1. Jaiho 777 — जो पत्र उसने नहीं भेजा
ज़ोया ने पहला पत्र बिजली के बिल की पीठ पर शुरू किया। मैं उस आदमी के लिए खाना गर्म रखते थक गई हूँ जो कहता है बस घर पहुँच रहा हूँ। वाक्य काटा। फिर बिना एक शब्द बदले दोबारा लिखा।
भोपाल के दूसरी ओर फ़रहान दो अन्य गोदाम मजदूरों के साथ कमरे में पतले गद्दे पर सो रहा था। उनतालीस साल की उम्र में वह ऐसी बहस के बाद अलग हुआ था जो छूटे खाने से शुरू हुई और चार साल की शिकायतों तक गई। दूसरे शहर में काम करता उनका वयस्क बेटा दोनों से बात कर चुका था। दोनों की कहानी में सामने वाला कभी सुनता नहीं था।
फ़रहान के पुराने रमी साथी यश ने अलगाव को मजाक बना दिया। टीम की बैठक में हाथ का विश्लेषण दोहराने को कहा, “किसी ऐसी भाषा में जो लोग समझ सकें।” कमरे ने उसके क्षेत्रीय लहजे पर हँसी की। फ़रहान चुप हुआ तो यश बोला कि यही प्रमाण है कि कहने को उपयोगी कुछ नहीं था।
एक सप्ताह बाद टीम सूची में फ़रहान का नाम नहीं था। शाम के अभ्यास ने घर में उसकी जगह कठिन कर दी थी। जिन खिलाड़ियों को वे घंटे दिए थे, उन्होंने बात किए बिना बदल दिया।
तीन दिन पुराना टीम बैज कमीज की जेब में रखा। चौथे दिन दराज़ में रखकर फर्श पर तेरह पत्ते लगाए। गद्दों के बीच मेज़ की जगह नहीं थी। उसने पैरों के पास पड़ी चप्पल हटाई और कॉपी खोली। रात की शिफ्ट वाले साथी के उठने तक उसके पास थोड़ी जगह थी।
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2. पत्तों से बना वाक्य
फ़रहान हमेशा अपनी सोच बोलकर समझाता था। हाथ पर उँगली घुमाता, पुरानी संभावना पर लौटता और बताता कि दूसरा पत्ता आता तो क्या होता। साथियों के लिए लंबी व्याख्या बीच में टोकने का निमंत्रण बन गई थी। साझा कमरे में उसने समूह बनाकर चित्र शुरू किए। हर वास्तविक पत्ते का चौकोर। तीर से संभावित बदलाव। दो विचारों को एक ही पत्ता चाहिए होता तो आवाज आगे भागने से पहले चित्र टकराव दिखा देता।
पहले पन्ने उलझे थे। लगभग हर जगह संभव लिखा। बादशाह का सेट हो सकता था। बेगम जुड़ सकती थी। इक्का दूसरे उस इक्के की मदद कर सकता था जो हाथ में था ही नहीं। इतने भविष्य बचा लिए कि वर्तमान हाथ का आकार नहीं रहा।
सार्वजनिक पुस्तकालय की खिलाड़ी स्नेहा से खुले अभ्यास के बाद चित्र देखने को कहा। उसने बड़े पत्ते चिह्नित किए जो अभी कोई काम नहीं कर रहे थे। फिर दो छोटे पत्ते दिखाए जो एक से अधिक वास्तविक तरीके से जुड़ सकते थे। “पहले दिखाओ अभी क्या है,” उसने कहा।
फ़रहान ने हाथ दोबारा बनाया। कम समृद्ध और अधिक खेलने लायक लगा। वही रूप कॉपी के सामने रखा। अगली शाम कमरे के साथी ने पूछा कि उदाहरण से तीन बादशाह क्यों काटे। उसने दो वाक्य बोले और बाकी पत्तों से दिखाया। इस बार साथी बीच में नहीं बोला। फ़रहान ने उसके सवाल का सीधे जवाब दिया और गलत खाने को पेंसिल से सुधारा। कार्डों के चित्र किसी के लहजे की नकल नहीं कर सकते थे।
