MPL GAME — पूरी क्लिप चलने दीजिए
MPL GAME

MPL GAME — पूरी क्लिप चलने दीजिए

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

माँ का फोन आने तक अमन अपनी आवाज में वह वाक्य तैंतालीस बार सुन चुका था। “आप जैसे लोगों को घर पर ही रहना चाहिए।” कभी वीडियो वहीं खत्म हो जाता। कभी उसके बाद…

माँ का फोन आने तक अमन अपनी आवाज में वह वाक्य तैंतालीस बार सुन चुका था।

“आप जैसे लोगों को घर पर ही रहना चाहिए।”

कभी वीडियो वहीं खत्म हो जाता।

कभी उसके बाद बुजुर्ग का चेहरा आता, फिर ताश की गड्डियों के पास बैठा अमन हँसता दिखाई देता।

लाल अक्षरों में पूछा जाता कि नई पीढ़ी अपने बड़ों के बारे में यही सोचती है?

माँ ने कहा, “पीछे वाली गली से आना।”

अमन सीधा बैठ गया।

“क्यों?”

“बस आ जाओ।”

उनकी आवाज के पीछे एक आदमी पूछ रहा था कि ऐसे बेटे की परवरिश करके उन्हें गर्व हो रहा है या नहीं।

* * *

पूरी रिकॉर्डिंग ग्यारह मिनट की थी।

फोन से फोन पर घूमने वाला वीडियो उन्नीस सेकंड का।

अमन को लंबाई पता थी। हॉल से निकलने से पहले इंटरव्यू की फाइल का विवरण उसी ने दर्ज किया था। सुबह कैमरे उठाकर लाया था, तार बिछाए थे और उस आदमी के कॉलर का माइक जाँचा था जिसने पहले वह बात कही थी।

उसका नाम राघव था।

कैमरे पर राघव भाई।

कैमरा बंद होते ही अमन उसके लिए बस ‘एक्स्ट्रा’ रह जाता था।

अमन सत्ताईस साल का था। चौदह महीने से चैनल के लिए काम करता था। स्थानीय ताश आयोजनों की शुरुआत करवाता, छोटे इंटरव्यू संपादित करता और राघव के देर से आने पर कार्यक्रम सँभाल लेता।

चैनल वयस्कों की तीन पत्ती बैठकों और मनोरंजन के लिए बनाए गए ताश चैलेंज दिखाता था।

चैनल पर ऊँची आवाजें और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई प्रतिक्रियाएँ चलती थीं। रोशनी का इंतजाम सस्ता था, मगर हर चेहरा किसी बड़े शो जैसा दिखना चाहिए था।

अमन से कहा गया था कि उसका चेहरा उपयोगी है, क्योंकि लोग उस पर विश्वास कर लेते हैं।

अब लोगों को विश्वास था कि उसने एक बुजुर्ग का अपमान किया है।

वीडियो उसी दोपहर के अलग-अलग हिस्से जोड़कर बनाया गया था। हँसी उस समय की थी जब खराब माइक पर मजाक हुआ था।

वाक्य उसने भी बोला था।

लेकिन राघव को रोकने के लिए उसके शब्द दोहराए थे।

पहले के शब्द गायब थे।

बाद का जवाब गायब था।

सवालों के जवाब अब भी उसकी माँ को देने पड़ रहे थे।

* * *

इमारत के बाहर चार लोग थे।

एक पड़ोसी उन्हें हटाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस तरह कि अमन का पक्ष लेता हुआ न लगे।

फोन पकड़े आदमी ने आगे बढ़कर कहा, “फिर से बोलो।”

“रास्ता दीजिए।”

“किसी की इज्जत नहीं करते?”

माँ, सायरा, गेट के भीतर खड़ी थीं। सब्जियों का थैला अब भी कलाई में फँसा था।

थैले में सबसे नीचे रखा टमाटर पिचक गया था।

लाल धब्बा बाहर तक आ गया था। अमन उसे देखता रहा। जैसे बाकी सब छोड़कर अभी इन खराब हुई सब्जियों के लिए ही माफी माँग सकता हो।

“अंदर आओ,” माँ ने कहा।

आदमी कैमरा लिए पीछे बढ़ा।

सायरा ने गेट बंद कर दिया।

वह सलाखों के बीच से रिकॉर्ड करता रहा।

ऊपर आकर अमन ने वीडियो की काट-छाँट समझाने की कोशिश की।

माँ एक-एक टमाटर निकाल रही थीं।

“मुझे पता है तुमने ऐसे नहीं कहा होगा।”

वह रुक गया।

“आपको पता है?”

