IX7: तीन डील की जीत और एक बड़ी हार
IX7

IX7: तीन डील की जीत और एक बड़ी हार

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

IX7 की मौलिक रमी कहानी: तीन डील जीतने वाली मजबूत प्रतिद्वंद्वी बताती है कि भास्कर ने कम दंड और एक पूरी घोषणा से चैंपियनशिप कैसे जीती।

1. IX7: पाँच में से तीन डील मैं जीती थी

उस फाइनल की पाँच डील में से तीन मैं जीती थी। शुरुआत इसी बात से करना चाहती हूँ, क्योंकि कुछ शर्मनाक मिनटों तक मैं चाहती थी कि लोग केवल इसी तथ्य का जिक्र करें।

भास्कर एक डील जीता था। चैंपियन भी वही बना।

स्कोर में गलती नहीं थी। हर नाम के पास प्रारूप लिखा था: पाँच डील, सबसे कम जमा दंड अंक वाला विजेता। सही घोषणा पर उस डील के शून्य अंक। बाकी खिलाड़ियों के अधूरे पत्तों का दंड प्रकाशित नियमों के अनुसार। मेज पर चार वयस्क थे। किसी ने वादा नहीं किया था कि सबसे ज्यादा घोषणाएँ करने वाला पहले स्थान पर आएगा।

मैं नियम जानती थी। पहले उसका फायदा भी मिला था। नियम समझना और अपने लिए असुविधाजनक होने पर भी उसका महत्व याद रखना अलग उपलब्धियाँ हैं।

मेरा नाम रीना है। उम्र अड़तीस थी। तेजी से हाथ पूरा करने की पहचान बनाई थी। भास्कर पैंतालीस का व्यवस्थित खिलाड़ी था, जिसे मैंने कभी हमारे क्लब का भाग्यशाली रिजर्व कहकर परिचित कराया था।

उसकी बड़ी बहन मीना अंतिम दोपहर दर्शक सीमा के पीछे खड़ी थी। कुर्सियाँ थीं, लेकिन उस जगह नहीं जहाँ वह खड़ी थी। काम की पाली के बाद देर से पहुँची थी। किसी ने दूसरे सिरे से कुर्सी लानी चाही तो उसने मना कर दिया।

मैं उस इनकार को पहचानती थी। पिछली प्रतियोगिता में उसका कारण मैं बनी थी। पाँचवीं डील के बाद स्कोरर ने भास्कर का कुल बताया तो मीना ने तुरंत ताली नहीं बजाई। पहले शीट देखी। वह सीख चुकी थी कि अजनबियों के सामने उसका उत्सव छीना जा सकता है।

ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी चाहिए? नीचे अपनी पसंद की कम्युनिटी चुनें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

2. वह खुशी जिसे मैंने रोक दिया

पिछले सत्र में भास्कर एक स्थानीय आयोजन में अंतिम समय पर बदले खिलाड़ी के रूप में आया था। तीन सावधान राउंड खेले और दर्ज कुल में सबसे आगे रहा। उसकी बहन मिठाई का छोटा डिब्बा लेकर आई।

मैं घोषणाओं में मदद कर रही थी। एक परिणाम की जाँच बाकी थी। मैंने कहा कि रैंक अभी अस्थायी है। वह बात सही थी।

फिर जोड़ दिया कि स्थायी खिलाड़ियों का हिसाब पूरा होने से पहले रिजर्व कभी-कभी प्रभावशाली लगते हैं।

लोग हँसे। भास्कर ने पूछा कि उसकी शीट में वास्तविक समस्या है क्या। मैंने कहा कि अनुभवी लोगों को गिनती पूरी करने दे। मीना ने डिब्बा वापस बैग में रख दिया।

बाद में परिणाम की पुष्टि हुई। भास्कर जीता था। तब तक बहन काम के लिए जा चुकी थी। वह उसके साथ गया था क्योंकि बस स्टॉप पर मीना रो रही थी। लगभग खाली कमरे में मैंने सही परिणाम घोषित किया और मामला समाप्त मान लिया।

वह कई सप्ताह नहीं लौटा। वापस आया तो मैंने पूछा कि क्या अब भी प्रशासनिक देरी से नाराज है। काफी देर मेरी तरफ देखता रहा।

“मेरी बहन ने मेरे लिए वह शाम बचाई थी,” उसने कहा। “आपने उसे आने पर मूर्ख जैसा महसूस कराया।”

मैंने उत्तर दिया कि गंभीर खिलाड़ियों को इतना संवेदनशील नहीं होना चाहिए।

आज भी लगता है कि वह मेरी सबसे कायर बात थी। मैंने जाँच की उचित जरूरत में अपमान छिपाया। फिर चोट खाने वाले के दुख को ऐसे पेश किया जैसे वही प्रमाण हो कि अपमान सही था।

3. वह अभ्यास जो मुझे उबाऊ लगा

भास्कर दूसरे साप्ताहिक समूह में अभ्यास करने लगा। सुना कि वे हाथ पूरा करने के बाद केवल हारने वाले खिलाड़ी के फैसले दोहराते हैं। मैंने उसे हारने वालों का क्लब कहा।

बाद में कॉपियाँ देखीं। उनमें दर्ज था कि खिलाड़ी वास्तव में कौन-से पत्ते देख सकता था, कौन-से समूह बनने की संभावना बची थी और प्रत्येक डिस्कार्ड के बाद कितना अधूरा मूल्य रह गया था। अंत में खुले विरोधी के पत्ते इस्तेमाल करके पुराने निर्णय को सही बताने की अनुमति नहीं थी।

भास्कर की विशेष कमजोरी आकर्षक जोड़ी से लगाव थी। दो बड़े पत्ते इसलिए रखता कि उसी अंक का तीसरा आने पर सेट बन जाएगा, भले हाथ का बाकी हिस्सा अधिक जरूरी काम माँगता हो।

अभ्यास साथी ड्रॉ का क्रम बदलते। उससे समझाने को कहते कि वही जोड़ी कब रखनी चाहिए और कब तोड़नी चाहिए। हर बड़ा पत्ता छोड़ देने का कोई सार्वभौमिक आदेश नहीं था। इंतजार की कीमत गिनने की जिम्मेदारी थी।

जोकर दूसरी जगह ले जाते समय वह जाँचता कि शुद्ध क्रम सुरक्षित है या नहीं। कई अभ्यास घोषणाएँ पत्ते खोलने से पहले रोक दीं क्योंकि समय पर गलत व्यवस्था दिख गई।

मेरी तैयारी तेज फिनिश पहचानने पर थी। उपयोगी काम था। जुड़े पत्तों, उपलब्ध दूसरे क्रम और पूरे समूह को खराब करने वाले डिस्कार्ड से बचने में बेहतर हुई।

जिस हाथ को पहले खत्म नहीं होना था, उसे नजरअंदाज किया। उसे वास्तविक खेल का असफल रूप मानती थी। भास्कर उसी हाथ को खेलना सीख रहा था।

4. पहले अठारह, फिर सोलह

फाइनल की पहली डील मैंने साफ घोषणा से जीती। भास्कर को अठारह दंड अंक मिले। बाकी दोनों फाइनलिस्ट दिनेश और माया के अंक भी दर्ज हुए।

तेज शुरुआत का परिचित सुकून मिला। हाथ अच्छा चल रहा हो तो दर्शक मुझे पसंद आते हैं। किसी ने कहा कि भास्कर को अधिक महत्वाकांक्षी होना पड़ेगा। उसने प्रतिक्रिया नहीं दी।

दूसरी डील में भी मेरा हाथ जल्दी बना। प्राकृतिक पत्ते ने एक क्रम पूरा किया और जोकर दूसरे समूह के लिए खुल गया। तेरह गिने, जरूरी क्रम जाँचे और घोषणा की। भास्कर का दंड सोलह था।

दो डील बाद मेरे शून्य और उसके चौंतीस अंक थे। दो घोषणाएँ बनाम शून्य—मैं यही संख्या जोर से कहना पसंद कर रही थी।

उसका खुला हारने वाला हाथ मुझे चिढ़ा रहा था। वह पूरी तरह बिखरा नहीं था। शुद्ध क्रम था और नुकसान सीमित था। मेरे पूरा करने से पहले कई आकर्षक बड़े पत्ते छोड़ चुका था।

मैं चाहती थी कि अंतर जितना था, उससे अधिक निर्णायक लगे।

रीसेट के समय भास्कर ने स्कोरर से पुष्टि माँगी कि दूसरी डील में सोलह लिखा है, उन्नीस नहीं। स्कोरर ने सही अंक दिखाए। उसने धन्यवाद कहा और चुप हो गया।

मैंने दर्शकों की तरफ छोटा इशारा किया, जैसे यह सावधान जाँच घबराहट की आदत हो। किसी का हँसना जरूरी नहीं था। इशारा अपने आप में बदसूरत था। उसकी शांति मुझे उसे ऐसे किरदार में बदलने को उकसा रही थी जिसे हराना मुझे आसान लगता था।

5. चवालीस

तीसरी डील दिनेश जीता। उसने हमारी निजी कहानी का ध्यान रखकर धीरे प्रवेश नहीं किया। अपना हाथ खेला, वैध घोषणा की और बाकी सबको दिखाना पड़ा कि वे क्या लिए बैठे थे।

मैं दो अच्छे दिखने वाले समूहों का बहुत देर तक इंतजार करती रही थी। शुद्ध क्रम सुरक्षित था, लेकिन बाकी पत्ते उम्मीद के अनुसार नहीं जुड़े। दंड चवालीस निकला।

भास्कर को आठ मिले।

अब रीना 44 और भास्कर 42 था। जिसे मैंने दो बार हराया था, वह पहली बार मुझसे आगे था।

मैंने स्कोरर को ऐसे देखा जैसे उसने आश्चर्यजनक काम किया हो। उसने तीन प्रविष्टियाँ दिखाईं। शून्य, शून्य, चवालीस। अठारह, सोलह, आठ। जोड़ने में कुछ कठिन नहीं था।

भास्कर समझाने के लिए आगे नहीं झुका। कोई भाषण देता तो शायद कम चिढ़ होती।

पत्ते हटे तो उसकी तीसरी डील की सोच समझ आने लगी। उसने दिनेश के ठीक पत्ते नहीं जान लिए थे। उसने देखा कि अपने रास्ते कम हो रहे हैं और आदर्श फिनिश का अनंत इंतजार करने के बजाय अधूरा मूल्य घटाया।

मैं वह हाथ खेलती रही थी जो अपने पास चाहती थी।

सीमा पर मीना अब भी खड़ी थी। भाई को अगली डील के लिए तैयार होते देख रही थी। मैंने सोचा कि शायद बैठना नहीं चाहती, क्योंकि फिर कुर्सी छोड़कर जाना पुराने अपमान को दोहराना लगेगा।

मुझे पता नहीं था। पहली बार मैंने अपना अनुमान किसी और के बारे में तथ्य बनाकर पेश करने से खुद को रोका।

6. तीसरी जीत

चौथी डील मैं जीती। अंत अधिक संतोषजनक बनाने के लिए इस वाक्य को कमजोर नहीं करना चाहिए। मैंने अच्छा खेला था। शुद्ध क्रम रखा। उपयोगी प्राकृतिक पत्ता आने पर दूसरी योजना बदली। भास्कर के पहले कुल को देखकर गलत घोषणा की जल्दबाजी नहीं की।

उसे चौदह अंक मिले।

अब स्कोर रीना 44 और भास्कर 56 था। एक डील बाकी थी और मैं बारह अंक आगे थी। दिनेश और माया पीछे थे, लेकिन आखिरी हाथ में अपना सर्वश्रेष्ठ खेलने का पूरा कारण दोनों के पास था।

मेरी तीन घोषणाएँ। भास्कर की अभी एक भी नहीं।

बाद की रिपोर्ट मन में लिखने लगी। बताऊँगी कि अस्थायी झटके ने एकाग्रता की परीक्षा ली। भास्कर की निरंतरता की प्रशंसा उस लहजे में करूँगी जो सम्मानजनक उपविजेता के लिए होता है।

फिर वास्तविक नियम देखा।

अगली घोषणा वह करता तो उससे साफ आगे रहने के लिए मुझे बारह से कम दंड चाहिए था। बारह पर बराबरी और प्रकाशित टाई प्रक्रिया आती। बारह से अधिक पर वह आगे होता।

इस गणना ने उतना नहीं डराया जितना चाहिए था। अभी भी उम्मीद थी कि पहले मैं ही समाप्त करूँगी।

भास्कर ने पानी पिया और गिलास अलग मेज पर रखा। उसके हाथ न नाटकीय थे, न पूरी तरह स्थिर। अंगूठा तर्जनी से रगड़ा, फिर अंपायर ने बाँटना शुरू किया तो रोक दिया।

उस पर भी दबाव था। बाद में याद रहा। उस समय उसकी चुप्पी को मैंने मेहनत की अनुपस्थिति समझ लिया था।

नई गतिविधियों और ऐप अपडेट के लिए अपना पसंदीदा चैनल देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

7. वह जोड़ी जिसे मैं नहीं छोड़ रही थी

मेरे आखिरी हाथ में कई उचित रास्ते थे। खतरे का एक हिस्सा यही था। खराब हाथ अपना संकट घोषित करता है। अच्छा दिखता हाथ उस समय के बाद भी इंतजार करने को मना सकता है जब इंतजार समझदारी नहीं रहता।

मैंने क्लब का शुद्ध क्रम और हार्ट का क्रम पूरा किया। बादशाहों का समूह वैध सेट बना। दो रानियाँ आकर्षक रहीं, क्योंकि अलग सूट की एक और रानी मिलती तो वे पूरी हो जातीं।

मुझे पता था कि अधूरा हिस्सा कितने अंक का है। बस संभावित तीसरी रानी को स्कोर की जरूरत से ज्यादा महत्व देती रही।

भास्कर के चुनाव उसके हाथ की निश्चित जानकारी नहीं देते थे। उसने एक खुला पत्ता उठाया, दूसरा छोड़ा और बंद ढेर से ड्रॉ किया। हर कार्रवाई कुछ संभावनाएँ घटाती थी, सब कुछ नहीं दिखाती थी।

एक बार उसका चेहरा देखा और उसमें आत्मविश्वास की कहानी बनाने लगी। फिर अपनी तरफ लौट आई।

अंत में मेरे पूरे समूह थे: क्लब के 2, 3, 4; हार्ट के 7, 8, 9; और चार अलग सूट के बादशाह। अधूरे पत्ते हार्ट की रानी, क्लब की रानी और डायमंड का 4 थे।

दो रानियाँ और एक चार। कोई अभी घोषणा करता तो चौबीस दंड अंक।

मुझे एक और बारी चाहिए थी। स्वाभाविक है। ज्यादा इंतजार करने वाला हर खिलाड़ी बता सकता है कि अगली बारी क्या ठीक कर सकती है।

भास्कर ने ड्रॉ किया, पत्ते लगाए और फिर जाँचे। वह बोलता, उससे पहले मैं आगे झुक गई, जैसे ज्यादा ध्यान से देखने से वाक्य देर से निकलेगा।

8. वह हाथ जो उसने पूरा किया

भास्कर ने अपना ढीला पत्ता छोड़ा और घोषणा की।

हाथ में डायमंड के 4, 5 और 6 का शुद्ध क्रम था। क्लब के 9, 10 और जैक थे। हार्ट, स्पेड और डायमंड के तीन आठ थे। स्पेड के 2, 3, 4 और 5 थे।

तीन, तीन, तीन और चार। कुल तेरह। क्रम लगातार थे और सही सूट में थे। आठों का सेट अलग सूट का था। उत्साही व्याख्या के भीतर कोई गायब पत्ता छिपाया नहीं गया था।

अंपायर ने घोषणा स्वीकार की। मैंने अपने चौबीस अंक खोले।

मेरा कुल अड़सठ हुआ। भास्कर छप्पन पर रहा। दिनेश बानवे और माया एक सौ सत्रह पर समाप्त हुए।

भास्कर बारह अंकों से चैंपियन था।

एक क्षण मैंने तरीका खोजा कि मेरी तीन घोषणाओं का भावनात्मक वजन उसकी एक से अधिक कैसे बताया जाए। फिर शीट की पाँच पंक्तियाँ दिखीं। उसने शून्य से पहले अठारह, सोलह, आठ और चौदह चुकाए थे। मैंने तीन बार कुछ नहीं चुकाया और दो बार बहुत ज्यादा।

मैं नियम की चालाकी से नहीं हारी थी। ऐसे खिलाड़ी से हारी थी जो व्यक्तिगत डील नहीं जीतते समय भी खेलता रहा।

मीना ने कुल देखा। स्कोरर ने दोहराया और सीमा के पीछे से हस्ताक्षर वाला परिणाम दिखाया। तभी उसने ताली बजाई। शुरुआत में आवाज छोटी थी। भास्कर ने तुरंत सुन ली। उसकी निगाह पहली बार पत्तों से हटकर बहन के चेहरे तक गई।

9. कुर्सी

मैंने दोबारा जोड़ने को कहे बिना हस्ताक्षर किए। गणना सही थी। हाथ जाँचे जा चुके थे। दूसरों की कीमत पर पर्याप्त ध्यान ले चुकी थी।

भास्कर ने तीनों से हाथ मिलाया। कठिन तीसरी डील के लिए दिनेश का धन्यवाद किया। माया का भी, जिसने मुश्किल कुल के बाद भी दबाव बनाए रखा।

मैंने कहा, “तुमने हार का नुकसान छोटा रखा।”

“हाँ,” उसने जवाब दिया। “आपने उसकी जरूरत बना दी थी।”

यह झूठी नम्रता नहीं थी। मेरी अच्छी डीलों ने अच्छे उत्तर माँगे थे। इसे स्वीकार करने से उसकी जीत को खारिज करना कठिन और सम्मान देना आसान हो गया।

पुरस्कार से पहले मैं दर्शक क्षेत्र गई और मीना के पास कुर्सी लाई। उसने कुर्सी देखी, फिर मुझे।

“आपको हटना नहीं पड़ेगा। यहीं रख देती हूँ।”

वह इतनी देर खड़ी रही कि समझ आ गया—कुर्सी मेरे किए को ठीक नहीं करती। फिर बैठी क्योंकि पैर दुख रहे थे, इसलिए नहीं कि मुझे सुंदर अंत मिलना चाहिए था।

मैंने कहा कि पुराना परिणाम सही था और सामान्य जाँच बताने के बहाने मैंने उसके भाई को अपमानित किया था। उसने पूछा कि कमरा भरा था तब क्यों नहीं कहा।

मेरे पास उपयोगी उत्तर नहीं था।

पुरस्कार के समय वही सुधार सबके सामने किया। उसे अपने विकास की कहानी नहीं बनाया। भास्कर ट्रॉफी के पास सुनता रहा। किसी घटना को आखिर ठीक बताने के लिए उसे मुझे धन्यवाद देना जरूरी नहीं था।

10. वह डील जिसे मैंने देखना चाहा

तस्वीरों के बाद भास्कर पत्ते समेटने लगा। मैंने पूछा कि तीसरी डील दिखाएगा क्या, जिसमें दिनेश जीता था और उसे केवल आठ अंक लगे थे। उसने बहन की तरफ देखा। उसने कहा कि समय है।

समीक्षा नोट्स और अंत में खुले पत्तों से फैसले फिर बनाए। जहाँ पुराने छिपे पत्ते नहीं जाने जा सकते थे, भास्कर ने साफ कहा। सफल निर्णय को दिनेश का मन पढ़ लेने का दावा नहीं बनाया।

एक जगह मैंने बड़ी जोड़ी एक और ड्रॉ तक रखने को कहा। उसने पूछा कि मैं क्या छोड़ूँगी और मेरी अगली बारी से पहले हाथ खत्म हो गया तो कितना दंड बचेगा।

मैंने जल्दी उत्तर दिया। फिर दोबारा गिना।

मीना ने इस बार लाया मिठाई का डिब्बा खोला। एक माया को दी, एक दिनेश को, फिर मुझे। मैंने बिना भाषण लिए स्वीकार किया।

क्लब कर्मचारी को मेज चाहिए थी तब तक बैठे। मैं तीन शानदार फिनिश की रिपोर्ट बनाने आई थी। उस डील के फैसलों का पन्ना लेकर निकली जो हमारी मेज पर दिनेश के अलावा कोई नहीं जीता था।

अगले हफ्ते अभ्यास का एक हिस्सा बदला। हर हार के बाद लिखा कि सबसे पहले किस मोड़ पर नुकसान सीमित कर सकती थी। जीतने की कोशिश बंद नहीं की। केवल बाकी फैसलों को वास्तविक खेल से बाहर मानना बंद किया।

मुझे अब भी तेज घोषणा अच्छी लगती है। अब भी जीतने के लिए खेलती हूँ। लेकिन कोई पूछता है कि भास्कर ने कैसे हराया, तो मेरी बात अब मेरी जीती हुई तीन डीलों से शुरू होकर वहीं खत्म नहीं होती।

आगे जानना चाहते हैं? ऐप की जानकारी और साझा ऑफ़र की शर्तें चैनल पर देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

🎁 ऐप अपडेट • ऑफ़र • कम्युनिटी

✅ ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी देखें।

🔐 हमारे चैनल के एक्सक्लूसिव ऑफ़र।

📲 नए ऐप के मुफ़्त रिवॉर्ड अपडेट—सब एक जगह!

🔥 अभी जुड़ें, ऑफ़र देखें और उपलब्ध मुफ़्त रिवॉर्ड क्लेम करें!

टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप