1. Hindi 777 कथा: जूतों के पास रखी बिसात
क्लब के सचिव ने काव्या की शतरंज की बिसात जूतों की रैक के पास रख दी। “स्टाफ यहाँ इंतज़ार कर सकता है,” उसने कहा। उसकी निगाह काव्या के पीछे आने वाले लोगों पर थी।
काव्या चयन मुकाबला खेलने भोपाल के दूसरे छोर से आई थी। बुलावे का ईमेल प्लास्टिक की फाइल में रखा था। उसके पिता ने फाइल का फटा किनारा सिला था, उस पक्षाघात से पहले जिसने उनकी आवाज़ छीन ली। घर में अब उनकी दवाइयाँ थीं और शाम की ट्यूशन से आने वाले पैसे अगली दवा तक मुश्किल से पहुँचते थे।
उसने ईमेल दिखाया। सचिव ने उसकी घिसी चप्पलें देखीं, फिर निमंत्रण। जैसे दोनों में से किसी एक का झूठा होना ज़रूरी था।
अंदर संरक्षक देव मल्होत्रा अरमान का परिचय करा रहा था। वही क्लब का अगला प्रमुख खिलाड़ी बनने वाला था। काव्या ने हिंदी में अपनी बिसात का नंबर पूछा तो देव दर्शकों की ओर मुस्कराया।
“हमें ऐसा खिलाड़ी चाहिए जो हमारा प्रतिनिधित्व कर सके। जिसे हर वाक्य समझाना न पड़े।”
काव्या उसकी अंग्रेज़ी समझती थी। शत्रुतापूर्ण निगाहों के सामने उसी भाषा में सहज जवाब देना अलग बात थी। तीन लोग हँसे। अरमान नहीं हँसा, लेकिन उसने नज़र भी नहीं हटाई।
काव्या बैठ गई। अच्छी स्थिति मिलने के बाद उसने सचिव को पीछे खड़ा देखा। घबराहट में जल्दी चली और अपना हाथी असुरक्षित छोड़ दिया। अरमान ने उसे मार लिया।
हार स्वीकार करने के बाद देव ने उसका निमंत्रण बैग के पास फर्श पर रख दिया। “पहले ठीक से जवाब देना सीखिए।”
काव्या कागज़ उठाने झुकी। पीछे लोग उसकी हार समझाने लगे, जैसे वह वहाँ थी ही नहीं।
ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी चाहिए? नीचे अपनी पसंद की कम्युनिटी चुनें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप
2. वह चाल जिसे माफ़ करना कठिन था
घर की रसोई में पिता ने उस खाली खाने को छुआ जहाँ उसका हाथी था। स्टील के गिलास और दवा के डिब्बे के बीच काव्या ने पूरी बाज़ी फिर लगा दी थी।
“मैंने उसे पीछे देखा,” उसने कहा। “फिर बिसात देखना बंद कर दिया।”
पिता बोल नहीं सकते थे। उन्होंने पहले उस काले घोड़े को छुआ जो वज़ीर पर हमला कर रहा था, फिर असुरक्षित हाथी को। दोहरा हमला छिपा हुआ नहीं था। अपमान ने उसे जाँचने से पहले चाल चलवा दी थी।
यह किसी बदकिस्मत हार से अधिक कड़वा सच था।
फोन में उसने हिंदी में शतरंज समझाने वाली सामग्री का एक फोल्डर बनाया था। उस रात उसने उसमें रखे प्रेरणादायक वाक्यों के चित्र मिटा दिए। सिर्फ वे स्थितियाँ बचाईं जिन्हें वह हल नहीं कर पाई थी।
कॉपी के पहले पन्ने पर उसने तीन सवाल लिखे। पिछली चाल से क्या बदला? सामने वाला क्या धमकी दे रहा है? मेरा पहला विचार गलत हो तो क्या होगा?
