1. 91BET कहानी: वह बोर्ड जो सूख नहीं रहा था
बाढ़ कदम्ब सामुदायिक कमरे की दीवार पर भूरी रेखा छोड़ गई थी। ठीक वहीं जहाँ कैरम की ट्रॉफियाँ रखी थीं। सना को अलमारी के नीचे उलटा पड़ा बोर्ड मिला। उसने उठाया तो कोने की पॉकेट से पानी के साथ एक काली गोटी निकली।
भाई हारून दो दिन बाद पहुँचा। उसके नए कार्यस्थल की सड़क खुली थी। फूली हुई सतह देखकर बोला कि कमरा छोड़ना पड़ेगा।
“कमरा छोड़ना पड़ सकता है,” सना ने कहा। “इसका मतलब टीम छोड़ना नहीं है।”
तीन साल से दोनों इन्हीं वाक्यों के अलग रूपों में बहस कर रहे थे। छत्तीस साल का हारून खुद को व्यावहारिक मानता था। इकतीस साल की सना को लगता था कि बिना उससे पूछे लिए निर्णयों को वह व्यावहारिकता कहता है।
बाढ़ ने दोनों को अधिक कठोर कर दिया। उसने पूछा कि सामान नीचे क्यों छोड़ा था। उसने पूछा कि पानी बढ़ने से पहले वह आया क्यों नहीं। किसी सवाल ने एक गोटी भी डिब्बे में वापस नहीं पहुँचाई।
कमरा बंद रहने के कारण पहला लीग मैच छोड़ना पड़ा। टूटे बोर्ड की तस्वीर स्थानीय क्लब समूह में आई। किसी ने लिखा: तैरते हुए चैम्पियन।
सना ने बचे मैचों की सूची निकाली और पानी की रेखा के ऊपर लगा दी।
हारून तारीखें देखता रहा। सत्र में नौ हफ्ते बचे थे।
अब हार मानने के लिए उसे उस चीज़ को काटना पड़ता जिसे सना बचाने का निर्णय ले चुकी थी।
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2. चार नाम, एक उधार का बोर्ड
टीम में चार पंजीकृत खिलाड़ी थे: सना, हारून, जया और मोहन। लीग के प्रकाशित नियमों के भीतर हर मुकाबले से पहले डबल्स जोड़ी तय कर सकते थे। कमरा खोने से पंजीकरण नहीं गया था। अभ्यास सम्भव बनाने वाली लगभग हर दूसरी चीज़ चली गई थी।
मनोरंजन केंद्र ने अपने खिलाड़ियों के बाद हफ्ते में तीन शाम बोर्ड दिया। उनका समय शुरू होने के चालीस मिनट बाद आखिरी बस निकलती। हारून दो दिन आ सकता था। तीसरे दिन सना देर तक काम करती। जया खाना लाती, नहीं तो आधा समय रात का भोजन ढूँढ़ने में चला जाता।
उधार का बोर्ड पुराने से तेज़ था। सना लगातार तीन परिचित कट ज़्यादा ताकत से खेल गई। हारून ने कम जोर लगाने को कहा। उसने पूछा कि क्या वह ऐसी बात बताएगा जो वह अभी खुद नहीं समझ चुकी है।
मोहन ने अभ्यास का डबल्स मैच लगाकर दोनों को अलग किया। हारून उसके साथ, सना जया के साथ। बातचीत से प्रतिद्वंद्विता आसान थी, इसलिए खेल लिया।
परिणाम अस्थिर थे। हारून कठिन रिबाउंड बना सकता था, लेकिन बड़ा प्रयास चूकने पर खराब स्थिति छोड़ता। सना साफ रास्ते अच्छी तरह खत्म करती, पर रास्ता न मिले तो अधीर हो जाती।
उन्होंने मैच सूची के पीछे गलतियाँ लिखीं। हर नाम का अलग कॉलम बना।
