1. 9M.GAME कहानी: वह रिपोर्ट जो मैंने जल्दी लिख दी
दूसरा चरण शुरू होने से पहले मैंने जीत की रिपोर्ट की शुरुआत लिख दी थी। चार बोर्ड का पहला मैच हम तीन-एक जीते थे। दो चरणों में क्लब को बस बढ़त बचाने लायक अंक चाहिए थे। मैंने विरोधी टीम को जुझारू कहा। जिसे हराने का भरोसा हो, उसके लिए मेरा यह विनम्र शब्द था।
उनकी आखिरी बोर्ड खिलाड़ी सैंतीस साल की स्कूल अध्यापिका नुसरत थी। पहले चरण में उसने मुझसे ड्रॉ लिया। मैंने लिखा था कि अपनी सीमा समझने वाली खिलाड़ी का उपयोगी आधा अंक। उसने रिपोर्ट पढ़ी, जवाब नहीं भेजा।
अब फिर सफेद मोहरों के साथ सामने थी। काल्पनिक आयोजन के प्रकाशित नियमों के भीतर उसकी टीम ने बोर्ड क्रम बदला था, लेकिन जोड़ी फिर हमारी बनी। चार गेम साथ चलते और दोनों चरणों के बोर्ड अंक जुड़ते। कुल बराबर होता तो घोषित रैपिड टाईब्रेक होता।
मैं पैंतालीस का, कप्तान, क्लब पत्रिका का संपादक और दूसरों के प्रदर्शन का अर्थ तय करने का आदी था। घड़ी शुरू करने से पहले कहा कि स्थिर गेम उसकी टीम के सत्र का सम्मानजनक अंत होगा।
उसने मोहरे जाँचे और पूछा कि मैं तैयार हूँ क्या।
मुझे लगा टिप्पणी टाल दी। बाद में समझा कि उसने मेरी उस कहानी में प्रवेश नहीं किया जिसमें उसका छोटा किरदार पहले तय था। वह अपना गेम लाई थी। मैंने घड़ी दबाई और उस रिपोर्ट की पहली पंक्ति बैग में रखी रहने दी।
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2. पहला अंक कमरे के पार गया
नुसरत ने दूसरी चाल में चौंकाने की कोशिश नहीं की। ऐसा ढाँचा चुना जिसमें मोहरे सक्रिय विकसित हों और केंद्र लचीला रहे। मैंने परिचित व्यवस्था से जवाब दिया। उम्मीद थी असुविधा बढ़ेगी तो सरल अदला-बदली करेगी।
पास की मेज पर मेरा साथी रणनीतिक क्रम में जल्दी चला। उसके विरोधी को अपेक्षित वापस मारने से पहले बीच की शह मिली। हाथी गया और गेम हमारी इच्छा से पहले समाप्त हुआ।
कुल तीन-एक से तीन-दो हुआ। अपनी बारी में परिणाम देखा और खुद से कहा कि बड़ी योजना में एक बोर्ड छोड़ा जा सकता है।
नुसरत ने कुछ नहीं छोड़ा था। हाथी केंद्र की ओर लाई और तनाव रखा। मैंने ऐसी अदला-बदली दी जिससे बचाव आसान होता। उसने आगे की स्थिति गणना की और नहीं ली।
पहले चरण का ड्रॉ मुझे सावधानी का प्रमाण याद था। उसे शायद सुधारने योग्य स्थिति याद थी। यही अंतर खटकने लगा।
उसका ऊँट उपयोगी विकर्ण पर आया। मेरा ऊँट केंद्र का महत्वपूर्ण रक्षक हुआ। सही परिस्थिति में बदल सकता था या उन खानों की रक्षा के लिए रख सकता था जिन्हें हाथी आराम से नहीं बचाते।
मैंने रखा। निर्णय ठीक था। गलती यह मानना थी कि वह ऊँट की रक्षा को बोर्ड की स्थायी विशेषता समझेगी, हटाई जा सकने वाली समस्या नहीं। अगली चाल पर उसने लंबे समय तक केंद्र देखा और मैं अपनी सहजता को ताकत समझता रहा।
3. वह अभ्यास जिसका पता बाद में चला
उसकी तैयारी का पता मैच के बाद चला, जब उसने संबंधित पन्ने दिखाने की सहमति दी। टीम कई सप्ताह ऐसी स्थितियाँ पढ़ती रही थी जिनमें सामग्री की गिनती अधिक जरूरी प्रश्न छिपा देती—कौन-से मोहरे वास्तव में उपयोगी ढंग से चल सकते हैं?
