1. IE777: सामने की कुर्सी पर उसका भाई था
ताश की गड्डी पर समीर के अंगूठे की आवाज फैज पहचानता था। दो हल्की थपकियाँ, थोड़ा ठहराव, फिर एक थपकी। बचपन के घर में, रिश्तेदारों की बैठकों में और रात के खाने के बाद रमी सीखते समय उसने यही आवाज सुनी थी।
अब फाइनल की मेज के दूसरी तरफ वही आवाज सुनकर उसका मन उठ जाने को हुआ।
समीर चालीस साल का था। फैज चौंतीस का। उन्नीस महीने से दोनों केवल तब बात करते थे जब कोई तीसरा मौजूद हो। उनकी माँ ने दोनों को एक ही रविवार घर बुलाने की कोशिश छोड़ दी थी।
बीच में छह डील के मुकाबले के नियम रखे थे। सही घोषणा करने वाले को उस डील में शून्य दंड अंक मिलते। दूसरे खिलाड़ी के बिना सही समूह में लगे पत्तों का मूल्य प्रकाशित नियमों के अनुसार जुड़ता। छह डील के बाद कम कुल अंक वाला मेज जीतता। तीन स्वतंत्र मेजों में प्रत्येक की जीत से टीम को एक मैच अंक मिलता।
खेल के दौरान साथियों से बातचीत की अनुमति नहीं थी।
अंदर आने से पहले फैज की कप्तान दिव्या ने पूछा था, “तुम्हारे भाई को तुम्हारी गलती की जरूरत हुई तो क्या करोगे?”
“वह कहेगा नहीं।”
“मैंने यह नहीं पूछा।”
फैज ने उस महिला को देखा जिसने उसे तब जगह दी थी जब बाकी टीमें उससे बचती थीं।
“अपना हाथ खेलूँगा।”
सामने समीर की थपकियाँ रुक गईं। अंपायर ने पूछा कि दोनों तैयार हैं। भाई उसके लिए उत्तर देता, उससे पहले फैज ने हाँ कह दिया।
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2. पुराने फाइनल की खाली कुर्सी
उन्नीस महीने पहले फैज अपनी टीम का फाइनल नहीं खेल पाया था। जल शोधन संयंत्र में उसकी जगह आने वाला कर्मचारी नहीं पहुँचा था। उपकरण में चेतावनी बजने के बाद कम कर्मचारियों वाली पाली बिना सुरक्षित जिम्मेदारी सौंपे नहीं जा सकती थी। फैज ने संदेश भेजे, दो बार फोन किया और पर्यवेक्षक आने तक काम पर रुका।
तब तक टीम पंजीकृत रिजर्व को उतारकर हार चुकी थी।
कप्तान समीर था। उसने हॉल में कहा कि उसका भाई विरोधी से डरकर भाग गया। किसी ने वाक्य रिकॉर्ड कर लिया। रात तक ऐसे लोग वीडियो भेज रहे थे जो फैज को जानते भी नहीं थे।
अगली सुबह फैज काम की पाली का रिकॉर्ड लाया। समीर ने देखकर कहा, “तो आने का वादा ही नहीं करना चाहिए था।”
टीम प्रबंधक ने बाद में संदेश जाँचे और सही कारण बताया। समीर ने अपनी बात नहीं सुधारी।
माँ के जन्मदिन पर उसने फैज की पुरानी टीम जैकेट कुर्सी से उठाकर जूतों के पास रख दी। कहा कि कुर्सी उन खिलाड़ियों के लिए चाहिए जो समय पर आते हैं।
केक कटने से पहले फैज चला गया। माँ कागज की प्लेट लेकर सीढ़ियों तक आई। प्लेट लेता तो रो पड़ता, इसलिए बस छूटने का बहाना बनाया।
उसने पुराने अभ्यास कमरे में जाना बंद कर दिया। महीनों तक केवल रसोई में रखी घिसी गड्डी छुई। कभी हाथ बाँटता, पत्तों को देखता और एक भी फैसला किए बिना सब समेट देता। सबसे बुरी बात हार नहीं थी। वह खेल अब उस आवाज के साथ जुड़ गया था जिसमें उसका अपना भाई उसे कायर कह रहा था।
3. दिव्या ने कौन-सा काम उसके लिए नहीं किया
दिव्या ने दया करके फैज को नहीं बुलाया। खुले अभ्यास आयोजन में उसने देखा कि वह उपयोगी समूह पहचानता है, लेकिन हार के बाद जल्दबाज हो जाता है। अगली डील में पिछली पूरी शाम वापस जीतना चाहता था।
उसने परीक्षण का मौका दिया। शर्त थी कि हर समीक्षा आखिरी नाटकीय डिस्कार्ड से नहीं, सबसे पहले हुई टाली जा सकने वाली गलती से शुरू होगी।
वे तेरह पत्ते सामने रखते। फैज को तीन मिनट में दो अलग योजनाएँ समझानी होतीं। बिना जोकर वाला पूरा क्रम, जोकर लगे क्रम से साफ अलग दिखना चाहिए। सेट में एक ही अंक के अलग सूट होने चाहिए। अधूरे समूह को लगभग सुरक्षित कहकर उसका दंड मूल्य भूलना मना था।
एक अभ्यास में क्लब के पाँच और छह के साथ कई अकेले बड़े पत्ते थे। फैज ने बादशाह रोक रखा था, क्योंकि छोड़ना उसे हार स्वीकार करना लगता था। दिव्या ने पूछा कि सामने दिख रहे हाथ में वह आखिर किस सही समूह का हिस्सा बन सकता है।
उसके पास अच्छा उत्तर नहीं था।
उन्होंने वही फैसला कई संभावित अगली ड्रॉ के साथ दोहराया। कुछ बार बादशाह उपयोगी हुआ। अधिक बार जुड़े हुए छोटे पत्तों ने सुधार के ज्यादा रास्ते दिए। सीख शर्तों पर आधारित थी, अगला पत्ता क्या आएगा इसकी भविष्यवाणी नहीं।
काम के बाद वह टीम के तीसरे खिलाड़ी भुवन के साथ अभ्यास करता। भुवन धीमा था, दिखावा कम करता था और गिनती में कोई रियायत नहीं देता था। पहली शाम उसने फैज की गिनती में तीन छूटे अंक पकड़े। अगली शाम फैज ने पूछे जाने से पहले खुद जाँच की।
4. समीर की अपनी तैयारी
समीर ने सुना कि फैज दिव्या की टीम में जगह बना चुका है। उसे ऐसा गुस्सा आया जिसका उचित कारण नहीं था। वह चाहता था कि भाई गंभीर खेल में लौटे। शायद यह भी चाहता था कि लौटने से पहले उसकी अनुमति माँगे।
उसके अभ्यास साथी नीरज ने समीक्षा के दौरान पारिवारिक झगड़ा सुनने से मना कर दिया।
“तुमने कहा था कि वह भरोसेमंद नहीं। वह तुम्हारी बात है। इन पत्तों की बात अलग है।”
समीर ने अच्छी तैयारी की। बेकार जोड़ियाँ समय पर तोड़ने, पूरा शुद्ध क्रम बचाने और जोकर को सेट की जगह क्रम में इस्तेमाल करने का सही समय पहचानने पर काम किया। वह अनुभवी खिलाड़ी था। केवल ऊँची आवाज वाला आदमी नहीं, जिसे एक भाग्यशाली ड्रॉ से हराना तय हो।
क्वालिफायर में उसने खराब हाथ का दंड घटाकर मेज ग्यारह अंकों से जीती। दूसरे मुकाबले में सामने वाला जरूरी क्रम तैयार करता, उससे पहले उसने वैध घोषणा कर दी। फाइनल की जगह उसने कमाई थी।
ड्रॉ में फैज सामने आया तो नीरज ने कहा, “अच्छा है। अब उसके खेल के बारे में कहानी सुनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
समीर विरोध करने वाला था। फिर छह डील वाले नियम देखने लगा।
उस रात उसने संयंत्र के पर्यवेक्षक का पुराना संदेश खोला। उसमें साफ लिखा था कि फैज क्यों नहीं जा सकता था। समीर महीनों पहले पढ़ चुका था। कभी जवाब नहीं दिया था।
