1. IC7 Game कथा: वह नाम जिसे सुनना नहीं चाहते थे
डबल्स प्रवेश में अपने नाम के पास दर्शन लिखा देखकर इकबाल ने फॉर्म वापस माँगा।
“नहीं।”
सामुदायिक क्लब सचिव ने कागज़ दूर रखा। “खेलने वाला साथी माँगा था। इसे खेलना आता है।”
“दूसरों की नौकरी जाने वाली सूची पर हस्ताक्षर भी आते हैं।”
दर्शन दरवाज़े पर था। इतना सुन चुका था कि बात उसके बारे में है। अनजान बनना संभव नहीं था।
तीन साल पहले वह उस कारखाने का शिफ्ट फोरमैन था जहाँ इकबाल उपकरण सँभालता था। कंपनी ने लोग कम किए तो दर्शन ने ऊपर से बनी सूची पर हस्ताक्षर किए। उसमें इकबाल था। वे लोग भी थे जिनके साथ दस साल खाना खाया था।
एक साल बाद कंपनी ने दर्शन को भी निकाल दिया।
खबर सुनकर इकबाल को उम्मीद जितनी खुशी नहीं हुई। उसका अपना परिवार पहली छँटनी की कीमत दे रहा था। दूसरे का दुख खोया महीना वापस नहीं लाया।
अब कंपनी क्लब ने दोनों को अभ्यास कक्ष से मना किया था। नोटिस में वे असंबद्ध आगंतुक थे। नाम जानने वाले गार्ड ने सड़क पार सार्वजनिक मनोरंजन हॉल की ओर इशारा किया।
शहर का कैरम डबल्स कप छह महीने बाद था। दोनों के पास साथी नहीं था।
दर्शन अंदर आया। “एक-दूसरे को अभ्यास के बाद भी नापसंद कर सकते हैं।”
इकबाल ने फॉर्म ले लिया। हस्ताक्षर अभी नहीं किए। उसके हाथ में कागज़ था और आँखों के सामने पुरानी सूची।
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2. पीछे लिखी शर्तें
पहला समझौता प्रवेश शीट के पीछे आ गया।
बोर्ड के दौरान पुराने कार्यस्थल की बात नहीं। तस्वीरों के लिए दोस्त होने का दिखावा नहीं। चूके शॉट से हर पुरानी शिकायत खोलने की अनुमति नहीं। पहले महीने के बाद कोई भी साझेदारी समाप्त कर सकता है।
इकबाल ने हस्ताक्षर किए। नीचे दर्शन ने।
उम्र इकतालीस और तैंतालीस थी। जानते थे नियम भरोसा नहीं बना सकते। कम से कम हर शाम बीच में कैरम रखकर होने वाला झगड़ा रोका जा सकता था।
इकबाल जल्दी हमला करता। साफ स्ट्रोक से सामने वाला संभले उससे पहले कई गोटियाँ डाल सकता था। दर्शन बेहतर देखता कि चूक के बाद गोटियाँ कहाँ रहेंगी। वह कठिन हमले को अनावश्यक जोखिम भी जल्दी मान लेता।
पहली अभ्यास जोड़ी ने दोनों आदतें टकराकर हराया।
इकबाल ने जोर से समूह खोला। दर्शन को ऐसा बोर्ड मिला जिसमें दूसरी जोड़ी के आसान निशाने थे। बाद में दर्शन का अत्यधिक सावधान स्ट्रोक इकबाल के लिए उपयोगी आगे का रास्ता नहीं छोड़ पाया।
बाद में इकबाल बोला, “अभी भी ऐसे आदेश देते हो जिनकी कीमत दूसरा चुकाए।”
दर्शन ने समझौता देखा। “यह बोर्ड के बाहर है। बताओ कि तुम्हारे लिए क्या छोड़ा।”
