1. JEET UP कहानी: दो निमंत्रण, दोनों किसी और की लिखी भूमिका
कुसुम को एक ही सप्ताह में दो निमंत्रण मिले। जन्म देने वाली माँ चाहती थी कि वह पारिवारिक सभा में खड़ी होकर बताए कि उनका मिलना माँ के त्याग को अंततः समझ लेने का प्रमाण है। गोद लेने वाले परिवार का भाई ऐसे भोजन में बुला रहा था जहाँ उसे सबको भरोसा देना था कि इस मिलन से उसके घर से की जा सकने वाली अपेक्षाएँ नहीं बदलेंगी।
किसी निमंत्रण में नहीं पूछा गया कि वह क्या कहना चाहती है।
चवालीस वर्ष की कुसुम शाम के कॉलेज में पढ़ती थी और स्टेशनरी काउंटर पर काम करती थी। गोद लिए जाने की बात वर्षों से जानती थी। उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसे वयस्कों के बीच विवाद की व्याख्या बन जाएगी जिनके पास अतीत का अपना सुविधाजनक रूप मौजूद है।
भाई समर ने पहला निमंत्रण रिश्तेदारों के सामने पढ़ा। फिर मुस्कराया।
“अब असली परिवार के पास लौट सकती हो। हमने अपना हिस्सा कर दिया।”
माँ कमला ने मेज़ पर हथेली मारी। “यह पार्सल नहीं है।”
समर ने कंधे उचका दिए। वाक्य कमरे तक पहुँच चुका था।
कुसुम भोजन से पहले चली गई। बैग में तीसरा कागज़ था—सामुदायिक रमी कप का कार्यक्रम। वह और समर नॉकआउट के अलग हिस्सों में आगे पहुँचे थे। महीनों से वह उसकी सफलता अपने घर अभ्यास करने का लाभ बताता था।
बस स्टॉप पर कुसुम ने कार्यक्रम खोला। इस निमंत्रण में समय था, मेज़ थी और वह नाम था जो उसने खुद भरा था।
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2. पहली डील शुरू होती है
छह सप्ताह बाद कुसुम पाँच डील के कप फाइनल में समर के सामने थी। कम कुल पेनल्टी वाला जीतता। पहले दौरों में दोनों अलग प्रतिद्वंद्वियों से यहाँ पहुँचे थे। परिवार को ड्रॉ से छूट नहीं थी।
समर ने पत्ते जल्दी जमाए। कमला बाधा के पीछे थीं। पहली पंक्ति की कुर्सियों के नीचे उनकी चप्पल कुसुम को दिखती थी। जन्म देने वाली माँ रत्ना भी आई थी। दोनों महिलाएँ कुछ सीट दूर बैठी थीं।
पहली डील खराब गई। कुसुम सुंदर दिखने वाले समूह की प्रतीक्षा में अलग पड़े बड़े पत्ते पकड़े रही। छोटा पत्ता दूसरी सीक्वेंस से जुड़ सकता था, लेकिन पूरा सोचे बिना फेंक दिया।
समर ने घोषणा की। कुसुम की पेनल्टी तैंतीस थी।
उसने अपने सामने शून्य और उसके सामने तैंतीस लिखा। फिर पत्र इतना घुमाया कि दर्शक देख लें।
पत्ते समेटे जाने के बाद पूछा, “अब भी किसी के आसान बनाने का इंतज़ार है?”
