1. Damac Game कहानी: गायब औज़ारों की जगह
रेनु को तस्वीर देखने से पहले औज़ारों के गायब होने का पता चला था। अट्ठाईस वर्ष की उम्र तक वह अपनी कार्यशाला की दराज़ में खाली जगह को नीचे छूटे हल्के निशान से पहचान लेती थी। नया टॉर्क रेंच नहीं था। जाँच का वह उपकरण भी गायब था जिसे खरीदने के लिए उसने किराये के कमरे की टपकती छत की मरम्मत टाली थी।
शाम को नकुल उसी जैकेट में आया जो तस्वीर में दिखाई दे रही थी। उसने औज़ार अपने चचेरे भाई के गैराज में दे दिए थे। बदले में उसे क्लब के दौरे में सहायता मिली थी। उसने सगाई खत्म होने की खबर भी लोगों को दे दी थी। रेनु को यह बात तब मालूम हुई जब पड़ोस का आदमी पूछने आया कि विवाह के लिए मँगाई कुर्सियाँ रद्द कर दे या नहीं।
“तुम्हें लोगों से ज़्यादा मशीनों की समझ है,” नकुल ने कहा।
रेनु ने कार्यशाला की चाबी माँगी। उसने दो ग्राहकों के सामने चाबी फर्श पर फेंक दी।
एक ग्राहक झुकने लगा। रेनु ने उससे पहले चाबी उठा ली।
नकुल के कैरम क्लब का कप्तान रितेश अपनी मोटरसाइकिल इसी दुकान पर लाता था। जब रेनु ने प्रतिस्पर्धी चयन में खेलने की बात की थी, दोनों हँसे थे। रितेश ने परीक्षा लेने की जगह एक खराब अभ्यास बोर्ड पकड़ा दिया था। पूछा था, इसे किसी काम का बना सकती हो?
वही बोर्ड अब शटर के पीछे पुरानी चादर में था। अगले दिन बचा सामान गिनने के बाद रेनु ने चादर हटाई। फ्रेम पर किसी ने नाम खुरचा था। उसने वह किनारा दीवार की तरफ करके सतह जाँची।
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2. बोर्ड इंजन नहीं होता
शुरू में उसने बोर्ड को ऐसी मशीन समझा जिसकी खराबी ढूँढ़कर दूर की जा सकती थी। फ्रेम को ठीक करना था। सतह को सही तरह साफ करना था। उसने अभ्यास से पहले यह काम पूरा किया, फिर खेलते समय बोर्ड से छेड़छाड़ बंद कर दी। हर गलत स्ट्रोक के बाद लकड़ी को दोष देकर निशाना नहीं सुधरने वाला था।
पहली परीक्षा बहुत सीधी थी। वही सफेद गोटी, वही सीधा रास्ता और कॉपी के चित्र में दर्ज जगह से दस प्रयास। स्ट्राइकर हर बार गोटी के अलग हिस्से पर लग रहा था। तेज झटका देने पर कुछ गलतियाँ केवल तेज हो गईं।
सामुदायिक भवन में बुजुर्ग खिलाड़ी फर्नांडिस ने तीन स्ट्रोक देखे। फिर बोले, “जब नतीजा बहुत चाहिए होता है, तुम्हारी दिशा बदल जाती है।”
उन्होंने गोटी वापस रखी और स्ट्राइकर रखने के बाद रुकने को कहा। रेनु ने महसूस किया कि कंधा कसते ही उँगली बगल की तरफ खिंच रही थी। निशाना एक जगह था, प्रहार दूसरी जगह पहुँचता था।
पंद्रह दिन उसने ऐसा सहज प्रहार दोहराया जिसे बार-बार किया जा सके। फर्नांडिस दो बार आए। बाकी सत्र रेनु ने भवन में बारी-बारी आने वाले वयस्क खिलाड़ियों के साथ किए। वे सीट और रंग बदलते, ताकि एक सुविधाजनक कोना उसकी पूरी क्षमता न बन जाए।