उसका पहला अभ्यास का अदला-बदली बलिदान असफल था। ऊँट के बदले हाथी दिया, आकर्षक स्वतंत्र प्यादा पाया और फिर देखा कि प्यादा रोका जा सकता है, जबकि बाकी मोहरे पीछे धकेले जाते हैं। उसने असफलता दर्ज की।
अगले सत्र में उन्होंने अधिक सामग्री वाली तरफ से बचाव किया। उससे पता चला कि हमलावर को क्या रोकना है—सक्रिय हाथी, सुरक्षित नाकाबंदी और राजा का भागने का रास्ता। जो बलिदान इन्हें नहीं रोकता, वह महँगी हरकत रह जाता।
नुसरत उस रक्षक को पहचानने का अभ्यास करती जो स्थिति जोड़े रखता था। उसे हटाने के बाद जवाब गणना करती, फिर पूछती कि बाकी मोहरे समय पर पहुँच सकते हैं क्या। कभी उत्तर नहीं होता और वह हाथी बचाए रखती।
साथियों ने अपनी कमजोरियाँ सुधारीं। एक ने बीच की चालें पढ़ीं। दूसरे ने हाथी वाली रक्षात्मक स्थितियाँ दोहराईं। चार कमजोर बोर्डों की जगह एक असाधारण चमत्कारी बोर्ड तैयार नहीं था। चार गेम तैयार थे।
तब मुझे यह नहीं पता था। मैंने अध्यापिका को हाथी की चाल सोचते देखा और माना कि सामान्य सामग्री गिन रही है। वह देख रही थी कि गिनती बदलने के बाद मेरे मोहरों के पास उपयोगी खाने होंगे या नहीं।
4. ऊँट के बदले हाथी
नुसरत ने e6 पर मेरे केंद्रीय ऊँट को हाथी से मारा। मैंने चाल और उसके बचे मोहरे देखे। हाथी ने ऊँट लिया था। f-प्यादे से वापस मारूँ तो वह मिले मूल्य से ज्यादा देगी।
मैंने मारा। उसने h3 का ऊँट g4 और f5 से e6 लाकर अभी आए प्यादे को शह के साथ लिया। मेरा राजा खुली विकर्ण लाइन से हटा।
कुछ चालों में केंद्रीय रक्षक और उसका सहायक प्यादा गायब थे। नुसरत ने सामग्री में कुछ मूल्य दिया था, लेकिन ऊँट सक्रिय था और केंद्रीय स्वतंत्र प्यादे का रास्ता अधिक साफ। बचा हाथी सातवीं पंक्ति पर काम करने लगा।
अतिरिक्त हाथी मूल्य पर खुद को बधाई देना बंद किया तो अर्थ सरल था। मेरे मोहरों को प्यादे को वजीर बनने से रोकना था और कम उपयोगी रक्षकों वाले राजा को बचाना था। उसके मोहरे कई दिशाओं से सवाल पूछ सकते थे।
बलिदान से गेम खत्म नहीं हुआ। मेरे पास दो हाथी, उसके पास हाथी और ऊँट थे। बचाव मौजूद था। मैं उसे गंभीरता से खोजने लगा।
दूसरे बोर्ड का परिणाम आया—ड्रॉ। कुल हमारे पक्ष में साढ़े तीन बनाम ढाई हुआ।
उम्मीद थी बढ़त उसे अधीर करेगी। उसने शांत सहायक चाल चली। दबाव उसकी टीम के स्कोर से मेरी स्थिति में आ गया था। मैंने घड़ी देखी और पहली बार अपने अगले उत्तर को साधारण नहीं माना।
5. दो हाथी और बहुत सारे काम
मैंने उस हाथी को सक्रिय करने की कोशिश की जो स्वतंत्र प्यादा नहीं देख रहा था। नुसरत ने ऊँट से उन खानों पर नियंत्रण किया जहाँ से उपयोगी शह मिलती। मैं चल सकता था, लेकिन हर सक्रिय दिखती चाल में पूछना पड़ता कि पीछे क्या छोड़ूँगा।