महीने के अंत में कागज़ चुनौती की घोषणा कम और ठीक किए जाने वाले कामों का रिकॉर्ड अधिक लगता था।
3. वह मुकाबला जिसमें अंक से अधिक गया
बाढ़ के बाद पहला मैच खराब समाप्त हुआ। अभ्यास एक उधार बोर्ड पर किया था और मैच में दूसरी सतह मिली। हारून ने गति मजबूर करनी चाही। बाद के मैच में जया के साथ खेलती सना परिचित कोण का इंतज़ार करती रही जो ठीक वैसा नहीं बना।
उपयोगी लीग अंक गए। एक हफ्ते का यह विश्वास भी गया कि वापस आना समझदार निर्णय था।
घर लौटती बस में मोहन ने कहा कि अगर टीम को केवल झगड़ना है तो वह बार-बार काम की शिफ्ट नहीं बदलवा सकता। जया चुपचाप बाकी यात्राएँ गिनती रही। सना खिड़की के बाहर देखती रही। हारून को नहीं दिखाना चाहती थी कि वह दोनों से सहमत है।
अगले अभ्यास में किसी ने बाढ़ का ज़िक्र नहीं किया। सबने वे स्थितियाँ देखीं जो साथी के लिए छोड़ते थे। डबल्स में सामने बैठा व्यक्ति केवल अगली बारी नहीं है। एक खिलाड़ी की आसान समाप्ति साथी की तरफ से मिलने वाला अकेला रास्ता भी हटा सकती है।
उन्होंने खेलने से पहले भूमिकाएँ तय करना शुरू किया। खेल सक्रिय हो तो अपना निर्णय खुद। लगातार टिप्पणी नहीं। प्रोत्साहन के नाम पर छिपा निर्देश नहीं।
सना ने आसान समाप्ति से पहले कठिन पहुँच का अभ्यास किया। हारून ने हर शॉट खुद लेने की ज़िद किए बिना उपयोगी स्थिति छोड़ना सीखा।
किसी ने इसे माफी नहीं कहा। दोनों अगले सत्र में लौटे।
4. आखिरी शाम के दो मैच
अंतिम लीग शाम कदम्ब के दो मुकाबले अलग क्लबों से थे। पहला हारून और मोहन खेलते। दूसरे के लिए सना और जया की जोड़ी थी। शुरुआत से पहले नामांकन पक्का होना था।
मैच तीन में से दो गेम जीतने का था। हर गेम पच्चीस अंक या निर्धारित आठ बोर्ड पर समाप्त होता। आठ बोर्ड बाद आगे रहने वाला जीतता। सभी ने आयोजन का कागज़ पढ़ा था। एक अच्छा बोर्ड बाकी गेम नहीं मिटाता था।
हारून और मोहन पहला मैच उन्नीस-पच्चीस और सत्रह-पच्चीस से हार गए। विरोधियों ने कठिन गोटियाँ सँभालीं। हारून को दो बार उस समूह को खोलने की कीमत देनी पड़ी जिसके बाद सुरक्षित अगली चाल नहीं थी।
वह इतना गुस्से में लौटा कि शांत हो गया। सना भाव पहचानती थी। सामान्यतः इसका मतलब बाद में किसी दूसरे की गलतियों पर भाषण होता था।
इस बार उसने उसकी कॉपी माँगी।
सना ने दे दी।
लिखने से पहले जया को फोन आया। घर में पिता की तबीयत खराब हुई थी। उसे जाना था। कोई नाटकीय फैसला आवश्यक नहीं था। उसने बैग रखा, जबकि टीम ने अगले मैच की सूची जमा करने का समय देखा।
आयोजक ने बताया कि पंजीकृत विकल्प अभी चुना जा सकता है। पहले मैच के बाद मोहन की कलाई थकी थी। हारून ने सना को देखा।
