1. G77 कहानी: सीढ़ियों के नीचे का कमरा
आग के बाद प्रणव अपने घर को दरवाज़े के ऊपर बची दीवार के रंग से पहचान सकता था। नीचे राख, भीगे कपड़े और ऐसी चीज़ें थीं जो अब उपयोगी नहीं लगती थीं।
पत्नी माही शिशु को लेकर गली में खड़ी थी। प्रणव सत्ताईस वर्ष का था, माही छब्बीस की। दोनों गंभीर चोट के बिना निकल गए थे। किराये का कमरा और अधिकांश सामान चला गया था।
चाचा सुदर्शन ने सीढ़ियों के नीचे भंडार वाला कमरा दिया। दस दिन तक सामने रखी हर प्लेट के साथ उसी मदद की याद आती रही।
पारिवारिक सभा में चाचा ने बच्चे का कंबल उठाकर आगंतुक से कहा, “मैं दरवाज़ा न खोलता तो यह कहाँ सोता?”
प्रणव ने कंबल वापस लेकर बच्चे को ढका। माही की नज़र उस प्लेट पर रही जिसे उसने छुआ नहीं था।
सुदर्शन क्लब का वरिष्ठ शतरंज खिलाड़ी भी था। प्रणव किशोरावस्था के अंतिम वर्षों से वहाँ अभ्यास करता था। हाल में क्लब के अंतरक्लब प्रतिनिधि के क्वालिफाइंग आयोजन में स्थान मिला था। चाचा चाहता था कि वह नाम वापस ले।
कमरे की चाबी के पास प्रवेश फॉर्म रखकर बोला, “अब दूसरी जिम्मेदारियाँ हैं। उन्हें संभालने में मदद मैं कर रहा हूँ।”
प्रणव ने दोनों चीज़ें देखीं। पहले फॉर्म उठाया।
अगली सुबह क्लब कर्मचारी ने बताया कि अभ्यास के लिए उसका प्रवेश रोक दिया गया है।
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2. ऐसा बोर्ड जो मोड़ा जा सके
श्रमिक संघ के मनोरंजन कक्ष में प्रणव को छोटा मोड़ने वाला बोर्ड मिला। एक सदस्य ने कमरा खुला रहे तब इस्तेमाल करने दिया। मोहरे अलग-अलग थे, मगर हर खाना साफ दिखता था और घड़ी चलती थी।
पहले सत्र में माही का फोन आया। बच्चा शांत नहीं हो रहा था। पड़ोसी के कपड़ों की सिलाई में कई घंटे लगाने के बाद उसे विराम चाहिए था। प्रणव ने बोर्ड बाँधा और लौट गया।
शाम को दोनों ने समयतालिका बनाई। उसके अभ्यास और माही के भुगतान वाले काम के लिए सुरक्षित घंटे चाहिए थे। उस समय खाली माता-पिता में से दूसरा बच्चे को संभालता। कॉपियाँ जल गई थीं, इसलिए पुरानी डिलीवरी रसीद के पीछे लिखा।
पहला सप्ताह फिर भी खराब रहा। प्रणव थका पहुँचता, बिना पूरी गणना हमला चुनता और हर अभ्यास हार को कमरे में हुए नुकसान की सूची में नई चीज़ मानता।
साजन नाम के वयस्क खिलाड़ी ने एक हार फिर बनाने को कहा। प्रणव सामग्री में आगे था। उसने वह अदला-बदली ठुकराई थी जो विरोधी का खतरनाक हमला हटाती।
“जीता लाभ वापस देना पड़ता,” उसने कहा।
साजन ने हमलावर ऊँट बोर्ड पर वापस रखा। “उसे बचाने की कीमत क्या लगी?”