दुकान बंद करते समय उसने अपने लिए काम की पर्ची बनाई। शिकायत—गलत निशाने का दोष सतह पर। निरीक्षण—दबाव में संपर्क बदलता है। काम—बल बढ़ाने से पहले एक जैसा प्रहार। यह पहली पर्ची थी जिसका ग्राहक वह खुद थी।
3. प्रभावशाली स्ट्रोक की कीमत
उस बोर्ड पर एक स्थिति रेनु को बहुत पसंद थी। किनारे के पास की गोटी को कुशन से लौटाकर सामने की जेब में भेजा जा सकता था। गोटी गिरती तो आवाज सुनकर लोग सिर उठाते। चूक होती तो वह एक और अवसर माँगती।
अभ्यास में कमल ने इसी लगाव की कीमत वसूल ली। दो आसान गोटियाँ उपलब्ध होने पर भी रेनु ने लौटता हुआ स्ट्रोक चुना। निशाना जेब से दूर निकला। स्ट्राइकर ने एक झुंड छेड़ दिया और कमल की बची गोटियों के लिए सीधा रास्ता खोल दिया।
रेनु ठीक से बैठती, उससे पहले उसने बोर्ड खत्म कर दिया।
“बोर्ड जीतना था या किसी का सिर उठवाना था?” उसने पूछा।
वह इतनी नाराज़ थी कि जवाब नहीं दिया। बाद में स्मृति से स्थिति खींची। समझ आया कि लौटता स्ट्रोक अपने आप में बेकार नहीं था। उसे चुनने का समय गलत था। एक साधारण कट बाधा हटा देता और अगली अपनी गोटी सुलभ रहती। उसने अपनी बारी कठिन काम करने का प्रदर्शन देने में खर्च की थी।
नई पर्ची में तीन खाने बने—उपलब्ध जेब, अगली स्थिति, चूक का परिणाम। उसने उस स्ट्रोक के साथ सीधे कट और नियंत्रित स्थिति बनाने का अभ्यास किया। कई शाम उस चर्चित निशाने को छुआ भी नहीं।
नकुल दुकान के सामने से गुज़रकर फ्रेम थपथपाने लगा। रेनु ने उसे अपनी कला नहीं दिखाई। केवल कहा कि मोटरसाइकिल दरवाज़े के सामने से हटा दे।
4. छह मुकाबले, दो स्थान
जिला चयन समूह में चार वयस्क खिलाड़ी थे। सभी को एक-दूसरे से दो बार खेलना था। प्रत्येक के छह मुकाबलों से यात्रा करने वाली टीम के दो स्थान तय होते। एक मुकाबला एक गेम का था। पच्चीस अंक या आठ बोर्ड तक खेल चलता। आठवें बोर्ड तक कोई पच्चीस पर न पहुँचे तो अधिक अंक वाला जीतता।
रितेश ने नाम दिया। रेनु, कमल और छोटी दुकान में हिसाब रखने वाला विजय भी आए। विजय का प्रहार शांत और सधा हुआ था। इस व्यवस्था में केवल एक शानदार दोपहर काफी नहीं थी। दूसरी मुलाकात में पहली मुलाकात की आदतें सामने आतीं।
रेनु ने विजय से पहला मुकाबला जीता, फिर रितेश से हारी। उसने जल्दी क्वीन लेने की कोशिश की, जबकि कवर के लिए सुविधाजनक सफेद गोटी नहीं छोड़ी थी। अगला प्रहार चूक गया। क्वीन बीच में लौटी और रितेश ने बोर्ड पर नियंत्रण बना लिया।
नकुल पीछे खड़ा देख रहा था। उसके पास से गुज़रते समय उसने कहा, “आने की तकलीफ बचा सकती थीं।”
रेनु ने हाथ धोने की जगह ठंडे बेसिन पर दोनों हथेलियाँ रख दीं। मन हुआ घर जाकर बोर्ड को इतना खोल दे कि उसे दोष देने वाली समतल सतह ही न बचे।
