1. DiwaSlot: बस रद्द हो गई
लीला तीन कप चाय लेकर बेंच की तरफ लौट रही थी, तभी बस के डिस्प्ले पर अक्षर बदल गए। समय की जगह रद्द लिखा था। कुछ क्षण उसे लगा कि गलत पंक्ति पढ़ ली है।
मोहन तुरंत खड़ा हुआ। सना ने मोबाइल पर समय सारणी खोली। अगली बस, दूसरी कंपनी और पास के शहर से होकर जाने का रास्ता खोजा गया। हर जवाब देर से पहुँचाने वाला था। सेमीफाइनल दूसरे शहर में था। उपलब्ध किसी भी यात्रा से वे प्रकाशित रिपोर्टिंग समय से पहले नहीं पहुँच सकते थे।
लीला ने आयोजक को फोन करके पूरी बात बताई। नियमों के अनुसार वॉकओवर का निर्णय कायम रहा। चवालीस वर्ष की लीला खराब हाथों और खराब झगड़ों के बीच टीम चला चुकी थी। पत्ते बाँटने से पहले मिली ऐसी हार उसने नहीं झेली थी।
विरोधी कप्तान अनूप ने तीन खाली कुर्सियों की तस्वीर डाली। नीचे लिखा था कि समय सारणी समझना तेरह पत्तों से आसान है। अगली क्लब बैठक में लीला पंजीकरण मेज के पास खड़ी थी और वही तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई गई। किसी ने पूछा कि टीम को प्रतियोगिता चाहिए या गाइड के साथ यात्रा। मोहन कमरे से निकल गया। सना जूतों की तरफ देखती रही।
उस सत्र की घोषित संरचना के अनुसार मैच छूटने से उनका डिवीजन स्थान चला गया। लौटने के लिए पूरा निचला लीग सत्र और पदोन्नति प्लेऑफ खेलना था। लीला नई सूची घर लाई। उसमें आठ यात्राएँ थीं।
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2. DiwaSlot कथा: लौटने का लंबा रास्ता
पहले महीने टीम की हर बातचीत बस पर लौट आती। मोहन कहता कि पिछली शाम निकलना चाहिए था। सना कहती कि दूसरी कंपनी को पहले फोन करते तो सीट मिल सकती थी। लीला दोनों से सहमत होती और फिर भी उसी टर्मिनल में फँसी महसूस करती।
निचले डिवीजन का पहला मैच हार गए। समय से पहले पहुँचे थे, कागज जाँचे थे और खराब खेले थे। मोहन महँगा अधूरा हाथ खींचता रहा। सना ने बचाने वाला पत्ता छोड़ दिया। लीला विराम में अपने अगले हाथ की तैयारी करने के बजाय सबका मन ठीक करती रही।
वापसी में उसने कॉपी खोलकर बीच में रेखा खींची। एक तरफ यात्रा, दूसरी तरफ रमी। दोनों के लिए स्पष्ट योजना चाहिए थी। एक दूसरे का काम नहीं कर सकती थी।
अट्ठाईस वर्ष की सना ने पक्की बुकिंग और वैकल्पिक रास्ते सँभाले। छियालीस वर्ष के मोहन ने अभ्यास मुकाबलों की सूची ली। लीला ने प्रविष्टियाँ और नियम जाँचे। व्यावहारिक काम पूरे होने के बाद प्रशिक्षण की बातचीत पत्तों पर होनी थी।
अगले सत्र में लीला फिर बस रद्द होने के लिए माफी माँगने लगी। बीच में रुक गई। उसने सना के सामने तेरह पत्ते रख दिए। “यह बेगम क्यों बचाई थी, दिखाओ।” कई सप्ताह बाद टीम ऐसी बात पर बहस कर रही थी जिसे अगले मुकाबले से पहले सुधार सकती थी। मोहन भी कुर्सी खींचकर बैठ गया। कॉपी का यात्रा वाला पन्ना बंद कर दिया गया।
