1. IW7 कथा: वह खेलने आई थी
चौकीदार ने अनीता को सामान वाले दरवाजे की ओर भेजा।
“कपड़े पीछे से मिलेंगे।”
उसने फोन पर खिलाड़ी पंजीकरण दिखाया। चौकीदार ने कंधे के कपड़े वाले थैले और साड़ी के नीचे साधारण चप्पलों को फिर देखा। उनतालीस साल की अनीता इस क्लब में इतने कपड़े पहुंचा चुकी थी कि हर अधीर दरवाजा पहचानती थी। आज थैले में स्ट्राइकर, तौलिया और प्रतियोगिता की रसीद थी।
सूची जांची जा रही थी तभी क्लब की संरक्षक सविता पहुंची। उसके कई जरूरी ऑर्डर अनीता को देर रात तक सिलाई कराते रहे थे।
“अच्छा, इन्होंने नाम लिखा दिया। हमारी दर्जिन को दिया हुआ बोर्ड पसंद आ गया।”
तीन लोग शिष्टता में हंसे। अनीता तब तक खड़ी रही जब तक चौकीदार को नाम नहीं मिला। पांच महीने पहले सामुदायिक भवन में बोर्ड देने का कार्यक्रम हुआ था। सविता ने लोगों को कोशिश करने बुलाया। अनीता आगे आई तो कहा गया पहले खाली कपड़ों के कवर समेटे।
“हमने सिलाई के पैसे दिए हैं। खिलाड़ियों को खेलने दो।”
माइक्रोफोन खुला रह गया था। शाम को बाईस साल की बेटी काव्या ने अनीता को तैयार ब्लाउज पर जरूरत से ज्यादा जोर से इस्तरी करते देखा। सिलाई पहले ही बैठ चुकी थी।
आज इस्तरी घर में ठंडी थी। अनीता खिलाड़ियों वाले दरवाजे से भीतर गई। थैला कुर्सी के नीचे रखा और पहले दौर की पुकार का इंतजार किया। सविता की बेटी तन्वी पिछली चैंपियन थी।
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2. साफ रिलीज की आवाज
अभ्यास का पहला पाठ एक आवाज से जुड़ा था। सामुदायिक भवन में अनीता बहुत जोर से मारती। स्ट्राइकर गोटी से तेज आवाज के साथ टकराता, पर अतिरिक्त गति उसे खराब जगह या जेब की ओर भेज देती। आवाज अच्छी लगती थी। उससे प्रहार निर्णायक महसूस होता था। नतीजा अक्सर खराब होता।
उसने हर हफ्ते दो शाम का समय लिया और छोटी कॉपी में परिणाम लिखे। सीधे कट, रिबाउंड, गति, स्ट्राइकर की सुरक्षा। एक स्थिति तब तक दोहराती जब तक बता न सके कि अलग गलतियां अलग दिशा में क्यों गईं।
एक कम उम्र वयस्क खिलाड़ी ने दिखाया कि उंगली का तनाव रिलीज बदल देता है। उसने प्रहार से पहले हाथ ढीला करना सीखा। थकान से हरकत बिगड़ती तो रुक जाती।
घर में पुराना खरीदा बोर्ड रखा। वह प्रतियोगिता वाले बोर्ड जैसा नहीं था। इसलिए उसी बल को हर जगह सही मानने के बजाय बदलाव का अभ्यास किया। काव्या दस दस कोशिशों का रिकॉर्ड रखती। गोटी जेब के पास सुंदर जगह रुक जाए, फिर भी न गिरने पर उसे चूक लिखती।
उस सुबह अनीता ने अनुमति वाले अभ्यास प्रहार लिए। सीखी हुई हल्की संपर्क आवाज सुनी। पहला बोर्ड घर वाले से तेज था। उसने बल कम किया।
सामने वाले ने रिबाउंड जरूरत से ज्यादा तेज मारा। अनीता ने देखा स्ट्राइकर कहां रुका, फिर अपनी बारी शुरू की। अंगूठा रखने से पहले उंगली ढीली की। उसकी पहली गोटी गिरने के बाद भी आवाज तेज नहीं थी।