3. उसका दूसरा पन्ना
ज़ोया का दूसरा पत्र उसकी चुप्पी की शिकायत से शुरू हुआ। उसने पूछा था कि टीम की बैठक में क्या हुआ। फ़रहान ने कुछ नहीं कहा, फिर अधिक देर बाहर रहने लगा। मजाक की रिकॉर्डिंग देख चुके पड़ोसी से उसे बात पता चली। पड़ोसी ने हल्की फुल्की मस्ती बताया। ज़ोया उस वाक्य पर रुक गई। थकने पर वह भी फ़रहान की लंबी व्याख्याओं पर हँसी थी। नहीं जानती थी कि कमरे ने उसी कमजोरी के साथ क्या किया।
पुस्तकालय में फ़रहान प्रभावशाली बड़े पत्ते जमा करने के बजाय छोटे समूहों पर काम कर रहा था। दो जुड़े पत्तों के एक से अधिक रास्ते हो सकते थे। मगर उसे वास्तविक रैंक और सूट लिखने थे। चिड़ी के सात और आठ को छह या नौ मदद कर सकते थे। केवल संख्या सही होने से पान का नौ नहीं लगता था।
उसने असफल हाथ में खुला नुकसान भी गिना। बड़ा पत्ता केवल बड़ा होने से खराब नहीं था। पूरा बड़ा क्रम शानदार हो सकता था। धुँधले भविष्य के लिए रखा अकेला बड़ा पत्ता अलग चीज थी। यह फर्क सीखते कई अभ्यास हारे। उसने बेगम छोड़ी जो बाद में काम आती। पूरा तरीका उलट देना चाहा। स्नेहा ने चुनाव के समय उपलब्ध जानकारी फिर देखने को कहा। अगले पन्ने पर उसने परिणाम से पहले फैसला लिखा।
ज़ोया ने अधूरा दूसरा पत्र तह करके पहले के नीचे रख दिया। उसके पास भी घटनाओं का पूरा क्रम लिखने को बाकी था। उसने ऊपर केवल उसकी गलती नहीं, अपना कहा हुआ वाक्य भी जोड़ा।
4. पूरी सीरीज़
पहले पूरे अभ्यास में फ़रहान ने तीन घोषणाएँ कीं और कुल स्कोर खराब रहा। जीतों के बीच बहुत से अलग पत्ते रखे थे। प्रतिद्वंद्वियों के छोटे नुकसान उसकी शानदार समाप्तियों से भारी पड़े। उसने व्यावहारिक काम तय किया। हर डील के बाद बचे असंगठित पत्ते और वह बारी लिखता जब उन्हें उचित रूप से छोड़ा जा सकता था। इतिहास ऐसा नहीं लिखता कि अगला ड्रॉ पहले से जानना चाहिए था। कभी बेहतर चुनाव नहीं था। कभी चित्र टाली जा सकने वाली पेनल्टी साफ दिखाता।
अभ्यास को गोदाम की शिफ्ट के आसपास रखा। माल उतारने वाली रात के बाद फर्श पर बैठकर दो स्थितियाँ देखता। खाली दोपहर पुस्तकालय में पूरा स्कोर वाला मुकाबला खेलता। कमरे के साथियों को बताता कि छोटी साझा जगह कब चाहिए। बाद में बिस्तर वापस मोड़कर रख देता।
बेटे के दस्तावेज के लिए ज़ोया का फोन आया। उसने सीधे उत्तर दिया। फोन खत्म होने से पहले बताया कि शहर की चैंपियनशिप में नाम दिया है और वास्तविक तारीखें बताईं। उसने यह नहीं कहा कि जीतकर लौटेगा। उसने कोई नया वादा नहीं माँगा।
क्वालिफायर में दूसरा स्थान मिला और मुख्य आयोजन में प्रवेश हुआ। स्नेहा भी पहुँची। बधाई देकर उसने कठिन सातवाँ हाथ अगले विश्लेषण के लिए रखने को कहा। नुकसान अच्छी तरह घटाया था, मगर उसे लगा कि पहले का एक डिस्कार्ड बेहतर हो सकता था। फ़रहान ने वही पन्ना अलग चिन्हित किया। जीत की घोषणा वाले पन्ने के पीछे नहीं छिपाया। अब उसे सवाल पूछे जाने से पहले हँसी की उम्मीद नहीं होती थी।