उसने उत्तर लिखा, मिटाया और अभ्यास के पत्ते लगा दिए। इस बार पत्ते क्रम में लगाने से बाकी जरूरी बात शांत नहीं हुई।
5. अड़तालीस अंक
पहली डील ने फैज को तुरंत चोट पहुँचाई। शुद्ध क्रम जल्दी बन गया, लेकिन बाकी हाथ खराब विकसित हुआ। जिस जोड़ी से सेट बनने की उम्मीद थी, वह जोड़ी ही रही। दूसरा क्रम पूरा करने की कोशिश में उसने दो बड़े पत्ते बहुत देर तक रखे।
समीर ने सही घोषणा की। फैज के अधूरे पत्तों का कुल मूल्य अड़तालीस था।
स्कोरर ने उसके सामने 48 और समीर के सामने 0 लिखा।
पुराने हॉल का वाक्य फिर सुनाई दिया—विरोधी से डर गया। अंपायर की जाँच पूरी होने से पहले उसका हाथ पत्तों की तरफ बढ़ा। उसने खुद को रोक लिया। जाँच अपमान नहीं थी। खेल का हिस्सा थी।
दूसरी डील में उसने पहले शुद्ध क्रम सुरक्षित किया। दो उपयोगी जुड़े समूह रखे। जब एक अकेला बड़ा पत्ता हाथ में समझदारी से कहीं नहीं जुड़ रहा था, उसे छोड़ दिया। बाद में आए पत्ते से दूसरा क्रम पूरा हुआ। घोषणा से पहले उसने तेरहों पत्ते गिने।
समीर को चौंतीस अंक मिले।
अब फैज 48 पर था और समीर 34 पर। दोनों एक-एक डील जीते थे। फैज फिर भी पीछे था।
उनके रिश्ते में कुछ ठीक नहीं हुआ था। समीर मुस्कराया नहीं। फैज ने दर्शकों की तरफ नहीं देखा। दूसरी मेजों पर दिव्या और भुवन अपने मुकाबले लड़ रहे थे। उनके पत्ते उसे दिखाई नहीं देते थे।
उसने ध्यान अपनी जगह लौटाया। अगली डील उसे आगे या पीछे कर सकती थी। ताश को उनके उपनाम के साथ जुड़ी कहानी से कोई मतलब नहीं था।
6. दस अंक जिन पर तालियाँ नहीं बजीं
तीसरी डील समीर की रही। खुले ढेर से उसके चुनाव संकेत देते थे कि हाथ विकसित हो रहा है। फैज ठीक-ठीक नहीं जान सकता था कि उसमें क्या है। किसी खुले पत्ते को उठाना जरूरत का संकेत था, सारे तेरह पत्तों में झाँकने की खिड़की नहीं।
फैज ने उस हिस्से पर ध्यान दिया जो उसके नियंत्रण में था। दो क्रम बनाए, उनमें एक शुद्ध था। बाकी अधूरे पत्तों का मूल्य घटाया। समीर ने घोषणा की तो उसे केवल दस दंड अंक मिले।
फैज 58। समीर 34।
दर्शक सीमा के पीछे किसी ने फुसफुसाकर कहा कि फैज फिर हार गया। वह हारा था। फिर भी वे दस अंक महत्वपूर्ण थे।
समीर दर्शक से बेहतर समझ रहा था। उसे उम्मीद थी कि भाई कई अकेले बड़े पत्तों के साथ पकड़ा जाएगा। गिनती के लिए खुले हाथ ने दिखाया कि फैज स्थिति निराशाजनक होने से पहले योजना बदल चुका था।
चौथी डील में फैज को जोकर मिला। उसने शुरुआत में उसे एक जोड़ी के साथ रखा, लेकिन उस व्यवस्था को स्थायी नहीं माना। बाद में प्राकृतिक पत्ते से सेट बन गया। जोकर दूसरे वैध समूह के लिए मुक्त हो गया। उसने जाँच लिया कि कम से कम एक क्रम पूरी तरह प्राकृतिक है।
उसकी घोषणा पर समीर को बत्तीस अंक मिले।
फैज 58। समीर 66। बढ़त बदल गई थी।
समीर ने स्कोरशीट देखकर हल्का सिर हिलाया। फैज को वही इशारा याद था जब उसने पहली बार सीखा था कि एक सूट के कोई भी तीन पत्ते अपने आप लगातार क्रम नहीं बन जाते।
