1. All Yono Games: रेखा के नीचे चार नाम
प्रतिष्ठित क्लब की लीग टीम प्रवेश हॉल के सफेद बोर्ड पर घोषित हुई। मोटी रेखा के नीचे चार नाम थे। इरा, ओम, सुदीप और कविता। फिर वही रिजर्व खिलाड़ी।
पैंतीस वर्षीय इरा तीन सत्रों से उन खिलाड़ियों के लिए ओपनिंग तैयार करती थी जो शायद ही कभी उसे खेलने की कुर्सी देते। बयालीस वर्षीय ओम को जरूरत से अधिक सावधान कहा जाता। उनतीस साल का सुदीप घड़ी के दबाव में अविश्वसनीय माना जाता। अड़तालीस वर्षीय कविता से कहा गया कि उसके अच्छे वर्षों का अनुभव अब युवाओं को सलाह देने के काम आ सकता है।
उन्होंने घोषित चयन ट्रायल के बारे में पूछा। कप्तान प्रताप बोला कि अनुभव कुछ असुविधाजनक नतीजों से अधिक महत्वपूर्ण है। फिर उसने इरा को बाहर के मैचों के सामान की सूची दी। “तुम चारों अब भी उपयोगी रह सकते हो।”
इरा ने रेखा के नीचे नाम देखे। सुदीप ने चुने हुए एक खिलाड़ी को ट्रायल में दो बार हराया था। कविता दूसरे से ऊपर रही थी। ओम की बराबरियों ने कई अभ्यास मुकाबले बचाए थे जिनमें प्रताप के पसंदीदा हार गए थे।
उसने सूची लौटाई। “हमें खेलने के बोर्ड चाहिए।” प्रताप ने निकलती टीम के सामने हँसकर कहा कि चार अतिरिक्त पुर्जों की जरूरत वाली लीग ढूँढ़ लो। सप्ताह के अंत तक चारों छोटे मनोरंजन क्लब में नई टीम दर्ज कर चुके थे। पहली मेज का एक पैर छोटा था। ओम उसे स्थिर करने के लिए तह किया गत्ता लाया।
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2. All Yono Games कथा: कोई बेंच पर नहीं
नई टीम ने इरा को कप्तान इसलिए बनाया क्योंकि उसने फॉर्म पूरे किए थे। यह सहमति नहीं हुई थी कि वह सबसे मजबूत खिलाड़ी है। इसी अंतर पर पहला गंभीर झगड़ा हुआ।
सुदीप पहला बोर्ड चाहता था। कविता वास्तविक शक्ति के अनुसार क्रम चाहती थी। ओम चाहता था कि सम्मान की बहस रोककर लीग का वैध बोर्ड क्रम तय किया जाए। इरा शांत शाम चाहती थी और पता चला कि कप्तानी वह नहीं देती।
घोषित रोस्टर नियम, हाल के परिणाम और आपसी प्रशिक्षण बाजियों के आधार पर क्रम तय हुआ। इरा पहली, ओम दूसरा, सुदीप तीसरा और कविता चौथा बोर्ड। किसी को अगले सत्रों के लिए स्थायी जगह का वादा नहीं मिला।
शुरुआती मुकाबलों ने दिखाया कि साझा शिकायत खेलने में कितनी कम मदद करती है। इरा जरूरत से अधिक निष्क्रिय बचाव करती। ओम बराबर दिखती स्थिति को परखे बिना स्वीकार कर लेता। सुदीप ओपनिंग की बढ़त सिद्ध करने में अधिक समय लगा देता। कविता स्मृति के आधार पर हमला करती, भले स्थिति धैर्य माँग रही हो।
पहला टीम मुकाबला तीन से एक हारा। प्रताप ने परिणाम की तस्वीर के नीचे चार छोटी बेंचों के चिह्न बनाकर भेजे। इरा ने साथियों को दिखाया और फोन रख दिया। हर खिलाड़ी ने वह स्थिति लगाई जहाँ उसकी अपनी बाजी बिगड़नी शुरू हुई थी। डगमगाती मेज पर चार बोर्ड आए। पहली बार चारों पर खेलने वाला व्यक्ति बैठा था।
