1. DHAN7: माँ का नाम गायब था
सावित्री को पति की तस्वीर के नीचे स्मृति टीम की सूची मिली। कुणाल ने चार नाम, कप्तान और दो रिजर्व लिखे थे। उसका नाम नहीं था।
वह चौवन की थी। बेटा तीस का। उसे मोहरे चलना, बाजी लिखना और बिना निर्णय मोहरा छूने की समस्या उसने सिखाई थी। अब वह कह रहा था कि स्मृति आयोजन को प्रतियोगी खिलाड़ी चाहिए।
“मैं खेलती हूँ।”
“घर पर।”
उसने शेल्फ की स्कोर कॉपियाँ दिखाईं। उसने कहा कि पारिवारिक अवसर को खुद को साबित करने की एक और बहस बनाना जरूरी नहीं। एक और बहस—उसने केवल एक प्रश्न पूछा था।
एक महीने बाद खुले क्वालिफायर के अंतिम राउंड में उसका नाम बेटे के सामने लगा। आयोजन अपना व्यक्तिगत खिताब भी देता था। छह राउंड, दर्ज परिणाम, परिवार के लिए आरक्षित जगह नहीं।
कुणाल के पाँच में साढ़े चार थे। सावित्री के चार। बाकी किसी के साढ़े तीन से अधिक नहीं। बराबरी उसे पहले रखती। माँ जीतती तो पाँच पर बाकी की पहुँच से बाहर होती।
आर्बिटर ने नाम कार्ड बोर्ड के पास रखे। सावित्री ने अपना सीधा किया। कुणाल ने स्कोरशीट की परिचित लिखावट देखी। याद आया कि पहली दर्ज बाजियाँ इसी हाथ ने जाँची थीं।
“तैयार हैं?” आर्बिटर ने पूछा। सावित्री ने हाँ कहा। बेटे को अपना उत्तर खुद देना था।
उसने सफेद राजा की जगह देखी और हाथ पीछे रख लिया। घड़ी शुरू हुई। इस बार कमरे में कौन महत्वपूर्ण है, इसका निर्णय बोलकर नहीं लिया जाना था।
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2. खाने की मेज की बातचीत
सूची पहला खारिज करना नहीं था। पिता की मृत्यु के बाद कुणाल पारिवारिक शतरंज गतिविधियाँ ऐसे सँभालने लगा था जैसे जिम्मेदारी से माँ का ज्ञान पुराना हो गया हो।
स्मृति कार्यक्रम के लिए पुराने क्लब मित्र बुलाए। सावित्री ने कमरा तैयार किया, पुराने बोर्ड निकाले और ऐसी स्थिति की चर्चा सुनी जिसे वर्षों पहले पति के साथ देख चुकी थी।
रक्षात्मक ऊँट चाल सुझाई तो कुणाल बोला कि सार्वजनिक सत्र के लिए सरल उदाहरण देखेंगे। एक आगंतुक ने पूछा कि उसे चाल सही क्यों लगती है। उत्तर से पहले बेटे ने विषय बदल दिया।
शाम को खाने की मेज पर वही स्थिति लगाई। ऊँट की चाल अंतखेल बचाती थी। सबसे मजबूत राजा मार्ग, प्यादा तोड़ और आकर्षक अदला-बदली जाँची। तीनों के बाद उत्तर बचा।
कुणाल गुजरते बोला कि बैठक को ज्यादा व्यक्तिगत ले रही है। उसने बैठकर चाल जाँचने को कहा। उसने कहा टूर्नामेंट में व्यस्त है।
जाने के बाद उसने एक-एक मोहरा रखा। सफेद राजा तक पहुँची तभी रोई। उसका टूटा आधार तब सुधारा था जब कुणाल स्कूल में था।
अगली सुबह आयोजक से खुले क्वालिफायर का फॉर्म माँगा। सामान्य विवरण पूछे, पात्रता पुष्टि की और कार्यक्रम भेजा।
कुणाल ने प्रवेश सुना तो पूछा कि उद्घाटन तैयार करा दे क्या।
“नहीं। देखने से पहले उनका वर्णन करना बंद करो।”
वह कुछ देर दरवाजे पर खड़ा रहा। सावित्री ने फॉर्म पूरा किया और तारीख लिखी। इस बार अपनी जगह की बात अधूरे उत्तर के साथ नहीं छोड़ी।
3. वे बाजियाँ जो पूरी नहीं की थीं
सावित्री पढ़ती रही थी, लेकिन हाल के वर्षों में गंभीर बाजियाँ कम खेली थीं। जानती थी। क्वालिफायर के लिए खाने की मेज पर एक सही ऊँट चाल से अधिक चाहिए था।
मोहल्ले के क्लब में शाम के सत्र शुरू किए और शुरुआती दोनों अभ्यास हारे। एक में विरोधी संरचना बदल गया, फिर भी परिचित योजना में ज्यादा समय लगाया। दूसरे में राजा के रास्ते केवल अपनी ओर से गिनकर गलत अंतखेल बदला।
शोर, अपरिचित मोहरे या पुरानी घड़ी पर दोष दिए बिना दोनों त्रुटियाँ लिखीं।
सैंतालीस साल की स्कूल प्रशासक रेनु अभ्यास साथी थी। योजनाओं के बीच निर्णय पर काम कराती। हमला कब अदला-बदली बने? स्वतंत्र दिखता ऊँट कब स्थिर प्यादा बचाने से बँधा है? दूसरा कमजोर स्थान कौन-सा राजा पहले पहुँचेगा?