5. चौरानवे
चैंपियनशिप फाइनल में फ़रहान, यश, स्नेहा और अनुभवी देव थे। दो दिनों में दस डील, हर दिन पाँच। सबसे कम कुल पेनल्टी वाला जीतता। पहला दिन कठिन था। शुरुआती डील में दूसरी सीक्वेंस अधूरी रहते बड़े पत्तों की जोड़ी रखी। अपेक्षा से अधिक हाथ खुला रह गया। बाद की घोषणा से संभला। फिर यश को आत्मविश्वास से पत्ते जमाते देखकर जल्दी खत्म करना चाहा और एक और डील हारा।
पाँच डील बाद फ़रहान चौरानवे पर था। यश तिरासी पर। ग्यारह अंक का अंतर बंद हो सकता था। इतना था कि जल्दबाज़ जवाब देने को उकसाए। यश ने बोर्ड देखा। “कम से कम अंक तो साफ बोलते हैं।”
फ़रहान ने अपने खाने जाँचे, हस्ताक्षर किए और निकल गया। साझा कमरे में वही हाथ बनाए जिन्हें सही याद कर सकता था। जहाँ याद नहीं था, खाली छोड़ा। अच्छा दिखता विश्लेषण गढ़ा नहीं। सुबह से पहले देखने के लिए दो फैसले घेरे।
ज़ोया का तीसरा पत्र एक पंक्ति था। यदि फिर बात करें, तो चाहती हूँ कि हम दोनों अपने वाक्य पूरे कर सकें। उसने कलम रखकर फोन किया। पूछने पर फ़रहान ने कुल अंक बताए। उसने कहा कि शायद अंतिम सत्र देखने आएगी। बाद की चुप्पी में किसी ने सफाई भरने की जल्दी नहीं की।
फोन के बाद फ़रहान ने अगले दिन की बस का समय देखा। फिर दोनों चिह्नित फैसले पढ़े। एक में उसे बदलाव करना था। दूसरे में पुराने चुनाव का कारण सही था, भले परिणाम खराब निकला था।
6. चार डील का काम
छठी डील यश ने जीती। फ़रहान ने उपयोगी बनावट इतनी बचाई कि बचे नुकसान के चौदह अंक हुए। कुल एक सौ आठ। हार चुभी, मगर सातवीं टूटी योजना से शुरू करना जरूरी नहीं हुआ। सातवीं उसने छोटे जुड़े पत्ते बचाकर जीती, जबकि प्राकृतिक पत्ते से अलग सेट पूरा हुआ। यश को बाईस अंक लगे। पुराने साथी की बढ़त तेज घटी।
आठवीं स्नेहा जीती। फ़रहान के असंगठित पत्तों के आठ, यश के सोलह अंक हुए। नौवीं में यश फिर पहले पूरा हुआ। फ़रहान की घोषणा नहीं थी, मगर पूरे समूहों के बाद केवल छह अंक खुले बचे।
अंतिम डील से पहले बोर्ड पर स्नेहा एक सौ उन्नीस, यश एक सौ इक्कीस, फ़रहान एक सौ बाईस और देव एक सौ बत्तीस था। बढ़त स्नेहा की थी, चुपचाप लड़ते किसी आदमी की नहीं। फ़रहान ने चारों योग देखे। पहले स्थान से तीन अंक था। हर प्रतिद्वंद्वी प्रासंगिक था।
तय ब्रेक में ज़ोया आई और पीछे बैठी। फ़रहान ने देखा, मगर मेज़ से उसका चेहरा ठीक नहीं पढ़ सकता था। उसने हल्का हाथ उठाया। उसने इशारा लौटाकर कलम रख दी। अंतिम डील शुरू होने वाली थी। चार अलग फैसलों और परिणामों से अपना कुल मुकाबले में लाया था। अब मिले वास्तविक तेरह पत्ते खेलने थे।
उसने कुर्सी थोड़ी सीधी की। सामने डेक फेंटा जा रहा था। ज़ोया के आने की खबर उसने पत्तों की अपेक्षाओं में नहीं जोड़ी। पहली कार्ड हाथ में आई तो उसका सूट देखा, फिर अगली ली।
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7. बड़े पत्ते जिनका काम नहीं था
आखिरी हाथ धीरे विकसित हुआ। फ़रहान की ईंट की सीक्वेंस मजबूत थी, मगर छोटे पान और चिड़ी पर ध्यान चाहिए था। चिड़ी की बेगम और हुकुम का बादशाह शुरू में उपयोगी लगे, क्योंकि सैद्धांतिक रूप से ऐसे पत्तों से सेट बन सकते थे जो आए नहीं थे। आगे भी दोनों को वास्तविक काम नहीं मिला। उपयोगी पान का तीन आया तो अलग बेगम छोड़ी। बाद में पान के पाँच से प्राकृतिक क्रम बढ़ा तो हुकुम का बादशाह जाने दिया। पुराने छोड़े प्रोजेक्ट बचाने के लिए ईंट की बनी सीक्वेंस से पत्ता नहीं निकाला।
यश ने एक खुला डिस्कार्ड उठाया। फ़रहान ने क्रिया देखी। उससे पूरा हाथ मालूम होने का दावा नहीं किया। एक पल केवल दूसरे की रुचि के कारण अपना छोड़ा पत्ता वापस चाहिए था। उसने अपने समूह देखे।
पान का क्रम 2–3–4–5 हुआ। चिड़ी 7–8–9 थी। ईंट 9–10–J–Q–K। हुकुम का इक्का अलग था। चार जमा तीन जमा पाँच जमा एक, कुल तेरह। बारह पत्ते पहले से प्राकृतिक वैध सीक्वेंस में थे। अलग इक्का केवल इसलिए किसी में नहीं छिप सकता था कि कभी इक्का बड़ा होता है। ईंट का क्रम बादशाह पर खत्म होता था। हुकुम का इक्का गलत सूट था।
फ़रहान ने उसे अलग रखा। उसका काम न होना छिप नहीं सकता था। उसने समूहों को इतना अंतर देकर पकड़ा कि अगली बारी पर गिनती फिर साफ हो। इस बार सुंदर कल्पना के पीछे एक वास्तविक पत्ता गायब नहीं होने देना था।
8. तीन दिशाएँ, एक गिनती
चिड़ी की सीक्वेंस छह या दस से बढ़ सकती थी। उचित प्राकृतिक पत्ता आता तो पान का क्रम भी बढ़ सकता था। फ़रहान ने वास्तविक संभावनाएँ गिनीं। उन्हें मिलने का अधिकार नहीं समझा। स्नेहा ने बंद गड्डी से लिया, सोचा और छोड़ा। देव ने बारी खेली। यश ने खुला पत्ता चुना और हाथ जमाया। चेहरा सहज था। फ़रहान को पहले दिन की जल्दी वाली हार याद आई। उसने उस चेहरे को सूचना नहीं माना।
अगला ड्रॉ असंबंधित बड़ा पत्ता था। रखने के लिए बनी सीक्वेंस से पत्ता निकालना पड़ता या एक बेकार बड़े पत्ते की जगह दूसरा रखना पड़ता। उसने नया पत्ता छोड़ा। हाथ कुछ खास प्राकृतिक विस्तारों के लिए तैयार रहा। एक और चक्कर पूरा हुआ। इक्के पर उँगलियों की पकड़ कसी, फिर ढीली हुई। ज़ोया बैग गोद में रखे बैठी थी। उसे केवल नजर के किनारे से देख सकता था। पत्तों को बीच की जगह चाहिए थी।
अगली बारी बंद ड्रॉ चिड़ी का दस था। 7–8–9 बढ़कर चार पत्तों की प्राकृतिक सीक्वेंस हुआ। अब चौदह पत्ते थे। हुकुम का इक्का अलग ही था। फ़रहान ने नया सेट गढ़ने के लिए ईंट की पाँच पत्तों की सीक्वेंस नहीं तोड़ी। वर्तमान बनावट गिनी। चार पान, चार चिड़ी, पाँच ईंट। तेरह। तीन प्राकृतिक सीक्वेंस। हर वास्तविक पत्ता केवल एक जगह।
उसने निर्धारित प्रक्रिया में इक्का छोड़ा और घोषणा की। फिर हाथ पीछे रखे। अब मेज़ पर उसका पूरा वाक्य मौजूद था। अधिकारी को उसे शुरू से अंत तक देखना था।
9. जिसे किसी ने बीच में नहीं रोका
अधिकारी ने लंबे समूह ध्यान से देखे। पान दो से पाँच। चिड़ी सात से दस। ईंट नौ से बादशाह। कोई जोकर नहीं। साझा पत्ता नहीं। परिचित संख्या के पीछे गलत सूट नहीं। घोषणा सही थी। फ़रहान एक सौ बाईस पर रहा। स्नेहा के बचे पत्तों के अठारह से एक सौ सैंतीस हुए। देव के दस से एक सौ बयालीस। यश के असंगठित पत्तों के बाईस से एक सौ तैंतालीस।
फ़रहान चैंपियन था। उसे टीम से हटाने वाला आदमी चार फाइनल खिलाड़ियों में आखिरी रहा। यश ने अधिकारी से ईंट की पाँच पत्तों वाली सीक्वेंस फिर गिनने को कहा। उसने गिनी। पाँच ही थे। फ़रहान ने कुछ जोड़े बिना देखा। उसका हाथ अधिक देर देखे जाने पर भी सही रह सकता था।
सम्मान के समय आयोजक ने आखिरी बनावट समझाने को कहा। फ़रहान ने साँस ली। लहजा नहीं बदला था। पहले छोड़ी बेगम और बादशाह से शुरू किया। फिर छोटे जुड़े पत्ते दिखाए। चिड़ी जमाने को रुका तो किसी ने अगले वाक्य की जगह मजाक नहीं डाला।
स्नेहा प्रदर्शन मेज़ के पास थी। उसने एक विकल्प पूछा। उसने दिखाया। उसने सिर हिलाकर हाथ मिलाया। यश समूह के किनारे अंतिम शीट के साथ खड़ा था। अधिकारी पहुँची तो हस्ताक्षर किए। फ़रहान का नाम तीनों के ऊपर था। ज़ोया पूरी व्याख्या खत्म होने के बाद आगे आई।
फ़रहान ने कार्ड समेटे और कॉपी बंद की। आयोजक ने फोटो के लिए रुकने को कहा। वह रुका। इस बार किसी ने उसकी जगह किनारे नहीं की।
10. गुरुवार का खाना
हॉल के बाहर ज़ोया ने तीन मुड़े पन्ने दिए। “जब तीनों पूरे पढ़ने का समय हो, तब पढ़ना।” उसने पास की नीची दीवार पर साथ बैठकर पढ़े। लोग बोर्ड वाहन में रख रहे थे। पहले पन्ने पर उसने अपने हाथ देखे। दूसरे पर उसकी ओर मुड़ा। वह रुकी रही। बोलने से पहले तीसरा भी खत्म किया।
उसने टीम बैठक की पूरी बात बताई। कुछ नहीं हुआ नहीं कहा। फिर उन शामों की बात की जब लौटने का वादा करके बाहर रहा। ज़ोया ने बताया कि खाना हटाने से पहले कितनी देर रुकी थी। उसने पूरा सुना।
गुरुवार का खाना तय किया। मानने से पहले फ़रहान ने शिफ्ट देखी। ज़ोया ने चैंपियनशिप के लिफाफे की पीठ पर समय लिखा। वह खाना बनाएगी। वह सब्जियाँ लाएगा और जरूरत पड़ने से पहले पहुँचेगा।
गुरुवार को दरवाज़े पर इतनी जल्दी पहुँचा कि मदद कर सके। पुराना टीम बैज जेब में नहीं था। सब्जियाँ, स्कोर शीट और माँगी हुई कॉपी लाया था। खाते समय बेटे का फोन आया। ज़ोया ने प्लेटों के बीच रखा। फ़रहान ने कप दिखाया। तुरंत आखिरी हाथ समझाने को कहा गया। उसने पानी के गिलास से दूर खाने के पास पत्ते फैलाए।
आधी व्याख्या पर ज़ोया ने जगह देने को कटोरा खिसकाया। मुस्कराकर बेटे से बोली, “उसे पूरा करने दो।” फ़रहान ने चिड़ी का दस नौ के पास रखा और आगे बताया। बेटे ने इस बार सवाल अंत तक रोका। ज़ोया ने रोटी तोड़ी और हाथ में पकड़े पत्तों के लिए प्लेट थोड़ा पीछे कर दी।
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