1. IN7: जिसे फोल्डर उठाना था
राजन ने विश्लेषण वाला फोल्डर उठाकर अरुण को क्लब का सबसे भरोसेमंद सहायक बताया। फिर फोल्डर उसे वापस दिया और टीम की तस्वीर से पहले अतिरिक्त कुर्सियाँ हटाने को कहा।
अरुण मेज के पास खड़ा रहा।
उस फोल्डर के ब्रिज नोट्स उसने तैयार किए थे। हर डील देखी थी, बचाव के दूसरे रास्ते खोजे थे और वे सवाल लिखे थे जिनसे टीम अभ्यास करती थी। राजन ने जो पुस्तिका बाँटी थी, उसमें अरुण का नाम कहीं नहीं था।
इकतालीस की उम्र में वह ऐसे दो हाथ बन गया था जिन्हें सामान उठवाने के समय याद किया जाता था।
उसने पूछा कि खेलने वाली टीम का चयन कब घोषित होगा।
जवाब से पहले राजन ने कमरे में सबकी तरफ देखा। “हमें ऐसे लोग चाहिए जो हाथ में पत्ते लेकर सोच सकें। पिछली बार क्या हुआ था, तुम्हें पता है।”
पिछली बार लगभग दो साल पत्नी की देखभाल करने के बाद अरुण का पहला मैच था। वह तुरुप की गिनती भूल गया था। जो कॉन्ट्रैक्ट पूरा कर सकता था, उसे हार गया था। पूरी शाम गलती की चर्चा सुनता रहा था। उस वापसी से चार महीने पहले पत्नी की मृत्यु हुई थी।
राजन हर अगले चयन के लिए उसी डील को वजह बनाता आया था।
अरुण का चौबीस साल का बेटा दरवाजे के पास खड़ा था। वह पिता का नाम टीम में सुनने आया था। अब दृश्य खत्म करने की कोशिश में कुर्सियों की तरफ बढ़ा।
अरुण ने उसे रोक दिया।
फोल्डर लिया। कुर्सियाँ वहीं छोड़ीं। बेटे के साथ बाहर निकल गया। पीछे राजन तस्वीर के लिए किसी और को मदद करने बुला रहा था।
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2. IN7 की कहानी: उसी डील का अलग जवाब
राजन को उम्मीद थी कि अरुण अगले अभ्यास से पहले लौट आएगा। क्लब को उसके नोट्स चाहिए थे। अरुण का गुस्सा भी आम तौर पर ज्यादा देर नहीं रहता था।
इस बार संदेश आया। अरुण ने अपने लिखे विश्लेषण पर अपना नाम वापस लगाने को कहा था। मूल फाइलें और तारीखें साथ थीं। सचिव ने पुस्तिका के अगले संस्करण में नाम ठीक कर दिया।
राजन ने इसे छोटी दफ्तरी गलती पर बेकार का विवाद बताया।
अरुण ने उस शब्द पर बहस नहीं की। सुधार माँगा था, मिल गया। अब ऐसी जगह ढूँढ़ने लगा जहाँ खेल सके।
पहला नया साथी उसके अनुकूल नहीं बैठा। बोली के समझौते अलग थे। दोनों मान रहे थे कि दूसरा समझता होगा। अभ्यास बहस में समाप्त हुआ जो पत्ते रखने के बाद भी जारी रही।
दूसरी साथी उनतालीस साल की मीरा थी। उसने नोट्स पढ़े। फिर अरुण से कहा कि पहले वही पुरानी बिगड़ी डील खेले, उसकी व्याख्या बाद में करे।
अरुण बताने लगा कि उसे क्या करना चाहिए था।
“खेलो,” मीरा ने कहा।
उन्होंने स्थिति लगाई। अरुण ने सही चाल जल्दी चुन ली, क्योंकि जवाब याद था। मीरा ने रक्षकों के पत्तों का बँटवारा बदला और फिर शुरू करने को कहा।