पहला अभ्यास चालीस मिनट चला। चार सवाल बने, सात गलत हुए। अगले दिन ट्यूशन के नोट्स खोलने से पहले उसने वही सात सवाल दोहराए।
एक सप्ताह बाद क्लब ने अरमान की तस्वीर लगाई—हमारा स्वाभाविक चैंपियन। काव्या पेज बंद करने वाली थी। फिर तस्वीर में दिख रही चालों की शीट बचाकर बाज़ी पढ़ने लगी।
तेईसवीं चाल पर अरमान ने मुश्किल बचाव करने के बजाय बराबरी का प्रस्ताव दिया था। सामने वाले ने मान लिया था।
काव्या ने उस चाल के चारों ओर गोला बना दिया।
3. तारीफ़ करने से इनकार करने वाली महिला
रेलवे की पूर्व खिलाड़ी शालिनी काव्या से नगरपालिका के वाचनालय में मिलीं। उन्होंने उसकी दो बाज़ियाँ देखीं। किसी की तारीफ़ नहीं की।
“तुम हमला इसलिए करती हो कि कमरे में हँसी रुक जाए,” उन्होंने कहा। “इसलिए तुम्हारी अगली चाल समझना आसान है।”
काव्या ने विरोध किया। शालिनी ने ऐसी स्थिति लगाई जिसमें वज़ीर की कुर्बानी देकर मात होती दिखाई देती थी। काव्या ने लगातार तीन शह खोज लीं और मुस्कराई।
“अब काले राजा को दूसरे खाने पर चलाओ।”
हमला गायब हो गया। काव्या का वज़ीर बस चला गया था।
छह सप्ताह तक शालिनी ने उसे ऐसे सवाल दिए जिनके बारे में पहले नहीं बताया जाता था कि हमला करना है, बचाव करना है या मोहरे बदलने हैं। काव्या को शांत चालों वाले सवाल सबसे बुरे लगते। वे दिखाते थे कि वह सामान्य सुधार को कितनी बार डरपोक चाल समझ लेती थी।
उसने गणना की गलतियाँ और भावनाओं से हुई गलतियाँ अलग लिखनी शुरू कीं। घोड़ा असुरक्षित छोड़ना पहले खाने में आता। सामने वाला ऊबा हुआ दिखे इसलिए हमला करना दूसरे में।
ट्यूशन बढ़ गई। कभी आधी रात को पिता की साँसों की आवाज़ सुनते हुए वह एंडगेम पढ़ती। एक बार बिसात पर सो गई और गाल पर हाथी का निशान लेकर उठी।
अगली शाम शालिनी ने उसे बीस चालों में हरा दिया। “घर जाओ और सोओ। थककर गिरना अभ्यास का तरीका नहीं है।”
काव्या ने विद्यार्थियों का समय छह शामों से बदलकर चार शामों में किया। सुधार का वर्णन कम रोमांचक हुआ, लेकिन उसे मापना आसान हो गया।
4. पहला जवाब बिसात पर
मोहल्ले की प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय का एक छात्र उसके सामने बैठा। शुरुआती चालें वह लगभग बिना देखे चल रहा था। उसने काव्या के राजा की ओर प्यादा बढ़ाया और उत्तर आने से पहले पानी उठाने लगा।
पुरानी काव्या इससे बड़ी धमकी देकर जवाब देती।
इस बार उसने गिना। हमला करने वाले घोड़े के लौटने के तीन खाने थे। दो पहले से नियंत्रित थे। उसने पेश किया प्यादा लेने के बजाय अपना प्यादा बढ़ाकर तीसरा रास्ता बंद कर दिया।
लड़के ने पानी का गिलास नीचे रख दिया।
घोड़ा बचाने के लिए उसे ऊँट देना पड़ता। उसने हताश होकर हमला जारी रखा। काव्या ने वज़ीर बदले, अपने मोहरे खोलने के लिए एक प्यादा लौटाया और आखिरी चरण जीत लिया।
वह चौथे स्थान पर आई। ट्रॉफी नहीं मिली। लेकिन उसने वैसी स्थिति जीती थी जिसे पहले खुद बिगाड़ देती थी।
अगले रविवार फिर बुरी हार हुई। प्रतिद्वंद्वी ने सक्रिय हाथियों के बदले एक प्यादा छोड़ा। काव्या तीस चाल तक अतिरिक्त प्यादा बचाती रही और उसका राजा कैदी बन गया।
शालिनी ने वही स्थिति दोबारा खेलवाई, इस बार अतिरिक्त प्यादा हटाकर। “अब कौन सी तरफ खेलना चाहोगी?”
