EZ777: शून्य अंक की क्वीन ने खिताब दिलाया
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EZ777: शून्य अंक की क्वीन ने खिताब दिलाया

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

EZ777 की मौलिक कैरम डबल्स कहानी: निकाली गई जोड़ी क्वीन कवर से चार अंकों की बढ़त बचाती है, अंतिम बोर्ड हारती है और चैंपियनशिप जीतती है।

1. EZ777: आखिरी बोर्ड मैं जीता, फाइनल मैं हारा

आखिरी काली गोटी साफ जेब में गई। मेरे साथी ने हाथ मेरी ओर उठाया, फिर हथेलियाँ मिलने से पहले नीचे कर लिया।

बोर्ड मैंने जीता था। चैंपियनशिप आशा और जावेद ने जीती थी।

मेरा नाम मोहन है। उस शाम मैं सैंतालीस वर्ष का था और उस क्लब का कप्तान था जिसे बारह वर्षों से दूसरे लोगों से अनुशासित कहलवाता आया था। सामने वे दो खिलाड़ी बैठे थे जिन्हें मैंने डबल्स टीम से निकाल दिया था। उन्होंने सबके घर चले जाने के बाद सामान ढोकर अपनी प्रतिबद्धता साबित करते रहने से मना किया था।

स्कोरबोर्ड बताता था कि मेरी अंतिम सफाई ने जरूरी बात क्यों नहीं बदली। निर्णायक गेम का आठवाँ और अंतिम बोर्ड शुरू होते समय वे चौबीस-बीस आगे थे। आशा ने क्वीन लेकर उसे कवर किया था। उनके अंक इतने थे कि क्वीन उन्हें अपना बोनस नहीं दे सकती थी। वह मुझे भी तीन अंक नहीं दे सकती थी।

मेरे समाप्त करने पर उनकी दो सफेद गोटियाँ बची थीं। दो अंक लेकर हम बाईस पहुँचे। आठ बोर्ड की सीमा पर गेम चौबीस-बाईस समाप्त हुआ और मैच दो-एक से हमारे खिलाफ गया।

लोग आशा का वह रिबाउंड याद रखते हैं जिससे क्वीन कवर हुई। मुझे उससे पहले का ठहराव याद है। उसने स्कोर देखा और ऐसी लाल गोटी लेने का निर्णय किया जो उसके लिए कोई अंक नहीं देने वाली थी।

वर्षों तक मैं उसे उपयोगी काम करने वाली कहता रहा था। मुझे समझ ही नहीं आया था कि वह बोर्ड का कितना बड़ा हिस्सा देख सकती है।

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2. मेरे हिसाब से प्रतिबद्धता

आशा छत्तीस वर्ष की थी और मेडिकल रिकॉर्ड कार्यालय में काम करती थी। चालीस वर्ष का जावेद औद्योगिक सिलाई मशीनें ठीक करता था। उनके अभ्यास के समय मिलाना कठिन था। इसलिए जो समय मिलता, उसके प्रति दोनों पाबंद रहते थे।

मैं उनकी इस पाबंदी को अपनी संपत्ति समझता था।

बाहर की टीम आए और बोर्ड उतारने हों तो उन्हें बुलाता। मैच देर से समाप्त हो तो अलमारी बंद करने को कहता। सबसे मजबूत सिंगल्स खिलाड़ी आराम की जरूरत बताकर जा सकते थे। आशा और जावेद से रुकने की उम्मीद थी, क्योंकि मैं कहता था कि छोटे काम करने वालों से टीम बनती है।

एक रविवार हमारी भारी टीम हार में उन्होंने अकेला डबल्स मैच जीता। उसके बाद कहा कि छह बोर्ड ऊपर ले जाने के लिए नहीं रुक सकते। खेलने के लिए आशा पहले ही शिफ्ट बदल चुकी थी। जावेद की मरम्मत की अपॉइंटमेंट थी जो रुकने पर छूट जाती। मैच से पहले दोनों बातें मुझे बताई गई थीं।

मैंने कहा कि बहाने सबके पास होते हैं।

आशा ने पूछा कि बाकी खिलाड़ी बारी क्यों नहीं ले सकते। मैंने सवाल को रवैये की समस्या कहा। दो दिन बाद नई डबल्स जोड़ी घोषित की। बदले खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता की तारीफ की, जबकि आशा और जावेद अपने स्ट्राइकर लेने के लिए अलमारी के पास खड़े थे।

जावेद ने पूछा कि क्या उनके नतीजों पर चर्चा हुई थी। मैंने कहा कि नतीजे ही सब कुछ नहीं होते।

वाक्य बातचीत समाप्त करने के लिए कहा था। बातचीत समाप्त हो गई। आशा ने शेल्फ से स्ट्राइकर का केस उठाया, अलमारी की चाबी मुझे दी और जावेद के साथ चली गई। उसी रात कैलेंडर से उनकी अभ्यास बुकिंग हट गई।

3. कमरा खो चुकी जोड़ी

कई सप्ताह सुनता रहा कि जहाँ कोई बोर्ड दे देता है, वहीं वे खेल लेते हैं। मुझे यह हमारे क्लब से जाने की मूर्खता का प्रमाण लगा।

बाद में फाइनल का विश्लेषण करते हुए जावेद ने वे कमरे दिखाए जिन्हें उन्होंने आजमाया था। बाजार वाली शाम सामुदायिक हॉल बहुत शोर करता था। छोटे कार्यालय में जगह थी, लेकिन मेज की ऊँचाई भरोसेमंद नहीं थी। रेजिडेंट्स रूम में सप्ताह के दो सत्र मिल सकते थे, शर्त थी कि अगली बुकिंग से पहले सब सामान समेट दिया जाए।

उन्होंने वही कमरा चुना और सामान खुद समेटा। फर्क यह था कि काम का तय अंत था और कमरे का उपयोग करने वाले सभी लोगों का हिस्सा था। तीसरा सदस्य बोर्ड लाता। चौथा लाइट देखता। अधिक प्रसिद्ध होने से किसी को पहले जाने का अधिकार नहीं मिलता था।

उनकी पहली स्वतंत्र प्रतियोगिता खराब रही। आशा दो क्वीन कवर चूकी। जावेद ने रिबाउंड अधिक जोर से मारा, स्ट्राइकर जेब में गया और नियम के अनुसार ड्यू चुकानी पड़ी। पहले दौर में हारकर वे उत्सव मनाते अनजान लोगों के बीच से अपना बोर्ड उठाकर लौटे।

हमारे क्लब में किसी ने परिणाम दिखाया। मैंने कहा कि उचित मार्गदर्शन के बिना सब कुछ करने की कठिनाई समझ आ गई होगी।

अगली तीन सुबह मैंने नहीं देखीं। जावेद ने अपॉइंटमेंट बदली थीं। आशा ने पहले की बस खोजी थी। काम पर जाने से पहले वे छूटे कवर दोहराते थे। हर सफल कोशिश के बाद कोण बदलते। सिर्फ याद किए हुए स्थान से लगने वाला शॉट पर्याप्त नहीं था।

4. लाल गोटी और उसके पास लिखा अंक

उनके अभ्यास के रिकॉर्ड मुझे मिली गपशप से कहीं अधिक कठिन काम दिखाते थे।

वे बोर्ड के पास अलग स्कोर लिखकर क्वीन के स्थान लगाते। कुछ स्कोर पर क्वीन लेकर कवर करने और बोर्ड जीतने से तीन अतिरिक्त अंक मिलते। बाईस या उससे अधिक पर उनका अपना क्वीन बोनस उपलब्ध नहीं रहता। फिर भी क्वीन कहाँ है और किसने कवर की है, यह विरोधी के संभावित अंक बदल सकता था।