तीन साल बाद पहली बार दोनों को एक ही परिणाम की तरफ बैठना था।
5. बैठने से पहले की योजना
सामने रिवरसाइड क्लब के आनंद और फरीदा थे। वे कदम्ब से मजबूत जोड़ियों को हरा चुके थे। भाई-बहन के भावनात्मक इतिहास में उनकी रुचि नहीं थी।
मैच से पहले व्यावहारिक बातें तय करने के लिए दस मिनट थे। हारून ने बताना शुरू किया कि सना को खास कोण कैसे लेना चाहिए।
उसने रोक दिया।
“वह शॉट जानती हूँ। बताओ तुम्हारे लिए क्या छोड़ना चाहिए।”
सवाल ने बातचीत बदल दी। उसने सामने की सीट से पसंद आने वाले रास्ते बताए। सना ने समझाया कि तेज़ चूक उसके अच्छे संभलने वाले विन्यास को कहाँ नुकसान पहुँचाती है। तय हुआ कि बात निर्धारित विराम में करेंगे और खेलते समय निर्णय खुद लेंगे।
हारून हर कठिन गोटी को निजी परीक्षा नहीं बनाएगा। सना केवल आसान होने से गोटी नहीं निकाल देगी, अगर वह बाद में कवर या उपयोगी अगली चाल बन सकती हो।
दोनों आमने-सामने बैठे। दूसरी तरफ आनंद और फरीदा थे। भाई-बहन की दो बारियों के बीच विरोधी पूरा बोर्ड बदल सकता था। विश्वास का मतलब स्थिति को वैसा ही रहने की आशा नहीं था। मतलब था कि बदलने पर साथी जवाब ढूँढ़ सकेगा।
फरीदा ने टॉस जीता। पहला बोर्ड जल्दी खुला। सना का शुरुआती कट थोड़ा चूक गया।
हारून ने न आह भरी, न छत देखी।
अपनी बारी में उसने वही स्थिति खेली जो सचमुच सामने बची थी।
6. पहला गेम दोनों का था
हारून का संयम तुरंत शानदार नहीं दिखा। जटिल समाप्ति आजमाने के बजाय उसने भीड़ वाली दो गोटियाँ अलग कीं। कोई पॉकेट में नहीं गई। लेकिन आनंद के आसान रास्ते कम हुए और मौका लौटता तो सना के काम का विन्यास बन गया।
आनंद ने एक अच्छा शॉट लिया, अगला चूक गया। सना ने उपलब्ध रेखा ली। दो गोटियाँ निकालीं। फिर तीसरी को उस कोण से मजबूर करना छोड़ा जो अब अनुकूल नहीं था।
कई बोर्ड में भाई-बहन की बढ़त बनने लगी। हारून ने क्वीन लेकर अगली स्ट्राइक में सही कवर किया। दूसरे बोर्ड में फरीदा की कठिन समाप्ति चूकने के बाद सना ने बाकी गोटियाँ निकालीं। कोई नहीं कह सकता था कि एक नायक था और दूसरा केवल साथ बैठा था।
कदम्ब पच्चीस पहुँचा। रिवरसाइड अठारह पर था।
पहला गेम कदम्ब का।
विराम में हारून ने वह जगह बताई जहाँ उसका महत्वाकांक्षी विचार सना की सम्भावित अगली चालें बिखेर देता। बोला कि लगभग खेल ही दिया था।
“मैंने तुम्हें रुकते देखा,” उसने कहा।
पूरी शाम एक-दूसरे की प्रशंसा के सबसे करीब यही आया था।
आनंद और फरीदा योजना बदल रहे थे। दूसरे गेम में वे दोनों को उलटी दिशाओं से कठिन गोटियाँ देने वाले थे। हर बचाव अगले से कठिन बनता।
सना ने पानी पिया, हाथ पोंछा और तैयार होता बोर्ड देखा। पहला गेम बढ़त देता था। सोचना बन्द करने की अनुमति नहीं।