एक रंग के ऊँट वाले अंतखेल दोनों तरफ से खेले। अपने प्यादे उपयोगी खाने पर रखना, राजा सुधारना और कम मोहरे आसान लगते हैं इसलिए ऊँट न बदलना सीखा।
एक अभ्यास में प्यादा जीता, फिर भी गलत प्यादा पहले बढ़ाकर बराबरी की। रेनु ने रीसेट करके अलग बचाव किया। सहयोग वाला क्रम याद नहीं करना था। कारण खोजना था।
देर घर लौटी तो कुणाल खा चुका था। पूछा अभ्यास कैसा रहा।
“दो हारी। काम लायक तीन गलतियाँ मिलीं।”
वह लगभग सलाह देने लगा। उसने खुद कॉपी खोली। पहले अपनी टिप्पणी पढ़ी और अगली अभ्यास तारीख लिखी। कुणाल ने देखा कि हार ने उसे लौटने से नहीं रोका। वह हार का इस्तेमाल कर रही थी।
4. परिचित उद्घाटन, अलग सवाल
कुणाल ने माँ को कई संभावित विरोधियों में एक मानकर तैयारी की। घर की बाजियों में अक्सर खेला उद्घाटन देखा और ऐसा क्रम खोजा जो जल्दी हमला करने को लुभा सकता था।
सावित्री वही उद्घाटन उनके इतिहास की दूसरी तरफ से जानती थी। उसी संरचना में उसे प्यादा दौड़ने से पहले विकास सिखाया था। उसने बाद में मजबूत खिलाड़ियों से सुधारा और मान लिया कि पुराने पाठों में कुछ नहीं बचा।
मोहल्ले के क्लब में उसने बेटे की पूरी तैयारी अनुमान से नहीं खोजी। सामान्य केंद्रीय तोड़, अदला-बदली के बाद खराब होते मोहरे और खुले राजा के रहते किनारे के प्यादे बढ़ाने के खतरे देखे।
रेनु बार-बार बचाव वाला पक्ष देती। विरोधी का सर्वश्रेष्ठ उत्तर नहीं मिलता तो अपना हमला तैयार नहीं था।
एक शाम कुणाल ने केतली के पास चित्र देखा। पारिवारिक उद्घाटन पहचानकर सामरिक क्रम समझाने लगा। सावित्री ने अपनी गणना पूरी होने तक रुकने को कहा। अनिच्छा से रुका। उसके उत्तर में छूटा बचाव था।
साथ जाँचा। हमला जीत नहीं रहा था।
कुछ सेकंड वह पुराने समय की तरह खुश लगा जब साथ नई बात खोजता था। फिर कहा कि घड़ी के कारण टूर्नामेंट अलग होगा।
उसने सिर हिलाकर अभ्यास टाइमर लगाया। व्यावहारिक चिंता थी। अभ्यास से उत्तर देगी, बातचीत समाप्त करने का कारण नहीं बनने देगी।
कुणाल कुर्सी पर बैठ गया। इस बार दोनों ने उसी स्थिति को समय के साथ खेला। वह जल्दी हमला करता रहा। उसे हर धमकी का सही उत्तर समय रहते देना पड़ा।
5. उसकी मदद के बिना चार अंक
पहले दो राउंड में सावित्री ने उन स्थितियों को सावधानी से खेलकर जीता जिन्हें विरोधी जल्दी करना चाहते थे। एक में समय से पहले प्यादा नहीं लिया। दूसरे में विरोधी हाथी सक्रिय हुए बिना अतिरिक्त प्यादा जीत में बदला।
तीसरा हारी।
अनुकूल समझा ऊँट अंतखेल तब कठिन हुआ जब विरोधी ने दूर पास्ड प्यादा बनाया। राजा गलत रास्ता गया। कुछ चाल बचाव किया। प्रमोशन रोकने में निर्णायक सामग्री जाती तो इस्तीफा दिया।
भोजन पर कुणाल ने सहानुभूति दी। उसने पूछा महत्वपूर्ण राजा चाल देखी क्या। नहीं देखी थी।