3. वह बोर्ड जो लगभग दे बैठती है
पहले मैच का शुरुआती गेम अनीता जीती। दूसरे में सीधा कट चूकने के बाद अधीर हो गई। अगली स्थिति में उसकी गोटी जेब के पास थी, लेकिन सीधी रेखा दूसरी गोटी रोक रही थी। उसने जोरदार संपर्क से रास्ता खोलना चाहा। अपनी गोटी के साथ रुकावट भी हिल गई। विरोधी को आसान रास्ता मिल गया।
अनीता वह बोर्ड हारी और फिर गेम भी। बीच में हाथ पोंछकर बैग में मुड़ी पर्ची देखी। उसमें लिखा था कि केवल अपनी गोटी कहां जाए यह नहीं, स्ट्राइकर कहां रुके यह भी तय करो।
काव्या दर्शक सीमा के पीछे थी। उसने पानी दिया, स्थिति पर सलाह नहीं। अनीता ने पानी पिया और निर्णायक गेम के लिए बैठ गई।
इस बार सीधा पॉकेट कमजोर होने पर छोटी स्थितिगत चाल स्वीकार की। अपनी बची गोटी पहुंच में रखी और विरोधी की बंद गोटी का रास्ता नहीं खोला। विरोधी कठिन बैंक चूक गया।
अनीता बेहतर रास्ते के साथ लौटी और दो नियंत्रित प्रहारों में समाप्त किया। मैच उसका हुआ। बाहर सविता दान किए बोर्ड के पास तस्वीर की व्यवस्था कर रही थी। क्लब स्थानीय प्रतिभा कैसे खोजता है, यह कहती सुनाई दे रही थी।
अनीता तस्वीर के लिए नहीं रुकी। अगला प्रतिद्वंद्वी निर्धारित मेज पर इंतजार कर रहा था। उसने तौलिया थैले में रखा और समय सारिणी खुद जांची। पहली गलती कॉपी में बाद में लिखनी थी। अभी अगली मेज की सतह और सामने बैठा खिलाड़ी देखना था।
4. अपनी चूक नापने वाली महिला
दोपहर तक सेमीफाइनल बदलाव के अनुसार ढलने की परीक्षा बन गया। इस सतह पर सुबह वाली मेज से कुछ अलग गति थी। पहले रिबाउंड अपेक्षा से दूर गए। अनीता ने हर चूक के बाद बोर्ड को दोष नहीं दिया। बल घटाया और मिले अवसरों में संपर्क बिंदु बदला। वास्तविक गति उसके लिए सूचना बनी।
फराह रानी का अच्छा नियंत्रण करती थी। एक बोर्ड में उसने रानी लेकर कवर कर दी, जबकि अनीता की कई गोटियां मुश्किल जगह थीं। अनीता ने चमकदार जवाब की जल्दी रोकी। पहले पहुंच में रखी गोटियां साफ कीं। कठिन गोटी के लिए सुरक्षित कोण वाला प्रहार छोड़ा।
फराह बोर्ड जीती, पर संभव बड़े लाभ से कम अंक मिले। अगले बोर्ड में अनीता ने अपनी एक गोटी गिराने के बाद ही रानी ली। अगली चाल के लिए वास्तविक कवर मौजूद था। उसने अगली बारी के प्रहार में कवर किया और उसी गति से बाकी बोर्ड खेला।
मैच दर्शकों की उम्मीद से लंबा चला। अनीता लगातार बेहतर समाप्ति से जीती। एक ही लंबी बारी ने सब नहीं किया था। फराह ने हाथ मिलाते हुए सुधरी रिबाउंड गति का जिक्र किया।
“मैंने तुम्हें बदलते देखा।”
“बदलना जरूरी था।”
फराह मुसकराकर किनारे हो गई। फाइनल में तन्वी सामने थी। खबर सुनते ही सविता प्रस्तुति मंच से उतरी। हाथ में वही माइक्रोफोन था जो पांच महीने पहले इस्तेमाल किया था। अनीता ने अपनी कॉपी बंद की और अंतिम मैच की मेज की ओर चली।