काव्या ने सक्रिय हाथियों की ओर इशारा किया।
उसकी कॉपी में पहली बार लिखा गया—कभी हर चीज़ बचाने की कोशिश ही सब कुछ हरवा देती है।
उसने चौथे स्थान की तस्वीर नहीं डाली। हाथियों वाली स्थिति पोस्ट की, हिंदी में अपनी गलत समझ बताई और दूसरों से सुधार माँगा।
5. देव की शर्त से बाहर
ज़िले की आमंत्रण प्रतियोगिता में हाल के क्वालिफाइंग नतीजों के आधार पर आवेदन स्वीकार हुए। सोलह खिलाड़ियों की सूची में काव्या का नाम था। अरमान सबसे ऊँची वरीयता पर था।
देव ने खुद फोन किया। “वैकल्पिक खिलाड़ी के रूप में हमारे साथ आ सकती हो। क्लब की पोशाक पहनना। तुम्हारे प्रस्तुत करने के तरीके पर भी काम कर देंगे।”
“मेरी व्यक्तिगत जगह पहले ही तय है।”
“लेकिन किसके साथ जुड़ी हो, उससे फर्क पड़ता है।”
काव्या ने मेज़ पर रखी फाइल देखी। सिला हुआ किनारा दोपहर की रोशनी में चमक रहा था। “जगह मेरे नतीजों से मिली है। कपड़े चाल नहीं बदलेंगे।”
देव का स्वर सख्त हुआ। “कुछ स्थानीय जीतों को तैयारी मत समझ लेना।”
काव्या ने मना किया और सफाई देने से पहले फोन रख दिया।
अब तैयारी अधिक केंद्रित हुई। शालिनी ने अरमान की उपलब्ध बाज़ियाँ जुटाईं। साफ लक्ष्य मिलने पर वह शानदार गणना करता था। ऐसी स्थितियों में अधीर होता था जहाँ उपयोगी चाल सिर्फ प्रतिद्वंद्वी की सक्रियता रोकती थी।
यह कोई जादुई कमजोरी नहीं थी। इसका फायदा लेने से पहले काव्या को उसकी अच्छी चालों का सामना करना था।
उन्होंने बिना वज़ीर वाले मध्य खेल, हाथी के अंत और खराब ऊँट वाली स्थितियाँ खेलीं। शालिनी अरमान की तरफ से आक्रामक खेलतीं। दो बार प्यादे की ऐसी तोड़ ने काव्या की तैयारी खत्म की जिसे उसने महत्व नहीं दिया था।
तीसरी कोशिश में उसने अपनी स्थिति सुधारने से पहले वही तोड़ रोकी। पिता कुर्सी से देख रहे थे। काव्या ने ऊपर देखा तो उनका अच्छा हाथ मेज़ थपथपा रहा था।
6. लंबी प्रतियोगिता की कीमत
पहला दौर काव्या जीती, दूसरा बराबर रहा। तीसरे में ऊँट बचाने वाली पीछे लौटने की चाल नहीं देखी और हार गई। रात के खाने का पहला कौर भी मुश्किल से निगला।
देव अरमान से मिलने जाते समय उसकी मेज़ के पास रुका। “लंबी प्रतियोगिताएँ असली अंतर दिखाती हैं।”
काव्या वह वाक्य पत्थर की तरह लेकर कमरे में गई। बीस मिनट तक उसने सोचा कि अगली बाज़ी में कोई बिल्कुल आक्रामक शुरुआत करेगी, जिसे देखकर सब चौंक जाएँ।
फिर कॉपी खोली। भावनाओं वाली गलतियों के नीचे लिखा—कल की बाज़ी उस आदमी को जवाब देने के लिए तैयार कर रही हूँ जो उसे खेल ही नहीं रहा।
अगली सुबह सामने वाली खिलाड़ी ने जल्दी वज़ीर बदलने का प्रस्ताव रखा। काव्या ने स्वीकार किया। उस स्थिति में न मनचाही तालियाँ थीं, न डरावना विनाश। तीन घंटे का सावधान काम था।
उसने कमजोर प्यादे को काले खाने पर रोका, राजा आगे लाया और वह ऊँट नहीं बदला जो प्यादे पर हमला कर सकता था। प्रतिद्वंद्वी आखिरी आधे घंटे तक बचती रही। आखिर दो दूर स्थित प्यादों में से एक छोड़ना पड़ा।
काव्या जीत गई। पाँचवें दौर में सामरिक जीत मिली। आखिरी दौर से पहले वह अरमान से आधा अंक पीछे थी। लिफ्ट के पास दोनों की जोड़ी लगी थी।
