किया। जाने का समय आया तो अपना सामान लेकर खड़ा हुआ।
10. पाली का पहला घंटा
गोदाम के गेट पर साथी प्रकाश हस्तांतरण नोट्स लेकर इंतजार कर रहा था। आधिकारिक परिणाम देखे थे। पहला घंटा सँभालने की व्यवस्था कर चुका था ताकि पुरस्कार से नवीन भागता न आए। खेलने की इच्छा के लिए माफी माँगकर एहसान कमाने को नहीं कहा था।
नवीन ने तीन शीट दिखाईं। प्रकाश ने आखिरी कुल पढ़ा और पूछा कि अंतिम डील ने खिताब क्यों तय नहीं किया। उसने जमा दंड समझाया और बीच के ब्लॉक की छह अंक वाली हार दिखाई।
“उससे भी मदद मिली?”
“उससे भी।”
हस्तांतरण पूरा किया। ट्रॉफी लॉकर में सुरक्षित रखी। शीट उसी काम की फाइल में सीधी रखीं जिसमें एक साल बिना इस्तेमाल प्रवेश फॉर्म था।
बाद के अधिकृत विराम में कॉपी खोली और अगली समीक्षा के दो फैसले लिखे: महँगी दूसरी डील और ग्यारहवीं की जल्दी तोड़ी जोड़ी।
फोन में क्लब भोज की तस्वीर थी। चैंपियन के लिए खाली कुर्सी के पास दुर्गेश खड़ा था। नवीन ने देखी, फिर ईशा और मनीष को तय समीक्षा समय भेजा। प्रकाश को पाली सँभालने के लिए अलग धन्यवाद दिया।
विराम समाप्त हुआ तो कॉपी बंद करके काम पर लौटा।
अगली सुबह ट्रॉफी लॉकर से निकाली। घर में अपनी मेज पर रखी और तीन स्कोरशीट क्रम से साथ खोलीं। सुबह के चवालीस, बीच के अट्ठासी और आखिर के एक सौ बारह सामने थे। उसने दूसरी डील की प्रविष्टि पर उँगली रखी। अगला अभ्यास वहीं से शुरू होना था।
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