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7. विराम में कोई सलाह नहीं
चार डील के बाद निर्धारित विराम हुआ। उस समय कोई हाथ चल नहीं रहा था। खिलाड़ी खेल क्षेत्र से बाहर जा सकते थे। फैज पानी लेने गया। समीर उसके पीछे आया, लेकिन इतनी दूरी पर रुका कि दूरी दिखाई दे।
“मैंने पाली का रिकॉर्ड फिर पढ़ा,” समीर ने कहा।
फैज ने हाथ का कागजी गिलास देखा। “पहले भी पढ़ा था।”
“हाँ।”
“तो आज उसे पहली बार पता चलने जैसा मत बनाओ।”
समीर ने अपना बचाव नहीं किया। कुछ देर हॉल की आवाज दोनों के बीच रही। फिर बोला, “नहीं बनाऊँगा।”
फैज पहले लौट आया। बाहर जाती दिव्या रास्ते में मिली। उसने पत्तों के बारे में नहीं पूछा, कोई रणनीति नहीं बताई। केवल पूछा कि वह आगे खेलने के लिए ठीक है या नहीं। फैज ने हाँ कहा।
पाँचवीं डील ने उत्तर की परीक्षा ली। अच्छी शुरुआत धीरे-धीरे कठिन विकल्पों में बदल गई। समीर का हाथ सुधरता रहा। फैज को आकर्षक मगर अधूरा समूह तोड़कर अपने पास बचे मूल्य को कम करना पड़ा।
समीर ने घोषणा की। फैज के कुल में सोलह अंक जुड़े।
फैज 74। समीर 66। एक डील बाकी थी।
भुवन की मेज हार के साथ समाप्त हो चुकी थी। दिव्या का मुकाबला अभी चल रहा था। अब फैज की टीम को दोनों बाकी मेजें जीतनी थीं।
समीर यह जानता था। उसने स्कोर देखा और पत्ते सीधे किए। हॉल के बाहर चाहे जितनी माफी बाकी हो, अंदर आसान हाथ देकर वह भाई का दूसरा अपमान नहीं करने वाला था।
8. दोनों के बीच तेरह पत्ते
आखिरी हाथ फैज को पूरा बनकर नहीं मिला। कई सामान्य फैसलों से बना। जब पत्तों ने शुरुआती योजना का साथ देना बंद किया, उसने वह योजना छोड़ दी।
डील के अंतिम हिस्से में उसके पास हार्ट का शुद्ध क्रम था: 2, 3, 4 और 5। क्लब के 8 और 9 थे। डायमंड, क्लब और स्पेड के तीन सात थे। स्पेड का जैक, रानी और बादशाह था। बचा हुआ पत्ता डायमंड का बादशाह था।
कुल तेरह पत्ते। एक समूह अधूरा।
क्लब का 10 मिलता तो क्लब का क्रम पूरा हो जाता। दूसरे बदलावों से दूसरे रास्ते भी बन सकते थे, लेकिन बंद गड्डी को आदेश नहीं दिया जा सकता था। केवल हर समूह करीब दिख रहा है, इसलिए मौजूदा हाथ की घोषणा भी नहीं की जा सकती थी।
समीर ने ऐसा पत्ता छोड़ा जिसकी फैज को जरूरत नहीं थी। फैज ने उसे नहीं उठाया। बंद ढेर से पत्ता लिया।
क्लब का 10 था।
उसकी पहली प्रतिक्रिया जीत का उछाल नहीं, गिनती थी। हार्ट के चार लगातार पत्ते। क्लब के तीन लगातार पत्ते। अलग सूट के तीन सात। स्पेड के तीन लगातार पत्ते। डायमंड का बादशाह छोड़ने के बाद तेरह पत्ते। सारे समूह वैध। जरूरी क्रम मौजूद और प्राकृतिक क्रम भी सुरक्षित।
उसने घोषणा की।
अंपायर हाथ देख रहा था। फैज ने दोनों हथेलियाँ मेज के किनारे रखीं। समीर ने अपने पत्ते गिनने के लिए लगाए। ऐसी तकनीकी आपत्ति खोजने की कोशिश नहीं की जो थी ही नहीं। उसने पूरा क्लब क्रम एक बार देखा और अपने अधूरे पत्ते अलग रख दिए।
9. दूसरी मेज अभी जीतनी थी