उसने बोर्डवार स्कोर माँगा। दो बार क्वीन के पीछे जाने से पहले अपनी कठिन गोटियाँ नहीं सँभाली थीं। उसने उन जगहों पर गोला लगाया। अगली शाम वही स्थितियाँ बनाईं और आसान कवर को हर बार थोड़ा दूर किया।
5. जिस चीज़ के पीछे दौड़ना छोड़ा
तीसरे मुकाबले में कमल ने उसे हराया। उसने लगातार शानदार निशाने लगाकर ऐसा नहीं किया। बार-बार ऐसी स्थिति छोड़ी जिसमें रेनु को कम संभावना वाला आक्रमण या बहुत कम सुधार करने वाला प्रहार चुनना पड़ा। सावधान चुनाव उसे डर मान लेने जैसा लगता, इसलिए वह जल्दी करती थी।
बाद में उसने कमल से तीन स्थितियाँ फिर बनाने को कहा। दोनों ने हर स्थिति दोनों तरफ बैठकर खेली। जब कमल उसकी सीट पर आया तो पता चला कि उसके कई कथित खतरे उसे खतरे लगते ही नहीं थे। जेब के पास बैठी गोटी भी कठिन हो सकती थी यदि संपर्क का सही कोण उपलब्ध न हो।
अभ्यास में हर तीसरे स्ट्रोक पर रुककर वे बताते कि अब सबसे सरल रास्ता कौन सा है। रेनु ने केवल गोटी कहाँ जाएगी, यह देखना छोड़कर संपर्क के बाद स्ट्राइकर कहाँ जाएगा, यह भी देखना शुरू किया।
वापसी के मुकाबले में उसने कमल को हराया। चौथे बोर्ड पर पुराना लौटता स्ट्रोक काम आया। इस बार सीधा रास्ता बंद था और लौटने के बाद स्ट्राइकर अगली लाइन खुली छोड़ता। उसके बाद दो साधारण गोटियाँ गईं। पहले स्ट्रोक पर अलग से तालियाँ बजाने का समय नहीं मिला।
अब उसकी दो जीत और दो हार थीं। रितेश का एक चयन स्थान पक्का हो चुका था। दूसरे के रास्ते में विजय था। उसने आखिरी दो मुकाबलों के समय दुकान के कैलेंडर पर लिखे और ग्राहकों को सामान लेने के लिए उससे पहले बुलाया।
6. आखिरी दरवाज़े से पहले हार
विजय ने दूसरी मुलाकात जीत ली। पाँच बोर्ड तक रेनु बराबरी के करीब रही। फिर बहुत अच्छा पतला कट लगाने के बाद आसान गोटी चूक गई। उसके मन ने कठिन काम पूरा होने का जश्न पहले ही शुरू कर दिया था। विजय ने अवसर लिया और मज़बूत अंत किया।
बाहर नकुल का चचेरा भाई जाँच उपकरण वापस लाया। उसका डिब्बा टूटा हुआ था। टॉर्क रेंच अब भी गायब था।
“बाकी सामान चयन के बाद ले लेना,” उसने कहा। “रितेश सब ठीक कर देगा।”
रेनु ने लौटे सामान की तस्वीर ली, बाकी चीज़ें लिखीं और उसे सूची दी। फिर खुद अंकतालिका देखने अंदर गई।
कमल ने अपने आखिरी मुकाबले में विजय को हराया था। दोनों का अंतिम परिणाम अब उस अंक तक नहीं पहुँच सकता था जहाँ रेनु रितेश को हराकर पहुँचती। जीतने पर वह अकेली दूसरे स्थान पर होती। हारने पर चयन से बाहर। किसी दूसरे खिलाड़ी के बुरे नतीजे की प्रतीक्षा नहीं थी।
अंतिम अभ्यास के लिए उसने एक कठिन और एक आसान गोटी रखी। कठिन गोटी डालने के बाद वह उठती, शरीर फिर जमाती और आसान प्रहार को उतना ही ध्यान देती। पचास जोड़ियों के प्रयास पन्ने पर दर्ज हुए। आखिरी जोड़ी में आसान गोटी फिर छूटी। उसने चूक लिखी और तय समय पर सत्र खत्म किया।