कुसुम ने वह खाली जगह देखी जहाँ हाथ था। परिचित चोट मौजूद थी, लेकिन स्पष्ट गलती भी। उसने कल्पना के सुंदर अंत को उपलब्ध उपयोगी संरचना से अधिक महत्त्व दिया था।
स्कोरपत्र मेज़ पर सीधा रखा। चार डील बची थीं। अगले हाथ में तेरह नए पत्ते होते। बचपन से अब तक समर की हर बात का उत्तर नहीं।
3. अभ्यास का कमरा खुद खोजा
उस भोजन के बाद कुसुम ने समर के घर अभ्यास बंद किया। कॉलेज के पास मनोरंजन कक्ष में वयस्क समूह मिला। खिलाड़ियों को नहीं पता था कि कौन सा परिवार कहाँ बुला रहा है। उन्हें इतना पता था कि वह भारी बैग लेकर कक्षा से आती है और जल्दी प्रदर्शन के बजाय पूरा सत्र पसंद करती है।
पहली अभ्यास साथी तीस वर्ष की दर्जी हरिणी थी। उसने कठिन ड्रॉ के बाद हर बचाए पत्ते का कारण पूछा। जरूरत पड़ सकती है पर्याप्त नहीं था, यदि इसी कारण छह अलग पत्ते पकड़े रहें।
दोनों ने बड़े पत्तों के संभावित सेट और छोटे पत्तों के उपयोगी संपर्क में चुनाव अभ्यास किया। कभी सेट बेहतर होता। कभी उसे बचाने से हाथ को जरूरी सीक्वेंस रुकती। कुसुम को वास्तविक व्यवस्था समझानी होती। किसी एक प्रकार के समूह को हमेशा पहले रखने का नियम सुनाना नहीं।
खेल के बाद दिखे डिस्कार्ड और पिकअप फिर बनाते। कुसुम ने पाया कि व्यक्ति से अपमान महसूस हो तो वह उसके पत्तों की योजना भी मन से तय कर लेती है। खुले ढेर का पत्ता जानकारी था। मुस्कान पूरा हाथ नहीं थी।
अब वह दो कॉपियाँ रखती। एक कॉलेज की, दूसरी रमी समीक्षा की। दोनों में अपनी लिखावट के सुधार थे। मेहनत उसकी है या नहीं, तय करने के लिए किसी रिश्तेदार की ज़रूरत नहीं थी।
4. दूसरी डील अंक बदलती है
फाइनल की दूसरी डील में कुसुम ने जल्दी प्योर सीक्वेंस बनाई। एक ही रंग के लगातार पत्तों का स्थिर समूह था, जिसमें जोकर नहीं चाहिए था। आसपास कई व्यवस्थाएँ संभव थीं।
अधीरता कम करने के लिए पत्ते इधर-उधर करने के बजाय उसने उपयोगी संपर्क रखे। समर ने खुला पत्ता उठाया। उस एक काम से उसका पूरा छिपा हाथ कल्पना में बनाने से वह बची।
बाद का ड्रॉ बची आवश्यकताएँ पूरी कर गया। डिस्कार्ड और घोषणा से पहले सीक्वेंस की संख्या, सेट और सभी तेरह पत्ते जाँचे।
समर की पेनल्टी बाईस थी। कुल कुसुम के तैंतीस, समर के बाईस। बढ़त घटकर ग्यारह रह गई।
कमला अंक सुनने को मेज़ की तरफ झुकीं। जाँच खत्म होने से पहले रत्ना ताली बजाने लगी। आयोजक ने हाथ उठाया तो रुकी। परिणाम की पुष्टि तक कुसुम का ध्यान पत्तों पर रहा।
छोटे विराम में समर बोला, “अब सब सोचेंगे दोनों तरफ वालों ने सिखाया।”
कुसुम ने पानी निकालने को खोला बक्सा बंद किया। “हरिणी मेहनत पहचान लेगी।”
“कौन?”
“जिसके साथ अभ्यास किया।”
वह दर्शकों की तरफ देखने लगा, जैसे नकारने के लिए नया व्यक्ति खोज रहा हो। हरिणी वहाँ नहीं थी। दुकान पर ऑर्डर पूरा कर रही थी और बाद में पूरा परिणाम माँग चुकी थी।
5. चार पत्ते कोई वादा नहीं हैं
एक अभ्यास ने कुसुम को बाकी से अधिक परेशान किया था। हरिणी ने लगातार चार प्राकृतिक पान पत्ते दिए, दूसरी बनी सीक्वेंस और कुछ संभावित सेट। कुसुम लंबी पान रन बचाना चाहती थी क्योंकि सुरक्षित लगती थी।
हरिणी ने पूछा कि यदि किनारे का पत्ता दूसरे समूह को पूरा करे और बाकी तीन से वैध प्योर सीक्वेंस बची रहे तो क्या होगा।
कुसुम ने पत्ता हटाया, फिर उसे दोनों जगह इस्तेमाल करने लगी।
“एक बार,” हरिणी ने पत्ता थपथपाया। “हाथ में यह एक ही बार है।”