समीर का दंड चौबीस था। आखिरी कुल फैज 74 और समीर 90 हुआ। फैज ने अपनी मेज सोलह अंकों से जीती थी। तीसरी डील में केवल दस अंक लेकर हारना इस परिणाम का हिस्सा था, ठीक वैसे ही जैसे आखिरी घोषणा।
समीर ने पहले स्कोरशीट पर हस्ताक्षर किए।
टीम अभी नहीं जीती थी। भुवन हारा था। फैज जीता था। दिव्या खेल रही थी। दोनों भाई दर्शक सीमा के पीछे खड़े हुए। वहाँ से न खिलाड़ियों से बात कर सकते थे, न बाकी हाथ को प्रभावित कर सकते थे।
दिव्या का विरोधी मजबूत था। दो बार उसने बाहर से आकर्षक दिखने वाला खुला पत्ता नहीं उठाया। दिव्या ने दोनों फैसलों का इंतजार किया, अपना हाथ बदला और आखिर वैध घोषणा पूरी की। उसका अंतिम कुल उसे उस मेज पर आगे रखता था।
दो मेज बनाम एक। फैज की टीम जीत गई।
भुवन अपनी हार से शर्मिंदा दिखता हुआ पास आया। माफी माँगता, उससे पहले फैज ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अभ्यास में हर हाथ तुमने मेरे साथ गिना था। इधर आओ।”
समीर के पास खड़े एक आदमी ने कहा कि भाइयों को आमने-सामने रखना ही नहीं चाहिए था। इशारा साफ था। समीर कुछ बोलता, उससे पहले फैज मुड़ गया।
“उसने मुझे तीन डील में हराया। मैंने उसे तीन में। फर्क समझना है तो छह स्कोरशीट देखिए।”
स्कोरर ने आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए सभी शीट रख दीं। हर दंड सामने जाँचा गया था। समीर जीतने के लिए खेला था। फैज अपनी जीत का इस्तेमाल भाई के खिलाफ नया झूठ बनाने के लिए नहीं होने देता।
10. बाद में उन्होंने कौन-सी डील दोहराई
ट्रॉफी की तस्वीर में दिव्या, फैज और भुवन थे। समीर बाहर रहा। वह दूसरी टीम का सदस्य था। उसके साथियों की निराशा भी उसका समय चाहती थी।
अपने साथियों की मेहनत स्वीकार करने के बाद वह फैज के पास आया।
“मुझे पता था कि तुम पुराना फाइनल क्यों नहीं आए,” उसने कहा। “गुस्से में तुम्हें डरा हुआ कहा। अपनी हार किसी और के सिर डालना चाहता था।”
फैज ने उत्तर आसान नहीं किया। “तुमने माँ को वह बात सुनने दी।”
“पता है। जो अभी कहा, उन्हें भी बताऊँगा।”
“हॉल में सुनने वालों को बताओ।”
समीर ने बताया। बात सीधी और स्पष्ट थी। उसने ऐसा नहीं कहा कि आज का मैच उस सच्चाई का प्रमाण है जिसे काम का रिकॉर्ड पहले ही स्थापित कर चुका था। फैज जीतने से पहले भी गलत व्यवहार का शिकार था।
बाद में दोनों एक खाली अभ्यास मेज पर बैठे। आखिरी शानदार घोषणा नहीं दोहराई। समीर ने तीसरी डील माँगी, जिसमें फैज दस अंक लेकर हारा था।
फैज ने याद की स्थिति लगाई और बड़े पत्ते को पहले छोड़ने का कारण बताया। समीर ने दूसरा रास्ता सुझाया। फैज ने दिखाया कि अगला पत्ता मदद नहीं करता तो उसमें कितना अधूरा मूल्य रह जाता।
बारह मिनट बहस हुई।
दिव्या टीम को लेने आई तो फैज ने तुरंत पत्ते समेटे और उठ गया। जिन लोगों के साथ आया था, उन्हीं के साथ जाएगा।
समीर ने मेज पर दो थपकियाँ दीं, रुका, फिर एक और।
“रविवार?” उसने पूछा।
“अभ्यास के बाद,” फैज ने कहा।
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