वे खराब अंतिम स्थानों का भी अभ्यास करते। ऐसे स्थान जहाँ अपनी बची गोटियाँ कठिन हों और विरोधी के पास छोटी सफाई उपलब्ध हो। हर बार विरोधी को समाप्त करने से रोकना संभव नहीं था। कभी-कभी उसकी समाप्ति से मिलने वाले अंक सीमित किए जा सकते थे।

आशा ने सचमुच खुली सीधी लाइन और केवल देखने में खुली लाइन का अंतर सीखा, जहाँ स्ट्राइकर की चौड़ाई आने पर रास्ता बंद हो जाता था। जावेद रिबाउंड ड्रिल लगाता और हर कोशिश के बाद सफेद गोटी थोड़ा खिसका देता। वे लिखते कि संपर्क अधिक भरा था, अधिक पतला था या गति ही ज्यादा थी।

उनकी बहसें ठोस होने लगीं। एक स्थान में जावेद पहले फँसी सफेद गोटी पर हमला करना चाहता था। आशा विरोधी की अगली बारी से पहले क्वीन सुरक्षित करना चाहती थी। दोनों योजनाएँ चारों सीटों से खेलीं। एक उसके बेसलाइन से काम करती और जावेद के बेसलाइन से नहीं। इस अंतर ने शॉट तैयार करने का क्रम बदला।

मुझे यह सब खतरे की तरह नहीं बताया गया। सुना कि पूरी सुबह कवर करते हैं तो मैंने घबराए खिलाड़ी अपनी गलतियाँ दोहराते कल्पना किए। वे सीख रहे थे कि कौन-सी चूक एक अंक लेगी और कौन-सी पूरा मैच।

5. पहली बार उन्होंने मुझे रुककर देखने पर मजबूर किया

सूरत की क्षेत्रीय डबल्स प्रतियोगिता में फिर मुलाकात हुई। मेरा साथी उनतालीस वर्ष का प्रणव था। वह कठिन सीधा शॉट भी सामान्य दफ्तर के काम जैसा शांत बना देता था।

आशा और जावेद ड्रॉ के दूसरे हिस्से में थे। हमारा सेमीफाइनल जल्दी समाप्त हुआ, इसलिए मैं उन्हें देखने बैठा। उनके विरोधी भीड़ बनाए रखने में अच्छे थे। वे जेबों के पास कठिन गोटियाँ छोड़ते ताकि एक रंग साफ करने से दूसरे का रास्ता खुल जाए।

जावेद ने भीड़ पर तुरंत हमला नहीं किया। पहले एक सीधी सफेद गोटी ली, फिर दूसरी। अगली कठिन कोशिश बेहतर कोण वाले स्थान के लिए छोड़ी। उसकी बारी समाप्त हुई तो आशा को नया रास्ता मिलने से पहले बीच के विरोधी का खेल झेलना था। उसने झेला। क्वीन ली, कवर किया और अगला स्ट्रोक इतना नियंत्रित रखा कि अंतिम सफेद खेलने योग्य रहे।

वे तीन गेम में मैच जीते। निर्णायक गेम आठवें बोर्ड तक गया। वहाँ सीधे समाप्त करने और अधिक महत्वाकांक्षी क्वीन योजना के बीच चुनने से पहले उन्होंने स्कोर देखा। उस स्थान और सीमा के लिए चुनाव सही था।

बाद में मैंने उस आदमी के लहजे में बधाई दी जो पुराने कर्मचारी की प्रगति स्वीकार कर रहा हो। आशा ने पहले पाउडर ब्रश देने के लिए प्रणव को धन्यवाद कहा। मुझे छोटा-सा सिर हिलाकर जवाब दिया और जावेद की स्कोरशीट की ओर लौट गई।

वे मुझे जलाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। यही सहना कठिन था। चर्चा करने के लिए काम था और मेरी राय अब उसका केंद्र नहीं थी। मैं कुछ क्षण उनके पास खड़ा रहा, फिर अपनी जोड़ी की मेज पर लौट आया।