“तो पहले मुझे समीक्षा करने दो।”
की। अगले राउंड में शांत उद्घाटन से बचा समय कठिन मध्यखेल की गणना में लगाया और जीती। पाँचवें में हमला बचाया, बेहतर संरचना पाई और धीरे जीत पूरी की।
पाँच में चार अंक। कुणाल केवल आधा गिरा था। अंतिम जोड़ी दोनों को खिताब के लिए सामने लाई।
परिणाम बोर्ड के पास किसी ने भावुक पारिवारिक अंत कहा। सावित्री ने अंतिम बोर्ड की जगह पूछी। कुणाल ने रंग देखे। दोनों उस प्रतियोगिता में व्यस्त थे जिसे दर्शक पहले ही फोटो बनाना चाहता था।
सावित्री सफेद से थी।
अंदर जाने से पहले रेनु ने तीसरे राउंड की समीक्षा एक वाक्य में याद दिलाई: “दूसरे राजा का रास्ता भी गिनना।”
बाकी तैयारी के साथ शब्द खेल क्षेत्र के बाहर रह गए। अंदर गिनती उसे करनी थी। उसने पेन, स्कोरशीट और समय देखा। फिर सामने बैठे बेटे की ओर एक बार सिर हिलाया और बोर्ड पर लौटी।
6. वह हमला जिसे वह उससे चाहता था
फाइनल परिचित उद्घाटन से शुरू हुआ। कुणाल ने तीखा क्रम दिया जिससे सावित्री जल्दी हमला शुरू कर सकती थी, अपनी स्थिति कमजोर करने की कीमत पर। उसने देखा और नहीं लिया।
विकास पूरा किया। केंद्रीय खाने सुरक्षित किए। बेटे को तय करना पड़ा कि जगह कैसे इस्तेमाल करेगा। उसने किनारे का प्यादा बढ़ाया, फिर दूसरा। माँ की शांत योजना आरामदेह होती, उससे पहले सक्रियता चाहिए थी।
सावित्री ने समय पर केंद्रीय अदला-बदली की। एक हमलावर का उपयोगी रास्ता गया। दूसरे को कमजोर खाने पर स्थिर हुआ प्यादा बचाना पड़ा।
कुणाल ने सक्रिय संसाधन खोजा। लाइन खोली, हाथी रखा और माँ को राजा का सुरक्षित खाना बनाने में समय देना पड़ा। दोनों के लिए स्थिति कठिन थी।
धमकी आई तो योजना पूरी नहीं छोड़ी। पहले उत्तर दिया। फिर देखा मूल विचार अब भी काम करता है क्या। करता था, बदले चाल क्रम के साथ।
आखिर रानियाँ हटीं। हाथियों की एक जोड़ी भी। बाकी हाथी से कुणाल सक्रियता खोजता रहा। सावित्री राजा सुधारती और प्यादों को बिना गणना की दौड़ बनने से बचाती रही।
आखिरी हाथी बदलने पर एक ही रंग के ऊँट और दोनों किनारों पर प्यादे बचे।
कुणाल काफी देर देखता रहा। खाने की मेज वाली समस्या से इतना मिलता था कि चुभे, इतना नहीं कि याद से हल हो। इस बार माँ की चाल देखने से यह कहकर नहीं बच सकता था कि व्यस्त है। उसकी अपनी घड़ी चल रही थी। उसी स्थिति का उत्तर देना उसका तत्काल काम था।
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7. दो काम वाला ऊँट
सावित्री के ऊँट को उपयोगी विकर्णों पर स्वतंत्रता थी। कुणाल के ऊँट को स्थिर प्यादा बचाना था। बाकी प्यादों की जगह ऐसी थी कि जिम्मेदारी बदलने से नया लक्ष्य बनता।
पहला कमजोर दिखता प्यादा लेने नहीं दौड़ी। राजा सुधारा और बेटे से दिखवाया कि कौन-सा रास्ता बचाना चाहता है।