इकबाल अंतर मानना नहीं चाहता था। फिर गोटियाँ वापस रखकर दिखाया।
पहली बार बहस व्यक्ति पर नहीं, स्थिति पर खत्म हुई। जाने से पहले उन्होंने उसी जगह को दो बार और खेला।
3. एक गलती के चार पक्ष
फोन स्टैंड उधार लेकर बोर्ड ऊपर से रिकॉर्ड किया। फिर हर महत्वपूर्ण स्थिति उस सीट से देखी जहाँ खिलाड़ी को फैसला करना था।
इकबाल की तरफ आसान गोटी दर्शन से रुक सकती थी। दर्शन का सुरक्षित धक्का अगले विरोधी को सीधा पॉकेट दे सकता था।
अभ्यास शीट पर बारी का क्रम लिखा। डबल्स में अगला खिलाड़ी दाहिनी तरफ होता है। साथी के लिए योजना में बीच के विरोधी की बारी भी गिननी थी।
वास्तविक बोर्ड में एक-दूसरे से बात या संकेत नहीं कर सकते थे। समझ स्ट्रोक से पहले बनी होनी चाहिए थी।
इकबाल नियंत्रित खोलने का अभ्यास करने लगा। एक गोटी मुक्त करो, बाकी जहाँ उपयोगी हैं वहीं रहने दो। दर्शन उपलब्ध रन लेने लगा, बाद का शॉट कठिन होगा इसलिए तुरंत टर्न छोड़ने के बजाय।
सफल प्रयास गिने। यह भी दर्ज किया कि स्ट्राइकर कहाँ रुका। पॉकेट के बाद खराब स्थिति उतनी पूरी सफलता नहीं थी जितनी पहले लगती।
कुछ शाम खामोश समाप्त हुईं। खामोशी धीरे बदली। हमेशा सज़ा नहीं थी। कभी दोनों एक ही गलती समझ रहे थे।
चार सप्ताह बाद दर्शन समझौता लाया। “कहा था छोड़ सकते हैं।”
इकबाल ने दीवार पर अगली बुकिंग देखी। “गुरुवार अभी खाली है।”
दर्शन ने कागज़ मोड़ दिया। किसी ने मित्रता घोषित नहीं की। उन्होंने अगली तारीख लिखी और उस दिन के गलत रिबाउंड का वीडियो दोबारा देखा। अब कम से कम दोनों उसी शॉट की बात कर रहे थे।
4. गेट के बाहर की तस्वीर
कप से पहले कंपनी क्लब ने प्रचार शाम रखी। प्रमुख जोड़ी अरविंद और बोस नए बोर्ड के पास फोटो दे रहे थे। पुराने कर्मचारी सामने मनोरंजन हॉल से देख रहे थे।
इकबाल ने पीछे ट्रॉफी की अलमारी पहचानी। जब कमर जवान थी और नौकरी स्थायी लगती थी, उसने ऊपर चढ़ाने में मदद की थी।
अरविंद ने दोनों को देखा और पुकारा। “टीम बना ली? शिकायत विभाग की भी डबल्स जोड़ी हो गई।”
कुछ लोग हँसे। बोस असहज दिखा, मजाक नहीं रोका।
दर्शन गेट की ओर बढ़ा। इकबाल ने बाँह पकड़ी, फिर तुरंत छोड़ी। “हमारी सफाई देने अंदर मत जाओ।”
वे उधार के बोर्ड पर लौटे। उस शाम इकबाल अधिक जोर लगा रहा था। सामान्य शॉट चूक रहे थे। दर्शन कारण जानता था। जानने से चूक उपयोगी नहीं बनती थी।
तीसरे हारे बोर्ड के बाद उसने स्ट्राइकर रख दिया।
“सूची पर मैंने हस्ताक्षर किए थे। अपनी जगह जाने से डरता था। यह नहीं कहूँगा कि कोई विकल्प नहीं था।”
इकबाल उसे देखता रहा। बहाने के लिए इतनी बार तैयार रहा था कि बहाना न मिलने पर जवाब नहीं था।