“तुम्हें पाला है। किसी के फोन पर पहली बार नहीं मिली हूँ।”

फिर वह बैठ गईं।

उनके घुटने काँप रहे थे।

* * *

स्टूडियो में निर्माता विक्रम ने बिना आवाज के वीडियो देखा।

“बहुत खराब हुआ।”

“पूरी रिकॉर्डिंग आपके पास है।”

“हाँ।”

“वह डाल दीजिए।”

विक्रम ने स्क्रीन बंद कर दी।

“चैनल के अकाउंट से कुछ भी नहीं डाल सकते। सोच-समझकर जवाब देना होगा।”

“बाकी वाक्य दिखा देना ही जवाब है।”

इंटरव्यू की मूल फाइलें विक्रम के पास ऐसे फोल्डर में थीं जिसे अमन खोल नहीं सकता था। उसे एडिटिंग के लिए चुने हुए हिस्से दिए जाते थे। रिकॉर्डिंग का विवरण दर्ज करने का मतलब यह नहीं था कि उसकी प्रति अपने पास रख सकता था।

राघव सोफे पर बैठा डिब्बे से खाना खा रहा था। उसने सिर नहीं उठाया।

अमन उसकी तरफ मुड़ा।

“मिस्टर डिसूजा को घर पर रहने को आपने कहा था।”

“उन्हें फॉर्मेट समझ नहीं आ रहा था।”

“उन्होंने एक नियम समझाने को कहा।”

“बार-बार बीच में बोल रहे थे।”

“आप उनका अपमान कर रहे थे।”

राघव ने डिब्बा नीचे रखा।

“जरा तमीज से बात करो।”

कमरा चुप हो गया।

जब सबसे ज्यादा दर्शक लाने वाला आदमी तय कर लेता कि उसका अपमान हुआ है, तो हमेशा यही होता था।

विक्रम अमन को गलियारे में ले गया।

“इसे ठीक करने का रास्ता है।”

उस ‘रास्ते’ की कीमत थी। तीन महीने और एडिटिंग, छुट्टी के दिनों में अतिरिक्त शूट, और उसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं।

चैनल में उसका बने रहना समर्थन के तौर पर दिखाया जाता। अगला प्रचार अभियान पूरा होने पर सफाई दी जाती।

“आज क्यों नहीं?”

“बात को और मुश्किल मत करो।”

अमन ने अँगूठे पर केबल की रगड़ से बना निशान देखा।

राघव का माइक लगाते समय लगा था।

* * *

अगली सुबह वह वापस गया।

बाद में यही हिस्सा याद करना उसे सबसे ज्यादा बुरा लगता।

वह तुरंत निकल जाने वाला आदमी बनना चाहता था।

इसके बजाय संपादन की कुर्सी पर बैठकर दो प्रचार वीडियो पूरे किए। डर था कि काम करने से मना किया तो पूरी रिकॉर्डिंग गायब कर दी जाएगी।

दोपहर में एक सहकर्मी चाय रख गया।

किसी ने वीडियो की बात नहीं की।

यह चुप्पी अजनबियों की गालियों से ज्यादा चुभी। ये लोग उस कमरे में मौजूद थे।

शाम को विक्रम ने हस्ताक्षर के लिए बयान भेजा।

उसमें अमन के शब्दों को अनुचित कहा गया था। सीखने का मौका देने के लिए चैनल का धन्यवाद था।

अमन ने दो बार पढ़ा।

उसने खुली फाइलें सेव कीं, हेडफोन उतारे और खड़ा हो गया।

विक्रम ने पूछा, “कहाँ जा रहे हो?”

“घर।”

“काम खत्म नहीं हुआ।”

“आपका हो गया।”

वह चाय छोड़कर निकल गया।

बस में प्लास्टिक की थैली में उल्टी हुई।

घर पर बताया कि नौकरी छोड़ दी।

माँ ने पूछा, “खाना खाया?”

उसने हाँ कहा।

उन्होंने फिर भी खाना गरम किया।

* * *

वीडियो वाले अतिथि बहत्तर साल के जोसेफ डिसूजा थे। रेलवे में क्लर्क रह चुके थे।

Telegram · WhatsApp Channel · WhatsApp Group

भतीजी को चैनल पसंद था, इसलिए रिकॉर्डिंग में आए थे। दोस्तों के साथ बरसों से ताश खेलते थे।

आयोजन के लिए दिया उनका नंबर अमन के पास था।

उसने एक बार फोन किया। फिर अपना परिचय देते हुए छोटा संदेश भेजा।

शाम को जोसेफ ने वापस फोन किया।

“सोच रहा था, कब बात करोगे।”

“माफ कीजिए।”

“जो कहा उसके लिए, या जैसा सुनाया जा रहा है उसके लिए?”