इस बार वह रुका।
मीरा इंतजार करती रही। गलत रास्ता चुना तो दोनों ने उसे देखा। फिर उसने एक और पत्ता बदल दिया।
शाम खत्म होने तक अरुण उस पुरानी डील को न बहाना बना सकता था, न सुधार का प्रमाण। नोटबुक में नए सवाल थे। सामने ऐसी साथी थी जो जवाब मेज पर चाहती थी।
3. हार के बाद की शाम
उनकी साझेदारी साधारण और कई बार असहज मेहनत से बनी। उन्होंने अपने समझौते लिखे। जाँचा कि हर बोली क्या बताती है। किसी क्रम में भ्रम निकलता, तो अगली प्रतियोगिता से पहले उसे स्पष्ट करते।
अरुण ने डमी खुलने पर ठहरना सीखा। कितनी बाजियाँ पक्की थीं, कितनी हार सकता था और बाद में किस हाथ तक पहुँचने का रास्ता चाहिए होगा, वह गिनता। कभी उस विराम से बेहतर योजना बनी। कभी फिर भी गलत चुनाव किया।
एक शुरुआती मैच में मीरा ने सही बचाव किया, लेकिन दूसरे मौके पर अरुण अपना कॉन्ट्रैक्ट पूरा नहीं कर सका। मीरा कोट पहनती, उससे पहले उसने गलियारे में माफी माँग ली।
मीरा ने पूछा कि वह गलती के लिए माफी माँग रहा है या उससे वादा चाहता है कि वह उससे कभी नाराज नहीं होगी।
उसके पास तुरंत जवाब नहीं था।
वे अंदर लौटे और डील फिर लगाई। मीरा ने वह बचाव दिखाया जिसे अरुण भूल गया था। अरुण ने वह जगह खोजी जहाँ दूसरे हाथ में जाने का रास्ता बचा सकता था। दोनों बातें नोटबुक में लिखीं।
घर पर बेटे ने खाना ढककर रखा था। अरुण प्लेट के पास स्कोर शीट रखकर बैठा। इस बार उसने हारा मैच बताया, लेकिन अपनी घबराहट पर राजन का फैसला नहीं दोहराया।
अगली सुबह स्थिति फिर खेली। एक सफल क्रम याद करने के बजाय पत्तों का बँटवारा बदला।
सीजन आगे बढ़ा तो वह और मीरा, फरीद और लीला के साथ चार खिलाड़ियों की टीम बने। कुछ मैच हारे, कुछ जीते और क्लब चैलेंज के फाइनल में पहुँचे।
4. राजन ने प्रतिद्वंद्वी को पहचान लिया
फाइनल की सूची में राजन ने अरुण का नाम देखा। नीचे बाकी तीन नाम पढ़े। मीरा भरोसेमंद थी। फरीद और लीला इतने अनुभवी थे कि प्रतिद्वंद्वी के खराब सत्र को महँगा बना सकें।
राजन ने अपनी टीम से कहा कि अरुण को जल्दी करवाकर अब भी गलती कराई जा सकती है।
अकेले में वह इतना निश्चित नहीं था। उसने हाल की दो स्कोर शीट देखी थीं। पुरानी वापसी में असफल हुआ खिलाड़ी अब कठिन कॉन्ट्रैक्ट सँभाल रहा था। कई नजदीकी डील में सही बचाव भी किया था।
राजन ने पुराना अभ्यास फोल्डर मँगाया। सुधरे हुए आवरण पर अरुण का नाम था। मेज पर रखने से पहले उसने आवरण नीचे कर दिया।
फाइनल दो मेजों पर डुप्लिकेट ब्रिज का था। एक कमरे के वही पत्ते दूसरे कमरे में दूसरी टीम खेलती। दोनों नतीजों का फर्क अंतरराष्ट्रीय मैच अंक, यानी IMP, में बदलता। एक मेज पर अच्छा कॉन्ट्रैक्ट दूसरे कमरे के उतने ही अच्छे परिणाम से बराबर हो सकता था।