बराबरी उसे विजेता बना देती। काव्या को जीत चाहिए थी।
अरमान ने सूची देखी। “खतरे तो उठाने पड़ेंगे।”
“हाँ,” काव्या ने कहा। “लेकिन कौन से खतरे, यह मैं चुनूँगी।”
नई गतिविधियों और ऐप अपडेट के लिए अपना पसंदीदा चैनल देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप
7. बिसात के उस पार से प्रस्ताव
काले मोहरों से अरमान की शुरुआत दरवाज़े बंद करने जैसी थी। उसने एक जोड़ी छोटे मोहरे बदले और दोनों राजाओं पर सीधा हमला होने से पहले वज़ीर बदलने का अवसर दे दिया।
देव रस्सी के पीछे हाथ बाँधे खड़ा था। हर अदला-बदली पर उसका चेहरा थोड़ा और निश्चिंत हो जाता।
काव्या वज़ीर रखकर हमले की संभावना बचा सकती थी। लेकिन वह यह भी देख रही थी कि अरमान उससे यही उम्मीद कर रहा था। जिसे जीतना है वह किसी कीमत पर वज़ीर नहीं बदलेगी।
उसने वज़ीर बदल दिए।
किसी दर्शक ने आह भरी। काव्या ने ध्यान नहीं दिया। उसके ऊँट के लिए खुले विकर्ण थे। अरमान का ऊँट अपने प्यादों के पीछे बंद था। तुरंत कुछ तोड़ना संभव नहीं था, लेकिन वज़ीर हटने से उस स्थिति के सवाल खत्म नहीं हुए थे।
चाल पूरी करके अरमान ने बराबरी की पेशकश की।
काव्या ने कुछ पल बिसात देखी, फिर मना किया। इस जवाब को भी वह देव के लिए किया गया प्रदर्शन नहीं बनने देना चाहती थी।
उसने खुली फाइल पर दोनों हाथी लगाए। अरमान ने विरोध किया। काव्या ने एक जोड़ी हाथी बदले और उसके वापस मारने में लगे समय का उपयोग राजा को केंद्र की ओर लाने में किया।
अरमान आगे झुक गया। पहली बार उसे दो छोटी रियायतों में चुनना पड़ा। काव्या के राजा को अंदर आने दे या प्यादा चलाकर उसके ऊँट को नया निशाना दे।
उसने प्यादा चलाया। काव्या ने नई कमजोरी याद रखी। अभी उसे छुआ नहीं।
8. जिस चाल पर ताली नहीं बजी
काव्या ने अपना हाथी दूसरी तरफ भेज दिया।
वह पीछे हटना लगा। देव ने पड़ोसी से कुछ कहा। अरमान ने प्यादा बढ़ाकर जगह ली और उसके राजा की ओर रास्ता खोलने की धमकी बनाई।
काव्या ने बारह मिनट गणना की। असली खतरा पहली शह नहीं था। उसके बाद हाथी का अंदर घुसना था। उसने ऊँट एक खाना पीछे किया। प्रवेश का खाना सुरक्षित हो गया और नई कमजोरी पर दबाव भी बना रहा।
ताली नहीं बजी। कोई मोहरा मरा भी नहीं था।
अरमान के पास इकतीस मिनट थे। वह स्थिति संभालकर रख सकता था। लेकिन ऐसा करने का मतलब था उस खिलाड़ी के खिलाफ लंबा बचाव, जिसे उसका संरक्षक खुलेआम कमतर बता चुका था। उसने प्यादा फिर आगे बढ़ाया।
इस बार अदला-बदली काव्या की शर्तों पर हुई। प्यादे हटे तो उसका हाथी बगल से हमला कर सकता था। अरमान का ऊँट आगे वाला प्यादा बचा सकता था या पीछे वाला। दोनों को बिना सहायता नहीं बचा सकता था।
वह राजा इधर लाया। काव्या ने निशाना बदल दिया।
पहला प्यादा गिरा। अरमान ने तुरंत उसके आखिरी किंगसाइड प्यादे पर हमला किया। काव्या ने उसे लेने दिया। उसे बचाने के लिए सक्रिय हाथी पीछे बुलाना पड़ता, और वही सक्रियता उसकी बढ़त का आधार थी।
अब हाथी, ऊँट और कम प्यादे बचे थे। अरमान हारा नहीं था। वह पूरी एकाग्रता से शह खोज रहा था।
