MM9: वह बोर्ड जो अब उसका नहीं था
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MM9: वह बोर्ड जो अब उसका नहीं था

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

MM9 की मौलिक कैरम कहानी: लीला पुराने अपमान, मजबूत पूर्व शिष्या और सुधरे स्कोर के बीच अंतिम पतले कट से अपना मुकाबला पूरा करती है।

1. MM9: बोर्ड पर बचे पाँच काले

अठारह बनाम बीस के स्कोर पर भी लीला को पुराने क्लब की सीढ़ियों पर घिसटते कपड़े के थैले की आवाज याद आ रही थी। उसमें सात ट्रॉफियाँ थीं। थैला उँगलियों में धँस रहा था जब वह उस दरवाजे से उन्हें लौटाने गई थी जहाँ कभी उसकी तस्वीर टँगी थी।

निर्णायक गेम के आठवें और आखिरी बोर्ड पर वह स्मृति लौट आई थी। उस समय उसे पुरानी याद से कम उपयोगी चीज शायद ही कोई लगती। उसने दोनों पैर जमीन पर सीधे टिकाए।

सामने चित्रा स्ट्राइकर लगा रही थी। अभी पॉकेट की गई क्वीन को अगली चाल में सही तरह कवर कर लेती तो उसके पाँच काले बचे रहते। लीला के दो सफेद बाकी थे।

बोर्ड खत्म नहीं हुआ था। मैच भी नहीं।

लीला बावन साल की थी। उसने कभी चित्रा के पहले क्लब समूह को प्रशिक्षण दिया था। चित्रा अब चवालीस की थी और मजबूत सिंगल्स खिलाड़ी थी। दो युवा दावेदारों को हराकर फाइनल पहुँची थी। पुराने संबंध के कारण उसे आसान चाल देना उसकी जिम्मेदारी नहीं थी।

दर्शक सीमा के पीछे पुराने क्लब का सचिव भावेश खड़ा था। उसने एक आगंतुक से कहा था कि जिसके पास अब अपना बोर्ड भी नहीं है, उसकी बढ़त सुखद आश्चर्य है। आवाज इतनी ऊँची थी कि लीला सुन ले।

लीला ने दोनों सफेदों को देखा। एक का रास्ता साफ था। दूसरा असुविधाजनक कोण से सटीक संपर्क माँगता था। बारी मिली तो दोनों निकालने होंगे। वह फर्क सीखने में इतनी शामें लगा चुकी थी कि किसी भी स्ट्रोक को असंभव नहीं कह सकती थी।

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2. पहला गेम आसान दिखाई दिया था

दो घंटे पहले लीला पहला गेम पच्चीस-सत्रह से जीती थी। स्कोर ने उसे वास्तविक खेल से आसान दिखाया था।

चित्रा बार-बार वे सीधे रास्ते बंद कर रही थी जो लीला को पसंद थे। लीला ने अनुमति वाली बेसलाइन पर स्ट्राइकर की जगह बदली और पतला संपर्क चुना। जिस कोण से रास्ता नहीं बन रहा था, वहाँ अधिक जोर लगाकर उत्तर खोजने की कोशिश नहीं की।

एक बोर्ड पर कठिन गोटी को तब तक छोड़ा जब तक बाद की वैध चाल ने उसका रास्ता नहीं खोल दिया। दूसरे पर क्वीन तभी निकाली जब उसके बाद कवर की वास्तविक संभावना थी। पहले वह दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए क्वीन लेने दौड़ती थी। इस बार अगली चाल तालियों से अधिक महत्वपूर्ण थी।

गेम पॉइंट पर उसने साधारण सीधा स्ट्रोक लिया। न रिबाउंड, न नाटकीय टक्कर। प्रतिद्वंद्वी की बची गोटियों ने पच्चीस तक पहुँचने के लिए पर्याप्त अंक दिए।

भावेश ने उस आदमी की तरह संयमित ताली बजाई जिसकी सलाह से यह काम नहीं हुआ था। चित्रा उठी, उँगलियाँ खोलीं और अंपायर से निर्धारित विराम माँगा। वह समझने लगी थी कि लीला अब क्या अलग कर रही है।

लीला ने कुर्सी पर पानी पिया। उसके दाएँ जूते में पंजे के पास दरार थी। दो बार मरम्मत कर चुकी थी। कैमरा अपनी तरफ आता देख उसने पैर दूसरे के पीछे कर लिया।

फिर खुद को पकड़ा और पैर वापस ठीक जगह रखा। जूता घिस सकता था। उसके भीतर बैठा खिलाड़ी उससे छोटा नहीं हो जाता था।

3. वह बोर्ड जिसे उसने बेच दिया

पति की मरम्मत की दुकान बंद होने के बाद लीला ने छह महीने बकाया घरेलू बिल और बेकार पड़े सामान सँभालने में लगाए थे। कभी अच्छी कैरम खिलाड़ी होने से देनदारियाँ खत्म नहीं हुई थीं।

घर का बोर्ड उसने एक रेस्तराँ मालिक को बेचा। वह ग्राहकों के लिए चाहता था। उसने सामने सतह पर स्ट्राइकर चलाकर देखा, फिर पूछा कि पॉकेट के आसपास पुराने निशान खराबी के हैं क्या।

“इस्तेमाल के हैं,” लीला ने कहा।

उसने फिर भी कीमत घटाई। लीला मान गई क्योंकि अगले सप्ताह से पहले किराया देना था।

क्लब में उसने पूछा कि शाम के दो समूहों को प्रशिक्षण देती रह सकती है क्या। भावेश ने कहा कि क्लब को अधिक ऊर्जावान व्यक्ति चाहिए। घर में रखी ट्रॉफियाँ वापस माँगीं और उन्हें क्लब की संपत्ति कहा। कुछ पर क्लब का नाम था। मालिकाना सवाल अभी सुलझा नहीं था। कमरे में प्रवेश के लिए एक और सप्ताह विनती करने के बजाय लीला उन्हें लौटा लाई।

थैला लेकर पहुँची तो भावेश नए सदस्य से कह रहा था कि पूर्व चैंपियन कभी-कभी कृतज्ञता को नौकरी का अधिकार समझ लेते हैं।

सदस्य गुजर जाने तक लीला सीढ़ियों पर खड़ी रही। फिर खाली थैला घर ले गई। ग्यारह दिन अभ्यास नहीं किया।

बारहवें दिन नगरपालिका वाचनालय के आयोजक का फोन आया। वयस्क मनोरंजन के लिए रखे बोर्ड को दो शांत दोपहरों में इस्तेमाल कर सकती थी, बशर्ते बाद में समेटने में मदद करे। वह नौकरी नहीं थी। फिर भी गई। पहला पतला कट नाखून जितने अंतर से चूक गया।

4. उसने स्ट्रोक को अपना नाम देना छोड़ दिया

वाचनालय में लीला को समझ आया कि पुराने आत्मविश्वास का कितना हिस्सा परिचित उपकरण पर टिका था। यह बोर्ड तेज था। पहले भरोसेमंद लगने वाला जोर अब स्ट्राइकर को बहुत दूर भेजता था। पसंदीदा कट गोटी का ज्यादा हिस्सा छूकर उसे पॉकेट से दूर धकेल देता था।

वह छोटे अभ्यास समूह के बाद संपर्क और परिणाम कॉपी में लिखने लगी। अभ्यास में गोटियाँ ठीक उसी जगह दोबारा रख सकती थी। प्रतियोगिता में नया विन्यास पढ़ना पड़ता।

वहाँ खेलने वाला सेवानिवृत्त सर्वेक्षक कॉपी में स्थिति दर्ज करने में मदद करता था, खेल की सतह पर निशान नहीं लगाता था। वह कोशिशें गिनता। हर अभ्यास को प्रशंसा में नहीं बदल देता।

सात चूक। दो साफ पॉकेट। एक अनचाही पॉकेट, जिसे लीला ने अपनी इच्छित चाल की सफलता नहीं गिना।

उसने पहले संपर्क बिंदु देखना सीखा। फिर स्ट्राइकर की जगह और जरूरी जोर चुनना। पहले वह उस स्ट्रोक से शुरुआत करती थी जिसके लिए मशहूर रहना चाहती थी।

एक दोपहर पुराने शिष्य ने पहचानकर प्रसिद्ध रिबाउंड दिखाने को कहा। उसने कोशिश की, चूकी और दरवाजे पर खड़े आदमी की हँसी सुनी।

उसी स्थिति को फिर लगाया। इस बार उपलब्ध सीधे कोण से गोटी निकाल दी।

शिष्य ने कहा, “इसमें उतना कमाल नहीं दिखता।”

“बोर्ड पर एक गोटी कम रह गई,” उसने उत्तर दिया।

कमरे को मेज वापस चाहिए थी तब तक अभ्यास किया। फिर स्टैंड मोड़ा, बोर्ड भंडार में रखा और अगली दोपहर फिर गिनती करने लौटी। हर सत्र में परिणाम अच्छे नहीं होते थे। लेकिन अब खराब परिणाम छिपाए नहीं जाते थे।