बारह बोर्ड खेले जाने थे। राजन और उसका साथी अरुण-मीरा के सामने थे। उनके दूसरे दो खिलाड़ी फरीद-लीला से खेलते।
शुरू होने से पहले राजन ने अरुण के फोल्डर के वजन पर पुराना मजाक किया।
अरुण ने समझौतों के नोट्स अनुमति वाली जगह रखे, जरूरी सवालों के जवाब दिए और खिलाड़ी की कुर्सी पर बैठ गया।
मजाक के बाद की चुप्पी भरने की उसने कोशिश नहीं की। राजन ने यह ध्यान दिया। मीरा ने पत्ते जाँचे। निदेशक ने शुरू करने का संकेत दिया।
5. ग्यारह अंक पीछे
फाइनल में किसी को आसान शाम नहीं मिली। राजन ने एक गेम कॉन्ट्रैक्ट का सटीक बचाव करके उपयोगी बढ़त बनाई। दूसरी डील में अरुण ने आकर्षक पहली योजना से ज्यादा सुरक्षित रास्ता खोजकर जवाब दिया।
छह बोर्डों के बाद विराम में पूरे हुए नतीजे मिलाए गए। अरुण की टीम पंद्रह IMP पर थी। दूसरी टीम छब्बीस पर।
छह बोर्ड बाकी थे।
फरीद ने अपना छूटा मौका बताया। लीला ने मिला हुआ बचाव बताया। किसी ने अरुण से यह नहीं कहा कि अगले पत्ते चाहे जैसे हों, ग्यारह अंक जबरदस्ती वापस लाने हैं।
मीरा ने समय देखा। “हमारे समझौते वही रहेंगे।”
वे मेज पर लौटे। पाँच और बोर्डों में दोनों तरफ कठिन फैसले आए। सत्र खत्म होने से पहले दूसरे कमरे के नतीजे उन्हें मालूम नहीं हो सकते थे।
आखिरी बोर्ड में अरुण के पास छह मजबूत हुकुम थे। बोली में उनका फिट और जरूरी नियंत्रण स्पष्ट हुए। अरुण सिक्स स्पेड्स का डिक्लेयरर बना। उत्तर-दक्षिण की तरफ वल्नरेबिलिटी नहीं थी। कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने के लिए बारह बाजियाँ चाहिए थीं।
पश्चिम में राजन बैठा था। उसने पान की बेगम से शुरुआत की। उत्तर में मीरा ने डमी खोल दी। अब खेलने के फैसले अरुण को करने थे।
अरुण के पत्ते थे: हुकुम A-K-Q-J-10-9, पान A-2, ईंट A-3-2 और चिड़ी A-Q।
डमी में थे: हुकुम 8-7-6-5, पान K-5-4-3, ईंट K-5-4 और चिड़ी 3-2।
पहला पत्ता खेलने से पहले अरुण ने दोनों हाथ देखे। अभी चुना क्रम कॉन्ट्रैक्ट बना भी सकता था और बिगाड़ भी।
6. चिड़ी की बेगम इंतजार कर सकती थी
राजन ने अरुण को चिड़ी देखते पाया। पश्चिम में उसके पास चिड़ी का बादशाह था। डमी से छोटी चिड़ी चलकर अरुण बेगम लगाता, तो राजन उसे ले लेता। बाद में एक ईंट की बाजी और मिलती तो स्लैम गिर सकता था।
उसने शुरुआत पान से की थी ताकि चिड़ी का फैसला आसान न हो।
अरुण बादशाह नहीं देख सकता था। उसे इतना दिख रहा था कि उसके A-Q के सामने दो छोटी चिड़ियाँ हैं। ईंट की एक बाजी भी जाने वाली थी, जब तक आगे का खेल उससे निपटने का दूसरा रास्ता न दे।
पहला विचार चिड़ी की परिचित फिनेस था। दूसरा मीरा का अभ्यास वाला सवाल था: बचाव करने वाला बाजी जीतने के बाद क्या चला सकेगा?
