1. 365in: आँगन में दो ढेर
रिश्तेदारों ने बचे घरेलू सामान के दो ढेर बनाए। स्टील का संदूक कमला के लिए। खाना बनाने के बर्तन सीमा के लिए। बाढ़ से टाँगें खराब हुई पुरानी रमी मेज दोनों ढेरों के बीच खड़ी थी, जैसे उससे पूछा जाने वाला हो कि परिवार को किस बहन ने निराश किया।
पैंतालीस वर्षीय कमला निकासी के बाद शुरुआती दिनों में घर के आसपास रुकी थी। जब प्रवेश संभव हो, तब सामान निकालने की व्यवस्था करना चाहती थी। उनतालीस वर्षीय सीमा पिता के साथ ऊँची जगह के आश्रय में गई, फिर रिश्तेदार के घर पहुँची। दोनों को दूसरी के काम के बारे में अधूरे संदेश मिले थे।
दोबारा मिलने तक संदेश आरोप बन चुके थे। “तुम सब छोड़ गई,” कमला ने कहा। “क्या उन्हें छोड़ देती?” सीमा ने पूछा। महेश चाचा पड़ोसियों से कहते कि एक बहन बरबाद घर पकड़े रही और दूसरी जिम्मेदारी से भाग गई। रिश्तेदार अपनी पसंद की बहन के अनुसार संस्करण चुन लेते।
कभी मजबूत रमी जोड़ी रही दोनों बहनों की बातचीत व्यावहारिक संदेशों तक सीमित हो गई। नई जोड़ी लीग खुली तो दोनों अलग वयस्क साथियों के साथ दर्ज हुईं। कमला नॉर्थ स्टेप्स क्लब गई। सीमा रिवरसाइड से आई।
सूचनाएँ देखकर महेश हँसा। “एक घर साथ नहीं रख सकीं। अब टीम चलाएँगी।” कमला ने खराब मेज आँगन से हटवाई। सीमा अपना पंजीकरण फॉर्म घर ले गई। उसी शाम दोनों ने अलग जगह अभ्यास का समय पूछा।
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2. 365in कथा: अलग कैलेंडर
स्थानीय लीग में दो खिलाड़ियों की जोड़ी टीम थी। हर मुकाबले में दो स्वतंत्र आमने सामने की मेजें थीं। हर मेज पर पाँच हाथ। दोनों खिलाड़ियों के कुल दंड जोड़कर कम टीम अंक वाला पक्ष जीतता। साथी पहले तैयारी कर सकते थे, खेलते समय सलाह नहीं दे सकते थे।
कमला की साथी सैंतालीस वर्षीय मीता थी। स्थिर खिलाड़ी, लेकिन हाथ दोबारा सजाना हो तो कभी रुक जाती। सीमा ने छत्तीस वर्षीय रवि को चुना। वह बनावट जल्दी पहचानता था, पर कभी पूरा हाथ देखने से पहले एक योजना पकड़ लेता।
बहनों ने अलग कैलेंडर पर लीग की वही आठ तारीखें लिखीं। वर्षों में पहली बार यात्रा और विरोधियों की चर्चा साथ नहीं हुई। कमला उन स्थितियों से बचती जो सीमा ने सिखाई थीं। सीमा उन शुरुआती आदतों से बचती जिन पर कमला जोर देती थी।
पहले मुकाबलों ने जिद की कीमत ली। कमला शानदार सेट बचाए रही और बाकी हाथ टूटा रहा। सीमा हर परिणाम को जाने के फैसले का प्रमाण बनाने के लिए अधिक आक्रामक खेली। दोनों टीमें हारीं। विश्लेषण पूरा होने से पहले परिणाम परिवार पहुँचे। रिश्तेदार के घर भोजन पर महेश ने आँगन वाली भविष्यवाणी दोहराई।
मीता ने कमला से टिप्पणी सुनी, फिर सामने तेरह पत्ते रखे। “कौन सा समूह बचा रही हो?” शहर के दूसरे हिस्से में रवि ने सीमा से पूछा, “अगले पत्ते से क्या साबित करवाना चाहती हो?” दोनों जगह अभ्यास की बातचीत बदल गई।