6. पहला गेम मैंने लिया

फाइनल हमारे लिए अच्छा शुरू हुआ। मैंने टॉस जीता, अपनी पसंद की लय पकड़ी और ऐसी सफाई चुनी जिससे पीछे उपयोगी रुकावटें रहें और उनकी कठिन सफेद गोटियाँ और असुविधाजनक बनें।

प्रणव सुंदर खेला। उसने कठिन कोण से क्वीन कवर की और दो बार मेरे समाप्त न कर पाने के बाद बोर्ड वापस जीता। पहला गेम हम पच्चीस-सोलह जीते। अंतिम स्ट्रोक के बाद आशा के कंधे तन गए। जावेद ने भाषण दिए बिना उसका स्ट्राइकर केस बढ़ा दिया।

मुझे उम्मीद थी कि अगले गेम में वे जल्दबाजी करेंगे। आशा ने शुरुआती बोर्ड से सरल लय बनाई। जहाँ सीधी सफेद बेहतर पहला संपर्क देती थी, वहाँ रिबाउंड ठूँसना बंद किया। जावेद ने पहले इस्तेमाल की गति पर अड़ने के बजाय बोर्ड के अनुसार स्ट्रोक की ताकत बदली।

फिर भी हमने उन्हें मेहनत कराई। प्रणव ने क्वीन कवर के आसपास लंबी सफाई बनाई। मैंने अपना आखिरी काला सही कोण मिलने तक सुरक्षित रखकर एक बोर्ड जीता। दूसरा गेम करीब रहा।

हम इक्कीस और वे बाईस पर थे। हमें मजबूत बोर्ड चाहिए था। उन्हें तीन अंक। उन्होंने सफेद समाप्त कीं तो हमारी तीन काली गोटियाँ बचीं। क्वीन का निपटारा उसी बोर्ड में पहले हो चुका था; अपने स्कोर के कारण उन्हें उसका अतिरिक्त बोनस नहीं मिला। वे तीन अंक उन्हें पच्चीस तक ले गए।

एक-एक गेम। मैं नाराज था, डरा नहीं था। पहला गेम साफ जीते थे और दूसरा लगभग जीत लिए थे। मैंने प्रणव से कहा कि उन्हें कठिन शॉट खेलने पर मजबूर करता रहे। उसने सिर हिलाया, फिर मुझसे दर्शकों को देखना बंद करने को कहा।

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7. निर्णायक गेम के सात बोर्ड

निर्णायक गेम में पहले उन्हें पाँच अंक मिले और हमने सात से जवाब दिया। उन्होंने आठ लिए। हमने छह। उन्होंने छह। हमने सात।

छह बोर्ड बाद हम बीस-उन्नीस आगे थे। बदलती जीतों ने कमरे में बेचैनी भर दी थी। दोनों जोड़ियाँ बड़ा बोर्ड बना सकती थीं। कोई दूसरी जोड़ी को लंबे समय शांत नहीं रख सकी थी।

सातवें में जावेद के ब्रेक ने संभावनाएँ दीं, आसान अंत नहीं। मैंने दो काली लीं और तीसरी चूका, जिसकी लाइन एक सफेद के पास संकरी थी। बदले स्थान से आशा ने सीधी सफेद निकाली। फिर कठिन गोटी पर नियंत्रित कोशिश चूकने से उसकी बारी गई। सामान्य क्रम चलता रहा। कोई वादा नहीं कर सकता था कि साथी तक लौटने पर बोर्ड वैसा ही बचेगा।

बोर्ड बदला। प्रणव ने सफल शॉट से केंद्र का हिस्सा खोला। जावेद ने नया रास्ता इस्तेमाल किया, क्वीन ली और कवर की। उनकी आखिरी सफेद गई तो हमारी दो काली बचीं। उन्होंने बोर्ड उन्नीस पर शुरू किया था, इसलिए उन दो गोटियों के साथ कवर की हुई क्वीन के तीन अंक जुड़े।