कुणाल ने राजा केंद्र में रखकर ऊँट बदलने की पेशकश की। सावित्री ने प्यादा अंतखेल गिना। महत्वपूर्ण तरफ उसका राजा समय पर पहुँचता। सरल दिखने वाला बदलाव दबाव छोड़ देता। ऊँट रखे।
फिर दूसरे किनारे पर दूसरी कमजोरी बनाई। कुणाल का ऊँट लंबा विकर्ण पकड़ सकता था, लेकिन एक प्यादे से बँधे रहकर हर दूसरे राजा प्रवेश को नहीं रोक सकता था।
प्यादा बढ़ाकर मुक्त करना चाहा। उसने परिणामी कैप्चर जाँचे और ऐसा चुना जिससे रक्षक का काम कठिन रहे। स्थिति खुली, बेटे की चाहत के अनुसार नहीं।
बीस चाल उसने सावधानी से बचाया। प्रतीक्षा चालें खोजीं। जल्दी हराने वाला आकर्षक प्यादा कैप्चर छोड़ा। हर सुधार माँ से साबित कराया।
सावित्री ने शामें इसी तरह के काम में बिताई थीं। वही चित्र नहीं, पहले उत्तर मिलने के बाद दूसरा प्रश्न पैदा करने की जरूरत।
सीमा पर रेनु आगे झुकना बंद कर चुकी थी। सावित्री पूरा खेल एक खाने से जबरन नहीं निकाल रही थी। रक्षक के लिए बोर्ड बड़ा कर रही थी। कुणाल को हर बार तय करना पड़ता कि किस तरफ ध्यान दे और किस तरफ माँ को एक कदम मिले।
8. रास्ता जिसे उसने देर से गिना
कुणाल का राजा खतरे वाली तरफ गया। सावित्री का ऊँट स्थिर प्यादा बाँधे रहा और उसका राजा दिशा बदल गया।
नया मार्ग तुरंत स्पष्ट नहीं था। पहले दो कदम लक्ष्य से दूर लगते थे। वे उसके ऊँट के नियंत्रित खाने छोड़कर केंद्र पहुँचे, बिना जरूरी जवाबी खेल दिए।
कुणाल ने इरादा देखकर ऊँट बदला। मूल कमजोरी छूट गई। सावित्री ने प्यादा लिया।
बदले में उसने राजा सक्रिय करके अपना पास्ड प्यादा बनाने की कोशिश की। उसने आगे बढ़ने से पहले दोनों दौड़ें गिनीं। तीसरे राउंड की सीख चाल से पहले की रुकावट में थी, बोलने वाले किसी वाक्य में नहीं।
उसका ऊँट बेटे की उपयोगी प्यादा बढ़त रोकता था। राजा दूसरी तरफ अपने पास्ड प्यादे की मदद करता। कुणाल एक खतरे का सक्रिय बचाव करता तो दूसरा बढ़ता।
फिर ऊँट बदलने का प्रस्ताव दिया। इस बार प्यादा अंतखेल माँ के पक्ष में था क्योंकि उसका राजा महत्वपूर्ण तरफ पहुँच चुका था। सर्वश्रेष्ठ बचाव जाँचकर उसने स्वीकार किया।
राजा चले। बची प्यादा चालें महत्वपूर्ण थीं। कुणाल ने दूर का प्यादा बढ़ाकर उसे खींचना चाहा। उसने रास्ता गिना था और निर्णायक खाना रखा।
आखिर उसे दोनों अदला-बदली के प्रस्तावों का फर्क दिखा। मोहरे एक प्रकार के थे। राजा एक जैसी जगह नहीं थे।
सामने माँ ने वह प्यादा आगे बढ़ाया जिसने फर्क दिखाई देने योग्य बना दिया। कुणाल ने घड़ी देखी। उत्तर खोजने का समय था। खोई हुई स्थिति वापस बनाने का साधन नहीं था।
9. उसके नाम के नीचे परिणाम
कुणाल तब तक खेला जब तक प्रमोशन रोकने पर सावित्री को दूसरा जीतता पास्ड प्यादा मिलता। फिर घड़ी रोकी और हाथ बढ़ाया। उसने लिया।
