GoGoRummy: अपने ही नाम के खिलाफ दस अंक
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GoGoRummy: अपने ही नाम के खिलाफ दस अंक

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

GoGoRummy की मौलिक रमी कहानी: प्रतिबंध पूरा कर लौटा बदनाम खिलाड़ी अपने पक्ष की स्कोर गलती ठीक करवाता है और आठ डील के फाइनल में असली जीत खोजता है।

1. GoGoRummy — ढीले हत्थे वाला कप

कप जमीन तक पहुँचता, उससे पहले उसका हत्था अलग हो गया। अनुशासन समिति की सुनवाई वाले कमरे के बाहर विकास खड़ा था। टूटा हिस्सा उसकी मुट्ठी में था। खुले दरवाजे से भीतर लगा पुराना प्रचार पोस्टर दिख रहा था। उसमें उसकी ठोड़ी उठी हुई थी, हाथ में तीन पत्ते थे और चेहरे पर वह मुस्कान थी जिसका अभ्यास उसने आईने के सामने किया था।

सुहैल उसके पास से निकला। उसने कप की तरफ नहीं देखा। “खेल सीख सकते थे,” वह बोला।

विकास ने प्रदर्शनी मुकाबलों के नतीजे पहले से तय करवाने में हिस्सा लिया था। बाद में उन्हीं जीतों को अपनी योग्यता का प्रमाण बताया। सच्चाई खुली तो पहले आयोजक को दोष दिया, फिर माहौल को, फिर गलतफहमी का नाम लिया। सुनवाई में दूसरे सहभागी के बयान और विकास के अपने संदेश सामने आए। बहाने टिक नहीं पाए। उसने अपना किया स्वीकार किया। कहानी के जयपुर प्रतियोगिता मंडल ने प्रकाशित अनुशासन प्रक्रिया के अनुसार उसे दो साल के लिए निलंबित किया।

उसकी बहन रेवती ने अपनी नौकरी के बाद उन मुकाबलों के कार्यक्रम छापे थे। उसने बचा हुआ बंडल खाने की मेज पर रखा। “तुमने मुझसे लोगों को बुलवाया था।”

पैंतीस साल का विकास समझ रहा था कि बात केवल छपाई की नहीं है। उसने माफी माँगी। बंडल वहीं पड़ा रहा।

दो साल टूटा कप अलमारी के पीछे रहा। विकास छोटे प्रिंटिंग काउंटर पर दूसरों के प्रमाणपत्र काटता रहा। प्रतिबंध पूरा होने पर पात्रता का पत्र लेकर अभ्यास कक्ष पहुँचा। किसी ने पूछा, “पत्तों को पहले से समझा दिया है?” चार लोग हँसे। विकास लगभग वापस मुड़ गया।

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2. खिड़की के पास की कुर्सी

लीना खिड़की के पास अभ्यास की मेज लगा रही थी। पुराने प्रदर्शनी मुकाबलों से पहले वह विकास के साथ खेल चुकी थी। उसे कई बार हराया भी था। इसलिए उसके अचानक बने नाम में कितना झूठ था, यह समझने में उसे समय नहीं लगा था। उसने लौटने पर स्वागत का भाषण नहीं दिया।

“बैठना है तो पत्ते फेंटो।”

पहले अभ्यास हाथ में विकास के पास महँगे बड़े पत्ते थे, पर एक भी प्योर सीक्वेंस नहीं बनी। वह बुरी तरह हारा। दूसरे हाथ में जोकर को बार बार अलग समूहों में रखने लगा। आखिर भूल गया कि उसके पास वास्तव में कितने और कौन से पत्ते हैं। उसने कहा कि हाथ तैयार है। दोबारा गिना तो उठाने के बाद चौदह पत्ते थे। कोई एक पत्ता छोड़ने से बाकी तेरह की वैध घोषणा नहीं बन रही थी।

लीना ने गलत घोषणा करने से पहले रोका। “हाथ जैसा था, वैसे रखो। इसे लिखेंगे।”