प्यादा अकेले दौड़ नहीं रहा था। हाथी उसकी बढ़त को सहारा देता। तुरंत की धमकियाँ सँभलने पर राजा केंद्र की ओर आया। अगला खाना खाली है इसलिए वह प्यादा नहीं बढ़ाती थी। देखती कि बढ़त के बाद मेरा रोकने वाला हाथी कहाँ रहेगा।
मैंने बचे हाथियों की अदला-बदली सुझाई। गलत समय स्वीकार करती तो मेरा राजा प्यादे तक आता और अतिरिक्त मूल्य काम में लाना आसान होता। उसने मना किया, फिर ऊँट की विकर्ण सुधारी।
पहली बार समझा कि उसने असफल बलिदान क्यों पढ़ा था। आकर्षक पहली चाल केवल प्रवेश थी। कठिन काम बाद में था—मेरे मोहरों को व्यस्त रखकर अपने सुधारना।
मैंने नापसंद रक्षात्मक चाल खेली और अगला टीम परिणाम चाहा। दूर की मेज पर साथी कठिन अंतिम चरण बचा रहा था। मैं उसे संभावित ड्रॉ गिन रहा था। वह आधा अंक केवल मेरी उम्मीद में था।
नुसरत ने उसकी ओर नहीं देखा। अपनी खतरनाक स्थिति बनाए रखनी थी। मेरे हर उत्तर में अधिक समय लगने लगा। बैग में रिपोर्ट की शुरुआत अब भी थी। उसका पहला वाक्य पहले ही गलत हो चुका था।
6. बढ़त समाप्त हुई
दूर का बोर्ड नुसरत के साथी ने जीता। दूसरे चरण के पहले तीन परिणाम उसकी टीम की दो जीत और एक ड्रॉ थे। पहले चरण से जोड़कर कुल साढ़े तीन-साढ़े तीन बराबर।
हमारा गेम तय करता कि कोई सीधे जीतेगा या टाईब्रेक होगा। मेरे प्यादा बचाते बैठे रहने के दौरान पुराने दो अंक का सहारा खत्म हो गया था।
बदलाव तुरंत महसूस हुआ। दस मिनट पहले शांत चुनी जा सकने वाली चाल अब निर्णायक गेम हारने वाला कप्तान बन जाने का डर लिए थी। सरल उत्तर चाहिए था, परिचित ड्रॉ जो शाम को मेरे संभाले जा सकने वाले हिसाब में वापस ले जाए।
नुसरत ने राजा सुधारा। मेरे हाथी व्यस्त थे इसलिए उसे समय मिला। एक को केंद्रीय फाइल देखनी थी। दूसरे को किनारे से आते हाथी और ऊँट पर नजर।
मैंने दोनों हाथी सातवीं पंक्ति में फिर व्यवस्थित किए। व्यवस्था जुड़ी हुई लगी। दोनों उपयोगी बिंदु बचाते थे। सोचा कि एक साथ आने वाली धमकियाँ घटा दीं।
फिर देखा कि उसका ऊँट कहाँ जा सकता है।
हाथी b7 और f7 पर थे। उसका ऊँट c4 पर था। f7 की लाइन मेरा d5-प्यादा रोक रहा था। वह प्यादा मारे तो ऊँट c6 से b7 और e6 से f7 पर हमला करता। उसका अपना स्वतंत्र प्यादा e5 पर था, दोनों विकर्णों से अलग। मैंने दोनों लक्ष्य एक ही मार की पहुँच में रख दिए थे।
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7. ऊँट ने दो सवाल पूछे
उसने Bxd5 खेला। विकर्ण को रोकता प्यादा हट गया।
ऊँट ने दोनों हाथियों पर हमला किया। चाल पिछले खेल से अलग अचानक चालाकी नहीं थी। स्वतंत्र प्यादा और सक्रिय हाथी मेरे उपयोगी खाने सीमित करते रहे थे। मोहरों को जोड़ने की कोशिश में मैंने उन्हें उन दो विकर्णों पर रखा जो ऊँट के नए खाने पर मिलती थीं।