3. ओम की आधे अंक की आदत
ओम वर्षों से मानता आया था कि उसका काम समस्या पैदा न करना है। पुराने क्लब में बराबरी पर सिर हिलाया जाता। जीतने पर पूछा जाता कि विरोधी ने क्या गलती कर दी। उसने स्थिति का डर खत्म होते ही बराबरी प्रस्तावित करना शुरू कर दिया था।
कविता ने अभ्यास में ऐसे प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए। बराबर दिखते अंतखेल तब तक चलवाती जब तक वह समझा न सके कि कोई पक्ष सुधार क्यों नहीं कर सकता। सक्रिय राजा या कमजोर प्यादे का लक्ष्य होता तो खेल पूरा किया जाता।
ओम ने सही बराबरी और ऐसी स्थिति में अंतर करना सीखा जिसे देखने से वह थक गया था। कमजोर पक्ष भी खेलता, ताकि वास्तव में बचाव चाहिए तो महत्वाकांक्षा उसे भ्रम में न डाल दे।
पाँचवें लीग मैच में उसने लगभग चालीस अतिरिक्त चालों के दबाव के बाद अंतखेल जीता। कठिन स्थिति में विरोधी की एक देर की गलती आई। ओम ने पकड़ी, जीत पूरी की और नतीजे पर हस्ताक्षर किए। उसके बाद पूछा कि बोर्ड समेटने में मदद चाहिए क्या।
उस अंक से टीम पदोन्नति की दौड़ में आई। परिणाम देखकर प्रताप ने भाग्यशाली घटना कहा। ओम ने स्कोर पत्र रखा, भाषण देने के लिए नहीं। अगले अभ्यास में गलती से बारह चाल पहले की स्थिति लगाई। वह जानना चाहता था कि उसका दबाव सचमुच मजबूत था क्या। इरा और कविता ने एक घंटा उसके खिलाफ बचाव करने में लगाया। ओम हर सही जवाब के बाद योजना बदलकर फिर कोशिश करता रहा।
4. तीन और तरह की मेहनत
इरा ने सक्रिय बचाव का अभ्यास किया। कभी एक प्यादा कम लेकर शुरू करती, कभी कम जगह के साथ। दूसरी निष्क्रिय दीवार बनाने से पहले पलटवार खोजती। शह दे सकने वाला वजीर तीन डूबते प्यादों की रक्षा में बँधे वजीर से अधिक उपयोगी हो सकता था।
सुदीप ने समय की सीमा तय की। हर बात साबित करने की इच्छा घड़ी बिगाड़े, उससे पहले खेलने योग्य मध्य बाजी चाल चुननी होती। बाद में जितना चाहे विश्लेषण कर सकता था। खेलते समय महत्वपूर्ण गणना और आकर्षक भटकाव अलग करना सीखा।
कविता ने अंतखेल दोबारा पढ़े। पारित प्यादे, छोटे मोहरों का तालमेल और प्रमोशन के ऐसे विकल्प जिनमें अपने आप वजीर माँगना पर्याप्त नहीं था। एक बार इरा कम मूल्य का मोहरा बनाने वाले अभ्यास पर हँसी। फिर घोड़े का दोहरा हमला भूलकर वही स्थिति हार गई।
प्रशिक्षण हमेशा शांत नहीं था। सुदीप ओपनिंग व्याख्यान बीच में रुकने पर नाराज होता। मजबूत आवाज कमरे में भरती तो ओम चुप हो जाता। कविता जितना समय चाहती, बाकी हमेशा नहीं दे पाते। व्यावहारिक झगड़े सत्र से पहले सुलझाए जाते। शतरंज वाले मतभेद बोर्ड पर रहते।
आखिरी लीग सप्ताहांत तक वे प्रताप की दूसरी टीम के खिलाफ पदोन्नति प्लेऑफ में पहुँच गए। नियमों के भीतर प्रताप खुद उस टीम में जुड़ा था। सूचना में स्थापित क्लब और नई प्रविष्टि लिखा था। पुराने हॉल में चारों नाम अब भी चयन की रेखा के नीचे थे।
5. कप्तान चार हाथ नहीं चला सकती थी
प्लेऑफ में चार बोर्ड थे। जीत का एक अंक, बराबरी का आधा। अधिक बोर्ड अंक वाली टीम पदोन्नति लेती। घड़ियाँ चलने से पहले क्रम की पुष्टि हुई।
पहले बोर्ड पर प्रताप और इरा थे। ओम के सामने मजबूत स्थितिजन्य खिलाड़ी था। सुदीप ऐसे गणनाशील विरोधी से खेलता जो उसकी पसंद की ओपनिंग जानता था। कविता के सामने हरीश था, वह युवा वयस्क जिसे पुराने क्लब में उससे पहले चुना गया था।
खेल क्षेत्र में जाने से पहले इरा ने सबसे एक व्यावहारिक प्राथमिकता पूछी। ओम ने कहा कि उपयोगी दबाव मिलने तक खेलेगा। सुदीप मध्य बाजी के लिए समय बचाएगा। कविता पारित प्यादा बढ़ाने से पहले सामने का पलटवार जाँचेगी। चार जीत का वादा नहीं हुआ। वे कुर्सियों पर बैठे।
प्रताप ने इरा का स्वागत यह पूछकर किया कि मैच के बाद उनका सामान कौन उठाएगा। उसने कुर्सी ठीक की और निर्णायक के साथ घड़ी की सेटिंग देखी।
बाजियाँ शुरू होने के बाद आपस में सलाह नहीं दी जा सकती थी। तैयारी पहले हो चुकी थी। इरा बाकी परिणाम देख सकती थी, किसी के निर्णय में अतिरिक्त दिमाग नहीं बन सकती थी। तीसरे बोर्ड पर परिचित ओपनिंग में सुदीप रुका। दूसरे पर ओम ने जल्दी आया बराबरी प्रस्ताव नहीं लिया। चौथे पर कविता ने अपनी योजना शुरू करने से पहले खतरनाक हमलावर मोहरा बदला। इरा के सामने प्रताप का पहला गंभीर खतरा आया।
6. एक अंक मिला, फिर एक गया
ओम को थोड़ी अधिक जगह देकर विरोधी ने सोचा कि वह कुछ खास नहीं करेगा। ओम ने जल्दी तोड़ने की कोशिश के बिना मोहरे सुधारे। प्यादे की कमजोरी तय की, वजीर हटने के बाद राजा पास लाया और निष्प्राण स्थिति में बदलने के बजाय सक्रिय हाथी बचाया।
विरोधी लंबे समय तक टिका रहा। ओम को हमले का बिंदु बदलना पड़ा। अस्थायी प्यादा दिया और बेहतर स्थिति में वापस लिया। आखिर जब हाथी प्यादों के पीछे घुस सका, उसने दूसरी कमजोरी जीतने के लिए इस्तेमाल किया। पहली जीत उसकी थी। नई टीम का एक अंक।
अगला परिणाम उलटा आया। सुदीप ने पहले से अच्छी घड़ी सँभाली थी, लेकिन विरोधी ने खुले राजा के खिलाफ गणना का रास्ता खोजा। तत्काल खतरा रोकने के लिए सामग्री वापस देनी पड़ी। सुदीप बीस चाल और बचाव करता रहा, फिर हारी स्थिति में इस्तीफा दिया।
वह खुद से नाराज होकर बाहर आया। इस बार हार परिचित समय संकट से नहीं हुई थी। ओम ने दर्शक सीमा के पीछे जगह बनाकर उसे पानी दिया। एक एक अंक। दो बाजियाँ बाकी।
प्रताप ने स्कोर देखा और इरा पर दबाव बढ़ाया। उसकी बढ़त वास्तविक थी। कविता की स्थिति भी खतरनाक दिखती थी। दोनों पक्षों का एक एक पारित प्यादा आगे बढ़ रहा था। पदोन्नति अब दो बोर्डों तक सिमट गई थी। किसी भी बोर्ड का उत्तर सरल नहीं था। दर्शक भी दो भागों में बँटकर खड़े हो गए।
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7. इरा के राजा को चलना पड़ा
एक मजबूर क्रम में प्रताप ने सामग्री जीत ली। इरा ने उसकी ताकत कम आँकी थी। उसका राजा खुल गया। शांत रक्षा करने पर प्रताप सब सँभाल लेता। उसे लगभग वह भविष्य की कहानी सुनाई दी जिसमें अतिरिक्त पुर्जों की कप्तान पहले विफल हुई होती।
खोई सामग्री देखते रहने के बजाय उसने अपने वजीर की शहें खोजीं। प्रताप के राजा के सुरक्षित घर उसके आत्मविश्वास से कम थे। एक सक्रिय वजीर चाल ने ऐसा खतरा बनाया कि उसे लगातार शहों और अपनी बढ़त का बड़ा हिस्सा लौटाने में चुनना पड़ा।
उसने सामग्री रखकर शहों की परीक्षा ली। इरा ने क्रम ध्यान से निभाया। बीच में आकर्षक प्यादा लेने से शहों का ढाँचा टूटता, इसलिए उसे छोड़ा। अपना क्रम जारी करने से पहले उसके राजा को भी बीच की एक शह सँभालनी पड़ी।
वही स्थिति फिर आई। चलने वाला पक्ष और संबंधित अधिकार भी वही थे। इरा ने स्कोर पत्र देखकर सही समय पर निर्णायक को बुलाया। तीन बार स्थिति दोहरने का दावा जाँचा गया और सही मिला। बाजी बराबर हुई।
प्रताप ने क्रम दोबारा देखने को कहा। निर्णायक ने दोहराई स्थितियाँ दिखाईं। उसने अनिच्छा से हस्ताक्षर किए। इरा आधा अंक लेकर उठी। टीम कुल डेढ़ डेढ़ था। सुदीप के लिए भाषण नहीं दिया, कविता के लिए निर्देश नहीं था। वह बाकी साथियों के साथ दर्शक सीमा के पीछे खड़ी हो गई। आखिरी बाजी अब कविता की थी।
8. हरीश ने पूरी कीमत वसूली
शुरुआती मध्य बाजी में कविता ने हरीश से बेहतर खेला था, लेकिन उसका बचाव कल्पनाशील था। हाथी सक्रिय करने के लिए प्यादा दिया और राजा के खिलाफ खतरे बनाए। हर लापरवाह धक्का हाथी को प्यादों के पीछे निर्णायक शहों का रास्ता दे सकता था।
कविता धीमी हुई। फिर आगे बढ़ने से पहले राजा सुधारा। अदला बदली में एक खतरनाक छोटा मोहरा हटा। आगे के क्रम में एक तरफ उसके जुड़े प्यादे और आगे बढ़ा एफ प्यादा महत्वपूर्ण बने। हरीश के पास हाथी तथा राजा के खिलाफ व्यावहारिक अवसर थे।
दर्शक प्रमोशन का घर करीब आते देख सकते थे। अभी धक्का सही है या नहीं, बाहर से निश्चित कहना कठिन था। कविता ने पीछे की उत्सुकता से नहीं, बोर्ड से गणना की।
हरीश का राजा h7 की तरफ गया। हाथी पलटवार खोजते हुए बाद में d7 पर आया। सातवीं पंक्ति पर हमला करके वह आगे के प्यादे से ध्यान हटवाना चाहता था। कविता के राजा और बाकी प्यादों ने उसे एक सटीक निर्णय का समय दिया।
उसका सफेद प्यादा f7 पर था। अगली चाल प्रमोशन संभव था। हरीश वजीर की अपेक्षा कर रहा था और उसके खिलाफ सबसे जिद्दी उत्तर देख चुका था। कविता ने सोचा कि f8 पर घोड़ा कौन से घर मारता है। एक पर h7 वाला राजा था। दूसरे d7 पर हाथी। घोड़ा बनाना शह होता। उसी जवाब में हाथी भी नहीं बच सकता था। उसने घोड़ा माँगा।
9. छोटा मोहरा, बड़ी आवाज
निर्णायक ने सही मोहरा दिया। कविता ने प्यादा f8 पर बढ़ाकर सफेद घोड़े से बदल दिया। चाल ने h7 के राजा को शह दी और d7 के हाथी पर हमला किया।
हरीश ने घोड़ा देखा, फिर हाथी। राजा को शह का जवाब देना था। वह वैध घर पर गया। अगली चाल कविता ने d7 का हाथी ले लिया। दर्शक सीमा के पीछे आवाज उठी जैसे देर से रोकी साँस एक साथ बाहर आई हो।
केवल सुंदर चाल के कारण बाजी समाप्त घोषित नहीं हुई। कविता को बची स्थिति जीतनी थी। उसके बाकी प्यादों से स्पष्ट रास्ता था। घोड़ा विरोधी राजा को जरूरी घरों तक समय से नहीं पहुँचने दे रहा था।
हरीश ने कुछ चाल और खेलीं। आखिरी प्यादा दौड़ पैदा करने की कोशिश की। कविता राजा पास लाई, पारित प्यादा बचाया और घोड़े से रास्ता ढकने के बाद ही उसे आगे बढ़ाया। बचाव की स्थिति निराशाजनक हो गई। हरीश ने इस्तीफा दिया।
कविता के अंक से उनकी टीम ढाई पर पहुँची। प्रताप की टीम डेढ़ पर रही। ओम जीता था, सुदीप हारा, इरा बराबर रही और कविता ने निर्णायक जीत दी। इरा परिणाम पर हस्ताक्षर होने तक रुकी। फिर चारों एक साथ बोर्ड के पास पहुँचे।
प्रताप स्कोरर की मेज के पास खड़ा रहा। सामने ऐसा टीम परिणाम था जिसमें उसे चार अलग बाजियों का हिसाब देना पड़ता। उसने कागज पर एक बार ऊपर से नीचे देखा और कलम उठाई।
10. रेखा के ऊपर
पदोन्नति की सूचना में चार नाम थे, किसी के पास रिजर्व नहीं लिखा था। पुराने क्लब के सचिव ने चयन बोर्ड हटाकर नए सत्र की डिवीजन सूची लगाई। मनोरंजन क्लब की टीम उस दल से ऊपर थी जिसे उसने हराया था।
प्रताप को निचले डिवीजन के कप्तान के रूप में कार्यक्रम बैठक में जाना पड़ा। इरा अगले कमरे में ऊपरी डिवीजन की बैठक में गई। सत्रों के बीच गलियारे में भीड़ हुई तो उसने रास्ता छोड़कर उनकी टीम को निकलने दिया।
उस दिन बोर्ड सुदीप उठा रहा था क्योंकि उसकी बारी थी। ओम घड़ियाँ लिए था। कविता के पास पदोन्नति का परिणाम वाला फोल्डर था। इरा अगले सत्र के विरोधियों की सूची लेकर चल रही थी। सामान की जिम्मेदारी अभ्यास कार्यक्रम के पास घूमती बारी के अनुसार लिखी थी।
पहले अभ्यास में सभी घोड़े वाले प्रमोशन को दोहराना चाहते थे। कविता ने दस मिनट दिए। फिर सुदीप की हारी मध्य बाजी लगाकर पूछा कि पहली बार खतरा कहाँ महसूस हुआ था। उसने बिना किसी के हटने को कहे स्थिति दिखाई। ओम को रक्षात्मक रास्ता मिला। इरा ने चुनौती दी। कविता ने हमला करता वजीर चलाकर फिर गणना करवाई।
मेज के एक पैर के नीचे अब भी तह किया गत्ता लगता था। सतह पर चार बोर्ड थे। ऊपर दीवार की नई टीम सूची में भविष्य के आवेदकों के लिए जगह थी और जगह पाने का तरीका लिखा था। वहाँ ऐसी रेखा नहीं थी जिसके नीचे नाम लिखे लोग कभी खेलने वाले ही न हों।
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