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7. वह गेम जिसे बचा नहीं पाए
रिवरसाइड ने धैर्य से लक्ष्य चुनकर दूसरे गेम पर नियंत्रण लिया। फरीदा सना को पसंद की सीधी रेखा कम देती। आनंद कठिन गोटियाँ वहाँ ले जाता जहाँ हारून के प्रिय रिबाउंड सम्भव तो थे, भरोसेमन्द नहीं।
हारून ने फिर भी एक कोशिश की। वह चूका और फरीदा के लिए साफ रास्ता खुल गया।
सना के भीतर परिचित वाक्य उठा: तुम्हें हमेशा अपना ही तरीका चलाना होता है। उसने दाँतों के पीछे रखा। उससे बोर्ड नहीं बदलता और अगली बारी दोनों के लिए कठिन होती।
बाद में उसकी अपनी गलती हुई। कुशन के पास फँसी गोटी सुलझाने से पहले आसान गोटी ले ली। बारी लौटी तो बाकी स्थिति कहीं खराब थी।
गेम रिवरसाइड के पच्चीस, कदम्ब के बाईस पर समाप्त हुआ।
एक-एक।
विराम में दोनों ने पहले अपनी गलती बताई। कोई बड़ा मेल-मिलाप नहीं हुआ। हारून अब भी मानता था कि सना कभी बहुत इंतज़ार करती है। सना को लगता था कि वह अनिश्चितता मानने से बचने के लिए हमला करता है। दोनों बातों में उपयोगी सच था, अगर पत्थर की तरह फेंकना बन्द करें।
आखिरी बोर्ड देखा, फिर कॉपी बन्द करके खेलने लौटे।
मोहन दर्शकों के पीछे था। जया का छोटा संदेश आया था कि घर पहुँच गई है और पिता की देखभाल हो रही है। टीम में अब भी चार लोग थे, भले बोर्ड पर दो बैठे हों।
सना ने भाई को देखा और स्ट्राइकर रख दिया।
8. वह स्थिति जो उसने छोड़ी
निर्णायक गेम धीरे बढ़ा। कई बोर्ड में विरोधी की बहुत कम गोटियाँ बचीं, इसलिए किसी जोड़ी को आसान बड़ी बढ़त नहीं मिली। कदम्ब इक्कीस पहुँचा। रिवरसाइड बीस पर था।
अगले बोर्ड में क्वीन रिवरसाइड ले और कवर कर चुका था। सना-हारून की दो सफेद बची थीं। आनंद-फरीदा की चार काली।
हारून की बारी में एक सफेद कुशन के पास थी। दूसरी बेहतर कोण से मिल सकती थी। कठिन गोटी पर बहुत ताकत लगती तो दूसरी भी परेशानी में बिखर सकती थी। उसने नियंत्रित स्ट्रोक से फँसी गोटी फ्रेम से हटाई।
वह पॉकेट में नहीं गई। बारी समाप्त हुई।
फरीदा ने नया विन्यास देखा। भाई-बहन यह मान नहीं सकते थे कि हारून का काम सना तक वैसा ही पहुँचेगा। फरीदा ने कट आजमाया। थोड़ा चूकी और टक्कर से एक सफेद फिर हिल गई।
अब सना के सामने भाई की तैयार की हुई रेखा से अलग कोण था।
उसे पुराने हारून की आवाज़ लगभग सुनाई दी जो समझाता कि उसका इरादा क्या था। वर्तमान हारून चुप रहा।
सना ने वास्तविक रेखा मापी। पहला कट पतला और नियंत्रित था। सफेद पॉकेट में गई, स्ट्राइकर उसके पीछे नहीं खिंचा।
एक सफेद बची। उसने साँस ली, हाथ फिर रखा और आखिरी संपर्क बिंदु खुद चुना।
9. दूसरी तरफ की चार गोटियाँ