5. चित्रा का जवाब

फाइनल के दूसरे गेम में चित्रा ने लीला को एक ही समस्या बार-बार देना बंद कर दिया। वह बची गोटियों की जगह बदलती और नियंत्रित स्ट्रोक से आकर्षक सीधे रास्तों को कठिन बनाती रही।

लीला एक शुरुआती बोर्ड जीती, फिर दो हारी। अगले पर उसने दबाव से निकलने के लिए क्वीन लेने का फैसला किया। कवर वास्तव में जितना सटीक संपर्क माँगता था, उतना उसने खुद से स्वीकार नहीं किया।

क्वीन चली गई। कवर नहीं हुआ।

नियम के अनुसार क्वीन केंद्र में लौटाई गई। चित्रा ने बाद में उसे निकाला, वैध कवर किया और बोर्ड जीता। लीला ने कोई अपने आप मिलने वाली जीत नहीं दे दी थी। उसने अपनी अच्छी बारी ऐसी योजना पर खर्च कर दी थी जो अगले स्ट्रोक तक नहीं बची।

उन्नीस-इक्कीस पर मौके बाकी थे। चित्रा ने मजबूत, सटीक क्रम खेला। विरोधी की पर्याप्त गोटियाँ बची थीं, इसलिए वह पच्चीस तक पहुँच गई।

एक-एक गेम। दूसरे का परिणाम उन्नीस-पच्चीस।

भावेश दर्शक सीमा के पीछे फिर बोलने लगा। लीला ने शब्द सुनने की कोशिश नहीं की। वह पहचान चुकी थी कि एक शानदार स्ट्रोक से पूरा पुराना विवाद समाप्त करने की इच्छा फिर लौट आई थी। उसी इच्छा ने गेम गंवाने में मदद की थी।

विराम में चित्रा ने धीरे कहा, “कट पहले से बहुत अच्छे ले रही हो।”

“तुम उनके रास्ते कम छोड़ रही हो।”

दोनों नहीं मुस्कराईं। यह पुनर्मिलन नहीं था। वे समझ रही थीं कि दूसरी ने क्या कठिन बनाया है। अगला गेम दोनों उसे और कठिन बनाने वाली थीं।

6. वह बढ़त जो छोटी होने लगी

निर्णायक गेम के चार बोर्ड बाद बड़े प्रदर्शन पट पर लीला पंद्रह-आठ से आगे दिखाई दे रही थी। गेम पच्चीस अंक या आठ बोर्ड, जो पहले हो, पर समाप्त होता। आठ बोर्ड तक कोई पच्चीस न पहुँचता तो अधिक अंक वाला जीतता।

लीला नियम जानती थी। यह भी जानती थी कि बढ़त बचाने के लिए हर कठिन स्ट्रोक छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

पाँचवें बोर्ड पर उसे साफ मगर कठिन कट और नरम स्थिति बनाने वाली चाल में चुनना था। उसने दूसरा रास्ता लिया, लेकिन अगली बारी की ठोस योजना नहीं थी। चित्रा ने अवसर इस्तेमाल किया और चार अंक लिए।

प्रदर्शन पट पर पंद्रह-बारह हो गया।

छठा बोर्ड लंबा चला। लीला जीती। चित्रा के तीन काले बचे थे और लीला के लिए क्वीन के अंक नहीं थे। पट पर अठारह-बारह दिखाई दिया।

तभी अंपायर ने कुल सुधारा। छठे बोर्ड से पहले चित्रा का सही अंक बारह नहीं, सोलह था। लीला ने हस्ताक्षर वाली अलग-अलग बोर्ड पर्चियाँ देखीं। पहले के चार अंक बड़े पट पर उतारते समय छूटे थे। आधिकारिक पर्चियाँ एक-दूसरे से मेल खाती थीं।

सही स्कोर अठारह-सोलह था।

सातवाँ बोर्ड शुरू होने से पहले सुधार घोषित हुआ। लीला ने स्वीकार किया। गलत पट इसलिए वास्तविक फायदा नहीं बन सकता था कि बड़ी बढ़त देखकर उसे अच्छा लगा था।

उसने स्ट्राइकर रखा और सही काम समझा। दो बोर्ड बचे थे। बढ़त दो अंकों की थी, छह की नहीं। किसी के गोटी छुए बिना गेम कठिन हो गया था।