पाँच अंक लेकर वे चौबीस पहुँचे। हम बीस पर रहे।

अगर पहले कोई पच्चीस न पहुँचे, तो आठवाँ बोर्ड अंतिम होगा। पाँच या अधिक अंक का विजयी बोर्ड हमें गेम देता। उससे कम की बोर्ड जीत पर सीमा के समय वे आगे रह सकते थे। मैंने केंद्र की लाल क्वीन देखी और जरूरी पाँच अंकों की योजना बनाने लगा।

सामने आशा ने वही क्वीन देखी। वह मुझे वे अंक लेने से रोकने की योजना बना रही थी। दर्शकों ने अपनी कुर्सियाँ पास खिसका लीं। प्रणव ने स्ट्राइकर घुमाकर देखा और ब्रेक के लिए जगह खाली कर दी।

8. उसके लिए शून्य अंक की क्वीन

आखिरी बोर्ड में देर से ऐसा स्थान आया जहाँ आशा और जावेद की तीन सफेद बची थीं। हमारी तीन काली थीं। क्वीन किसी की नहीं हुई थी।

उनकी सफेद असुविधाजनक जगहों पर थीं। दो को अगली उपलब्ध सीटों से कठिन संपर्क चाहिए था। हमारी काली अगली अच्छी बारी मिले तो बेहतर समाप्ति देती थीं। बीस से क्वीन के बोनस और दो बची सफेद के साथ हम पच्चीस पहुँचते। क्वीन के बिना वही दो सफेद हमें केवल बाईस तक पहुँचातीं।

मैंने ऐसी काली जेब में डाली जो आशा की तरफ से केंद्र का हिस्सा रोक रही थी। मेरी उपलब्ध सफाई की यह सही शुरुआत थी। अगली काली पर कठिन कट चाहिए था। थोड़ा चूका और स्थान खुला रह गया। हटाई काली ने आशा के बेसलाइन से ऐसी लाइन खोली थी जो मेरी तरफ से नहीं थी।

उसने क्वीन और कवर के लिए जरूरी सफेद देखी। अकेली क्वीन लेने से कुछ तय नहीं होता। अगला स्ट्रोक कवर न कर पाए तो नियम के अनुसार क्वीन बोर्ड पर लौटती और उसका बोनस लेने का मेरा मौका बचा रहता।

एक दर्शक ने फुसफुसाकर कहा कि वह पहले ही चौबीस पर है। उसे पता था। उसका स्कोर योजना का कारण था, उसके खिलाफ आपत्ति नहीं।

आशा ने नई खुली सीधी लाइन से क्वीन जेब में भेज दी। फिर कवर के लिए स्ट्राइकर रखा। उस सफेद को उसी सरल सीधे रास्ते से नहीं लिया जा सकता था। उपयोगी तरफ से संपर्क करने के लिए कुशन का सहारा लेना था।

जावेद स्थिर बैठा था। स्ट्रोक वह उसकी जगह नहीं खेल सकता था। मैं उसके चुने अंतर को देख रहा था और याद कर रहा था कि कवर का अभ्यास करते उनकी सुबहों का मैंने कैसे मजाक उड़ाया था।

9. वह कवर जिसे मैं उलट नहीं सका

स्ट्राइकर कुशन से लगा और सफेद की ओर लौटा। संपर्क नियंत्रित था। न वह घबराहट वाला थप्पड़ था जिसकी मुझे उम्मीद थी, न इतनी डरी हुई हल्की चोट जो जेब तक पहुँचने से पहले रुक जाए।

सफेद अंदर गई। क्वीन कवर हो चुकी थी।

बची दो सफेद में से एक पर आशा की अगली कोशिश चूक गई। खेल आगे बढ़ा। प्रणव ने बची काली पर काम किया। पहले सीधा शॉट लिया, फिर कठिन वाला। एक काली गई। आखिरी के लिए बनी लाइन वह पूरी नहीं कर सका। जावेद ने अपनी कठिन सफेद निकालने की कोशिश की और चूका। मेरी बारी आ गई।