5. तन्वी को मां के मजाक की जरूरत नहीं
तन्वी अट्ठाईस की, आत्मविश्वासी और तकनीकी रूप से मजबूत खिलाड़ी थी। सेमीफाइनल का इतना हिस्सा देख चुकी थी कि जानती थी फाइनल में ध्यान देना पड़ेगा।
सविता ने परिचय को क्लब की चैंपियन और उसके कपड़े बदलने वाली महिला की मनोरंजक मुलाकात बनाना चाहा। माइक्रोफोन तन्वी तक पहुंचने से पहले उसने रोक दिया।
“कृपया खिलाड़ियों के नाम बताइए।”
अनीता पुराना अपमान नहीं भूली। लेकिन अब उसने पीछे खड़ी मां के बजाय सीधे विरोधी को देखा। शुरुआती गेम तन्वी जीती। साफ कट, रानी का सही समय और अनुशासित स्थिति निर्माण। अनीता को मौके मिले, लेकिन चूकने के बाद बहुत रास्ते दे दिए।
विराम में उसने अंतिम बोर्ड मन में देखा। दो बार केवल पॉकेट होने की संभावना देखकर प्रहार चुना था। न होने पर क्या स्थिति बचती, यह कम सोचा। उसने बदलाव किया।
दूसरे गेम में ऐसे रास्ते चुने जिनमें चूक के बाद भी बेहतर स्थिति रहती। एक कठिन बैंक छोटी जेब के साथ तन्वी की गोटियां खुलने का खतरा दे रहा था। उसने नहीं लिया। नियंत्रित स्थिति वाली चाल चली।
तन्वी को अगले अवसर के लिए मेहनत करनी पड़ी और वह चूक गई। अनीता ने कम अंतर से दूसरा गेम जीता। अब एक एक गेम था। निर्णायक गेम शुरू हुआ। दर्शक सीमा के पीछे भीड़ पास आ गई। सविता बैठी थी। माइक्रोफोन अब उसकी गोद में नहीं था। तन्वी ने स्ट्राइकर रखा और एकाग्र होकर पहला प्रहार किया।
6. प्रतिरोध के सात बोर्ड
निर्णायक गेम में सात बोर्ड बीते। तन्वी तेईस अंक पर थी, अनीता बीस पर। आठवां बोर्ड शुरू हुआ। खिताब हर हरकत के करीब महसूस होता था। प्रतियोगिता की मानक गेम संरचना में पच्चीस तक पहुंचना नतीजा तय करता। अन्यथा बोर्ड सीमा के बाद कुल अंक फैसला करते।
तन्वी ने अपने खेल से बढ़त बनाई। चार गोटियां गिराईं। रानी तब ली जब कवर उपलब्ध था। अगले प्रहार में उसे सफलतापूर्वक कवर भी किया।
अनीता को अभी काम करना था। उसने अच्छी बारी में कई पहुंच वाली गोटियां साफ कीं। लेकिन अपनी दो कठिन जगह बचीं। तन्वी की पांच बची थीं। रानी तन्वी कवर कर चुकी थी। अनीता के लिए जरूरी अंक पाने का रास्ता था कि विरोधी की पर्याप्त गोटियां रहते बोर्ड जीते।
लापरवाह समाप्ति से तन्वी को आसान शॉट नहीं देने थे। अगली स्थिति में सीधा लेकिन बहुत तीखा कट था। हल्का बैंक तुरंत गिरने की संभावना कम देता, पर स्ट्राइकर सुरक्षित रहता और दूसरी गोटियां कम हिलतीं।
अनीता ने दोनों देखे। सविता आगे झुकी। घर में ब्लाउज की सिलाई दबाने वाली पुरानी अनीता शायद ऐसा तेज प्रहार चाहती जिससे सब मुड़कर देखें।
मेज पर बैठी खिलाड़ी ने नियंत्रित बैंक चुना। गोटी जेब के मुंह तक पहुंची, गिरी नहीं। स्ट्राइकर खतरे से दूर रुका। अब तन्वी को कठिन बारी हल करनी थी। अनीता पीछे हुई और उसके लिए जगह छोड़ी। उसके चेहरे पर चूक की जल्दबाजी नहीं थी।