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7. गलत अंक की कीमत

प्रदर्शन की गलती ने आधिकारिक स्कोर नहीं बदला था, लेकिन लीला की मैच के बारे में भावना बदल दी थी। उसे लगा कि सातवें बोर्ड में वह बड़ी बढ़त वापस लेनी चाहिए जो वास्तव में कभी थी ही नहीं।

चित्रा ने उस अधीरता के सामने अच्छा खेल रखा। सही शुरुआत की, दो आसान गोटियाँ निकालीं और अगली ऐसी जगह छोड़ी जहाँ लीला को सँकरा रास्ता लेना पड़ता।

लीला ने जरूरत से अधिक जोर लगाया। सफेद पॉकेट के किनारे से लगा और बाहर रह गया।

वाचनालय के पहले सप्ताह की वही गलती थी। संपर्क को लेकर संदेह का जवाब अधिक ताकत से देना।

चित्रा ने बोर्ड पूरा किया। लीला के चार सफेद बाकी थे। क्वीन का कोई बोनस नहीं जुड़ा। चित्रा अब बीस-अठारह से आगे थी।

एक बोर्ड बचा था।

लीला ने गोटियाँ दोबारा लगते समय स्ट्राइकर नहीं छुआ। पिछली बर्बाद चाल वापस नहीं मिल सकती थी। अगला फैसला किस क्रम से लेना है, वह वापस पा सकती थी।

संपर्क बिंदु। स्ट्राइकर की जगह। आवश्यक जोर।

अंपायर ने अंतिम बोर्ड घोषित किया। चित्रा ने विन्यास देखा। भावेश ने हाथ बाँध लिए। उसके चेहरे पर लगभग राहत थी। जिस कोच को उसने हटाया था, उसे शाम के बड़े हिस्से में आगे देखना पड़ा था। अब स्कोर उसका पुराना निर्णय सुविधाजनक बनाने वाला लगता था।

लीला ने अंपायर के हाथ बोर्ड से हटते देखे। गला सूखा था। हथेलियाँ पर्याप्त स्थिर थीं। उसे निडर महसूस करना जरूरी नहीं था। सामने वास्तव में जो गोटियाँ थीं, उन्हें सही देखना जरूरी था।

8. क्वीन से बोर्ड की जीत तय नहीं हुई

आठवाँ बोर्ड तेजी से विकसित हुआ। अपनी बारियों में लीला सात सफेद निकाल चुकी थी। अंतिम क्रम से पहले चित्रा तीन काले निकाल चुकी थी और अब क्वीन पहुँच में थी।

चित्रा ने नपे हुए कट से क्वीन पॉकेट की। अगली चाल में काला निकालकर वैध कवर किया। अब उसके पाँच काले बचे। सफल स्ट्रोक के कारण बारी जारी रही। उसने कठिन जगह से एक और काले की कोशिश की।

गोटी पॉकेट की अंदरूनी धार से लगी, मगर गिरी नहीं।

यह चूक उपहार नहीं थी। चित्रा ने ऐसा विश्वसनीय स्ट्रोक चुना था जिससे वह खत्म करने के करीब पहुँचती। दबाव में उसका संपर्क उपलब्ध छोटे अंतर से अधिक हो गया था।

बारी लीला को मिली। दो सफेद बाकी थे। चित्रा के पाँच काले उनकी मदद के लिए सुविधाजनक लाइन में नहीं लगे थे। क्वीन चित्रा कवर कर चुकी थी, लेकिन इससे बोर्ड उसके नाम नहीं हो जाता था। क्वीन के अंक केवल बोर्ड जीतने वाले पक्ष को मिल सकते थे। लीला पहले खत्म करती तो चित्रा की क्वीन स्कोर में कुछ नहीं जोड़ती।

लीला को दोनों सफेद चाहिए थे। पहला हल्के कोण से सीधा पॉकेट था। उसने उसे निकाला और स्ट्राइकर से दूसरे सफेद की जगह नहीं बिगाड़ी।

एक बचा। उसे अधिक पतला संपर्क और बेसलाइन पर अलग शुरुआती जगह चाहिए थी। चित्रा पीछे हटी ताकि देखने में बाधा न आए।

लीला ने स्ट्राइकर सरकाया। एक पल कॉपी के अंक याद आए: सात चूक, दो साफ पॉकेट, एक दुर्घटनावश सफल। साफ सफलताओं को दुर्घटना कहना उसने बहुत पहले छोड़ दिया था।

9. पाँच अंक, कोई बोनस नहीं

लीला ने जाँचा कि स्ट्राइकर वैध जगह रखा है। हाथ जमाया। सफेद से पॉकेट तक देखा। रास्ता सँकरा था, लेकिन वास्तविक था।

उसने स्ट्रोक लिया।

स्ट्राइकर ने चुने हुए किनारे को छुआ। सफेद पिछली चूक वाली हिंसक गति के बिना पॉकेट की ओर गया। भीतर की तरफ लगा और गिर गया।

लीला के सभी नौ सफेद साफ हो चुके थे। पाँच काले बचे थे।

अंपायर ने लीला को पाँच अंक दिए। उसे क्वीन बोनस नहीं मिला क्योंकि क्वीन चित्रा ने निकाली और कवर की थी। चित्रा को भी बोनस नहीं मिला क्योंकि वह बोर्ड हार चुकी थी।

तेईस-बीस। आठ बोर्ड पूरे। निर्णायक गेम और मैच लीला का था। दो गेम बनाम एक।

चित्रा ने हाथ बढ़ाया तब तक लीला को हॉल का शोर समझ नहीं आया था। तालियाँ शुरू हो गई थीं और वह अभी उस खाली जगह को देख रही थी जहाँ आखिरी सफेद था।

चित्रा ने मजबूती से हाथ मिलाया। “वह स्ट्रोक तुम्हारा था।”

लीला ने सिर हिलाया। वह उन दोपहरों में भी उसका था जब वाचनालय में कोई वीडियो नहीं बनाता था। आज उन लोगों के सामने भी उसका था जिन्होंने उसे समाप्त मान लिया था।

भावेश तैयार मुस्कान के साथ सीमा की तरफ बढ़ा। लीला यह सुनने नहीं रुकी कि जीत का कौन-सा हिस्सा वह अपने नाम करेगा। उसने अंपायर से आधिकारिक कुल की पुष्टि माँगी और उनके पास हस्ताक्षर किए।

तस्वीर से पहले बड़े प्रदर्शन पट पर सही परिणाम लगा दिया गया। इस बार उसे हर अंक ठीक चाहिए था। आखिर जीत उसी पूरे हिसाब से आई थी, किसी एक पसंदीदा दृश्य से नहीं।

10. उसने दिखाने के लिए कौन-सा स्ट्रोक चुना

फाइनल से पहले ही तय था कि विजेता छोटी सार्वजनिक प्रस्तुति के लिए एक स्थिति चुनेगा। अधिकांश लोग आखिरी सफेद दोबारा देखने की अपेक्षा कर रहे थे।

लीला ने दूसरे गेम का असफल क्वीन कवर चुना। अनुमति लेकर गोटियाँ मैच नोट्स के अनुसार जितना संभव था उतना ठीक रखीं। समझाया कि क्वीन निकालने से योजना पूरी क्यों नहीं हुई थी। फिर सुरक्षित विकल्प दिखाया जिसे उसने छोड़ दिया था। पहली पंक्ति में बैठी चित्रा ने बचाव का उत्तर बताया। लीला ने स्थिति फिर लगाई और उसे शामिल किया।

भावेश ने उसके करियर पर क्लब के प्रभाव की कहानी शुरू करके बीच में बोलना चाहा।

“उसे स्थिति पूरी करने दीजिए,” चित्रा ने कहा।

लीला ने पूरी की।

सचिव ने पुरानी सामान सूची उठाई। लीला ने पास में अपना नया हस्ताक्षरित परिणाम रखकर दोनों रिकॉर्ड अलग रखने को कहा। सचिव आगे बोलता, उससे पहले आयोजक ने नए पुरस्कार की पुष्टि उसके नाम पर कर दी।

वाचनालय के आयोजक ने फाइनल से पहले ही मौजूदा बुकिंग के अनुसार अभ्यास बोर्ड थोड़े समय घर ले जाने की व्यवस्था की थी। वह फॉर्म लेकर आया और पूछा कि कब ले जाएगी।

“कल। कुछ काम करना है।”

नई ट्रॉफी उसी थैले में रखी जिसमें लौटाने को कही गई सात पुरानी थीं। पुराने क्लब सचिव ने सँभालने को हाथ बढ़ाया। उठा पाता, उससे पहले लीला ने दोनों हैंडल पकड़ लिए।

“यह मेरे साथ जाएगी।”

चित्रा ने हॉल का दरवाज़ा पकड़ा। सचिव भीतर रहा, लीला हस्ताक्षर वाला बोर्ड उधार फॉर्म और नया कप लेकर बाहर आई। सीढ़ियों के नीचे अगले दिन सामान लेने का समय देखा। बोर्ड पहले से तय इंतज़ाम के अनुसार मिलेगा। किसी कागज में क्लब लौटने की शर्त नहीं जुड़ी थी।

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