आखिर बोला, “मैच से वह बात खत्म नहीं होगी।”
“जानता हूँ।”
अभ्यास शुरू हुआ। अगले स्ट्रोक पर इकबाल ने ताकत घटाई और बाकी बोर्ड बिखेरे बिना मनचाही गोटी खोली।
दर्शन ने देखा। उसे माफ़ी पर भाषण नहीं बनाया। उसने अगली स्थिति के लिए गोटियाँ जमाईं।
5. क्वालिफायर का संकरा रास्ता
पहला क्वालिफाइंग मैच उम्मीद से लंबा चला। विरोधी जोड़ी नरम रक्षात्मक स्ट्रोक खेलती और सरल फिनिश कम छोड़ती।
इकबाल ताकत से पैटर्न तोड़ना चाहता था। दर्शन बेहतर बोर्ड का इंतज़ार। दोनों आदतें पर्याप्त नहीं थीं।
उन्होंने खास समस्याएँ चुननी शुरू कीं। बाकी खोले बिना एक फँसी गोटी खुल सकती थी। आखिरी शॉट कठिन रहे, फिर भी एक आक्रामक रन लेना उचित हो सकता था।
देर के बोर्ड में दर्शन ने दो गोटियाँ डालीं। क्वीन पहुँच में थी, भरोसेमंद कवर नहीं। उसने छोड़कर अपनी बची गोटी की स्थिति सुधारी।
विरोधी खत्म नहीं हुए। अगली बारी में इकबाल को सुलभ क्वीन और वास्तविक कवर मिला। दोनों सुरक्षित करके आगे खेला।
वे कम अंतर से आगे गए।
अगले दौर में इकबाल आसान फिनिश चूक गया। दर्शन का चेहरा कसा। इकबाल उस टिप्पणी का इंतज़ार करता रहा जो पुराने समझौते को व्यर्थ बना देगी।
कोई टिप्पणी नहीं आई।
दर्शन की बारी में उसने सामने का बोर्ड हल किया। जो मिलना चाहिए था उसकी माँग नहीं की। पहले स्ट्रोक ने विरोधी का आसान रास्ता सीमित किया। अगले अवसर पर फिनिश मिला।
बाद में माना कि क्रूर बात कहने का मन हुआ था।
इकबाल ने सिर हिलाया। “पिछले सप्ताह तुम चूके थे तब मेरा भी हुआ था।”
यह स्नेह नहीं था। ऐसी जानकारी थी जिसे पहले कोई दूसरे के पास सुरक्षित नहीं मानता था। अब अगले अभ्यास में उसे हथियार बनाने की जरूरत नहीं पड़ी।
6. विरोधी मजाक नहीं हैं
अरविंद और बोस बिना मैच हारे फाइनल पहुँचे। वे इतने अच्छे थे कि कंपनी की तस्वीरें झूठी न लगें।
खुला बोर्ड हो तो अरविंद शानदार हमला करता। बोस सटीक कोणों से साधारण दिखती स्थिति को लगातार पॉकेट में बदल सकता था। उन्हें सिर्फ नई शर्ट समझना अच्छा महसूस करने का महँगा तरीका होता।
इकबाल और दर्शन ने उसी अनुसार तैयारी की।
उपयोगी रुकावटें बचाईं। अपनी गोटियाँ सामने वाले साथी की पहुँच में छोड़ना दोहराया। समय के दबाव में साधारण फिनिश भी खेले। आखिरी आसान स्ट्रोक चूक जाए तो बहादुर योजना कम काम की थी।
तय नियमों के अनुसार फाइनल तीन में दो गेम का था। खेलने से पहले चारों ने ट्रायल बोर्ड पूरे किए और साथी आमने-सामने बैठे।
अरविंद ने इकबाल और दर्शन की पुरानी शर्ट देखीं। “एक जैसी पोशाक नहीं?”
इकबाल ने स्ट्राइकर रखा। “एक रंग गोटी नहीं डालता।”
पहले गेम ने उसकी बात अधूरी साबित की। क्लब जोड़ी का तालमेल काम आया। बोस ने कठिन गोटी तब तक बचाई जब तक अरविंद पहुँच सके। अरविंद ने वहाँ हमला रोका जहाँ बोर्ड खोलना विरोधी की मदद करता।
वे गेम जीते।
ब्रेक में दर्शन ने गलत पढ़ी स्थिति समझाई। इकबाल ने अपनी बात जोड़ने से पहले उसकी वजह दोहराई।
दूर अरविंद उनकी बातचीत देख रहा था। शायद झगड़े की अपेक्षा थी। उस अपेक्षा से फर्क पड़ने से पहले उन्हें एक गेम कमाना था।
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7. एक-एक बोर्ड से बना गेम
दूसरा गेम खराब शुरू हुआ। इकबाल कट चूका और अरविंद ने फायदा लिया। पुरानी इच्छा लौटी। अगले शानदार स्ट्रोक से सब वापस ले आओ।
अगली बारी भरा बोर्ड और संकरा सुरक्षित रास्ता था। उसने सुरक्षित रास्ता लिया, एक गोटी डाली और दूसरी दर्शन की तरफ उपलब्ध छोड़ी।
बोस ने स्थिति बिगाड़ी, लेकिन पूरी नहीं। दर्शन ने अपेक्षित शॉट पर अड़ने के बजाय बदली स्थिति के अनुसार स्ट्रोक लिया। नरमी से नया निशाना पॉकेट किया।
वापसी ऐसे हुई। एक फैसला बदलाव के बाद भी उपयोगी रहा। फिर दूसरा।
बोर्ड में न संकेत हुए, न अनुमोदन की निगाहें। बोर्डों के बीच चर्चा की कि विरोधी क्या कर रहे हैं और कौन सी लाइनें आसानी से खुल रही हैं।
जोरदार स्ट्रोक के बाद उपयोगी आगे का खेल न मिले तो अरविंद अधीर हुआ। बोस खतरनाक रहा। दो बार जब उन्हें बोर्ड खत्म लग रहा था, उसने बचाव पर लौटाया।
दर्शन ने समय से पहले क्वीन न लेकर दूसरे गेम का आखिरी बोर्ड सुरक्षित किया। पहले उपलब्ध गोटी डाली, साफ कवर का रास्ता रखा।
एक-एक गेम।
ब्रेक में इकबाल उठा और कंधे घुमाए। शर्ट भीगी थी। दर्शन ने पानी दिया। उसे किसी प्रतीक में नहीं बदला।
कुछ मिनट वे दो थके खिलाड़ी थे जिनका मैच अभी जीतना बाकी था। इकबाल ने आधी बोतल पी, ढक्कन बंद किया और अंतिम गेम के लिए वापस बैठ गया।
8. चौबीस पच्चीस नहीं है
निर्णायक गेम में इकबाल और दर्शन चौबीस पर थे। कंपनी जोड़ी बाईस पर। आठवाँ बोर्ड था। अंत अभी कोई भी बदल सकता था।
इकबाल जानता था एक जीता बोर्ड उन्हें जीत के निशान से आगे ले जाएगा। यह भी जानता था सिर्फ स्कोर सोचने से सामान्य शॉट असंभव महसूस हो सकता है।
शुरुआती टर्न तेज थे। अरविंद ने नियंत्रित रन में तीन गोटियाँ डालीं। दर्शन ने दो से जवाब दिया। अनावश्यक रिबाउंड के बजाय फँसी गोटी आंशिक खोली।
क्वीन कंपनी जोड़ी ने सुरक्षित की। बोर्ड उससे तय नहीं हुआ। उनकी बाकी गोटियाँ भी खत्म होनी थीं।
इकबाल ने बदली स्थिति देखी। लुभावना हमला दोनों बची गोटियाँ साफ कर सकता था। चूकता तो विरोधियों का सीधा फिनिश खुलता।
उसने पहले उपलब्ध गोटी साफ डाली। फिर नियंत्रित स्ट्रोक से आखिरी गोटी रुकावट से हटाई, जबकि विरोधी की आसान लाइन कठिन रही।
गोटी नहीं गिरी। टर्न चला गया।
एक पल दूसरे के लिए काम छोड़ने की पुरानी शर्म आई।
फिर याद आया कि दर्शन सामने बैठा ही इसलिए है क्योंकि यह डबल्स है।