प्रणव ने वह मात का खतरा देखा जिसे रोक नहीं पाया था। दूसरी रसीद की खाली तरफ पहली नई समीक्षा लिखी।
3. जिस लाभ को बहुत कसकर पकड़ा
अभ्यास स्थिति में प्रणव के पास हाथी था और सामने ऊँट, साथ प्यादे। सामान्यतः हाथी अधिक मूल्यवान होता है, इसलिए उसे आरामदायक बढ़त लगती थी। मगर ऊँट उसके राजा के पास महत्त्वपूर्ण विकर्ण पकड़ता था। विरोधी राजा खतरनाक प्यादे की चाल को समर्थन देता था।
उसने हर कीमत पर हाथी बचाया। अगली चालें बढ़ते खतरों की रक्षा में गईं। सामग्री वापस देने का विचार आया तब तक उपयोगी समय निकल गया।
साजन ने हाथी से ऊँट लेने की लाइन देखने को कहा। सामने वाला प्यादे से वापस मार सकता था। हाथी जाता। लेकिन खतरनाक विकर्ण गायब होता, प्यादों की संरचना बदलती और प्रणव का राजा सक्रिय होता।
उन्होंने बचा प्यादों का अंत अपने आप जीता नहीं मान लिया। रास्ते गिने, कौन से प्यादे चल सकते हैं देखा और दोनों तरफ से खेले। एक रूप केवल ड्रॉ था। दूसरे में रक्षक राजा एक खाना दूर था और प्रणव का फायदा था। तीसरा बाहरी पास हुए प्यादे को भूलने से असफल हुआ।
उसने अदला-बदली के बाद की स्थिति की तुलना मना करने के बाद बचने वाली स्थिति से करना सीखा। हाथी की कीमत महत्त्वपूर्ण थी। ऊँट के पैदा किए हर खतरे की भी।
कमरे में लौटकर माही ने अभ्यास पूछा। बच्चे के सोने के बाद उसने बोतल के ढक्कनों से वह अदला-बदली दिखाई।
4. घर पर छोड़ा प्यादा
अगले महीने प्यादों के अंत तैयारी का हिस्सा बने। पहले राजा के बारे में सोचते हुए प्रणव खाली प्यादे की चाल यूँ ही चला देता था। अब समझा कि उन चालों से क्या बचाया जा सकता है।
कुछ स्थितियों में राजा आमने-सामने होते और उपयोगी आगे का रास्ता नहीं होता। जिसे राजा चलना पड़े, उसे पीछे हटना पड़ता। कहीं दूसरी तरफ सुरक्षित प्यादा चाल वह मजबूरी सामने वाले को दे सकती थी। यह समय की एक चाल बचाकर रखना था, घड़ी के सेकंड नहीं।
साजन ने विचार ध्यान से परखवाया। प्यादा बढ़ाने से खाना कमजोर हो या निशाना बने तो लाभ नहीं। सामने वाले के पास समान प्रतीक्षा चाल हो तो कथित उपाय कुछ नहीं बदलता। दोनों तरफ बची चालें गिननी थीं।
उन्होंने अंत तब तक खेले जब तक प्रणव समझा सके कि सामने का राजा हटने पर कौन सा रास्ता खुलता है। केवल अतिरिक्त प्यादा चाल मिलते ही जीत बताना छोड़ा। प्यादा लेने और पदोन्नति की दौड़ तक लाइन देखी।
घर में उसे और माही को ऐसा नया कमरा मिला जो अपने काम से संभाल सकते थे। मकान मालिक ने क्वालिफाइंग आयोजन से पहले जाने की तारीख तय कर दी। माही ने उसे बच्चे की समयतालिका के पास लिखा।
अगले अभ्यास अंत में प्रणव ने एक प्यादा शुरुआती खाने पर छोड़ा। इस बार ठीक जानता था कि क्यों छोड़ रहा है।