मैं f7 वाला हाथी d7 लाया, ताकि पंक्ति में b7 की रक्षा करे। नुसरत ने ऊँट से b7 का हाथी लिया। मैंने d7 के हाथी से वापस b7 पर मारा। ऊँट के बदले मेरा हाथी गया और भारी मोहरों की सामग्री बराबर लौटी।
अब दोनों के पास एक-एक हाथी था। उसका केंद्रीय स्वतंत्र प्यादा बना रहा। उसका राजा उसे सहारा देने की बेहतर जगह में था। पहले दिए मूल्य से सक्रियता खरीदी गई थी। उसी सक्रियता ने मुझे ऐसी स्थिति में रखा जहाँ वह मूल्य वापस जीत सकती थी।
मैंने उस खाली खाने को देखा जहाँ बलिदान से पहले मेरा ऊँट था। स्थायी समझी रक्षा चली गई थी। उसे भरने की कीमत पूरे गेम मेरे पीछे आई।
स्थिति अनुमति देती तो नुसरत बचा हाथी स्वतंत्र प्यादे के पीछे लाई। चित्र के बिना भी अर्थ साफ था। प्यादा बढ़ता तो हाथी पीछे से सहारा देता। मेरे हाथी को रोकने में चालें लगानी पड़तीं।
मैं अब भी उससे अंतिम चरण पूरा साबित करवा सकता था। मैंने किया। लेकिन अब सम्मानजनक आधा अंक देने वाला खिलाड़ी नहीं था।
8. बढ़त पूरी करने में माफी नहीं थी
मेरे हाथी ने किनारे से शह दी, फिर मौका मिलने पर पीछे से। नुसरत ने प्यादा सुरक्षित रखते हुए राजा को आश्रय की तरफ किया। हर शह जाँचकर तय किया कि बढ़ना है, रोकना है या हाथी की स्थिति सुधारनी है।
मैंने दूसरी तरफ उसके प्यादों पर हमला किया। उसने सबको अपने आप बचाने के बजाय दौड़ की गणना की। गलत समय मेरे हाथी के केंद्रीय रोक छोड़ने पर एक प्यादा दिया जा सकता था। दूसरा बचाना जरूरी था, क्योंकि वह मेरे राजा को सक्रिय होने से रोकता था। उसने दोनों में सही फर्क किया।
स्वतंत्र प्यादा तभी आगे गया जब राजा सहारा देने की जगह पहुँचा। मेरा हाथी उसके सामने आया। उसके हाथी ने मेरे राजा को उस इलाके से काटा जहाँ मदद चाहिए थी। मैं धमकियाँ बनाकर उम्मीद करता था कि वह घबराकर जल्दी प्यादा बढ़ाएगी। वह जवाब देती, फिर उसी धैर्य वाली योजना पर लौटती।
अंततः नाकाबंदी बनाए रखने के लिए एक प्यादा छोड़ना पड़ा। उसे दूसरा लक्ष्य मिला। उसने लिया, हाथी बदला और अगली रियायत करवाई। स्थिति ऐसी बनी कि आगे बढ़ते प्यादे के लिए मुझे हाथी देना पड़ता। उसके बाद उसके हाथी के सामने मेरा राजा और बचे प्यादे होते।
मैंने आखिरी लाइन दो बार देखी। समय पर कोई उपयोगी किनारे की शह नहीं थी।
नुसरत हाथ मोहरों से दूर रखे इंतजार कर रही थी। मैंने घड़ी रोकी और हाथ बढ़ाया। इस बार परिणाम का अर्थ लिखने से पहले स्वीकार करना पड़ा।
9. साढ़े चार बनाम साढ़े तीन