बीच का विरोधी बोर्ड पर झुककर छोड़ा गया संकरा रास्ता देखने लगा। इकबाल हाथ गोद में रखे रहा। कोई इशारा नहीं किया। उसने स्थिति बनाई थी। अब साथी को अपनी तरफ से वही स्थिति पढ़नी थी, जैसे महीनों अभ्यास किया था।
9. दर्शन का अभ्यास किया स्ट्रोक
अरविंद को बची गोटी तक रास्ता दिखा। कठिन कोण चाहिए था। उसने शॉट लिया। गोटी पॉकेट के किनारे से लगी और बोर्ड पर रह गई।
दर्शन की बारी आई।
इकबाल की तरफ से आखिरी निशाना लगभग सीधा दिखता था। दर्शन की सीट से कुशन कोण कम करता था। लापरवाह ताकत से स्ट्राइकर गलत जगह जा सकता था।
वे यह अंतर दर्जनों बार रिकॉर्ड कर चुके थे।
दर्शन ने स्ट्राइकर रखा और अभ्यास वाली कम ताकत चुनी। वह साबित नहीं कर रहा था कि फोरमैन अभी भी आखिरी आदेश दे सकता है। साथी की छोड़ी स्थिति से एक गोटी डालनी थी।
टक्कर की आवाज़ हल्की थी।
गोटी रास्ते पर चली, पॉकेट का किनारा हल्के से छुआ और गिर गई।
बोर्ड पर सब रुकने तक दर्शन का हाथ स्थिर रहा। अंपायर ने बोर्ड और गेम घोषित किया। कुल जीत के निशान से ऊपर था।
अनुमति पर इकबाल उठा। एक पल सीने में आई राहत के साथ क्या करे समझ नहीं आया।
दर्शन ने हाथ बढ़ाया। इकबाल ने पकड़ा।
यह कारखाने की विदाई वाला हाथ मिलाना नहीं था, जहाँ किसी को शब्द नहीं मिलते थे और बहुत से आदमी फर्श देखते थे।
इसके पहले ऐसा परिणाम था जिसे दोनों ने बनाया था।
सामने अरविंद ने शीट पर हस्ताक्षर किए। बोस ने पहले बधाई दी। इकबाल ने उसे धन्यवाद दिया। जीत उसकी क्षमता से आई थी, विरोधी की क्षमता को झूठ बताने से नहीं।
10. साझेदारी दोषमुक्ति नहीं है
कंपनी प्रतिनिधि ने खेल की एकता वाली तस्वीर के लिए चारों फाइनलिस्ट क्लब के बैनर के नीचे बुलाए।
इकबाल ने दर्शन को देखा। पुराने समझौते के लिए चर्चा जरूरी नहीं थी।
उन्होंने प्रस्तुति क्षेत्र में आधिकारिक विजेता फोटो दी। फिर बैग लिए।
दर्शन ने नहीं कहा कि इकबाल अतीत को गलतफहमी बता दे। गेट वाली शाम के शब्द साफ थे। उसने चुनाव किया था और किसी दूसरे ने नुकसान झेला था।
बाहर उसने वह लिखित विवरण दिया जो आखिर पूर्व कर्मचारियों की समिति को भेजा था। क्या हस्ताक्षर किए और क्या जानता था, लिखा था। मैच ने तथ्य नहीं बनाए थे। अंतिम मुकाबले से पहले विवरण पूरा कर चुका था।
इकबाल ने कागज़ ध्यान से मोड़ा। “पढ़ूँगा।”
दर्शन ने सिर हिलाया।
बोर्ड केस के साथ कप उठाना अटपटा था। दो तरीके आजमाए, दूसरे पर हँसे। अंत में कप इकबाल के बैग में रखा और केस का एक-एक हैंडल लिया।
चौराहे पर बसें अलग जाती थीं। हाथ बदलने के लिए केस नीचे रखा।
“गुरुवार?” दर्शन ने पूछा।
“सात बजे। मेरी शिफ्ट के बाद।”
दोस्ती का वादा नहीं हुआ। किसी तस्वीर ने कठिन साल नहीं मिटाए।
समय था, जगह थी और अगले स्ट्रोक पर थोड़ा अधिक भरोसा करने का कारण था।
फिलहाल बोर्ड बुक करने के लिए इतना पर्याप्त था। इकबाल अपनी बस की ओर गया। दर्शन दूसरी तरफ मुड़ा। दोनों के पास अब अगली शाम का स्पष्ट काम था।
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