3. कमला ने पूरा समूह खोला
कमला को पूरे सेट हमेशा पसंद थे। अलग सूट की एक रैंक के चार पत्ते सुरक्षित लगते थे। अनिश्चित पत्तों से अलग रख सकने वाला छोटा व्यवस्थित हिस्सा। शुरुआती सत्र में वह उन्हें तब भी बचाती रही जब उनमें से एक पत्ता दूसरी जगह बेहतर सीक्वेंस बना सकता था।
मीता इसी आदत वाली स्थितियाँ लाई। चार पत्तों का सेट कभी एक प्राकृतिक पत्ता देकर भी तीन पत्तों का सही सेट रह सकता था। निकला पत्ता सीक्वेंस में जरूरी हो सकता था। इसका अर्थ हर सेट तोड़ना नहीं, पूरे हाथ को देखना था।
कमला को अभ्यास कठिन लगा क्योंकि पहली बनावट पूरी दिखती थी। एक पत्ता बाहर करना बचाई हुई चीज को नुकसान पहुँचाना लगता। दोनों धीरे काम करतीं। हर बदलाव के बाद पूरे समूह फिर गिने जाते। एक पत्ता पुराने सेट में रहते हुए नई सीक्वेंस में नहीं आ सकता था। कोई कमी बचती तो आशाजनक आकार की तारीफ करने के बजाय हाथ अधूरा लिखा जाता।
तीसरे लीग मुकाबले में कमला ने उपयोगी पुनर्गठन से सही घोषणा की। मीता अपनी मेज थोड़े अंतर से हारी, लेकिन दोनों के संयुक्त दंड कम थे। टीम मुकाबला जीत गई।
कमला ने परिणाम क्लब सचिव को भेजा। सीमा की पुरानी संदेश सूची पर उँगली रुकी। उसने वह बंद की और अगली अभ्यास स्थिति खोली। सेट का चौथा पत्ता अब हमेशा के लिए बंद नहीं दिखता था। मीता ने नया हाथ बाँटा। इस बार कमला ने पूरे समूह रखने से पहले बचे पत्ते भी देखे।
4. सीमा ने आँगन के खिलाफ खेलना छोड़ा
सीमा की कमजोरी अलग थी। कई रास्ते जल्दी बनाती, फिर सबसे साहसी चुनती क्योंकि भागने वाली बहन कहलाना नहीं चाहती थी। कमजोर हाथ ऐसी चुनौती बन जाता जिसे स्वीकार करना जरूरी लगे।
रवि ने प्रशिक्षण प्रतिस्पर्धी बनाया। प्रकाशित गणना और ड्रॉप प्रक्रिया के साथ पाँच हाथों के सेट खेले जाते। बाद में वे उन फैसलों को देखते जिनसे छोटी हार बड़ी हुई थी।
सीमा ने पहल और इंकार का अंतर समझा। संरचना उचित हो तो उपयोगी बड़ा पत्ता रहता। अकेला पत्ता छोड़ा जा सकता था, बिना निर्णय को अपने चरित्र का बयान बनाए। खुले पत्तों से संकेत मिलते थे, छिपे हाथ की निश्चित जानकारी नहीं।
रवि को भी काम करना था। अभ्यास में कभी समूह बोल देता जबकि एक पत्ता दूसरी जगह लगा होता। सीमा अगला ड्रॉ चर्चा करने से पहले उससे पूरा तेरह पत्तों का हाथ बनवाती। घर्षण से दोनों सुधरे। चौथे लीग मैच में साफ जीत मिली। पाँचवें में रवि को कठिन हार हुई। सीमा ने अपनी मेज पर पर्याप्त अंतर बनाया, जिससे संयुक्त कुल आगे रहा।
घर में पिता ने पूछा कि कमला अब भी रविवार को खेलती है क्या। सीमा ने कहा कि नहीं जानती। फिर उसी लीग बुलेटिन में नॉर्थ स्टेप्स का परिणाम दिखा। उसने बहन का स्कोर दो बार पढ़ा। अगले दिन उसी तरह के लचीले हाथ का अभ्यास किया जिसने उसे वह परिणाम दिलाया था। कोई संदेश नहीं भेजा, मगर पुरानी स्थिति अब छोड़ी भी नहीं।
5. पहली भिड़ंत सीमा की
छठे लीग मुकाबले में बहनें मिलीं। साथियों ने सामान्य तरीके से हाथ मिलाए। कमला और सीमा ने सिर हिलाया तो मेज छोटी लगने लगी।
पहला हाथ सीमा ने जीता। जवाब में कमला दूसरे हाथ में कठिन पूरा होने की उम्मीद पकड़े रही। सीमा पहले पूरी हुई तो महँगा दंड लगा। तीसरा हाथ कमला ने सही पुनर्गठन से जीता, लेकिन पहले का नुकसान बचा रहा।
दूसरी मेज पर मीता और रवि का मुकाबला करीबी था। पाँच हाथों के अंत में रिवरसाइड के संयुक्त अंक कम थे। टीम मैच सीमा की तरफ गया।
महेश स्कोरर के पास आकर उसे ऊँची आवाज में बधाई देने लगा। परिणाम को बाढ़ के बाद समझदारी दिखाने वाली बहन का प्रमाण बताना शुरू किया। सीमा ने बीच में स्कोरर से टीम कुल में रवि के योगदान की पुष्टि माँगी।
कमला ने हार पर हस्ताक्षर किए और पारिवारिक चर्चा फिर शुरू होने से पहले निकल गई। रास्ते में मीता को खामोशी की अपेक्षा थी। कमला ने दूसरे हाथ वाला पन्ना खोल दिया। “पता था कमजोर है। चाहती थी कि वह मुझे इसे पूरा करते देखे।”
घर पहुँचकर याद से पत्ते दोबारा लगाए। अनिश्चित बातें अनिश्चित लिखीं। सब याद होने का दिखावा नहीं किया। गलती ऐसे निर्णय में थी जिसे वह पहचान सकती थी। उसी शाम सीमा ने रवि के साथ अपनी एक देर की गलती देखी, जिससे कमला को अनावश्यक अवसर मिला था। अगले मैच की तारीख दोनों कैलेंडर पर पास आ रही थी।
6. फाइनल में चार नाम
आठ मुकाबलों के बाद दोनों टीमें चैम्पियनशिप फाइनल में पहुँचीं। लीग सूची में रिवरसाइड पहली, नॉर्थ स्टेप्स दूसरी थी। फाइनल में वही दो मेज, पाँच हाथ और संयुक्त कुल वाला प्रारूप था।
आधिकारिक सूचना में चार वयस्क खिलाड़ियों के नाम थे। महेश ने केवल बहनों वाला संस्करण भेजा और परिवार का अंतिम फैसला कहा। मीता ने आयोजक से पूरी सूचना हॉल में लगाने को कहा। रवि ने दूसरी प्रति प्रवेश द्वार पर लगाई।
सुबह कमला क्लब के पत्ते और अंक फॉर्म लेकर आई। सीमा रवि तथा पूरे सत्र के परिणामों का फोल्डर लेकर पहुँची। पिता दर्शक बनकर ऐसी जगह बैठे जहाँ दोनों मेजें दिखें।
कमला ने मीता का मेज आवंटन देखा, फिर अपनी कुर्सी तैयार की। सीमा ने रवि के लिए यही किया। खेल शुरू होने के बाद साथी किसी निर्णय को बचाने नहीं आ सकता था।
पहले हाथ से पहले सीमा ने पूछा कि बचा हुआ स्टील संदूक ठीक सूख गया था क्या। कमला ने कहा कि अंदर की परत बदलनी पड़ी। दोनों के बीच एक छोटी सामान्य जानकारी गई। फिर निर्णायक ने खिलाड़ियों को तैयार होने को कहा।
बहनें सामने बैठीं। पास की मेज पर मीता और रवि शुरू हुए। चारों के दंडों से मैच तय होना था। बोर्ड पर हर नाम की जगह थी। महेश दर्शक सीमा के पीछे खड़ा रहा। उसके हाथ में केवल बहनों वाली पुरानी सूचना थी। सामने दीवार पर पूरा आधिकारिक संस्करण लगा था।
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7. आठ अंक पीछे
कप्तानों के पहले चार हाथ कठिन रहे। पहला कमला हारी क्योंकि बड़ा पत्ता देर तक रखा। दूसरे में सीमा की दूसरी सीक्वेंस नहीं जुड़ी। तीसरे में कमला ने घोषणा की। चौथे में सीमा ने वापसी की।
आखिरी हाथ से पहले कमला के चौंसठ और सीमा के सत्तर अंक थे। कमला व्यक्तिगत रूप से छह अंक आगे थी, लेकिन टीम परिणाम दूसरी मेज पर भी निर्भर था।
मीता और रवि पहले खत्म हुए। रवि ने अंतिम हाथ सही खेलकर कुल सत्ताईस रखा। मीता इकतालीस पर समाप्त हुई। चौदह अंक का अंतर पूरी तस्वीर बदलता था।
नॉर्थ स्टेप्स के इकतालीस और चौंसठ मिलाकर एक सौ पाँच। रिवरसाइड के सत्ताईस और सत्तर मिलाकर सत्तानबे। कप्तानों के अंतिम हाथ से पहले कमला की टीम आठ अंक पीछे थी।
मीता हस्ताक्षर करके दर्शक क्षेत्र में गई। निराश दिखी, लेकिन चेहरे से कमला को संदेश भेजने की कोशिश नहीं की। रवि पास खड़ा था। वह भी सीमा के बचे निर्णयों में मदद नहीं कर सकता था।
कमला को मजबूत अंतिम परिणाम चाहिए था। केवल सही घोषणा से टीम खिताब निश्चित नहीं होता, अगर सीमा कम दंड पर रह जाती। सीमा अपनी संरचना सँभालकर बहन के पहले पूरा करने पर भी टीम की बढ़त बचा सकती थी।
निर्णायक ने कुल की पुष्टि की। बहनों ने विपरीत तरफ से वही अंक देखे और नए हाथ के लिए तैयार हुईं। बाकी दोनों खिलाड़ियों की शीट बंद हो चुकी थीं। अंतिम जोड़ इसी मेज से आना था।
8. चार नौ और एक नई सीक्वेंस
कमला के हाथ में दो प्राकृतिक सीक्वेंस बनीं। दिल का छह, सात और आठ। चिड़ी का गुलाम, बेगम और बादशाह। चारों सूट के नौ मिलकर सही सेट थे। हुकुम का आठ और दस अधूरे थे। साथ में अकेला चिड़ी का सात था।
तेरह पत्ते। दस सही समूहों में, मगर बाहर के तीन घोषणा रोक रहे थे। वह चार पत्तों वाले सेट से हुकुम का नौ लेकर आठ और दस के साथ रख सकती थी। बाकी तीन नौ सही सेट रहते। नई सीक्वेंस बनती, लेकिन अकेला सात फिर भी बचता। बारह सही समूहों में और एक अनचाहा पत्ता पूरा हाथ नहीं था।
कमला ने संभावना देखी, काम पूरा नहीं माना। सीमा ने उपयोगी दिखता खुला पत्ता लिया और बाद में दूसरी रैंक छोड़ी। कमला संभावनाएँ सोच सकती थी, निश्चित छिपा हाथ नहीं।
अगले बंद ड्रॉ में हुकुम का गुलाम आया। कमला ने हुकुम का नौ सेट से निकाला। आठ, नौ, दस और गुलाम की चार पत्तों वाली प्राकृतिक सीक्वेंस बनी। ईंट, दिल और चिड़ी के नौ सही सेट रहे। पहले की दोनों सीक्वेंस सुरक्षित थीं।
उसने चिड़ी का सात छोड़ दिया। चार, तीन, तीन और तीन मिलाकर तेरह पत्ते। सूट जाँचे, क्रम जाँचा और यह देखा कि हर पत्ता केवल एक जगह था। फिर घोषणा की। सीमा ने अपने पत्ते थोड़ा पास कर लिए और निर्णायक की जाँच का इंतजार किया।
9. एक सौ पाँच
निर्णायक ने कमला का हाथ सही माना। उसका व्यक्तिगत कुल चौंसठ रहा। नॉर्थ स्टेप्स एक सौ पाँच पर रही।
