1. Dream 77 कहानी: वह चाल जो अभी खर्च नहीं हुई थी
गिरीश ने a-फाइल पर सफेद के दो प्यादे देखकर ड्रॉ की पेशकश की। एक a4 पर था, उसके काले a5-प्यादे से रुका हुआ। दूसरा a2 पर था और ऊपर से किसी काम का नहीं लग रहा था। केंद्र में राजाओं के बीच केवल एक खाली खाना था।
हेमंत ने तुरंत जवाब नहीं दिया। वह छप्पन साल का था, भोर से पहले उठा था और कुर्सी की कड़ी सिलाई पैर पर महसूस हो रही थी। स्मृति राउंड-रॉबिन का आखिरी दौर ऐसे अंतिम चरण में पहुँचा था जिसे दर्शक एक नजर में समझ लेना चाहते थे।
ड्रॉ से गिरीश खिताब जीत जाता। पहले तीनों गेम उसने जीते थे। हेमंत की दो जीत और एक ड्रॉ था। इस सीधी भिड़ंत में जीतने पर उसके साढ़े तीन अंक गिरीश के तीन से ऊपर होते। पाँच खिलाड़ियों के इस काल्पनिक आयोजन में बाकी सब इन अंकों से नीचे थे।
बोर्ड के पास हेमंत की स्कोर शीट थी। कुर्सी के नीचे बैग में पुरानी कॉपी थी जो कभी उसकी पत्नी सविता की थी। खेल के दौरान उसने उसे नहीं खोला था। महीनों से सीख रहा था कि उसमें लिखे सवालों के जवाब बिना कॉपी के कैसे दे।
गिरीश ने अपनी शीट का किनारा थपथपाया। “वापसी सम्मानजनक रही।”
हेमंत ने a2 का प्यादा देखा। पूरे गेम वह इंतजार करता रहा था।
“वापसी अभी कर रहा हूँ,” उसने कहा। फिर ड्रॉ मना कर दिया।
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2. किनारे बैठने का निमंत्रण
सविता के जाने के बाद हेमंत ने पार्क के सुबह वाले शतरंज समूह में जाना छोड़ दिया था। कई सप्ताह रसोई में दो कप रख देता। वापस गया तो गिरीश ने गर्मजोशी से स्वागत किया, फिर समझाने लगा कि इतनी जल्दी गंभीर प्रतियोगिता शायद कठिन हो।
पहले चिंता अच्छी लगी। बाद में वह बिना पूछे लागू नियम बन गई। हेमंत को देखने, छोटा पुरस्कार देने, पुराने दिनों पर बोलने के लिए बुलाया जाता। स्मृति आयोजन में खेलने को पूछा तो गिरीश ने औपचारिक पहली चाल चलने का सुझाव दिया।
“इस उम्र में कुछ साबित करने की जरूरत नहीं,” उसने कहा, जबकि वह केवल तीन साल छोटा था।
हेमंत ने फिर भी प्रवेश लिया। पंजीकरण मेज पर किसी ने खिलाड़ियों के बीच जगह के बजाय तस्वीरों के पास कुर्सी रखी थी। वह खड़ा रहा, जब तक आयोजक ने सूची देखकर व्यवस्था नहीं सुधारी। गिरीश हल्का हँसा और व्यक्तिगत रूप से न लेने को कहा।
हेमंत उस व्यक्ति को खो चुका था जिसके साथ घर लौटते समय गेम की बात करता था। अब बाकी खिलाड़ी उसे जीवित खड़े रहते हुए तस्वीर में नहीं बदल दें, यह चाहता था।
शाम को सविता की कॉपी खोली। अंतिम अधूरे पन्ने पर प्यादों का अंतिम चरण, कई काटी हुई लाइनें और चौकोर लिखावट में सवाल था—इंतजार की कौन-सी चाल तुम्हारी है?