5. क्वालिफाइंग बाज़ियाँ उसकी अपनी हैं
क्वालिफाइंग आयोजन में वयस्क क्लब खिलाड़ी वर्तमान प्रतिनिधि सुदर्शन को चुनौती देने का अधिकार पाने के लिए खेल रहे थे। प्रणव को पहले स्थान पर आना था। चाचा के सामने केवल एक अच्छी बाज़ी काफी नहीं थी।
पहले दौर में कठिन मध्यखेल बचाकर ड्रॉ किया। दूसरे में आकर्षक प्यादा लेने से पहले राजा सक्रिय करके जीता। तीसरे में अदला-बदली गलत आँककर हारा। परिणाम के साथ परिचित क्रोध लौटा।
बाहर जाकर माही को फोन किया और शाम की बच्चे वाली योजना पुष्ट की। फिर विश्लेषण को लौटा। उसने सामने के राजा का रास्ता गिने बिना अनुकूल प्यादों का अंत मान लिया था। परिचित विचार पहचानकर बहुत जल्दी रुक गया।
बाकी दौर बेहतर काम माँगते थे। जवाबी खेल रोकने के बाद पास हुआ प्यादा बढ़ाकर लंबी बाज़ी जीती। अंतिम दौर में विरोधी के सक्रिय मोहरे सही क्रम में बदलकर पहला स्थान पक्का किया।
सुदर्शन परिणाम लगते देख रहा था। उसे उम्मीद थी कि अभ्यास प्रवेश रोकना भतीजे का फैसला कर देगा।
प्रणव ने लगातार दो दोपहर होने वाले दो बाज़ियों के चुनौती मुकाबले के लिए हस्ताक्षर किया। बराबरी पर छोटे समय की निर्णायक बाज़ियाँ थीं। तारीखें घर ले जाकर माही के काम के समयों के पास लगाईं।
सीढ़ियों के नीचे वाले कमरे की चाबी हुक पर थी। कमरे से जाने की तारीख पहले से लिखी थी।
6. पहली दोपहर: मेहनत का आधा अंक
पहली चुनौती बाज़ी में प्रणव काले मोहरों से था। सुदर्शन ने आत्मविश्वास से शुरुआत की, जगह बनाई और भतीजे को तंग रक्षा या सक्रिय केंद्रीय धक्का चुनने को मजबूर किया।
तत्काल मार जाँचकर प्रणव ने केंद्र तोड़ा। केंद्र खुला और मोहरों को उपयोगी खाने मिले। राजा की देखभाल बाकी थी। अधीर हमला उसे खुली फाइल की शह के सामने छोड़ देता।
उसने सबसे खतरनाक हमलावर मोहरा बदला और क्वीन वाले अंत में पहुँचा। दोनों राजा शह की अनुमति दिए बिना सुरक्षित आगे नहीं जा सकते थे। सुदर्शन ने प्यादा देकर शह के क्रम से निकलना चाहा। प्रणव ने प्रस्ताव गिना। लेना गलत समय पर उसकी रक्षा रोक देता।
उसने शह जारी रखीं। स्थिति दोहराई गई और दोनों ड्रॉ पर सहमत हुए।
सुदर्शन नाराज़ लगा। जो भतीजा पहले खुद को साबित करने जल्दी करता था, उसने आधा अंक बचाने की मेहनत स्वीकार की थी। चाचा ने अपने घर विश्लेषण जारी रखने को कहा, जहाँ वह प्रणव की छूटी बातें दिखा सके।
“यहीं देख सकते हैं,” प्रणव बोला।
क्लब की मेज़ पर थोड़ी समीक्षा हुई। तय समय आया तो प्रणव ने सामान बाँधा। माही का ग्राहक शाम को आता और वह बच्चे को पार्क ले जाने वाला था।
अगली बाज़ी बराबर स्कोर से शुरू होती। वह अपना बोर्ड और अपना तय काम लेकर भवन से निकला।