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7. कप्तान की बढ़त
रितेश टीम का फोल्डर लेकर आया। उसने उसे ऐसी कुर्सी पर रखा जहाँ चुने जाने वाले दोनों खिलाड़ियों के हस्ताक्षर की खाली जगह रेनु को दिखे।
रेनु की नज़र उधर गई तो उसने कहा, “पहले जीत लो।”
उसने अपनी कुर्सी खींची।
रितेश ने आक्रामक शुरुआत की और बढ़त ले ली। अगले बोर्ड पर रेनु ने अंक वापस लिए, लेकिन कप्तान के बेहतर शुरुआती ब्रेक बार-बार उसे आसान स्थितियाँ दे रहे थे। छठे बोर्ड के बाद रितेश बाईस और रेनु अठारह पर थी।
बाधा के पीछे खड़े दर्शक शांत होने लगे। रितेश को तीन अंक चाहिए थे, रेनु को सात। बोर्ड की सीमा तक केवल दो बोर्ड बाकी थे। नकुल इतना पास आ गया कि टीम के लिए बुक किए होटल की उसकी चर्चा सुनाई दे रही थी।
रेनु ने उँगलियाँ साफ कीं और नई स्थिति देखी। होटल की बात का कोई उपयोगी उत्तर नहीं था। किनारे के पास कठिन सफेद गोटी थी। दूसरी का रास्ता क्वीन ने थोड़ा रोका था। कुछ सीधे रास्ते भी थे जिन्हें ज़्यादा तेज प्रहार बंद कर सकता था।
उसने उपलब्ध सफेद गोटी निकाली और बीच की भीड़ नहीं छेड़ी। अगला अवसर आने पर कुशन के पास वाली गोटी नपे हुए कट से हटाई। उसकी चाल नाटकीय नहीं थी। वह ठीक उतनी दूर गई जितनी ज़रूरी थी।
रितेश पहली बार आगे झुका। कप्तान का फोल्डर कुर्सी से फर्श पर फिसल गया।
8. चार काली गोटियाँ
सातवाँ बोर्ड बीच की तंग जगह के आसपास सिमट आया। रेनु की सफेद गोटियाँ अभी आसान नहीं थीं, लेकिन उन्हें खेलने का क्रम साफ होने लगा था। उसने तत्काल क्वीन लेने की इच्छा रोकी। पास की काली गोटी को स्ट्राइकर धकेल देता तो आसान कवर की लाइन बंद हो जाती।
रितेश ने दो गोटियाँ डालीं। फिर वही कट चूक गया जो पहले सहज लग रहा था। उसकी चार काली गोटियाँ बचीं। उठते समय उसके हाथ के दबाव से फ्रेम की हल्की आवाज आई। रेनु बैठ गई।
उसके पहले स्ट्रोक ने सफेद गोटी को काली के पास से निकालकर खुली जगह पहुँचाया। कोई गोटी नहीं गिरी, इसलिए बारी चली गई। अब रितेश के पास एक आक्रमण संभव था, लेकिन कोण बहुत पतला था और पीछे की भीड़ के कारण अगला रास्ता अनिश्चित। उसने प्रयास किया। काली गोटी जेब के मुँह से आगे निकलकर दूर के कुशन के पास रुक गई।
रेनु की लाइन बच गई थी।
उसने खुली हुई सफेद गोटी डाली। दो सफेद और क्वीन रह गईं। क्वीन के बाद एक सफेद सीधा कवर देती थी। दूसरी के लिए अपनी तरफ से हल्का कट लगाना था। स्ट्राइकर छूने से पहले उसने दोनों रास्ते जाँचे।
क्वीन गिरी। सहायक हटने तक रेनु ने हाथ घुटने पर रखा। फिर स्ट्राइकर नए सिरे से रखकर सीधी सफेद गोटी डाली। सही कवर पूरा हुआ। क्वीन बाहर ही रही।
नकुल ने होटल की बात बंद कर दी।