उसने स्थिति सजाई। पहली कोशिश में जवाब गलत निकला। राजा आगे गया, लेकिन जीत हाथ से निकल गई। उसने मोहरे फिर रखे और सवाल दोबारा पढ़ा।
3. अधूरा पन्ना
सविता त्रुटिहीन विश्लेषक नहीं थी। कॉपी में गलतियाँ, तेज टिप्पणियाँ, खरीदारी की याद और कुछ अधूरे विवरण वाली स्थितियाँ थीं। हेमंत ने लिखावट को उत्तर मानने के बजाय बोर्ड जाँचना सीखा।
अधूरे प्यादे वाले अंतिम चरण ने तीन शाम लीं। पहले राजा विरोधी प्यादे की तरफ ले गया। बचाव वाले राजा को विपक्ष मिल गया। फिर अतिरिक्त प्यादा जल्दी बढ़ाया और समझा कि बाद में बारी दूसरे को देने वाली अकेली चाल खर्च कर चुका था।
वह स्थिति पार्क की चौंतीस साल की लीला के पास ले गया। उसे असहमत होना अच्छा लगता था। दोनों तरफ से खेलकर जाँचा। लाइन विफल होती तो काटते। चाल सही निकलती तो पूछते कि स्थिति में कौन-सा परिवर्तन इसे गलत करेगा।
हेमंत ने अपनी कॉपी में नया भाग शुरू किया। किसकी बारी है, कौन-सी प्यादे की चाल बची है और राजा किन खानों में कानूनी रूप से जा सकते हैं, यह लिखता। प्यादे के आगे का हर खाना प्रवेश का खाना नहीं कहता था। कुछ विरोधी राजा नियंत्रित करता। कुछ केवल इसलिए खुले लगते क्योंकि वह प्यादे का हमला भूल जाता था।
अभ्यास ने भरोसेमंद बनाने से पहले उसे धीमा किया। कई रैपिड गेम हारा क्योंकि पुरानी आदत से चलने के बजाय विचार जाँच रहा था। लीला फिर भी गेम पूरे करवाती।
घर पर दोनों कॉपियाँ साथ रखता। सविता के सवाल गणना, बहस और सुधार के जरिए उसके काम में आगे बढ़े। अधूरे पन्ने को आखिर ऐसी लाइन मिली जिसे वह दोनों पक्षों से समझा सकता था।
4. गिरीश से पहले तीन दौर
पहला प्रतियोगिता गेम हेमंत ने असुविधाजनक उद्घाटन के बाद वापसी करके जीता। विरोधी ने हमला करते हुए प्यादा कमजोर किया। हेमंत ऐसे अंतिम चरण में पहुँचा जहाँ वह कमजोरी ली जा सकती थी। जीत बहुत सुंदर नहीं थी। उसे आकर्षक छोटे रास्ते से बचना पड़ा जो जवाबी खेल दे देता।
दूसरा गेम लीला से ड्रॉ हुआ। उसने राजा की सक्रियता पर चुनौती दी और सटीक बचाव करवाया। स्थिति बराबर हुई तो दोनों ने केवल अहंकार से आगे खेलना उपयोगी नहीं माना। परिणाम पर हस्ताक्षर करके खेल क्षेत्र से बाहर पुराने मोड़ का विश्लेषण किया।
तीसरे में हेमंत सक्रिय हाथियों से जीता। एक हाथी स्वतंत्र प्यादे के पीछे रखा, दूसरे से विरोधी राजा रोका। जीत पूरी होने तक बाहर रखी चाय ठंडी थी।
गिरीश ने अपने तीनों गेम जीते। उसकी बढ़त योग्य थी। मोहरों में तेज, अदला-बदली में आत्मविश्वासी और अंतिम जोड़ी में हेमंत सामने देखकर खुश था। खिताब के लिए ड्रॉ काफी था।
आखिरी दौर से पहले आयोजक ने दोनों को अंकतालिका के पास खड़ा किया। तस्वीर के लिए गिरीश ने हेमंत के कंधे पर दोस्ताना हाथ रखा। हेमंत अपने छपे अंक के पास थोड़ा सरका, ताकि दोनों नाम साफ रहें।