3. आठ यात्राएँ, आठ सुधार
लीग के हर टीम मुकाबले में तीन स्वतंत्र आमने सामने की मेजें थीं। हर मेज पर पाँच हाथ खेले जाते। कम कुल दंड वाला खिलाड़ी वह मेज जीतता। दो मेज जीतने वाली टीम मुकाबला जीतती। खिलाड़ी पहले साथ तैयारी कर सकते थे, खेलते समय एक दूसरे को सलाह नहीं दे सकते थे।
इस ढाँचे ने अलग कमजोरियाँ खोलीं। मोहन सबसे मजबूत था, लेकिन विरोधियों ने देख लिया कि वह आशाजनक बड़े जोड़े को छोड़ना पसंद नहीं करता। लीला सबको शांत रखने में अपना ध्यान बाँट देती। सना पास की मेज का परिणाम सुनकर जल्दी करने लगती।
इन्हीं समस्याओं पर अभ्यास रखा गया। मोहन को हर बचाए बड़े पत्ते की कीमत समझानी पड़ती। लीला व्यवस्था में मदद करने से पहले अपनी तैयारी पूरी करती। सना पास की मेजों पर दूसरे वयस्कों के अभ्यास के बीच खेलती, ताकि ध्यान अपने हाथ पर लौटाना सीखे।
एक अभ्यास में हाथ खत्म होने के बाद जोकर का वर्तमान काम और संभावित दूसरा काम अलग पर्चियों पर लिखना था। सना को बार बार पता चला कि मन में दोनों संभावनाओं को पूरा समूह मान रही थी।
दूसरी बाहरी यात्रा पर छोटी जीत मिली। तीसरी में हार हुई, जब विरोधी की घोषणा से पहले लीला जरूरी दूसरी सीक्वेंस नहीं बना सकी। उसने वही गलती यात्रा योजना वाली कॉपी में दर्ज की। चौथी यात्रा तक किसी ने पिछले साल का दोषी नहीं पूछा। प्रश्न यह था कि अगली मेज जीतने के लिए किस स्थिति का अभ्यास चाहिए।
4. तीसरी कुर्सी की खिलाड़ी
सना व्यवस्थित थी, इसलिए टीम में उसे महत्व मिला था। जल्दी ही पता चला कि लोग उपयोगी होने को खेल की क्षमता न होने के बराबर मान लेते हैं। बैठकों में अनूप टिकट की बात उससे करता। चयन की चर्चा में उसकी तरफ देखता भी नहीं था।
एक साझा अभ्यास शाम उसने अपनी टीम के आगमन फॉर्म सना को पकड़ा दिए। “यात्रा की गड़बड़ी का अनुभव तो है,” उसने कहा। सना ने फॉर्म उसके कप्तानी फोल्डर में वापस रख दिए। बाद में अकेली बैठी तो लगातार तीन गलत पत्ते छोड़ दिए। लीला सामने बैठ गई और पहले निर्णय का कारण बताने तक चुप रही।
सना को बनावट समझने में कठिनाई नहीं थी। समस्या यह सिद्ध करने की जल्दी थी कि वह तुरंत समझ जाती है। दो सही संभावित रास्तों वाले हाथ लगाए गए। फिर ऐसा पत्ता दिया गया जिससे केवल एक रास्ता उचित रहता। उसे ठीक बताना होता कि कौन सी अधूरी योजना छोड़ रही है।
मोहन उसका सबसे कठिन अभ्यास विरोधी बना। वह चेहरे से अभिनय नहीं करता। अच्छे हाथ सही खेलता और कमजोर हाथों पर भी उसे मेहनत करवाता। कभी सना जीतती। अधिक बार उसे ऐसी गलती दिखती जिसके बारे में पहले सोचती भी नहीं थी।
सत्र के अंत के पास लीला अपनी मेज हारी और सना ने निर्णायक मेज जीती। अनूप ने अच्छे पत्तों का संयोग कहा। सना ने पूरी निर्णय श्रृंखला याद रहते कॉपी में लिख ली। तीसरी कुर्सी अब केवल समय सारणी रखने की जगह नहीं लगती थी।
5. पहुँचने की पुष्टि
आखिरी लीग सप्ताहांत में वे पदोन्नति प्लेऑफ तक पहुँचे। सामने अनूप का क्लब था, जो अपने खराब पिछले सत्र के कारण उसी डिवीजन में गिरा था। पुराने खाली कुर्सियों वाले चित्र पर अब नए मुकाबले का समय लिखकर भेजा जाने लगा।
लीला की टीम पिछली दोपहर ही निकल गई। ठहरने की जगह साधारण थी। मोहन ने सख्त तकिए की शिकायत की। लेकिन शाम तक पंजीकरण पूरा था। सना ने वापसी के पक्के टिकट पारदर्शी फोल्डर में रखे और फोल्डर बंद कर दिया।
आखिरी समय में लंबा थकाने वाला अभ्यास नहीं हुआ। पाँच हाथों वाले नियम और रिपोर्टिंग समय दोबारा देखे गए। हर व्यक्ति ने एक कठिन निर्णय चुना। मोहन ने जिद में खोया हाथ लिया। लीला ने देर से किया ड्रॉप चुना। सना ने वह स्थिति चुनी जिसमें प्राकृतिक पत्ता आने पर जोकर दूसरे काम के लिए खाली होता।
सुबह अनूप पहुँचा तो तीनों हॉल में थे। उसका अपना तीसरा खिलाड़ी अभी नहीं आया था। उसने कुर्सियाँ देखीं, फिर घड़ी। “तीनों मौजूद?” उसने पूछा। लीला ने टीम शीट दी। “नाम जाँच लो।”
निर्णायक ने जाँचे। लीला अनूप से खेलती। मोहन का मुकाबला उसके सबसे मजबूत साथी रितेश से था। सना के सामने देविका थी, जिसके क्वालिफाइंग समूह में दंड सबसे कम रहे थे। कुर्सियाँ भर चुकी थीं। अब पत्तों पर काम करना था।
6. लीला ने अपनी मेज सँभाली
अनूप ने पहला हाथ जीता और तुरंत लीला के पीछे दूसरी मेजों की ओर देखने लगा। लीला ने लगाए गए दंड पर ध्यान रखा। पहली सीक्वेंस ठीक थी, लेकिन देर से मिले बड़े पत्ते ने छोड़ने का निर्णय उलझाया था।
दूसरे हाथ की शुरुआती बनावट सचमुच कमजोर थी। उसने प्रकाशित प्रक्रिया के अनुसार ड्रॉप किया। अनूप ने पूछा कि फिर जल्दी रवाना होने की योजना है क्या। लीला ने निर्णायक से निर्णय दर्ज कराया और नए हाथ की तैयारी की।
तीसरे हाथ में शुद्ध सीक्वेंस और बीच के पत्तों में लचीलापन मिला। उसने दो जोड़ने वाले रास्ते बचाए, पर एक ही पत्ते को दोनों में नहीं गिना। अगला पत्ता एक रास्ता मजबूत करता था। उसने दूसरा छोड़ा और अनूप से पहले सही घोषणा की। उसके दंड से मुकाबला करीब आ गया।
चौथा हाथ अनूप ने जीता, लेकिन लीला पहले ही बचे पत्तों की कीमत घटा चुकी थी। पाँचवें में वह इतना पास थी कि मेज जीत सकती थी। अनूप महँगी संभावना पकड़े रहा। लीला टूटी दूसरी सीक्वेंस जोड़ती रही। उसके छिपे पत्ते उसे नहीं दिखते थे। उसने अपनी मजबूत बनावट बचाने वाला पत्ता छोड़ा और अगली बारी का इंतजार किया।
आखिरी उठाए पत्ते से बचा समूह पूरा हुआ। उसने एक छोड़ा, तेरह गिने और घोषणा की। निर्णायक ने हाथ तथा पाँचों परिणाम जाँचे। पहला टीम अंक लीला का था। हस्ताक्षर करके वह दर्शक क्षेत्र में गई। बाकी दो खिलाड़ियों की बाजियाँ उसे बाहर से देखनी थीं।
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7. सबसे मजबूत खिलाड़ी हार गया
मोहन का मुकाबला आखिरी हाथ तक करीब रहा। रितेश ने उसे खुले पत्तों से आसान जोड़ नहीं दिए थे और अपने खराब हाथ भी ठीक सँभाले थे। मोहन की शुद्ध सीक्वेंस आखिर बनी, मगर उसके आसपास बहुत से असंबद्ध पत्ते रहे।
निर्णायक गलती परिचित थी। बड़े पत्तों का जोड़ा एक पत्ते की दूरी पर उपयोगी लग रहा था। उसने उसे बचाया और छोटे, अधिक लचीले रास्ते को निकल जाने दिया। तीसरा बड़ा पत्ता मिलने से पहले रितेश ने घोषणा कर दी।
दंड जुड़ा तो पाँच हाथों के कुल में मोहन पीछे हो गया। उसने गणना देखी, हस्ताक्षर किए और हाथ बगल में लटकाए दर्शक सीमा तक आया। लीला ने पानी की बोतल हटाकर उसके लिए जगह की।
“वही किया जिसका अभ्यास करते थे,” उसने कहा।
“गलत तरीके से?”
उसने सिर हिलाया।
“सना खत्म कर ले, फिर लिखना।”
टीम मुकाबला एक एक मेज पर था। अनूप अपनी मेज हार चुका था, फिर भी उसके क्लब को पदोन्नति मिल सकती थी। वह तीसरी मेज अधिक विश्वास से देखने लगा।
सना ने मोहन का पूरा हाथ नहीं देखा था। उसे केवल घोषित टीम स्कोर पता था। देविका आखिरी हाथ के लिए शफल कर रही थी, तभी जल्दी करने की पुरानी इच्छा आई। सना ने पैर ठीक रखे, अपना कुल देखा और पत्तों का इंतजार किया। तीन वयस्क साथ आए थे। अंतिम मेज अब पूरी तरह उसकी जिम्मेदारी थी।
8. सत्तावन के सामने पचपन
आखिरी हाथ से पहले सना के सत्तावन और देविका के पचपन दंड अंक थे। अंतर छोटा, मगर वास्तविक था। अंतिम दंड जुड़ने से पहले केवल घोषणा देखकर पूरे मुकाबले का निर्णय नहीं किया जा सकता था।
सना के हाथ में ईंट का सात, आठ और नौ थे। उसने शुद्ध सीक्वेंस अलग रखी। बीच में चिड़ी के पत्ते और प्रिंटेड जोकर था। बाकी तीन सूट के आठों का सेट था। दो छक्कों को मदद चाहिए थी। अकेला बादशाह महँगा बच सकता था।
उसने चिड़ी के दो, तीन, चार और पाँच की जगह जोकर लगाकर सीक्वेंस बनाई। वह सही थी, लेकिन उसी जोकर से छक्कों का सेट भी बन सकता था। उसने दोनों विकल्प अलग रखे। मन में दोनों पूरे नहीं माने।
देविका ने खुला पत्ता उठाया और बाद में अलग रैंक छोड़ी। सना ने कार्रवाई देखी, लेकिन उससे विरोधी का निश्चित छिपा हाथ नहीं बना लिया। एक आकर्षक खुला पत्ता आया। उसे लेने से सबसे करीब पहुँची अपनी बनावट खराब होती। उसने बंद गड्डी चुनी और फिर भी इंतजार करना पड़ा।
खेल क्षेत्र के बाहर मोहन कुछ बोलने लगा, फिर आवाज निकलने से पहले रुक गया। लीला ने उसकी तरफ एक बार देखा। सना को सलाह नहीं मिल सकती थी। अगली बारी चिड़ी का असली पाँच उसके हाथ में आया। एक पल के लिए जोकर के दोनों काम एक साथ दिखे। फिर धैर्य से विकल्प अलग करने वाला अभ्यास याद आया।
9. जोकर का काम बदल गया
सना ने प्राकृतिक पाँच को चिड़ी के दो, तीन और चार के साथ रखा। वहाँ अब प्रिंटेड जोकर जरूरी नहीं था। उसने उसे दिल और हुकुम के छक्कों के साथ रखा, जहाँ वह तीसरे सूट के छक्के का काम करके सही सेट बना रहा था।
अकेला बादशाह छोड़ दिया। फिर सभी तेरह पत्ते जाँचे। ईंट की तीन पत्तों वाली शुद्ध सीक्वेंस। चिड़ी की चार पत्तों वाली सीक्वेंस। दिल, हुकुम और चिड़ी के आठों का सेट। दो छक्के और जोकर। तीन, चार, तीन और तीन। हर पत्ता एक जगह था।
उसने घोषणा की। देविका के चेहरे पर तनाव आया, लेकिन उसने पत्ते शांति से खोले। निर्णायक ने सना का हाथ सही बताया और नियमों के अनुसार देविका का बचा दंड गिना। सोलह अंक जुड़े। देविका इकहत्तर पर पहुँची। सना सत्तावन पर रही।
तीसरी मेज सना ने चौदह अंकों से जीती। टीम मुकाबला दो मेज से एक रहा। अनूप भरी हुई कुर्सियाँ देखता रह गया। लीला ने उसे हराया था। मोहन अपनी मेज हारा था। जिसे वह केवल यात्रा फॉर्म देता था, उसी सना ने पदोन्नति तय की थी।
मोहन अनुमत दर्शक सीमा तक आया और खिलाड़ियों को जाने की अनुमति मिलने का इंतजार किया। सना ने हस्ताक्षर करके उसकी तरफ कदम बढ़ाए। उसने कॉपी उठाई। “कल मुझे बिगाड़े हुए हाथ का अभ्यास करवाना।” सना ने कॉपी लेकर समय लिख दिया। इस बार किसी ने उससे बस के बारे में नहीं पूछा।
10. वापसी की यात्रा
पुरस्कार के समय आयोजक ने तीनों नाम बुलाए। लीला ने कहा कि टीम तस्वीर में पीछे तीनों परिणाम दिखने चाहिए। उसकी जीत, मोहन की हार और सना की जीत। साथ खड़े होने से पहले उसने अंक बोर्ड की तीनों पंक्तियाँ देखीं।
अनूप ने विरोधी कप्तान के रूप में पदोन्नति की पुष्टि पर हस्ताक्षर किए। उसका क्लब निचले डिवीजन में रहता। अगले सत्र की सूचना में लीला की टीम पदोन्नत सूची में थी। खाली कुर्सियों वाली तस्वीर वहाँ नहीं थी।
वे शाम का यातायात बढ़ने से पहले निकले। टर्मिनल पर सना ने एक बार प्रस्थान स्थान देखा, पक्की बस सेवा से मिलाया और सबको टिकट दिए। फिर उसी कॉपी के साथ बैठ गई जिसमें आखिरी हाथ लिखा था।
मोहन वह पल देखना चाहता था जब प्राकृतिक पाँच से जोकर खाली हुआ। लीला ने बेंच पर उँगलियों से तीन कल्पित समूह बनाए। सना ने बताया कि उसने संभावना किस क्रम में पहचानी थी। चर्चा के बीच बस में चढ़ने की घोषणा हुई।
तीनों बैग लेकर कतार में खड़े हुए। इस बार लीला के हाथ में छूटी हुई चाय की ट्रे नहीं थी। मोहन छोटी टीम ट्रॉफी लिए था। सना के पास परिणाम और अगला अभ्यास समय था। बस चली तो लीला ने वह लंबी सूची खोली जो कभी असंभव लगी थी। आठवीं यात्रा के पास उसने लिखा, पदोन्नति। फिर अगले सत्र के लिए साफ पन्ना खोल लिया।
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