सीमा ने पत्ते खोले। हुकुम के तीन, चार और पाँच की शुद्ध सीक्वेंस थी। ईंट के चार, पाँच और छह दूसरी शुद्ध सीक्वेंस थे। चारों सूट के दो का सही सेट था। बिना समूह के पत्ते दिल का इक्का, चिड़ी का चार और चिड़ी का छह थे।
दो जरूरी सीक्वेंस मौजूद थीं। सेट सही था। बाकी तीन की कीमत दस, चार और छह, कुल बीस हुई। सीमा के सत्तर बढ़कर नब्बे हुए। रवि के सत्ताईस जोड़कर रिवरसाइड एक सौ सत्रह पर समाप्त हुई। नॉर्थ स्टेप्स ने फाइनल बारह अंकों से जीता।
मीता ने एक हाथ मुँह पर रखा, फिर नीचे करके आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा की। रवि परिणाम बोर्ड तक गया और जोड़ देखा। अपने हस्ताक्षरित पत्र की तरफ देखने से पहले सीमा को सिर हिलाकर संकेत किया कि गणना सही है।
महेश मेज की तरफ बढ़ा। कमला की जीत को बाढ़ की कहानी में बदलने से पहले कमला ने निर्णायक से दोनों टीमों के पूरे नाम और कुल पढ़ने को कहा। उसके पहुँचने से पहले घोषणा पूरे हॉल में भर गई।
सीमा ने हस्ताक्षर करके पत्र बहन की ओर किया। “नौ। सेट तोड़े बिना उसे बाहर लिया।” कमला ने हाथ देखा। “तीन उसे खड़ा रखने के लिए काफी थे।” सीमा की नजर कुछ देर पत्तों पर रही। फिर उसने हाथ बढ़ाया।
10. जो सूची दोनों ने पूरी की
पुरस्कार के बाद दोनों एक टीम में नहीं गईं। कमला और मीता ने खिताब बचाने की इच्छा दर्ज की। सीमा और रवि ने अगले सत्र की तारीखें माँगीं। दोनों जोड़ियों का अपना आगे का काम था।
हॉल के बाहर बहनों ने पूरे अंतिम परिणाम की प्रतियाँ बदलीं। पिता ने पूछा कि बची घरेलू सूची रिश्तेदारों से संदेश भिजवाने के बजाय साथ बैठकर देख सकती हैं क्या। कमला अगली दोपहर मिलने को मान गई।
सीमा आश्रय के रिकॉर्ड और पिता के एक जगह से दूसरी जगह जाने की तारीखें लाई। कमला सामान निकालने की सूची तथा घर दोबारा खुलने पर मिले संदेश लाई। अंतराल, देर और दो ऐसे विवरण मिले जिन्हें जाँचे बिना तथ्य की तरह दोहराया गया था।
कुछ फैसले अब भी दुखाते थे। सीमा ने बताया कि पिता के साथ क्यों रही। कमला ने बताया कि घर के पास क्या बचाने की कोशिश थी। इस बार किसी की बात महेश के मुँह से होकर नहीं आई।
नए पन्ने पर व्यावहारिक काम बाँटे गए। बढ़ई पुरानी रमी मेज उपयोग योग्य बताए तभी मरम्मत होती। खेलने के लिए दोनों क्लबों में ठीक मेजें थीं। दस्तावेज हटाने से पहले प्रतियाँ बनतीं। मुलाकात का समय सीधे तय होता।
सामान की सूची पर हस्ताक्षर होते समय महेश का फोन आया। वह कमला को बताने लगा कि बाढ़ के समय सीमा का मतलब क्या था।
“वह यहीं है,” कमला ने कहा और फोन दे दिया।
सीमा ने दो तारीखें सुधारीं, नया इंतज़ाम पढ़ा और कॉल खत्म की। जाने से पहले दोनों ने प्रतियाँ बदलीं। उनके क्लब आगे भी विरोधी रहेंगे। घर वाले पन्ने के नीचे अब एक ही विवरण के साथ दोनों के हस्ताक्षर थे। बीच में महेश की दूसरी कहानी की जगह नहीं बची थी।
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