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7. दूसरी दोपहर: हाथी से अधिक
सफेद से प्रणव ने शांत शुरुआत चुनी जिसमें प्यादों की कई व्यवस्थाएँ संभव थीं। सुदर्शन ने जल्दी पहल छीननी चाही। सामरिक चूक से एक हाथी राजा से बँध गया। मजबूर क्रम में उसे प्रणव के ऊँट के बदले वह हाथी देना पड़ा।
आगे की अदला-बदलियों के बाद प्रणव के पास हाथी और सुदर्शन के पास ऊँट रहा। दोनों के पास कई प्यादे थे। सामग्री की बढ़त उत्साहजनक दिखी। दर्शक परिणाम सोचने लगे।
सुदर्शन ने सबसे असुविधाजनक व्यवस्था खोजी। ऊँट प्रणव के राजा के पास लंबा विकर्ण पकड़ता था। राजा सक्रिय हुआ। प्यादा बढ़ने से दूसरा रास्ता खुलने का खतरा था।
प्रणव का हाथी दूर वाला प्यादा ले सकता था, लेकिन उससे अपने राजा को बचाने वाले खाने छूटते। उसने शह गिनीं। आकर्षक मार के बाद ऊँट की सक्रियता अतिरिक्त सामग्री से अधिक खतरनाक हो जाती।
उसने राजा केंद्र के पास लाया। सुदर्शन ने उसे रोकने के लिए प्यादा बढ़ाया। संरचना बदली और संभावना आई—हाथी के बदले ऊँट, फिर प्यादे से वापसी की मार।
प्रणव ने हाथ हाथी से दूर रखा। उसके बाद बचने वाला राजा और प्यादों का अंत गिनना था। अभ्यास का पाठ तभी उपयोगी था जब सामने के वास्तविक खानों पर बैठता।
8. लाभ को दूसरा आकार देता है
प्रणव ने अदला-बदली के बाद राजाओं के रास्ते गिने। वापस मारने वाला प्यादा ऐसा निशाना बनता जिसके पास उसका सक्रिय राजा पहुँच सकता था। खतरनाक ऊँट हट जाता। सामने के राजा को लंबे विकर्ण की मदद बिना बची प्यादा श्रृंखला संभालनी पड़ती।
उसने हाथी रखने का विकल्प देखा। सुदर्शन के व्यावहारिक खतरे बने रहते। राजा अपने बचाव के काम आसानी से नहीं छोड़ सकता था। कागज़ पर सामग्री की बढ़त रहती और बोर्ड पर मोहरे जूझते रहते।
फिर शुरुआती खाने पर छोड़े प्यादे को देखा। उसका सुरक्षित एक कदम अभी मौजूद था। सुदर्शन की अतिरिक्त प्यादा चालें इस्तेमाल हो चुकी थीं या बंद थीं। राजा गणना की स्थिति तक पहुँचे तो बची चाल काम आती।
प्रणव ने हाथी से ऊँट लिया।
दर्शकों में आवाज हुई। केवल मोहरे गिनने वालों को लगा कि उसने स्वेच्छा से अधिक कीमत वाला मोहरा दे दिया। सुदर्शन ने प्यादे से वापस मारा। फिर राजाओं की जगह देखी।
भतीजे का राजा आगे आया। वापसी की मार से बने प्यादे को बचाने पर दूसरी तरफ प्रवेश मिलता। प्रणव ने वह प्यादा जीता और राजा निर्णायक रेखा तक लाया।
अब केवल राजा और प्यादे थे। धमकाने वाला विकर्ण गायब था। हर बचा रास्ता गिना जा सकता था।
9. एक छोटा कदम
बंद केंद्रीय प्यादों के पास राजा आमने-सामने थे। प्रणव तुरंत राजा चलाता तो सुदर्शन को नाकाबंदी बनाए रखने वाला खाना मिल जाता। चाचा आगे बैठा। उसे लगा कि युवक पाएगा, अदला-बदली से बंद रास्ते में आ गया है।
प्रणव ने प्रतीक्षा में रखा प्यादा एक खाना बढ़ाया।
चाल किसी पर हमला नहीं करती थी। असर यह था कि केंद्रीय व्यवस्था बदले बिना अब सुदर्शन को चलना था। उपयोगी प्यादा चालें खत्म थीं। राजा से जगह छोड़नी पड़ी।
प्रणव उस खाने में घुसा जो पहले उपलब्ध नहीं था। प्यादा मारने में जल्दी नहीं की। पहले जाँचा कि सुदर्शन दूसरी तरफ इतनी जल्दी पहुँच सकता है क्या कि अपना पास हुआ प्यादा बना ले। सक्रिय राजा के रास्ते बेहतर थे।
उसने बंद प्यादा जीता, पास हुआ प्यादा बनाया और आगे बढ़ने में साथ दिया। सुदर्शन किनारे से पास आया। प्रणव ने राजा से प्रवेश खाने रोके और रास्ता सुरक्षित होने तक प्यादा बचाया।
पदोन्नति रोकना असंभव हुआ तो सुदर्शन ने हार मान ली। बाज़ी और मुकाबला प्रणव का था—डेढ़ के मुकाबले आधा अंक।
चाचा ने पदोन्नति के पास खड़े प्यादे को देखा। उसे उम्मीद थी कि संकट में पड़ा युवा पिता हर लाभ कसकर पकड़ेगा। जिस हाथी को उसने इतना दबाया था, वह ऐसे अंत के लिए बदल दिया गया जिसे वह बचा नहीं पाया।
10. लौटाई हुई चाबी
पुरस्कार में सुदर्शन को क्लब प्रतिनिधि का फोल्डर देना था। आयोजक ने नए खिलाड़ी का नाम घोषित करने को कहा। उसने प्रणव का नाम लिया। यह नहीं जोड़ा कि उसे घर दिया, प्रशिक्षण दिया या सबसे पहले जानता था।
माही बच्चे के साथ सामने खड़ी थी। प्रणव ने उसे फोल्डर दिया और फोटोग्राफर कुर्सियाँ बदल रहा था तब बच्चा लिया। बच्चे ने कॉलर पकड़ लिया। प्रणव हँसा। माही अंततः किसी ऐसी बात पर मुस्कराई जिसका उद्देश्य रिश्तेदार को आश्वस्त करना नहीं था।
दो दिन बाद वे उस कमरे में गए जो मैच से पहले तय किया था। पालने, माही की सिलाई और खिड़की के पास छोटी मेज़ की जगह थी। उधार की सामान ढोने वाली ट्रॉली लौटाने से पहले प्रणव ने बोर्ड मेज़ पर रखा।
भंडार कमरे की चाबी सुदर्शन को देने गया। चाचा ने हाथ बढ़ाया, तुरंत बंद नहीं किया।
“अब भी क्लब आ सकते हो,” उसने कहा।
“मेरे अभ्यास का समय प्रतिनिधि के कार्यक्रम में है।”
सुदर्शन ने चाबी पर हाथ बंद कर लिया।
नए कमरे में माही ने दरवाज़ा पकड़ा और प्रणव मुड़ा बोर्ड भीतर लाया। बच्चा उसके कंधे पर सो रहा था। उसने छोटी मेज़ खाली करके बोर्ड वहाँ रखा जहाँ रात भर रह सके।
चाचा का फोन आया—स्टोररूम में कुछ भूल तो नहीं गए? प्रणव ने बैग देखे, माही से पूछा और नहीं कहा।
“चाबी आपके पास है,” उसने कहा।
फोन बंद होने के बाद माही ने अपना दरवाज़ा भीतर से बंद किया। कुंडी नई थी। प्रणव ने एक बार जाँची, फिर अपनी दोनों चाबियाँ बोर्ड के पास मेज़ पर रख दीं।
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