काव्या को यह अच्छा लगा। आखिर वह उसे अपना पूरा खेल दे रहा था।
9. जब घड़ियों की आवाज़ सुनाई देने लगी
एक जल्दी दी गई शह लगभग सब कुछ ले गई।
काव्या का हाथ राजा की ओर उठा, लेकिन मोहरा छूने से पहले रुक गया। सीधा दिखाई देने वाला खाना चुनने पर अगली शह से राजा हटता और पीछे रखा हाथी मारा जाता।
उसने दोनों हाथ गोद में रखे और दोबारा गणना की।
सुरक्षित खाना कम सक्रिय लग रहा था। लेकिन वहाँ से हाथी बचता था। उसने वही चुना।
अरमान के कंधे मामूली से ढीले पड़े। उसने भी जाल देखा था।
काव्या ने आगे निकल चुके प्यादे को तभी बढ़ाया जब हाथी पीछे से उसकी सहायता कर सकता था। अरमान ने ऊँट से रास्ता रोका। काव्या राजा को ऊँट की ओर लाई। अब उसका हाथी दूसरे प्यादों पर हमला करने के बजाय लगातार शह देने को मजबूर हुआ।
वे अगले समय नियंत्रण तक पहुँचे। घड़ियों में नए मिनट आए। कुछ देर दोनों शांत बैठे रहे।
फिर अरमान ने सबसे मजबूत बचाव चुना। खतरनाक प्यादे के बदले ऊँट देकर सक्रिय हाथी से लड़ना। काव्या सावधान रही। हाथी और ऊँट का अकेले हाथी के विरुद्ध होना अपने आप जीत नहीं देता।
लेकिन बिसात के दूसरे छोर पर एक प्यादा और बचा था।
उसने ऊँट से शह का रास्ता ढका, राजा को घेरे से निकाला और दूसरे प्यादे को आगे ले गई। उसे वज़ीर बनने से रोकने के लिए अरमान के हाथी को शह छोड़नी पड़ी।
तभी काव्या ने उसका हाथी जीता।
अरमान ने स्थिति देखी, साँस छोड़ी और हाथ आगे बढ़ाया। काव्या ने किसी और की ओर देखने से पहले उससे हाथ मिलाया।
10. उसका नाम, बिना किसी सफाई के
तालियाँ पीछे से शुरू हुईं, जहाँ शालिनी खड़ी थीं। काव्या उठी तो दूसरे बोर्डों पर घूमने वाले लोग भी उसकी बिसात के पास लौट आए।
अरमान चालों की शीट के पास खड़ा रहा। पहले पूछने वाले से उसने कहा, “उसने मुझसे अच्छा खेला। इसे मेरी एक गलती मत कहिए।”
देव तस्वीर के लिए तैयार मुस्कान लेकर आया। वह काव्या के पास की जगह लेने लगा, जैसे उसकी जीत हमेशा से क्लब की तस्वीर का हिस्सा रही हो।
आयोजक ने उसे अलग होने को कहा। पहली तस्वीर सिर्फ चैंपियन की ली जा रही थी।
देव हट गया।
वह छोटी सी हरकत देखकर काव्या के भीतर कुछ खुला, जिसे कोई ट्रॉफी छू नहीं सकती थी।
माइक पर उसने हिंदी में शालिनी और पिता को धन्यवाद दिया। फिर वह शांत चाल समझाई जिसमें ऊँट पीछे गया था और हाथी के रास्ते की रक्षा हुई थी। भाषा के लिए उसे माफ़ी नहीं माँगनी पड़ी।
किसी ने अंग्रेज़ी में समझाने को कहा। अरमान ने उसका स्पष्टीकरण सही-सही अनुवाद किया, फिर पूछा कि कुछ छूटा तो नहीं।
“नहीं,” काव्या ने कहा। “यही स्थिति थी।”
रात में पिता ने पदक अपने अच्छे हाथ में पकड़ा। काव्या ने अभ्यास का फोल्डर खोला और पूरी बाज़ी रख दी। वह पल भी रखा जब वह लगभग हाथी खो देने वाले जाल में चली गई थी।
सिले किनारे वाला निमंत्रण मेज़ पर पड़ा रहा।
कमरे में अपना अधिकार साबित करने के लिए अब उसे उसकी ज़रूरत नहीं थी।
आगे जानना चाहते हैं? ऐप की जानकारी और साझा ऑफ़र की शर्तें चैनल पर देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप