1. BetAce कहानी: धीमे आदमी के लिए छह गेम
मदन पुराना प्रदर्शन वाला बोर्ड सीढ़ियों से नीचे ला रहा था, तभी नया नामपट्ट लग गया। उसके पुराने छात्र विक्रम ने शाम का शतरंज कार्यक्रम अपने हाथ में लिया था और उद्घाटन की तस्वीरों से पहले कमरा खाली चाहता था। पढ़ाने की सूची से मदन का नाम हट चुका था। उसे बताया भी तब गया जब वह अपने नोट लेकर पहुँच गया।
“कल की चालें आप बहुत सुंदर समझाते हैं,” विक्रम ने कहा। “हमारे खिलाड़ियों को कल आने वाली चाल देखने वाला चाहिए।”
सैंतालीस साल का मदन वयस्क शिक्षा केंद्र में लिपिक था। उसकी कक्षाएँ चमकदार नहीं थीं। उसे याद रहता था कि कौन रात की पाली के कारण थका है, कौन राजाओं की विपक्ष वाली स्थिति को केवल पास खड़ा होना समझता है और कौन आत्मविश्वासी लड़का विरोधी की धमकी देखे बिना चल देता है। विक्रम कभी वही लड़का था।
स्थानीय आयोजक ने दोनों के बीच छह रैपिड गेम का प्रदर्शन मैच सुझाया। इस काल्पनिक आयोजन में जीत का एक अंक, ड्रॉ का आधा और अंत में ज्यादा कुल अंक वाले की जीत थी। विक्रम तुरंत मान गया। उसने इसे पुराने ढंग के शतरंज की सम्मानजनक विदाई कहा।
मदन ने समय नियंत्रण दो बार पढ़कर सहमति दी। तैयारी के छह सप्ताह थे और एक वास्तविक कमजोरी सुधारनी थी। जटिल स्थिति में वह अच्छी चाल खोज लेता था, लेकिन तब तक घड़ी का बड़ा हिस्सा चला जाता।
आखिरी डिब्बा उठाते समय विक्रम ने मदद की पेशकश की। मदन ने सबसे भारी डिब्बा उसे दे दिया। प्रदर्शन का बोर्ड घर ले गया और उसके पास घड़ी रख दी।
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2. एक मिनट में फैसला करना था
समय बाँधकर किए पहले अभ्यास में मदन पाँच बार हारा। स्थितियाँ पहचानता था, लेकिन मोहरे कहाँ अच्छे रहेंगे यह जानना और समय खत्म होने से पहले निर्णय लेना अलग बातें थीं। पहली ठीक चाल को बार-बार सही साबित करने में समय खर्च करता, फिर अगली स्थिति जल्दबाजी में चल देता।
उसने अभ्यास दो हिस्सों में बाँटा। रणनीतिक हमलों वाली स्थिति में पहले शह, मार और तुरंत की धमकियाँ देखता। शांत स्थिति में दो गंभीर विकल्प चुनकर प्रत्येक के खिलाफ विरोधी का सबसे मजबूत उत्तर जाँचता। तय समय समाप्त होने पर फैसला और कारण लिखना होता। बाद में लंबी जाँच कर सकता था, मगर दर्ज निर्णय को बेहतर चाल से बदल नहीं सकता था।
उसका अभ्यास साथी सुरेश नगरपालिका का सर्वेक्षक था और राजा पर आक्रमण पसंद करता था। वह उम्र के कारण रियायत नहीं देता। मदन ने स्वाभाविक वापस मारने वाली चाल पर तीन मिनट लगाए, तो सुरेश ने घड़ी रोककर पूछा कि तीसरे मिनट में कौन-सी नई जानकारी मिली।
अक्सर जवाब था—कुछ नहीं।
उन्होंने विराम का अभ्यास भी किया। हार के बाद मदन आखिरी गलती तब तक दोहराता था जब तक अगला गेम शुरू न हो जाए। अब एक उपयोगी बात लिखता, पानी पीता और हारी हुई स्थिति अलग रख देता। शुरुआत में यह बनावटी लगा। फिर देखा कि अगले उद्घाटन में पिछली हार की घबराहट साथ नहीं आ रही।
विक्रम ने नए नामपट्ट के पास मुसकराती तस्वीर डाली। उस शाम मदन हाथियों वाला एक अंतिम चरण हारा और समय पर दूसरा शुरू कर दिया।
3. पहला गेम विक्रम का था
विक्रम ने पहला गेम साफ ढंग से जीता। मदन ने संकुचित स्थिति स्वीकार की, बहुत देर उसे बचाता रहा और समय कम होने पर घोड़े का दोहरा हमला नहीं देखा। घोड़े ने राजा और हाथी दोनों को निशाना बनाया। राजा हटाने पर हाथी गया। विक्रम ने उपयोगी जवाबी खेल का मौका दिए बिना बढ़त जीत में बदली।
दर्शकों ने संयोजन पर तालियाँ बजाईं। कड़वाहट कम होने के बाद मदन ने मन में उस चाल की प्रशंसा की। जिस स्थिति को उसने बनने दिया था, उसका ठीक दंड मिला था।
खेल क्षेत्र से निकलने से पहले ही विक्रम समझाने लगा। “आपने अपने मोहरों को कोई सक्रियता नहीं दी।”
मदन ने सिर हिलाया। “और अदला-बदली से पहले बहुत समय लगाया।”
उसने कागज पर यही दो बातें लिखीं। यह नहीं लिखा कि कमरा विरोध में था या रोशनी ज्यादा तेज थी। विराम में दूर की खिड़की तक गया, पानी पिया और दोहरे हमले को चौथी बार मन में बनाए बिना लौट आया।
दूसरे गेम में उसने परिचित ढाँचा चुना, जिसमें मोहरों के लिए जगह थी। विक्रम ने तेजी से आक्रमण किया। उसे उम्मीद थी पहली हार मदन को डरा देगी। मदन ने सबसे खतरनाक हमलावर ऊँट बदला और हाथी सक्रिय रखा। खेल बराबर के अंतिम चरण में पहुँचा।
विक्रम बीस चाल और जीत खोजता रहा। मदन ने हर छोटी धमकी का सही जवाब दिया। प्रगति का रास्ता खत्म होने पर ड्रॉ हुआ। विक्रम डेढ़ के मुकाबले आधे अंक से आगे था। चार गेम बाकी थे।
4. छात्र का पसंदीदा छोटा रास्ता
तीसरे गेम में मदन को विक्रम की सुधरी तकनीक के नीचे पुरानी आदत दिखाई दी। मजबूर करने वाली चाल चलते ही वह आधे पल ढीला पड़ जाता था, मानो धमकी बना देने से विरोधी के पास एक ही ठीक जवाब बचता हो।
मदन ने चेहरे का भाव पढ़कर निर्णय नहीं लिया। उस भाव के पीछे की स्थिति जाँची। विक्रम ने उसके राजा की ओर प्यादे बढ़ाए थे, लेकिन बीच का एक प्यादा कम सुरक्षित था। तुरंत मारने पर खतरनाक लाइन खुलती। पहले हाथी की तैयारी वाली चाल से वही मार सुरक्षित हो सकती थी।
मदन ने तैयारी की। विक्रम किनारे पर बढ़ता रहा। दो चाल बाद केंद्रीय प्यादा गिरा और खुली फाइल मदन के हाथी को मिली।
आक्रमण पर ध्यान अभी भी जरूरी था। मदन ने वजीर तभी बदले जब जाँच लिया कि अगले हाथी वाले अंतिम चरण में उसका अतिरिक्त प्यादा और सक्रिय राजा बने रहेंगे। फिर विरोधी हाथी को बचाव में बाँधा, दूसरी कमजोरी बनाई और लंबे प्रतिरोध के बाद जीत हासिल की।
दोनों की एक-एक जीत और एक ड्रॉ। मैच बराबर।
विक्रम स्कोर शीट देखता रहा। दर्शकों का ढंग बदल गया। बाहर निकलने के पास खड़े लोग फिर सीमा के करीब आ गए। सुरेश अपनी कुर्सी पर चुप रहा। मदन उस खामोशी से खुश था। एक अच्छे गेम के बाद उसे किसी बड़े पुनर्जन्म की घोषणा नहीं चाहिए थी। दस मिनट, साफ दिमाग और चौथे गेम को नए स्कोर की तरह शुरू करने का अनुशासन चाहिए था।
5. बढ़त जिसे बार-बार कमाना था
चौथा गेम कम नाटकीय था और विक्रम के लिए अधिक तकलीफदेह। मदन ने जगह हासिल की, विरोधी प्यादे को ऐसे खाने पर रोका जहाँ उस पर हमला हो सकता था, और समय से पहले धावा नहीं बोला। विक्रम ने एक जोड़ी हाथी बदलकर जगह खोलनी चाही। मदन तैयार था, क्योंकि बचे मोहरों के लिए उसके रास्ते बेहतर थे।
युवा खिलाड़ी सोच रहा था कि थका प्रतिद्वंद्वी अदला-बदली में राहत ढूँढ़ेगा। इसके बजाय हर अदला-बदली से खेल उलझाने का उसका अपना एक साधन कम होता गया। अंत में उसे कमजोर प्यादा राजा से बचाना पड़ा, जबकि मदन का राजा दूसरी कमजोरी की ओर बढ़ा।
गेम दर्शकों के अनुमान से लंबा चला। किसी ने बजता फोन बंद किया। विक्रम ने कलम थपथपाना छोड़ दिया। जब उसने अंततः हार मानी, कमरे में इतनी शांति थी कि मेज पर राजाओं के हल्के स्पर्श की आवाज सुनाई दी।
मदन ढाई के मुकाबले डेढ़ अंक से आगे हो गया।
पाँचवाँ गेम जीतता तो एक गेम बचा रहने पर ही छह गेम की शृंखला जीत जाता। ड्रॉ होने पर छठा निर्णायक रहता। उसने हिसाब समझा और उसे शुरुआती चालों की योजना नहीं बनने दिया।
विराम से लौटते समय विक्रम की जैकेट उतर चुकी थी। अब वह आयोजन को विदाई नहीं मान रहा था। सामने पुराने शिक्षक ने घड़ी इस तरह रखी कि दोनों के अंक साफ दिखें। काम सामान्य था। विक्रम उसे अपमान की तरह देख रहा था।
6. वह शह जो उत्तर जैसी दिखी
पाँचवें गेम में दोनों ने सुरक्षित रास्ते छोड़ने के बाद तेज, कम मोहरों वाली स्थिति बनाई। मदन के पास वजीर, हाथी, ऊँट और तीन प्यादे थे। विक्रम के पास वजीर, हाथी और तीन प्यादे। अतिरिक्त ऊँट महत्वपूर्ण था, लेकिन मदन का राजा खुला था और उसका वजीर विरोधी हाथी की फाइल पर खड़ा था।
विक्रम को ऐसी शह मिली जो दोनों समस्याएँ हल करती दिखाई दी। उसका वजीर a2 पर आया और दूसरी पंक्ति से सफेद राजा को शह दी। मदन राजा को लापरवाही से हटाता तो d8 का हाथी d5 पर खड़ा सफेद वजीर मार सकता था। कई दर्शक एक साथ आगे झुके।
मदन की घड़ी में उसकी इच्छा से कम समय था। यही पल पुरानी आदत को खतरनाक बना सकता था। वह राजा के हर खाने की गणना करता, उन्हीं चालों को दोहराता और फिर मजबूरी में चलता।
इसके बजाय अभ्यास वाली प्रक्रिया अपनाई। शह किस प्रकार की थी? पंक्ति पर खुली लाइन। क्या शह देने वाला मोहरा सीधे मारा जा सकता था? अभी नहीं। क्या लाइन रोकी जा सकती थी? राजा की चालों पर लौटने से पहले उसने यह जाँचा।
उसका हाथी g1 पर, ऊँट f3 पर और राजा h2 पर था। हाथी g2 पर जाने से वजीर की शह के बीच आ जाता। राजा हाथी को बचाता। ऊँट भी g2 देख रहा था।
मदन ने एक बार फिर विक्रम का हाथी और अपना वजीर देखा। फिर हाथी की ओर हाथ बढ़ाया।
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7. हाथी g2 पर
उसने Rg2 चला।
चाल की आवाज शांत थी, असर नहीं। शह की लाइन बंद हुई और दूसरी पंक्ति पर काले वजीर पर हमला हो गया। अब विक्रम सफेद वजीर पर अपने हमले को मुफ्त लाभ नहीं मान सकता था।
प्रदर्शन के बोर्ड पर पूरी स्थिति साफ थी। सफेद राजा h2, वजीर d5, अब हाथी g2, ऊँट f3 और प्यादे a3, b4, g3। काला राजा g8, वजीर a2, हाथी d8 और प्यादे a7, g7, h7। कोई छिपा मोहरा किसी को नहीं बचा रहा था।
काला वजीर केवल हट जाता तो मदन d8 का हाथी शह के साथ मारने पर विचार कर सकता था। काला वजीर g2 का रोकने वाला हाथी मारता तो सफेद राजा उसे मार सकता था। तब ऊँट d5 की रक्षा करता रहता। विक्रम ने व्यावहारिक रूप से दोनों वजीरों की अदला-बदली चुनी। उसके हाथी ने d5 पर सफेद वजीर मारा। मदन का हाथी दूसरी पंक्ति पार करके a2 पर काला वजीर ले गया।
स्थिति साफ हुई। मदन के पास हाथी और ऊँट, विक्रम के पास हाथी था। दोनों के तीन-तीन प्यादे थे। अतिरिक्त ऊँट आक्रमण के बीच बच गया था।
विक्रम g2 को देखता रहा। गणना में उसने उसे खाली जगह माना था। वह पुराने शिक्षक से राजा भगाने की उम्मीद कर रहा था। मदन ने लाइन के बीच मोहरा रखकर उसे दोनों तरफ की धमकियों का हिसाब करने पर मजबूर कर दिया। सुरेश ने अभ्यास की कॉपी बंद कर दी।
8. बढ़त के बाद भी काम बाकी था
विक्रम ने हार नहीं मानी। हाथी सक्रिय करके किनारे से शह देने लगा, ताकि मदन का राजा खुला रहे। मदन संयोजन की प्रशंसा में खोकर लगातार शह लेने देता या प्यादे गँवाता, तो अतिरिक्त ऊँट का लाभ कम पड़ सकता था।
उसने ऊँट को उपयोगी बचाव की लाइन पर लाया, राजा को सुरक्षित दिशा दी और हाथी को एक ही प्यादे से बाँधने के बजाय सक्रिय रखा। छोटी, सोचकर की गई गणनाएँ करता रहा। हर शह पर वर्तमान शह के साथ विरोधी की अगली शह भी देखी।
बढ़त बदलने का वास्तविक अवसर तब आया जब विक्रम को वजीर की तरफ के आगे बढ़ते स्वतंत्र प्यादे को जाने देना या हाथी बदलकर कठिन ऊँट वाले अंतिम चरण में प्रवेश करना था। उसने हाथी बदलने का प्रयास चुना। मदन ने स्वीकार करने से पहले राजाओं के रास्ते जाँचे।
बची स्थिति में धैर्य का लाभ मिला। ऊँट एक तरफ पहुँचने के रास्ते नियंत्रित करता रहा और राजा दूसरी तरफ गया। मदन ने एक प्यादा रोका, विक्रम के राजा को उसकी रक्षा में लगाया और जवाब गणना करने के बाद ही आगे बढ़ा। दर्शकों को अचानक बलिदान पर तालियाँ बजाने का अवसर नहीं मिला। वे बचने के रास्ते खत्म होते देखते रहे।
विक्रम की आखिरी उपयोगी प्यादे की चाल भी निकल गई। उसने घड़ी देखी, मदन को देखा और राजा झुका दिया।
पाँचवाँ गेम खत्म। मदन साढ़े तीन बनाम डेढ़ से आगे था। छठा गेम बाकी रहते हुए भी विक्रम उसे पकड़ नहीं सकता था। जिस विदाई के पोस्टर में मदन किनारे था, उसी मैच का विजेता अब सामने बैठा था।
9. छठा गेम भी खेला गया
मदन छठे गेम के लिए समय पर लौटा। एक दर्शक ने पूछा कि शृंखला तय हो गई तो अब खेलने की जरूरत है क्या। उसने बैठकर स्कोर शीट पर तारीख लिखी।
विक्रम ने शाम का अपना सबसे अच्छा रक्षात्मक खेल दिखाया। मदन के शुरुआती दबाव का बिना झुँझलाए सामना किया। असुविधाजनक मोहरा स्थायी कमजोरी बनने से पहले बदला। फिर ऐसा अंतिम चरण बचाया जिसमें कई सटीक चालें जरूरी थीं। मदन ने अवसर रहने तक परीक्षा ली। स्थिति में आगे कुछ नहीं बचा तो ड्रॉ मान लिया गया।
अंतिम स्कोर चार-दो।
हाथ मिलाते समय विक्रम ने पकड़ एक पल बनाए रखी। “शह के बाद मैंने देखना बंद कर दिया था।”
“जानता हूँ,” मदन ने कहा।
बात नरम नहीं थी, लेकिन सही थी। विक्रम ने बचपन में भी यही सुना था, जब अपनी धमकी विरोधी के जवाब से अधिक रोमांचक लगती थी। इस बार उसी जवाब ने पूरी शृंखला उससे ले ली।
पुरस्कार के समय आयोजक ने मदन को विजेता की पट्टिका दी और कुछ बोलने को कहा। उसने अभ्यास में घड़ी का नियम मनवाने के लिए सुरेश को धन्यवाद दिया। फिर समझाया कि हाथी g2 पर शह क्यों रोक सकता था। लोग प्रदर्शन के बोर्ड के करीब आने लगे।
विक्रम काले मोहरे लिए किनारे खड़ा था। मदन ने स्थिति फिर बनाने को कहा तो उसने ध्यान से बनाई। उस शाम पहली बार वह पुराने शिक्षक का समझाना पूरा होने का इंतजार करता रहा।
10. आने वाले कल की चाल
अगले सप्ताह मदन ने उधार मिले कमरे में शाम का छोटा विश्लेषण समूह शुरू किया। पहले बोर्ड पर ऐसी स्थिति रखी जिसमें ऊपर से साफ दिखने वाला हमला गलत पड़ता था। घड़ी सबको दिखाई देने वाली जगह पर रखी।
सत्र शुरू होने के बाद विक्रम आया। दरवाजे के पास खड़ा रहा, जब तक मदन ने खाली कुर्सी नहीं दिखाई। उसके आने की कोई घोषणा नहीं हुई। कारखाने की पाली के बाद पढ़ने आई एक स्त्री अपना विकल्प समझा रही थी। समूह ने उसे पूरी लाइन बताने दी।
विक्रम की बारी आई तो उसने दो विकल्प बताए और प्रत्येक के खिलाफ विरोधी का सबसे मजबूत उत्तर दिया। मदन ने पूछा कि उसे दूसरा क्यों बेहतर लगा। जवाब में एक मिनट से कम लगा, क्योंकि उसने सच में तुलना की थी।
दूसरों के जाने के बाद विक्रम ने प्रदर्शन वाला बोर्ड स्टैंड में रखने में मदद की। पूछा कि क्या अगले गुरुवार मदन उसके साथ एक और गेम देखेगा।
“हारा हुआ लाना,” मदन ने कहा।
विक्रम लगभग मुसकराया। फिर उसने सिर हिलाया।
मदन ने कमरा बंद किया और कॉपी बाँह के नीचे दबाकर सीढ़ियों से उतरा। दरवाजे के पास नई सत्र सूची में उसका नाम सामान्य काली स्याही से छपा था। अगले सप्ताह का समय जाँचने भर को रुका। फिर घर चला गया, ऐसी स्थिति तैयार करने जिसे देखकर पूरे कमरे को सोचना पड़े।
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