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7. चूक जो बोर्ड उपहार में नहीं देती
तन्वी ने बची पांच गोटियां देखीं। अनीता की चाल ने उन्हें फैलाकर आसान कोण नहीं बनाए थे। नजदीकी अवसर के लिए बहुत पतला संपर्क चाहिए था। गलती की गुंजाइश छोटी थी। उसने चुना और चूक गई।
अनीता आधार रेखा पर लौटी। दो अपनी गोटियां बची थीं। बैंक के बाद एक जेब के पास थी। दूसरी को उपलब्ध कोण से नाजुक कट चाहिए था। पहला आकर्षण था कि आसान गोटी सहज बल से गिरा दे और बाकी बाद में देखे। स्ट्राइकर रखने से पहले रुकी।
अंत की स्थिति जरूरी थी। स्ट्राइकर गलत जगह पहुंचता या बची गोटी हिलती तो दूसरा प्रहार कठिन होता। गोटी गिरने से बारी तभी आगे रहती जब साथ में ऐसा दोष न हो जो लाभ छीन ले।
उसने हल्का संपर्क चुना। पहली गोटी गिरी। स्ट्राइकर बोर्ड पर रहा। उसने अगला प्रहार करने के लिए उसे वापस लिया और बैठने की स्थिति ठीक की।
अपनी एक बची थी। तन्वी की पांच। इस बोर्ड में अनीता के लिए रानी के अतिरिक्त अंक नहीं थे। तन्वी उसे कवर कर चुकी थी। अभी समाप्त करती तो विरोधी की पांच गोटियां पर्याप्त थीं।
अनीता ने एक बार स्कोर देखा, फिर केवल स्ट्राइकर से अंतिम गोटी तक की रेखा। काव्या पानी की बोतल दोनों हाथों में पकड़े खड़ी थी। तन्वी शांत बैठी रही। अनीता ने उंगली की जगह बदली और दूरी दोबारा नापी। कमरे की आवाजें पीछे चली गईं।
8. दूसरी ओर बची पांच गोटियां
अंतिम कट अनीता ने दस दस बार अभ्यास किया था। घर वाली स्थिति से हूबहू मेल नहीं था। सतह तेज, कोण थोड़ा संकरा और दूरी अलग थी। उसने याद किया आंदोलन अंधे होकर दोहराने के बजाय बल बदला।
उंगली ठहरी। उसने सांस छोड़ी और रिलीज किया। स्ट्राइकर गोटी से उसी हल्की आवाज में मिला जिस पर भरोसा करना सीखा था। गोटी जेब की तरफ गई, किनारा छुआ और गिर गई।
अधिकारी की जांच तक अनीता ने हाथ बोर्ड से दूर रखे। उसकी सारी गोटियां साफ थीं। तन्वी की पांच बची थीं। अनीता को बोर्ड के पांच अंक मिले। बीस से पच्चीस। तन्वी तेईस पर रही। बोर्ड हारने वाली खिलाड़ी को रानी के अंक नहीं मिले।
मैच खत्म हुआ। दो गेम अनीता के, एक तन्वी का। एक पल तालियां सुनाई नहीं दीं। वह उन्हीं पांच गोटियों को देख रही थी जिन्हें विरोधी के लिए आसानी से खोलने से बचाया था।
फिर तन्वी का हाथ आया।
“आपने मुझे मुश्किल शॉट लेने दिया।”
अनीता खड़ी हुई और हाथ मिलाया। “तुम्हारे लिए वही छोड़ना था।”
दोनों जवाब की सटीकता पर मुसकराईं। पीछे सविता धीरे उठी। बाकी कमरे की तालियां शुरू हो जाने के बाद उसने पहली बार हाथ मिलाए।
काव्या ने बोतल नीचे रख दी। अनीता ने उसकी तरफ देखा और हल्का सिर हिलाया। अधिकारी अंतिम स्कोर लिख रहा था। इस बार उसकी उंगली कॉपी में चूक दर्ज करने के लिए नहीं, हस्ताक्षर के लिए बढ़ी।
9. परिचय सुधारा जाता है
प्रस्तुति में सविता ने माइक्रोफोन उठाया। शुरुआत दान किए बोर्ड और क्लब के अवसरों की कहानी से की। अनीता तन्वी के पास खड़ी इंतजार करती रही। विजेता का कप अभी मेज पर था।
फिर सविता ने कहा, “हमारी प्रतिभाशाली दर्जिन।”
तन्वी ने अनीता की ओर देखा। अनीता माइक्रोफोन के करीब आई।
“मेरा नाम अनीता राव है। सेमीफाइनल में फराह और फाइनल में तन्वी से खेली। अंतिम गेम पच्चीस तेईस रहा।”
फिर तालियां हुईं। सामने पूरा परिणाम खड़ा था। विरोधियों के नाम और स्कोर साथ थे। कप देते समय सविता को वही नाम दोहराना पड़ा।
काव्या तस्वीर के लिए आई। अनीता ने उसे बगल में रखा। अगली तस्वीर में फराह और रिलीज सुधारने में मदद करने वाले वयस्क खिलाड़ी को भी बुलाया। फोटोग्राफर के समूह जमाने तक सविता किनारे रही।
बाद में उसने पूछा कि अगली सुबह दो जरूरी ब्लाउज ले जा सकती है या नहीं। अनीता ने फोन में तारीख देखी।
“मंगलवार को ले सकती हूं। तय डिलीवरी शुक्रवार होगी।”
सविता ने आपत्ति शुरू की, फिर बधाई देने का इंतजार करते लोगों को देखा।
“मंगलवार।”
अनीता ने फोन रख दिया। तन्वी ने अगले महीने अभ्यास मैच पूछा। उसके लिए कैलेंडर फिर खोला। दोनों ने उपलब्ध रविवार देखा। तन्वी ने समय अपने फोन में लिखा और कहा कि इस बार उसी बोर्ड पर खेलेंगी जिस पर आज अंतिम गेम हुआ था। अनीता ने हां कहा।
10. इस्तरी सुबह तक इंतजार करती है
घर में काव्या ने पुराने बोर्ड के पास कप रखा। छोटे कमरे में बड़ा दिख रहा था। अनीता ने स्ट्राइकर निकालकर सावधानी से पोंछा। थैले में मुड़ी पंजीकरण रसीद, नम तौलिया और चूके प्रहारों की कॉपी थी।
काव्या ने अभ्यास वाले कट का पन्ना खोला।
“उस शाम दस में सात।”
“छह। जेब के मुंह पर रुकी गोटी भी गिन ली थी।”
पुराने निशान पर बहस हुई, फिर काव्या को अपनी पेंसिल वाला सुधार मिला। छह। दोनों हंसीं। अनीता ने नीचे अंतिम स्कोर लिखा। फिर पहले वाले धीमे प्रहार के बारे में नोट जोड़ा जिसने समाप्ति का मौका बचाया था। आखिरी पॉकेट जरूरी था, लेकिन उसकी बारी पहले किए फैसले से बनी थी।
इस्तरी सुबह छोड़ी जगह पर खड़ी थी। पास साफ तह किया ब्लाउज था। अनीता ने काम की सूची देखी, कपड़ा ढका और स्विच बंद रहने दिया।
खिड़की खोलकर दोनों ने खाना खाया। पड़ोसन पूछने आई कि सुना हुआ परिणाम सच है या नहीं। काव्या ने कप दिखाया। अनीता ने पहले बोर्ड की तस्वीर दिखाई।
“उसकी पांच गोटियां अभी थीं।”
उसने अंतिम दो प्रहार समझाए। बेटी सुनती रही। पड़ोसन ने तस्वीर पास करके दूसरा कोण पूछा। अनीता ने स्ट्राइकर निकाल लिया और बोर्ड पर स्थिति जमाने लगी।
इस बार किसी ने शुरू करने से पहले खाली कवर समेटने को नहीं कहा। काव्या ने मेज से प्लेटें हटाईं और तीनों के लिए बोर्ड के आसपास जगह बना दी।
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