हर पत्ते का हिसाब रखते हुए समूह फिर बनाए। लंबी सीक्वेंस कभी अंतिम पत्ता छोड़कर भी वैध रहती। दूसरे उदाहरण में बीच का पत्ता निकालने से रन टूटती और व्यवस्था खराब होती। कुसुम ने दोनों उदाहरण तब तक किए जब तक हाथ बढ़ने से पहले अंतर दिखने लगा।
उसके बाद अपरिचित वयस्कों से पूरे गेम हुए। कुछ तेज खेलते। कुछ लंबे समय तक विकल्प रखते। पुराने पारिवारिक व्यवहार से उन्हें नहीं पढ़ सकती थी। दिखे पत्ते, अपनी जरूरतें और अगले डिस्कार्ड की कीमत देखनी पड़ती।
एक शाम रत्ना ने अभ्यास में फोन करके पूछा कि मिलन समारोह में क्या पहनेगी। कुसुम ने कहा कि माँगा गया भाषण देने को सहमत नहीं हुई है।
फोन की चुप्पी उत्तर से लंबी रही। फिर कुसुम अधूरे हाथ पर लौट गई।
6. तीसरी डील बढ़त फिर दूर करती है
तीसरी डील समर जीता। कुसुम ने पेनल्टी अठारह तक रखी, फिर भी चोट लगी। उसका कुल इक्यावन हो गया। समर बाईस पर रहा।
दो डील बाकी। उनतीस अंक पीछे।
कमरे में उसके आसपास लोग धीमे बोलने लगे। यह उसे पिछली हँसी जितना बुरा लगा। दया में लोग ऐसा व्यवहार करते जैसे अंत लिखा जा चुका है।
समर ने हल्की मुस्कान के साथ पानी बढ़ाया। कुसुम ने पानी लिया और स्कोर लिखने वाले से कुल फिर पढ़ने को कहा। उसे वास्तविक अंतर चाहिए था, मुस्कान का आकार नहीं।
अगले विराम में कमला दरवाज़े के पास मिलीं।
“मेरे घर में तुम्हारी जगह है,” माँ ने कहा। “वह जो चाहे बोले।”
कुसुम ने सिर हिलाया। “जब मैं कमरे में नहीं हूँ तब भी उससे कहिए।”
“कल कहा था।”
एक पल उसके चेहरे पर बदलाव आया। कमला ने बातचीत थोड़ी बताई, अगली डील की सलाह नहीं जोड़ी। समर से कहा था कि बहन का इतिहास उसके अपनेपन की शर्त नहीं बना सकता।
विराम खत्म होने से पहले कुसुम मेज़ पर लौट गई। भवन की दूसरी तरफ रत्ना देख रही थी। उसने हल्के सिर से उपस्थिति स्वीकार की, फिर उस भाई के सामने बैठी जिसे अभी हराना था।
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7. चौथी डील छोटा पत्ता चुनती है
चौथी डील के शुरू में खुला छोटा पत्ता कुसुम की प्योर सीक्वेंस पूरी करता था। दूसरा विचार बड़े दो पत्ते बचाकर ऐसा सेट बनाना था जिसे अभी मदद चाहिए थी।
चुनने से पहले बाकी हाथ देखा। छोटा पत्ता एक जरूरी सीक्वेंस तत्काल वैध करता और दूसरी जगह पर्याप्त संपर्क बचते। बड़े सेट को बचाने से कई जरूरतें एक साथ अनिश्चित रहतीं।
उसने छोटा पत्ता उठाया और वह अलग बड़ा पत्ता छोड़ा जिसकी रक्षा सबसे कम उपयोगी थी।
समर ने पिकअप देखा। जानकारी मिली, पूरा हाथ नहीं खुला। उसके अगले डिस्कार्ड से कुसुम तुरंत खत्म नहीं कर सकी। उसने बनी प्योर सीक्वेंस सुरक्षित रखी और बाकी समूह बदलते हुए काम किया।
कई बारियों बाद पूरा करने वाला पत्ता आया। कुसुम ने वैध व्यवस्था रखी और जाँच की प्रतीक्षा की। समर को चौबीस पेनल्टी अंक लगे।
इक्यावन-छियालीस। बढ़त अब पाँच थी।
समर ने पत्र दर्शकों की तरफ घुमाए बिना कुल पढ़ा। कुसुम ने उसका अंगूठा कागज़ के किनारे में दबते देखा।
एक डील बची। रत्ना उठी, फिर बैठ गई। कमला के हाथ गोद में जुड़े रहे। कोई महिला अगला उपयोगी पत्ता नहीं दे सकती थी, न अगला फैसला कर सकती थी।
कुसुम ने अंतिम डील के पत्ते समेटे और नए शफल की प्रतीक्षा की।
8. अंतिम हाथ में बदलने की जगह
पाँचवीं डील धीरे बनी। तुरंत घोषणा नहीं दिखी। केवल दोपहर चरम पर पहुँच रही है, इसलिए उसके पीछे भागना कुसुम ने स्वीकार नहीं किया।
अंततः पान के तीन, चार, पाँच और छह थे। हुकुम के सात, आठ, नौ और दस थे। चिड़ी और ईंट के छह थे। चिड़ी और ईंट के गुलाम थे। पान की क्वीन थी।
तेरह पत्ते। दो प्योर रन मौजूद थीं। छह और गुलाम की जोड़ियाँ अधूरी थीं। क्वीन अकेली थी।
समर ने ड्रॉ और डिस्कार्ड किया। उसका हाथ कितने पास है, खुला नहीं। कुसुम ने सार्वजनिक चुनाव और अपने दिखते पत्ते देखे। बारी आई तो बंद ढेर से हुकुम का गुलाम उठा।
उससे तीन रंगों के गुलाम का सेट पूरा हुआ। छह की जोड़ी अभी अधूरी दिखती थी। फिर उसने पान रन का किनारा देखा।
पान का छह, चिड़ी और ईंट के छह के पास चला गया। बचे पान तीन, चार, पाँच अब भी प्योर सीक्वेंस थे। चार पत्तों की हुकुम रन सुरक्षित रही। तीन गुलाम अंतिम समूह बने।
तीन पान, चार हुकुम, तीन छह और तीन गुलाम। तेरह पत्ते। हर एक का एक इस्तेमाल। दो वैध सीक्वेंस बचीं और दोनों प्योर थीं।
पान की क्वीन अतिरिक्त थी। कुसुम ने उसे डिस्कार्ड के ढेर पर रख दिया।
9. पाँच पीछे से बारह आगे
कुसुम ने घोषणा की। समर समूहों पर झुका। आयोजक ने जाँच के लिए जगह छोड़ने को कहा।
उसकी उँगली पान के छह के पास रुकी। पत्ता लंबी सीक्वेंस से निकला था, मगर बचे तीन पान अब भी लगातार थे। कोई पत्ता दो समूहों में नहीं था। कुछ दो बार नहीं गिना गया था।
घोषणा वैध थी।
समर ने अपना हाथ खोला। वैध समूहों का हिसाब होने के बाद पेनल्टी सत्रह रही। कुल छियालीस से तिरसठ हुआ। कुसुम इक्यावन पर रही।
अंतिम डील में पाँच पीछे आई थी। बारह आगे समाप्त हुई।
स्कोर लिखने वाले ने कप विजेता घोषित किया। समर इतनी जल्दी पीछे हुआ कि कुर्सी के पैर फर्श की चटाई में अटक गए। खड़ा होने से पहले उसे छुड़ाना पड़ा। आसपास वही रिश्तेदार थे जिन्होंने उसे दूसरे परिवार को वापस देने वाली बात सुनी थी। अब जीत के कुल के साथ उसका नाम सुन रहे थे।
पुरस्कार में रत्ना आयोजक से अपना परिचय विजेता की माँ के रूप में देने लगी। कमला पास चुप खड़ी थीं।
कुसुम बातचीत के बीच आई और अपना प्रवेश फॉर्म दिया। “यही नाम इस्तेमाल कीजिए,” उसने कहा।
फिर कमला को कप के पास आने को कहा। हरिणी का नाम लेकर धन्यवाद दिया और पूरे तेरह पत्तों की व्यवस्था की तस्वीर भेजी।
10. जिन मुलाकातों को स्वीकार किया
पुरस्कार के बाद समर स्कोरपत्र लेकर आया। रत्ना की तरफ देखकर बोला, “उसे बुलाने से पहले कह सकती थीं।”
“वह सार्वजनिक भवन में आई। हमारे घर क्या कहना है, तुमने चुना था।”
इस अंतर का जवाब तैयार नहीं था। कुसुम ने अपने परिणाम की प्रति अगले असाइनमेंट के पास कॉलेज फोल्डर में रखी।
कमला ने भोजन में आने को पूछा। कुसुम ने हाँ कहा, शर्त यह कि शाम इस पर बहस न बने कि वह किसकी बेटी है। समर बोलता, उससे पहले माँ ने उत्तर दिया।
“भोजन होगा।”
रत्ना ने मिलन समारोह पूछा। कुसुम ने कहा कि अकेले मिलकर पूरा अतीत सुनने को तैयार है। उसके लिए पहले से लिखा भाषण नहीं देगी। रत्ना ने लाया कार्यक्रम मोड़ा और अगले सप्ताह शांत मुलाकात स्वीकार की।
सोमवार को हरिणी ने दुकान में तस्वीर खोली। पान की रन से निकले छह पर उँगली रखी।
“एक बार इस्तेमाल किया।”
“और दोनों सीक्वेंस रखीं।”
दिन का काम खत्म होने पर कटिंग मेज़ पर नया अभ्यास हाथ लगाया। कुसुम ने कप ऐसी शेल्फ पर रखा जहाँ कपड़े का रास्ता न रुके। फिर बैठी, तेरह पत्ते देखे और तय करने लगी कि क्या साथ बनता है।
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