फिर खेल की मेज पर गया। तस्वीरों के पास की कुर्सी खाली थी। उसकी वापसी का अर्थ कोई तय करे, उससे पहले एक गेम पूरा करना था। उसने मोहरे जाँचे और अपनी जगह बैठ गया।
5. एक फाइल पर दो प्यादे
गिरीश की शुरुआती योजना व्यावहारिक थी। वह अदला-बदली चाहता था, तुरंत की रणनीतिक धमकियाँ कम करता था और ऐसी स्थिति की ओर बढ़ता था जहाँ आधे अंक की जरूरत आराम से पूरी हो।
शुरुआत में ऊँट और घोड़े की अदला-बदली के बाद हेमंत को b-प्यादे से a-फाइल पर वापस मारना पड़ा। बाद में वही प्यादा a4 तक गया और काले a5-प्यादे के सामने रुका। उसका मूल a-प्यादा a2 पर रहा। एक फाइल के दोनों प्यादे लंबे समय की कमजोरी दिखते थे। गिरीश का ध्यान बार-बार उन्हीं पर जाता।
हेमंत ने सक्रिय मोहरों और उपयोगी केंद्रीय स्थिति के बदले यह बनावट स्वीकार की। पीछे का a-प्यादा जल्दी नहीं बढ़ाया। बहुत देर उसका तुरंत काम नहीं था। अपने आप आगे कर देने से सामने का रुका प्यादा बेहतर नहीं होता।
मध्य खेल अदला-बदली की प्रतियोगिता बना। गिरीश ने वजीर बदलने का प्रस्ताव रखा जिससे बचाव सरल होता। हेमंत ने आगे की हाथी की सक्रियता गणना करके स्वीकार किया। बाद में केंद्रीय प्यादा जीता, लेकिन गिरीश का राजा इतना सक्रिय हुआ कि अंतिम चरण आसान नहीं रहा।
किनारे किसी दर्शक ने फुसफुसाया कि एक फाइल के दो प्यादे क्या तय करेंगे। अधिकारी ने चुप कराया। हेमंत को बात का केवल शुरू सुनाई दिया। वह नहीं मुड़ा।
a2 का प्यादा वहीं रहा। गिरीश ने उसकी निष्क्रियता को अपने अनुमान की पुष्टि माना। हेमंत उसे लगातार जाँचने वाला तथ्य मानता रहा।
6. आखिरी अदला-बदली से पहले
दोनों राजाओं के सक्रिय होने पर आखिरी हाथियों की अदला-बदली सामने आई। गिरीश ने गणना की कि रुकी वजीर वाली तरफ उसे परिचित केंद्रीय बचाव मिलेगा। हेमंत के पास अतिरिक्त केंद्रीय प्यादा था, लेकिन उपयोगी इंतजार की चाल न हो तो विपक्ष वाला राजा बिना सहारे की बढ़त रोक सकता था।
हेमंत ने सहमत होने से पहले बची प्यादे की चालें देखीं। सामने का सफेद a-प्यादा काले a5 में नहीं बढ़ सकता था। काला प्यादा सफेद a4 में नहीं बढ़ सकता था। पीछे वाले सफेद के पास a2 से a3 की एक उपयोगी इंतजार वाली चाल अभी थी।
उसने उसके बाद भी गणना की। अतिरिक्त बारी तभी उपयोगी थी जब उसके बाद राजा भीतर जा सके, केंद्रीय प्यादे को सहारा दे और बचाव वाला फिर रोक न बना पाए।
हाथी बदल गए। कई दर्शक सहज हो गए। गिरीश ने स्कोर सीधा किया और परिचित ड्रॉ की बनावट पहचानने वाले आत्मविश्वास से चलने लगा।
हेमंत देखता रहा कि उस बनावट का कौन-सा रूप वास्तव में बोर्ड पर है।
केंद्रीय टकराव तक पहुँचने पर स्थिति साफ थी। सफेद राजा e4, प्यादे e3, a2, a4। काला राजा e6, प्यादा a5। सफेद की बारी।
गिरीश ने रुकी a-फाइल देखकर ड्रॉ कहा। हेमंत ने अभी खर्च न हुई एक चाल देखी। दोनों नजरों का अंतर केवल एक खाने में था। उसने घड़ी देखी और अपनी गणना का आखिरी सिरा फिर जाँचा।
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7. a3
हेमंत ने a3 चला।
पीछे का प्यादा एक खाना बढ़ा और दूसरे सफेद प्यादे के पीछे रुक गया। वहाँ से वजीर बनने नहीं जा रहा था। उसका काम राजाओं को वहीं रखते हुए बारी विरोधी को देना था।
गिरीश का a5-प्यादा a4 से बंद था। जवाब में प्यादे की कोई चाल नहीं थी। राजा को विपक्ष छोड़ना पड़ा। वह बोर्ड देखता रहा, फिर e6 से d6 गया।
हेमंत का राजा e4 से f5 पहुँचा। गिरीश ने Kd5 खेला, केंद्रीय प्यादे के करीब रहना चाहता था। हेमंत ने e3 से e4 शह के साथ बढ़ाया। प्यादा d5 पर हमला करता था। काला राजा d6 लौटा।
अब हेमंत ने Kf6 चला।
अभ्यास किया रास्ता अब प्रश्न के पास बना चित्र नहीं था। राजा छठी पंक्ति पर था और प्यादा पीछे। उसी फाइल पर लौटकर गिरीश पुरानी व्यवस्था नहीं बना सकता था। चालों का समय बदल गया था।
गिरीश ने लंबा पानी पिया। a3 को देखा, फिर स्कोर शीट पर सामान्य पंक्ति में लिखा a2-a3 देखा। अंतिम चरण की सबसे छोटी चाल ने उससे वह निर्णय करवा लिया था जिससे बचना चाहता था।
हेमंत पीछे नहीं टिका। एक बार जीतता राजा-प्यादा अंतिम चरण जल्दी बढ़ाकर खराब कर चुका था। अगला काम राजा को सही खाने पर लाना था, उससे पहले कि प्यादा सुरक्षा माँगे। उसने अपनी उँगलियाँ मोहरे से अलग रखीं और काले की अगली चाल का इंतजार किया।
8. राजा पहले गया
गिरीश ने Kd7 खेला। हेमंत ने केंद्रीय प्यादा e5 तक बढ़ाया। काला राजा e8 पर आया, फिर वजीर बनने वाली फाइल की तरफ। इस पल उतावली बढ़त अंतिम चरण को जरूरत से ज्यादा कठिन बना सकती थी।
हेमंत ने इसके बजाय Ke6 खेला। राजा प्यादे के आगे था और जरूरी पहुँच के खाने नियंत्रित करता था। गिरीश Kd8 गया। हेमंत Kf7 पहुँचा।
काला राजा d7 लौटा। अब हेमंत ने e6 शह के साथ बढ़ाया। गिरीश d6 गया। प्यादा e7 पहुँचा, अब भी f7 पर खड़े सफेद राजा से सुरक्षित। गिरीश के d7 लौटने पर वजीर बनने का खाना सुरक्षित था।
हेमंत ने e8 पर शह के साथ वजीर बनाया। उसका राजा e8 की रक्षा करता था। नए वजीर को मारकर बचने का कानूनी रास्ता नहीं था।
कुछ सेकंड गिरीश नहीं हिला। जहाँ स्मृति के चित्र में रोक का भरोसा था, वहाँ वजीर खड़ा था। उसने फिर दोनों a-प्यादे देखे। एक a4 पर था, दूसरा अब a3 पर।
फिर घड़ी रोक दी।
परिणाम पर हस्ताक्षर से पहले दर्शक ताली बजाने लगे। हेमंत ने इंतजार किया। वजीर बनना सही लिखा, स्कोर जाँचा और गिरीश के हार स्वीकार करने पर हाथ बढ़ाया।
अंतिम गेम गिरीश की सबसे तेज जीत से लगभग घंटा ज्यादा चला था। निर्णय इतनी छोटी चाल से हुआ जिसे बिना ध्यान खर्च किया जा सकता था, और जिसे पूरी स्थिति की जरूरत तक बचाना जरूरी था।
9. तस्वीरों के पास की कुर्सी