9. बिना सजावट का अंतिम प्रहार
एक सफेद गोटी बची थी। वही हल्के कट वाली गोटी जिसका रास्ता वह पहले देख चुकी थी। न बिल्कुल सीधी, न बहुत कठिन। चारों काली गोटियाँ अब भी बोर्ड पर थीं। सफाई पूरी होने पर उनके चार अंक और क्वीन के तीन अंक उसे अठारह से पच्चीस पर पहुँचा देते।
पहला आवेग तेज प्रहार करने का था, ताकि कोई उसे डरपोक न समझे। उँगली तक तनाव पहुँचने से पहले उसने अपने कंधे का कसाव पहचान लिया।
हाथ हटा लिया।
रितेश ने स्कोर की मेज़ की तरफ देखा, फिर सफेद गोटी को। हिसाब उसे भी मालूम था। यह गोटी गिरने पर आठवाँ बोर्ड नहीं होता।
रेनु फिर स्थिर हुई। संपर्क की दिशा जमाई और प्रहार छोड़ा। स्ट्राइकर की सफेद गोटी से छोटी सी टक हुई। गोटी थोड़ी दूरी पार करके जेब तक गई। किसी किनारे में अटकी नहीं। नीचे गायब हो गई।
सात अंक बताने से पहले स्कोर लिखने वाले ने उसका नाम लिया। रेनु खड़ी थी और कुल अंक पच्चीस किए जा रहे थे। रितेश कुछ देर बैठा रहा। एक हथेली फ्रेम पर सपाट थी। फिर उठा और हाथ बढ़ाया।
नकुल ने टीम का फोल्डर उठा लिया था। वह उसे रखने की जगह ढूँढ़ता दिखाई दिया। रितेश ने उससे फोल्डर लिया, खिलाड़ियों वाला पन्ना खोला और रेनु की तरफ कर दिया।
इस बार किसी ने नहीं कहा कि पहले जीत लो।
10. काम की पर्चियों के ऊपर हस्ताक्षर
रेनु ने दूसरे चयन स्थान के सामने हस्ताक्षर किए। रितेश ने नीचे कप्तान की पुष्टि पर अपना नाम लिखा। विजय पूछने आया कि रवाना होने से पहले वह अभ्यास के लिए कब आ सकती है। कमल सातवें बोर्ड की स्थिति दोबारा देखना चाहता था।
बाकी लोग हटे तो नकुल पास आया।
“मुझे हमेशा पता था तुम्हारा हाथ अच्छा है,” उसने कहा।
“तुम्हें पता था मैं चाबी कहाँ रखती हूँ।”
रेनु ने आवाज धीमी नहीं की। टूटे उपकरण का डिब्बा पकड़े चचेरे भाई ने नीचे देखा। उसने बाकी औज़ार लौटाने की तारीख माँगी। उसके नाम के आगे तारीख लिखी, सूची मोड़ी और अपने नए टीम फोल्डर में रख दी।
दुकान लौटकर उसने चयन कार्यक्रम काम की पर्चियों के ऊपर लगाया। आखिरी पर्ची पर लिखा था—शिकायत: कठिन काम के बाद आसान प्रहार पर ध्यान नहीं। काम: पूरा बोर्ड खत्म करना।
अगली सुबह वही ग्राहक आए जिन्होंने नकुल को चाबी फेंकते देखा था। एक ने स्कोर पूछा। रेनु ने उसकी मोटरसाइकिल का पुर्जा कसते हुए पूरे स्कोरपत्र की तस्वीर दिखाई।
फिर टीम के अभ्यास का नया पन्ना खोला। अब उसे और रितेश को एक ही टीम में यात्रा करनी थी। उसके नाम के नीचे वे शुरुआती ब्रेक लिखे जिन्होंने परेशानी दी थी। अपने नाम के नीचे पहली मुलाकात में जल्दबाज़ी से किया कवर लिखा।
शाम को शटर गिरा तो सुधरा हुआ बोर्ड अंदर इंतज़ार कर रहा था। इस बार खुरचा हुआ किनारा कमरे की तरफ था।
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