उसने कागज पर तेरह खाने बनाए। विकास ने हर खाने में एक असली पत्ता लिखा। फिर एक पत्ते को दो जगह इस्तेमाल किए बिना समूह बनाए। आकर्षक दिखाई देने वाला जवाब बिखर गया। एक क्रम पूरा कर सकता था या सेट सुधार सकता था। सारे दावे एक साथ पूरे नहीं होते थे।

खिड़की से गुजरते आदमी ने फोन उठाया। विकास ने कागज ढकना चाहा। लीना चुप रही। धीरे धीरे उसने बाँह हटा ली। गलत हाथ अभ्यास समूह के सामने रखा रहा। शाम को पहली बार उसकी कॉपी की शुरुआत जीत से नहीं हुई। पार्सल लेने आई रेवती ने पहली पंक्ति पढ़ी, “प्योर सीक्वेंस नहीं, आकलन गलत।” उसने बिना कुछ कहे कॉपी लौटा दी।

3. जहाँ केवल अच्छा अंत नहीं चुना जाता था

आठ सप्ताह उसने ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ पूरे अभ्यास सत्र खेले जो उसे हरा सकते थे। लीना ने बैठने का क्रम खुला रखा। किसी को उसकी वापसी सुंदर दिखाने का काम नहीं दिया गया। कुछ शाम एक अच्छी जीत के बाद उठ जाने का पुराना मन होता। वह अगला हाथ खेलने बैठा रहता और अक्सर वही हार जाता।

बाद में कौन सा पत्ता आया, यह देखने से पहले वे उसके पुराने डिस्कार्ड पर चर्चा करते। इससे बाद में मददगार पत्ता मिल जाने भर से खराब निर्णय को शानदार बताना कठिन हो गया। विरोधी के खुले ढेर से उठाए पत्ते पर कोई अनुमान हो, तो विकास उसे लिखता। साथ में यह भी लिखता कि उस जानकारी से क्या साबित नहीं होता। किसी की पूरी छिपी हुई बाजी उसके सामने नहीं थी।

एक अभ्यास उसे खास तौर पर परेशान करता। लीना दो अच्छे क्रम, एक अटपटी जोड़ी और कुछ अलग पत्तों वाला हाथ देती। उसे बताना होता कि किन अलग अलग एकल ड्रॉ से घोषणा संभव होगी। फिर वह एक पत्ता बदल देती। उसे पूरा हिसाब दोबारा करना पड़ता। पसंद का पुराना जवाब दोहराने से काम नहीं चलता।

अधूरे हाथ का स्कोर भी कई वैध व्यवस्थाओं में निकाला जाता। लंबे क्रम का जोकर किसी सेट में अधिक अंक बचा सकता था, बशर्ते बाकी हाथ क्रमों की जरूरी शर्तें पूरी करे। विकास असली पत्ते गिनता, प्योर सीक्वेंस जाँचता और पूरे हाथ की तुलना करता।

सबसे खराब पन्ने भी घर ले जाता। एक शाम रेवती दस मिनट सामने बैठी। वह गलती समझाते हुए दूसरे खिलाड़ी के व्यवहार की शिकायत पर चला गया। रेवती ने अधूरे हाथ के चित्र पर उँगली रखी। विकास वापस अपने निर्णय पर आया।

4. जिस नतीजे के लिए भरोसा माँगना जरूरी नहीं था

विकास की पहली अधिकृत वापसी खुला क्वालिफायर थी। आयोजक ने निलंबन अवधि पूरी होने की पुष्टि की। फिर सामान्य पंजीकरण डेस्क से उसका नाम दर्ज हुआ। कोई विशेष परिचय नहीं कराया गया। उसकी मेज की घोषणा सुनकर दो दर्शक चले गए। सुहैल रुका रहा, हालाँकि वह दूसरी मेज पर खेल रहा था।

पहला हाथ विकास हारा। अगले में उसने अकेली बड़ी क्वीन छोड़कर दो कम अंक वाले जुड़े पत्ते रखे। बाद में ऐसा पत्ता आया जिसके साथ छोड़ी हुई क्वीन काम आ सकती थी। तुरंत मन हुआ कि पुराने निर्णय को भयानक गलती कह दे। मगर उसी समय लिखे नोट दिखाते थे कि भविष्य का ड्रॉ जाने बिना उस निर्णय का आधार क्या था। उसने नोट में बाद की जानकारी डालकर कहानी नहीं बदली।

सत्र में आगे दो हाथ जीता। कठिन अंतिम हाथ में दंड अंक घटाए। सभी डील जोड़ने पर उसका स्थान चैंपियनशिप फाइनल के लिए पर्याप्त था। आयोजक ने पूरे परिणाम लगाए। हार वाले हाथ भी उसी सूची में थे।

निकास के पास पुराने प्रदर्शनी आयोजकों में शामिल नरेन ने कंधे पर बाँह रखी। “एक अच्छी फोटो हो जाए। लोगों को सब भूलवा देंगे।”

विकास उसकी बाँह के नीचे से अलग हुआ। “स्कोर शीट बोर्ड पर है।”

उसने मुस्कराती तस्वीर नहीं दी। नरेन ने उसे एहसानफरामोश कहा। बाहर नीची दीवार पर बैठकर विकास ने साँस सामान्य होने दी। फिर वापस गया और अंतिम हाथ उतारा। विरोधी की घोषणा से पहले वह एक बेहतर व्यवस्था नहीं देख पाया था। फाइनल में पहुँचने के बाद भी उसे उस हाथ का हिसाब समझना था। वह कॉपी लेकर उसी खिड़की वाली मेज पर बैठ गया।

5. तीन कुर्सियाँ, आठ डील

फाइनल के प्रकाशित प्रारूप में तीन खिलाड़ी और आठ डील थीं। हर डील के विजेता को शून्य दंड अंक मिलते। बाकी खिलाड़ियों के अधूरे हाथ का आकलन घोषित नियमों के अनुसार होता। आठ डील के बाद सबसे कम कुल दंड वाला खिलाड़ी चैंपियन बनता। विकास के सामने सुहैल और चारु बैठे। चारु धैर्य से खेलती थी। उलझे हाथ को बहुत महँगा होने से पहले सँभालने में अच्छी थी।

विकास के पास कोई साथी नहीं बैठा था। लीना दर्शक सीमा के पीछे थी। डीलों के बीच स्कोरर कुल अंक दिखाता। खेल दोबारा शुरू होने से पहले सवाल हों तो निदेशक उनका समाधान करता।

पहली डील में विकास को अठारह अंक लगे। दूसरी में उसकी घोषणा सही रही। खुले समूह सुहैल ने उतनी ही सावधानी से जाँचे जितनी चारु के हाथों में बरतता था। उसने बिना कारण आरोप नहीं लगाया। जाँच जल्दी खत्म करने की दिखावटी उदारता भी नहीं दिखाई।

तीसरी डील में विकास एक उम्मीद भरे संबंध को एक बारी अधिक पकड़े रहा। बाईस अंक लगे। पीछे किसी ने फुसफुसाकर “प्रदर्शनी” कहा। उसने निदेशक से व्यवधान देखने को कहा। कमरा शांत हुआ, तब आगे खेला।

चौथी डील उसकी अब तक की सबसे अच्छी थी। उसने प्राकृतिक क्रम बचाया। ऐसी जोड़ी छोड़ी जो हाथ की संभावनाएँ कम कर रही थी। उपलब्ध समान सूट वाले संबंध के आधार पर हाथ फिर बनाया। घोषणा में तेरहों पत्ते वैध समूहों में थे। चारु ने व्यवस्था देखकर सिर हिलाया, फिर अपने पत्ते आकलन के लिए रखे।

विकास ने चौथी पंक्ति में शून्य लिखा। इस बार कागज का छोटा गोल निशान ऐसे हाथ का नतीजा था जो मेज पर बैठे सभी लोगों ने खुला देखा था।

6. मेज पर बने रहने की कीमत

अगली दो डीलों ने आसान चढ़ाई नहीं दी। पाँचवीं में बहुत अधिक अधूरा मूल्य पकड़े रहने से इकतीस अंक लगे। छठी में सुहैल की घोषणा के समय विकास के सत्ताईस अंक बाकी थे। उसे पत्ते सामने खोलकर आकलन सुनना पड़ा। कमरे के लोग देख रहे थे।

उसने यह नहीं कहा कि बस एक और बारी मिलती तो शानदार हाथ बन जाता। जोड़ देखने को कहा, उसकी पुष्टि की और पंक्ति पर हस्ताक्षर किए। ब्रेक में पाँचवीं डील फिर देखी। चार अलग पत्तों का बोझ घटाने के बजाय आकर्षक जोड़ी बचाए रखी थी।

पानी की मेज की ओर जाती चारु पास रुकी। “जोड़ी छोड़ने वाले थे। फिर दर्शकों को देखा।”

विकास को याद आ गया। कोई देखने के लिए पास आया था। उसे ऐसा सुंदर अंत चाहिए था जिसे देखकर लोग प्रभावित हों। उसी चाह में निर्णय बदल गया था।

सातवीं डील में उसने ध्यान जल्दी पत्तों पर लौटाया। फिर भी जीत नहीं मिली। डील खत्म होने पर उसकी सबसे अच्छी वैध व्यवस्था के बाहर Q♣, 8♦ और 2♣ बची थीं। दस, आठ और दो। स्कोरर ने उस डील के बीस अंक दर्ज किए।

अब उसके सात नतीजे थे 18, 0, 22, 0, 31, 27 और 20। सुहैल का कुल 112 था। चारु का 121। आखिरी डील की तैयारी के दौरान विकास अपना कॉलम जोड़ रहा था। उसके नाम के सामने घोषित कुल 108 आया।

पेंसिल रुक गई। उसने सातों संख्याएँ फिर जोड़ीं। पहले अठारह और बाईस, फिर इकतीस, सत्ताईस और बीस। शून्य वाली दोनों पंक्तियाँ भी अपनी जगह थीं। वास्तविक कुल 118 था। वह कुछ क्षण उसी संख्या को देखता रहा।

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7. अपने खिलाफ दस अंक

“मेरा कुल फिर जाँच दीजिए,” विकास ने कहा।

स्कोरर कागज पर झुका। “आखिरी हाथ बीस का था।”

“हाँ। हाथ सही है। जोड़ में दस कम हैं।”

एक क्षण लगा पूरा कमरा उसकी तरफ झुक आया है। दिखाई गई संख्या पर वह सबसे आगे था। सही संख्या पर सुहैल से छह अंक पीछे और चारु से तीन आगे। निदेशक ने हस्ताक्षर वाली हर पंक्ति जाँची। अगले शफल से पहले उसका कुल 118 कर दिया गया।

पीछे किसी ने कहा कि ईमानदारी का अभिनय भी हो सकता है। विकास ने सुन लिया। पेंसिल पकड़े हाथ ठंडे हो गए। मन हुआ मुड़कर हर कठिन अभ्यास शाम बताए, हर बंद दरवाजे की कहानी सुनाए। उसने संशोधित कागज सीधा रखा और सुधार के पास हस्ताक्षर कर दिए।

सुहैल ने सातों पंक्तियाँ देखीं। “एक सौ अठारह,” उसने पुष्टि की। फिर डीलर ने फेंटा पैक आगे किया तो सामान्य ढंग से कट लगाया।

निदेशक ने कमरे को सही स्थिति बताई। ताली नहीं बजी। विकास को पत्ते बाँटे जाने की साधारण आवाज बेहतर लगी। उसने सूट अलग किए, तेरह पत्ते गिने और इस हाथ का वाइल्ड रैंक जाँचा। इक्के वाइल्ड थे। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार प्रिंटेड जोकर भी इस्तेमाल हो सकते थे।

पहला उपयोगी समूह दिल वाले चार पत्तों का था: 8♥, 9♥, 10♥ और J♥। उसने उन्हें उसी सूट में क्रम से रखा और स्कोरबोर्ड देखना बंद किया। छह अंक का अंतर पूरी डील में हल होना था। उसने उँगली हटाई ताकि किसी पत्ते को समूह में मानते हुए गलती से दूसरे समूह में भी न गिने। इस बार कोई कागजी मुस्कान उसका हाथ पूरा नहीं करने वाली थी।

8. वह डिस्कार्ड जो सुहैल ने उठा लिया

दिल वाले क्रम के साथ विकास के पास 5♣, 6♣, 7♣, एक प्रिंटेड जोकर और 9♣ थे। जोकर 8♣ का स्थान ले सकता था। बाकी पत्ते K♣, K♦, 2♦ और 4♠ थे। एक प्योर सीक्वेंस और दूसरा क्रम पहले से मौजूद था। लेकिन बाकी पत्ते वैध समूह नहीं थे। सुंदर ढंग से रख देने पर वह कमी नहीं मिटती थी।

बंद पैक से Q♥ आई। उसने दिल का क्रम पाँच पत्तों तक बढ़ाया और अलग पड़ी 4♠ छोड़ दी। अब उपयुक्त सूट का किंग सेट पूरा कर सकता था। 8♣ आती तो चिड़ी का क्रम प्राकृतिक बनता और जोकर किंगों के साथ लग सकता था। दोनों रास्ते उसने खुले रखे। किसी भी रास्ते से यह पता नहीं चलता था कि बंद पैक वास्तव में कौन सा पत्ता देगा।

आगे की बारी में सुहैल ने खुले डिस्कार्ड से 9♦ उठाई। विकास ने ध्यान रखा। अपनी अगली बंद ड्रॉ में उसे 10♦ मिली। उसे छोड़ना खतरनाक लग रहा था। वह सुहैल के ईंट वाले संबंध में मदद कर सकती थी। मगर रखने के लिए विकास को अपनी उपयोगी बनावट बिगाड़नी पड़ती या अधिक अधूरा मूल्य पकड़ना पड़ता।

उसने अपने हाथ के वास्तविक पत्तों की तुलना की। फिर 10♦ छोड़ दी।

सुहैल ने तुरंत उठा ली। दर्शक सीमा के पीछे कुर्सी खिसकी। विकास का पेट कस गया। मगर सुहैल का हाथ अभी समाप्त नहीं हुआ था। उसने घोषणा करने के बजाय पत्ता छोड़ा। चारु ने अपनी बारी खेली। वह अपने हाथ को देख रही थी, दोनों पुरुषों में से किसी को आश्वासन नहीं दे रही थी।

विकास के छोड़े पत्ते ने प्रतिद्वंद्वी की मदद की थी। अब उसकी अगली बारी आ गई। उसने उसी हाथ से बंद पैक की तरफ हाथ बढ़ाया जिससे कभी अभ्यास की गलतियाँ ढकता था।

9. खुले हुए तेरह पत्ते

नया पत्ता K♠ था।

विकास सीधे घोषणा पर नहीं गया। ड्रॉ के बाद हाथ गिना। चौदह पत्ते थे। 2♦ अलग की, जिसे छोड़ा जा सकता था। बाकी में दिल के पाँच, चिड़ी के पाँच और तीन किंग थे। उसने किसी पत्ते को एक समूह से उठाकर दूसरे में उधार लिए बिना दोबारा गिना।

फिर 2♦ छोड़ी और घोषित प्रक्रिया के अनुसार अपनी घोषणा की।

दिल के पत्ते एक प्राकृतिक कतार में खुले: 8♥, 9♥, 10♥, J♥, Q♥। चिड़ी की कतार थी 5♣, 6♣, 7♣, प्रिंटेड जोकर, 9♣। यहाँ जोकर 8♣ का स्थान ले रहा था। आखिरी समूह K♣, K♦, K♠ था। तीन अलग सूटों के तीन किंग। कुल तेरह पत्ते। दो क्रम, जिनमें एक प्योर था, और एक वैध सेट।

निदेशक ने हर समूह जाँचा। चारु आगे झुकी, फिर अपनी कुर्सी पर पीछे हुई। सुहैल ने जोकर की जगह और तीनों किंगों के सूट देखे। फिर अपना अधूरा हाथ सामने खोला।

उठाई गई 10♦ ने उसका ईंट का क्रम पूरा करने में मदद की थी। पूरा हाथ नहीं बना था। सबसे अच्छी अनुमत व्यवस्था में भी 6♠ और 10♠ बाहर बचीं। सोलह अंक। चारु की बची 3♦ और 5♦ के आठ अंक लगे।

अंतिम कुल एक एक करके लिखे गए: विकास 118, सुहैल 128, चारु 129।

विकास ने पहले सुधारा हुआ सात डीलों का कुल देखा। फिर उसके पास नया शून्य। पहले छूटे दस अंक जोड़ने के बाद भी चैंपियनशिप में दस अंक की बढ़त थी। मेज के उस पार सुहैल ने स्कोर शीट उसकी तरफ बढ़ाई। “अपने नतीजे पर हस्ताक्षर करो।” विकास ने पेंसिल उठाई। इस बार हाथ ठंडा नहीं था।

10. शेल्फ पर दूसरी चीज

विकास ने हस्ताक्षर किए। तालियाँ चारु की तरफ से शुरू हुईं और कमरे में फैल गईं। दर्शक सीमा के पीछे लीना खड़ी होकर ताली बजा रही थी। उसके पास रेवती थी। दोपहर की नौकरी वाला पहचानपत्र अब भी गले में लटका था। विकास को नहीं पता था कि वह काम से सीधे यहाँ आएगी।

पुरस्कार देते समय वापसी का सवाल पूछा गया। उसने नरेन को दोष देकर जवाब नहीं शुरू किया। अतीत में अपनी निर्दोषता की नई कहानी भी नहीं बनाई। “मैंने निलंबन पूरा किया। अभ्यास किया। ये आज के पूरे परिणाम हैं।” उसने शीट उठाई। इकतीस और सत्ताईस वाली पंक्तियाँ भी दिखाई दे रही थीं।

सुहैल ने उसका बढ़ा हुआ हाथ लिया। “रविवार को पाँचवीं डील लाना,” उसने कहा। “बीच में एक जगह तुमने हाथ और खराब कर लिया था।”

विकास अचानक हँस पड़ा। इतनी जोर से कि आँखें चुभ गईं। “वह जगह पता है।”

“तो पत्ते भी लाना।”

घर में वह खाने की मेज साफ कर रहा था। रेवती ने अलमारी खोलकर टूटा पुराना कप उसके पास रखा। विकास ने उसे लपेटा। प्रदर्शनी के बचे कार्यक्रम उसी डिब्बे में रखे और ढक्कन बंद कर दिया। उस बंडल की कोई चीज वापस सजाने नहीं रखी।

चैंपियनशिप की स्कोर शीट प्रिंटिंग काउंटर के साधारण फ्रेम में आ गई। उसने शेल्फ पर रखी। संशोधित 118 साफ दिखाई दे रहा था। नया कप बगल में रखा, जिसके दोनों हत्थे सलामत थे।

रविवार को विकास जल्दी अभ्यास कक्ष पहुँचा। सुहैल खिड़की वाली जगह पर पहले से बैठा था। विकास ने पाँचवीं डील फिर बनाई। वे चार अलग पत्ते भी सामने रखे जिन्हें भूल जाना चाहता था। फिर सुहैल के सामने की कुर्सी खींचकर बैठ गया। कॉपी खुली थी। पहली पंक्ति लिखने से पहले उसने पूरे हाथ को एक बार और देखा।

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