हेमंत के साढ़े तीन अंक हुए। गिरीश के तीन। आयोजक ने अंकतालिका का क्रम बदला और हेमंत का नाम सबसे ऊपर रखा। जिसे औपचारिक पहली चाल देने को कहा गया था, उससे अब आखिरी चाल समझाने को कहा जा रहा था।
गिरीश प्रदर्शन वाले बोर्ड के पास स्कोर लिए खड़ा था। “मैंने प्यादे रुके हुए गिने,” उसने कहा। “बची हुई चाल नहीं गिनी।”
हेमंत ने सिर हिलाया। स्वीकार ठीक था। उसने a3 से पहले की स्थिति बनाई और दिखाया कि पीछे का प्यादा पहले बढ़ जाता तो अंतिम टकराव का समय कैसे बदलता।
लीला ने राजा का रास्ता भी दिखाने को कहा। उसने दिखाया, उस निर्णय के साथ जिसमें प्यादा जल्दी बढ़ाने से पहले Ke6 खेला था। दर्शक चालें देखते रहे। कुछ लोग अतिरिक्त बोर्ड पर बचाव के दूसरे रास्ते खेलने लगे और उसे जाँचने बुलाया।
तस्वीरों के पास की कुर्सी पुरस्कार तक खाली रही। तब आयोजक ने पूछा कि हेमंत कहाँ बैठना चाहेगा।
“खिलाड़ियों के साथ।”
गिरीश ने अपनी कुर्सी सरकाकर जगह बनाई।
ट्रॉफी आई तो हेमंत ने एक पल सीने से लगाई, फिर मेज पर रख दी। कैमरे के बजाय खिलाड़ियों को देखा। कई ने पंजीकरण पर उसे गलत रखी कुर्सी के पास खड़ा देखा था। अब वे इंतजार कर रहे थे कि वह अगली कौन-सी स्थिति समझाना चुनेगा। उसने स्कोर का पन्ना सीधा किया और पहले रुकने वाली राजा की चाल पर उँगली रखी।
10. एक और पन्ना
घर पर हेमंत ने सविता की और अपनी कॉपी खोली। उसके अधूरे पन्ने पर नहीं लिखा। अपनी कॉपी में अंतिम गेम की स्थिति, इंतजार की चाल और उसके बाद राजा का रास्ता दर्ज किया। पास में लिखा कि कहाँ लगभग जल्दी कर दी थी।
अगली सुबह दोनों कॉपियाँ पार्क ले गया। लीला पहले आई और काले मोहरे माँगे। गिरीश बाद में नई स्कोर शीट और दो कप चाय लेकर आया। एक कप हेमंत के पास रखा। प्रतियोगिता उसके लिए उचित है या नहीं, इस पर सलाह नहीं दी।
उन्होंने रंग बदलकर अंतिम चरण खेला। हेमंत ने बचाव किया। लीला ने अतिरिक्त प्यादे की चाल के बिना जीतने की कोशिश की। वास्तविक प्रतिरोध से फर्क दिखाई दिया। गिरीश ने राजा का एक रास्ता सुझाया। उन्होंने जाँचा और देखा कि कहाँ विफल होता है।
जाने से पहले पार्क आयोजक ने अगली राउंड-रॉबिन में प्रवेश पूछा। हेमंत ने फॉर्म लिया, तारीखें पढ़ीं और खिलाड़ियों में नाम लिखा।
पार्क गेट पर गिरीश पुराने नोटिस समेट रहा था। हेमंत को सम्मानित अतिथि बुलाने वाला ऊपर था। हेमंत ने माँगकर पलटा और खाली तरफ अगले राउंड-रॉबिन की तारीखें लिखीं।
“दूसरा अतिथि पास चाहिए?” गिरीश पूछकर रुक गया।
हेमंत ने भरा खिलाड़ी फॉर्म दिया। आयोजक ने प्रवेशों में रख लिया। सविता की कॉपी के कवर के भीतर नई तारीखें लेकर घर चला। उसकी पुरानी दुकान से नई कलम खरीदी। उस शाम पहला निशान पक्के प्रवेश पर उसके अपने दस्तखत थे।
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