उसने डमी से पान तीन दिया और पहली बाजी अपने इक्के से ली। फिर हुकुम इक्का और बादशाह चलाकर रक्षकों के तुरुप निकाले। पश्चिम ने दोनों बार हुकुम दिया। पूर्व ने एक बार दिया और दूसरी बार दूसरी रंगत का पत्ता छोड़ा। बाहर के तीनों हुकुम गिने जा चुके थे।
अरुण के हाथ में चार तुरुप बचे थे। डमी में दो।
उसने पान दो से डमी के बादशाह तक रास्ता लिया। उत्तर से पान चार चला और अपने हाथ के हुकुम की बेगम से काटा।
राजन ने पान दिया। उसके पास अब पान नहीं बचा था।
अरुण ने चिड़ी नहीं छुई थी। राजन ने डमी का बचा हुआ पान देखा। उसे समझ आने लगा कि खतरे वाली रंगत को अभी छोड़ क्यों रखा गया है।
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7. आखिरी बचाव का रास्ता हटाना
अरुण ने हाथ से ईंट दो चलाकर डमी का बादशाह लिया। राजन ने दस दिया। पूर्व ने छह दिया।
डमी से अरुण ने बचा हुआ पान पाँच चलाया। पूर्व ने पान दिया। अरुण ने हुकुम के गुलाम से काटा। राजन के पास पान नहीं था। उसने चिड़ी आठ छोड़ा।
उत्तर और दक्षिण दोनों के पान खत्म हो चुके थे। रक्षकों के तुरुप पहले ही निकल गए थे। अरुण और डमी में अब भी दो-दो तुरुप थे। कोई रक्षक ऐसी रंगत चलाता जो दोनों हाथों में नहीं थी, तो एक तरफ काटकर दूसरी तरफ अनचाहा पत्ता छोड़ा जा सकता था।
अरुण ने ईंट का इक्का लिया। राजन ने गुलाम, डमी ने चार और पूर्व ने सात दिया।
फिर अरुण ने ईंट तीन चला।
राजन ने बेगम से बाजी ली। डमी ने पाँच दिया। पूर्व ने आठ।
एक क्षण के लिए यह वही बाजी लगी जिसका राजन इंतजार कर रहा था। फिर बचे पत्तों ने उसका मकसद दिखा दिया।
अरुण के पास हुकुम दस और नौ, चिड़ी इक्का और बेगम थे। डमी में हुकुम आठ और सात, चिड़ी तीन और दो थे।
राजन के पास चार चिड़ियाँ थीं: बादशाह, गुलाम, दस और नौ। उसके हुकुम, पान और ईंट समाप्त थे। कोई दूसरी रंगत चल ही नहीं सकता था।
पिछली बाजियों में अरुण इसी क्षण की तैयारी कर रहा था। उसने राजन को चलने का अधिकार तब दिया था जब उसे सुरक्षित लौटाने का हर रास्ता हट चुका था।
राजन ने चिड़ी का बादशाह देखा। ईंट जीतने के बाद उसके सामने अलग रास्ते थे, लेकिन मंजिल एक ही थी।
8. वह चाल जिसे टाल नहीं सकता था
राजन ने चिड़ी का गुलाम चलाया।
डमी से दो आया। पूर्व ने छोटी चिड़ी दी। अरुण ने बेगम से बाजी ली। फिर चिड़ी का इक्का चलाया। राजन ने छोटी चिड़ी दी। उसके हाथ में बचा बादशाह अब कोई बाजी नहीं जीतने वाला था। अरुण के आखिरी दो हुकुम ने शेष बाजियाँ ले लीं।
बारह बाजियाँ। सिक्स स्पेड्स पूरा।
राजन चिड़ी का बादशाह चलाता, तो इक्का उसे ले लेता और बेगम अगली चिड़ी जीतती। दूसरी रंगतें हटाने के बाद चिड़ी की स्थिति संभल गई थी। शुरुआत में अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी थी।
राजन ने नतीजा लिखा। उसके मूल हाथ में दो हुकुम, तीन पान, तीन ईंट और पाँच चिड़ियाँ थीं। अरुण ने उन रंगतों के खेल से उसे अंत में सिर्फ वही चिड़ियाँ पकड़ा दी थीं जिन्हें वह बचाकर रखना चाहता था।
मीरा ने स्कोर पर्ची ली। उसने जश्न शुरू नहीं किया। दूसरे कमरे का खेल समाप्त होना था। नतीजों का मिलान भी बाकी था।
अरुण ने पत्ते बोर्ड के सही खानों में वापस रखे। खेल समाप्त होने के बाद अब हाथ थोड़ा काँप रहे थे। उसने मेज के नीचे दोनों हाथ दबाकर स्थिर होने दिया।
राजन ने पूछा कि क्या उसने यह अंत पहले किसी अभ्यास डील में देखा था।
“पहचाना कि क्या हटाना है,” अरुण ने कहा।
राजन ने खाली जगह देखी जहाँ अभी पत्ते थे। उस जवाब में दोहराने लायक पुरानी असफलता नहीं थी। उसमें वही खेल था जो दोनों अभी खेलकर उठे थे।
9. चौदह अंक
दूसरे कमरे में राजन की टीम भी उन्हीं उत्तर-दक्षिण पत्तों पर सिक्स स्पेड्स तक पहुँची थी। वहाँ डिक्लेयरर ने चिड़ी की फिनेस जल्दी आजमाई। पश्चिम में बैठे फरीद ने बादशाह से बाजी ली। बाद में बचाव को ईंट की एक बाजी और मिली। कॉन्ट्रैक्ट एक बाजी से गिर गया।
नतीजे सावधानी से मिलाए गए। अगले पाँच बोर्डों के उतार-चढ़ाव ने कुल मिलाकर अंतर नहीं बदला था। ग्यारह बोर्डों तक अरुण की टीम उनतालीस IMP पर थी, दूसरी टीम पचास पर। आखिरी बोर्ड जोड़ना बाकी था।
अरुण के गैर-वल्नरेबल छोटे स्लैम के नौ सौ अस्सी अंक थे। दूसरी मेज पर फरीद और लीला के बचाव से पचास और जुड़े।
फर्क एक हजार तीस अंक था। IMP तालिका में चौदह अंक।
उनतालीस बढ़कर तिरपन हुआ। राजन की टीम पचास पर रही।
अरुण, मीरा, फरीद और लीला ने तीन IMP से फाइनल जीत लिया था।
अरुण ने मिलान दो बार पढ़ा। फरीद ने आखिरी पंक्ति पर उँगली रखी, फिर पिछले बोर्ड देखे। हर छोटी बढ़त और सीमित रखी हार ने मुकाबले को इतना नजदीक रखा था कि आखिरी डील काम आ सके।
पुरस्कार के समय आयोजक ने विजेता खिलाड़ियों को बुलाया। अरुण बाकी तीन के साथ आगे गया। उसके हाथ में विश्लेषण का फोल्डर नहीं था। अतिरिक्त कुर्सियाँ भी नहीं थीं।
बेटा सामने खड़ा था। टीम कमरे की ओर मुड़ी तो तस्वीर की व्यवस्था होने से पहले उसने तालियाँ बजानी शुरू कर दीं।
राजन ने टीम का कप दिया। उसे चारों विजेताओं के बीच कप रखकर उनके नाम पढ़े जाने तक खड़ा रहना पड़ा।
अरुण का नाम आया तो किसी ने साथ में सहायक नहीं कहा।
10. वह पन्ना जिसे उसने रखा
औपचारिकता समाप्त होने के बाद राजन ने आखिरी डील फिर देखने को कहा। अरुण, मीरा, फरीद और लीला समीक्षा के लिए पत्ते लगा ही रहे थे।
उन्होंने उसके लिए जगह बनाई।
पूरा बँटवारा अब खुला था। राजन के पत्ते थे: हुकुम 4-3, पान Q-J-10, ईंट Q-J-10, चिड़ी K-J-10-9-8। पूर्व के पास था हुकुम दो, पान 9-8-7-6, ईंट 9-8-7-6 और चिड़ी 7-6-5-4।
मीरा ने पूछा कि अरुण ने दूसरी रंगतें हटाने की योजना पहली बार कब देखी। फरीद ने पूछा कि पश्चिम के पास ईंट की संख्या अलग होती तो क्या बदलता। लीला ने एक पत्ता खिसकाकर सवाल कठिन कर दिया।
अरुण सामने की स्थिति का जवाब देता रहा। जहाँ समय चाहिए था, लिया।
आखिर राजन ने पूछा कि क्या टीम वापसी का मुकाबला खेलने को तैयार होगी।
“तारीखें हम चारों को भेजना,” अरुण ने कहा।
उसने आखिरी स्थिति लिखी और लीला का नया सवाल जोड़ा। पन्ने पर विश्लेषण करने वाले चार खिलाड़ियों के नाम लिखे। राजन ने देखा कि उसने रक्षकों के योगदान भी दर्ज किए हैं।
बाहर बेटे ने खेलने के बैग की ओर हाथ बढ़ाया। अरुण ने बैग दे दिया। हस्ताक्षर वाली मैच शीट अपने पास रखी।
घर पहुँचकर उसने वह शीट पुरानी बिगड़ी डील के पास रखी। अब दोनों फोल्डर में थीं। नए पन्ने पर पूरा हुआ नतीजा था, चार साथियों के नाम थे और वह अंत था जो उसने अपने हाथ में पत्ते लेकर खोजा था।
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