मेरी एक काली थी। उनकी दो सफेद अब भी थीं। मैं अंतिम गोटी जेब में डाल सकता था। ऐसा करके क्वीन को अपनी नहीं बना सकता था।

मैंने बोर्ड और स्कोर दोनों देखे, क्योंकि निष्कर्ष दुखद हो तब भी कप्तान को दोनों देखने चाहिए। स्थान में छिपा ऐसा समझदार रास्ता नहीं था जो तीन अतिरिक्त अंक लौटा दे। आशा के कवर ने वह संभावना हटा दी थी। मैंने काली साफ जेब में डाली।

अंपायर ने हमें दो अंक दिए। हमारे बाईस, उनके चौबीस। आठ बोर्ड पूरे। आशा और जावेद निर्णायक गेम चौबीस-बाईस और मैच दो गेम से एक गेम जीते।

प्रणव ने उठा हाथ नीचे किया। फिर मुझसे पहले खड़ा होकर उन्हें बधाई दी। तालियाँ शुरू हुईं और मैं बोर्ड पर छोड़ी अपनी विरोधी की दो सफेद देखता रहा। मुझे लगा था कि वे इतनी कठिन हैं कि उन्हें हराया जा सके। क्वीन सुरक्षित होने के बाद वे ठीक उतने अंक थीं जितने आशा मुझे देने का जोखिम उठा सकती थी।

10. वह रिपोर्ट जो आखिर मैंने लिखी

क्लब को हार समझाने वाली रिपोर्ट चाहिए थी। मैंने पहले गेम से शुरुआत की, जहाँ हम बेहतर थे, और दूसरे से, जहाँ उन्होंने जवाब दिया। फिर निर्णायक गेम के आठों बोर्ड के स्कोर लिखे, ताकि कोई उसे आखिरी शॉट के भाग्य तक छोटा न कर सके।

मैंने क्वीन कवर और अंतिम काली से मिले दो अंक बताए। स्ट्रोक से पहले आशा के चुनाव का नाम लिया। जावेद की सातवें बोर्ड की सफाई भी रिपोर्ट में रखी। उन पाँच अंकों के बिना आठवें बोर्ड की योजना पर्याप्त नहीं होती।

सचिव ने पूछा कि क्या लिखना चाहूँगा कि वे वर्षों हमारे साथ अभ्यास कर चुके हैं। मैंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी लिखना चाहिए कि उन्होंने बंद क्यों किया।

उस वाक्य को लिखने में मैच के स्कोर से अधिक समय लगा। मैंने वह शिफ्ट और मरम्मत की अपॉइंटमेंट लिखी जिनकी मुझे पहले से जानकारी थी। उन्हें निकालने का अपना फैसला लिखा। प्रतिबद्धता शब्द छोड़ दिया, क्योंकि उससे मैं उस काम का विवरण छिपाता रहा था जो दूसरों से करवाना चाहता था।

हॉल में बोर्ड अब भी नीचे ले जाने थे। मैंने एक सिरा उठाया। प्रणव ने दूसरा। आशा और जावेद अपने सामान और ट्रॉफी के साथ पास से गुजरे। मैंने हमारे क्लब में वापसी मैच का प्रस्ताव दिया, अभ्यास और सामान लगाने के समय पहले से साफ बताने के साथ।

आशा ने कहा कि तारीख पर अपने समूह से बात करेंगे। जावेद ने बोर्ड दरवाजे से निकलने तक दरवाजा पकड़ा, फिर हमारे पीछे बंद होने दिया। उनकी टीम के पास लौटने के लिए अपना कमरा था। मैं और प्रणव बोर्ड उठाए सीढ़ियों की ओर बढ़े।

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