उसकी जीत से दूसरा चरण उनकी टीम के पक्ष में साढ़े तीन बनाम आधा हुआ। दोनों चरण मिलाकर साढ़े चार बनाम साढ़े तीन से वे जीते। परिणाम बोर्ड पर पूरी उलटफेर इतने बड़े अंकों में थी कि सब पढ़ सकते थे।
हस्ताक्षर होने के बाद ही नुसरत के साथी मेज पर आए। शुरुआती रणनीतिक जीत से वापसी शुरू करने वाले ने मुट्ठी बढ़ाई। उसने छुई, फिर ड्रॉ बचाने वाले साथी की ओर मुड़ी। तीन परिणामों ने उसके आखिरी अंक को निर्णायक बनाया था।
मैंने उन्हें भाग्यशाली उलटफेर मनाते सोचा था। वे मुकाबला बदलने के सही क्षण तुलना कर रहे थे। बीच की शह। बचाव का आधा अंक। दूर का अंतिम चरण। ऊँट के लिए हाथी, फिर दोहरे हमले से वापस मूल्य।
प्रस्तुति में मुझे उनके कप्तान को विजेता की शील्ड देनी पड़ी। पीछे मेरा क्लब उपविजेता पुरस्कार लिए था। टिप्पणी माँगी गई तो जुझारू शब्द शुरू करके रुक गया।
“उन्होंने चारों बोर्ड पर बेहतर तैयारी की,” मैंने कहा। “नुसरत ने सक्रियता के लिए मूल्य दिया और हर निष्क्रिय चाल की कीमत मुझसे ली।”
उसने मेरी आँखें देखीं, फिर कप्तान की शील्ड। उस सही वाक्य से मुझे बचाने की उसे जरूरत नहीं थी।
शाम को रिपोर्ट का मसौदा खोला। एक नया शब्द लिखने से पहले पहला अनुच्छेद मिटा दिया। पुराने आरंभ की जगह अब पूरा परिणाम था।
10. वह रिपोर्ट जो आखिर प्रकाशित की
नई रिपोर्ट कुल स्कोर से शुरू की। फिर बताया कि वहाँ कैसे पहुँचे। हर विरोधी खिलाड़ी का योगदान लिखा। मुख्य निर्णयों को हमारी टीम के साथ हुई दुर्घटनाएँ नहीं बनाया।
नुसरत के गेम में बलिदान और बाद का ऊँट का दोहरा हमला रखा। पत्रिका में जाने से पहले उसे विवरण जाँचने को कहा। उसने वह वाक्य सुधारा जिसमें मैंने स्वतंत्र प्यादे को आते ही अजेय बना दिया था।
“बचाव बाकी था,” उसने लिखा। “दिखाइए कि चुनाव कठिन क्यों होते गए।”
उस हिस्से के विश्लेषण के लिए क्लब में मिले। वह वह अभ्यास पन्ना लाई जहाँ पहले का बलिदान असफल था। मैंने उसी तरह की रोक पहचानी जहाँ अपने गेम में पहुँचना चाहता था। समझा कि उसने कैसे रोक दिया।
पूरे स्कोर और दोनों तरफ के उपायों के साथ रिपोर्ट निकली। एक पाठक ने पूछा कि अध्यापिका को कम आँका था क्या। मैंने कहा कि शतरंज खिलाड़ी को कम आँका था, क्योंकि उसका सुविधाजनक वर्णन पसंद था।
अगले टीम अभ्यास में बलिदान से पहले की स्थिति सजाई और अपने खिलाड़ियों को बचाव वाला पक्ष दिया। मेरा पहला जवाब जल्दी मिला। अगले उपयोगी कदम खोजने में समय लगा।
चर्चा से पहले उन्हें जूझने दिया। कमरे के दूसरी तरफ प्रस्तुति की खाली मेज पर शील्ड रखने का निशान था। इस बार सीख बोर्ड की वास्तविक माँग से शुरू हुई। मैंने अपनी पुरानी रिपोर्ट का वाक्य पढ़कर नहीं सुनाया। सामने की स्थिति पर्याप्त थी।
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