छह में पाँच अंक। कुणाल साढ़े चार पर। बाकी पाँच नहीं पहुँच सकते थे। सावित्री ने व्यक्तिगत खिताब और क्वालिफाइंग जगह कमाई।
दर्शकों को देखने से पहले परिणाम लिखा। शुरू में सीधा किया नाम कार्ड अब भी बोर्ड के पास था।
वह लिखती रही, कुणाल बैठा रहा। परिवार की बात कहना चाहता था। पहले वही देना था जो किसी प्रतिद्वंद्वी को देता।
“अंतखेल बेहतर खेलीं,” उसने कहा।
“हाँ।”
सीधी सहमति से उसे दर्द वाली मुस्कान आई। वह परिणाम को उदार दुर्घटना बताकर उसे आराम नहीं देने वाली थी।
साक्षात्कार में आयोजक ने पूछा दोनों का उद्घाटन कहाँ सीखा। सावित्री ने पुराने पारिवारिक विश्लेषण और रेनु के साथ हाल के काम बताए। कुणाल पास रहा। उससे मुख्य रक्षात्मक समस्या पूछी गई तो ऊँट के दो काम और देर से पहचाना राजा मार्ग समझाया।
फिर जोड़ा, “मेरी पहली शिक्षक थीं।”
सावित्री ने उसे देखा, फिर विश्लेषण के लिए लगे बोर्ड को।
“तो जानते हो कि बेहतर चाल खोजने को कहूँगी।”
उसने कुर्सी खींची। सामने की जगह अब फिर मिली थी, लेकिन इस बार वह माँ की बात सुनने से पहले उसे सरल करने नहीं बैठा। उसने अपना सबसे कठिन बचाव रखा। सावित्री ने समय लेकर उत्तर दिया। कमरे में बाकी लोग भी उसी स्थिति को देखने लगे।
10. घर की सूची
स्मृति कार्यक्रम पूरा करना था। घर पर कुणाल ने टीम कागज खाने की मेज पर रखे और पूछा कि क्वालिफाई करने के बाद सावित्री कौन-सी भूमिका चाहती है।
उत्तर से पहले वास्तविक जिम्मेदारियाँ पढ़ीं। खेलेगी और सार्वजनिक विश्लेषण तैयार करने में मदद करेगी। समझाए पदों के पास अपना नाम रहेगा। कुणाल ने लिखा।
फिर पिता की तस्वीर के नीचे पुरानी सूची निकाली। नई शीट चुपके से ऊपर नहीं रखी। वह पन्ना दिया जिसमें उसका नाम गायब था।
“तय कर लिया था कि तुम्हारी जगह पीछे है,” उसने कहा।
सावित्री ने पन्ना मोड़कर अलग रखा।
“बैठक वाली ऊँट चाल अब भी नहीं जाँची।”
वह बोर्ड लाया।
पहले स्मृति से मोहरे रखे, फिर मूल नोट्स से पुष्टि की। कुणाल ने हमलावर पक्ष लिया। राजा मार्ग आजमाया, फिर प्यादा तोड़। सावित्री ने दोनों का उत्तर दिया।
तीसरी कोशिश में अधिक जिद्दी क्रम मिला। वह अधिक देर सोचती रही। उसने प्रश्न सरल करने की पेशकश किए बिना इंतजार किया।
बाद में कुणाल स्मृति टीम की पुरानी सूची मेज़ पर लाया। साथ में प्रकाशित नतीजा भी था जिसमें माँ का नाम चैंपियन के रूप में था।
पिता की तस्वीर के नीचे दोनों पन्ने साथ रखे। सावित्री ने पहला समझाने में उसकी मदद किए बिना पढ़े।
“अगली सूची जमा होने से पहले आपके पास आएगी,” उसने कहा।
“मेरा अपना प्रवेश मेरे पास आएगा,” उन्होंने उत्तर दिया।
उसने सिर हिलाकर फॉर्म उनके सामने छोड़ा। उन्होंने कलम उठाई तो उसने अपना कप रास्ते से हटा दिया।
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