आखिरी सफेद बोर्ड पार करके कोने की पॉकेट में गई। सारी हरकत रुकने तक सना ने हाथ स्थिर रखा।
चार काली गोटियाँ बचीं। बोर्ड जीतने पर कदम्ब को चार अंक मिले। क्वीन दूसरी जोड़ी की थी, इसलिए भाई-बहन के स्कोर में क्वीन का अतिरिक्त लाभ नहीं जुड़ा।
इक्कीस बढ़कर पच्चीस हुआ। रिवरसाइड बीस पर रहा।
कदम्ब ने मैच दो गेम से एक जीता: पच्चीस-अठारह, बाईस-पच्चीस, पच्चीस-बीस।
हारून उठा, फिर अकेले अधिकारी के पास जाने के बजाय सना की प्रतीक्षा की। दोनों ने स्कोरशीट साथ जाँची। फोटोग्राफर ने पूछा आखिरी शॉट किसने लिया तो उसने दोनों नाम दिखाए।
“सना ने समाप्त किया,” उसने कहा। “मैंने ऐसी चीज़ छोड़ने में मदद की जिसे वह समाप्त कर सके।”
वाक्य सजा हुआ नहीं था। इसलिए उसे अधिक भरोसा हुआ।
आनंद ने हाथ मिलाए। फरीदा ने टक्कर के बाद के पतले कट के बारे में पूछा। गोटियाँ फिर रखकर बोर्ड पर बातचीत शुरू हुई। कुछ मिनट बाढ़, छोड़ा हुआ मैच और खराब टिप्पणी अनुपस्थित रहे।
बाद में आयोजक ने अंतिम स्थान और अगले सत्र के मैचों की पुष्टि की। एक जीत से वे हर चीज़ के चैम्पियन नहीं बन गए थे। उसने टीम को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखा और उधार के अभ्यास के महीनों को परिणाम में दिखाई देने दिया।
सना ने स्कोरशीट ली। हारून ने बिना कहे सामान का बैग उठाया।
10. घंटों में मापा गया कमरा
अगले हफ्ते चारों अपने काम के कैलेंडर लेकर मनोरंजन केंद्र पहुँचे। उन्हें मेज पर फैलाया और ऐसी नियमित शामें खोजने लगे जब पूरी टीम साथ अभ्यास कर सके।
मालिकाना नहीं, नियमित समय माँगा। बदले में कमरा लगाने, सामान सावधानी से रखने और ऐसे नए वयस्क खिलाड़ियों के साथ समय बाँटने की पेशकश की जिनके पास दूसरी जगह नहीं थी।
केंद्र परीक्षण वाले कार्यक्रम पर मान गया। हफ्ते में दो शाम। चाबी हस्ताक्षर से लेना और लौटाना। सना ने दोनों शामें कैलेंडर में लिखीं और पेन अगले खिलाड़ी को दिया।
सना के लिए महत्वपूर्ण था कि व्यवस्था में चारों नाम थे। हारून उसकी तरफ से नहीं बोलता था। वह यह नहीं मान रही थी कि कठिन काम आते ही वह गायब हो जाएगा।
झगड़े अब भी हुए। एक शाम वह देर से आया। दूसरी शाम सना को काम से रद्द करना पड़ा। हर रुकावट को पुराने विश्वासघात का प्रमाण बनाने के बजाय उन्होंने सूची बदली और साथियों को पहले बताया।
पहली खुली अभ्यास रात सना ने बाढ़ से बची काली गोटी उधार बोर्ड के पास रखी। वह टेढ़ी थी, खेल में इस्तेमाल नहीं होनी थी। उसे अगले बोर्ड को जमाने की बारी बताने के लिए रखा।
हारून ने उठाकर उसकी तरफ बढ़ाई।
“तुम्हारी बारी,” उसने कहा।
इस बार शब्दों में दोनों के लिए जगह थी।
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