“आपको इसमें घसीटे जाने के लिए।”

कुछ पल चुप्पी रही।

फिर जोसेफ ने कहा, “मुझे याद है क्या हुआ था।”

अमन ने आँखें बंद कर लीं।

इतनी राहत मिली कि वह कुछ पल बोल नहीं पाया। अपनी चुप्पी पर संकोच होने लगा।

जोसेफ ने बयान देने की पेशकश की।

अमन ने धन्यवाद दिया। फिर कहने लगा कि थोड़ा सोच ले, उन्हें दोबारा तमाशे का हिस्सा नहीं बनाना चाहता।

“बूढ़ा हूँ,” जोसेफ बोले। “गुलदान नहीं। पूछ सकते हो, मैं क्या चाहता हूँ।”

अमन ने फिर माफी माँगी।

“इस आदत को थोड़ा कम कर सकते हो,” जोसेफ ने कहा।

* * *

वहाँ एक और कैमरा था।

उस दिन किसे क्या काम सौंपा गया था, इसकी सूची अमन ने सँभालकर रखी थी। उसे देखते समय दूसरा कैमरा याद आया।

चौबीस साल की निशा वीडियो प्रोडक्शन पढ़ रही थी। हॉल की सालगिरह का वीडियो बनाने के लिए उसे काम मिला था। उसका कैमरा बगल की दीवार के पास लगा था।

वह चैनल की नियमित टीम में नहीं थी।

अमन ने स्थिति समझाते हुए पूछा कि क्या उसने वह बातचीत रिकॉर्ड की थी।

उसे कुछ प्रकाशित करने के लिए नहीं कहा।

अगले दिन पहला जवाब आया।

शायद है। देखना होगा। साझा करने से पहले हॉल वालों से अनुमति पूछनी पड़ेगी।

जवाब में तारीख नहीं थी, फिर भी पहली बार लगा कि बात कहीं आगे बढ़ी है।

उसने लिखा कि धन्यवाद, संभव हो तो मूल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखे।

फिर फोन नीचे रख दिया।

कपड़े सुखाने थे।

जब से वह उन्हीं उन्नीस सेकंड को बार-बार देख रहा था, घर का सारा काम सायरा कर रही थीं।

छत पर एक कमीज झटकते हुए उसे अचानक याद आया कि पिछले सोमवार से उसने माँ से उनके घुटनों के बारे में नहीं पूछा।

नीचे लौटकर पूछा।

उन्होंने कहा कि पहले गीली चप्पल बाहर उतारे।

उसे वह डाँट अच्छी लगी।

* * *

निशा ने पूरी दोपहर रिकॉर्ड नहीं की थी।

लेकिन वह बातचीत रिकॉर्ड हो गई थी।

आवाज साफ नहीं थी। माइक के पास पंखा चल रहा था। बीच में किसी ने कुर्सी खिसकाई थी।

बीच में रिकॉर्डिंग रुकी नहीं थी।

जोसेफ ने नियम समझाने को कहा।

राघव ने तीखा जवाब दिया।

जोसेफ ने कहा कि खेल जानते हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग के लिए बदला गया तरीका नहीं समझे।

राघव हँसा।

“आप जैसे लोगों को घर पर ही रहना चाहिए।”

अमन कैमरे के सामने आया।

“आपने अभी इनसे कहा, ‘आप जैसे लोगों को घर पर ही रहना चाहिए’? इन्होंने एक सवाल पूछा है।”

यही वाक्य काटकर फैलाया गया था।

राघव ने अमन को बीच में न बोलने को कहा।

अमन बोला कि अतिथि को जवाब मिलना चाहिए।

फिर अपनी कुर्सी जोसेफ की तरफ खिसकाई और टीम से थोड़ी देर रुकने को कहा।

देखते हुए अमन का मन हुआ कि स्क्रीन के अंदर हाथ डालकर अपने काँपते हाथ रोक दे। आवाज भी काँप रही थी। एक जगह जोसेफ की बात के ऊपर बोल गया था। दो बार विक्रम की तरफ देखा था, जैसे उससे बड़ा कोई आदमी बीच में आ जाएगा।

कोई नहीं आया।

उसने अपना पूरा वाक्य फिर सुना। इस बार छूटे हुए शब्द मन में जोड़ने नहीं पड़े।

* * *

संबंधित लोगों और अनुरोध की जाँच के बाद हॉल ने जरूरी हिस्से को सीमित रूप से जारी करने की अनुमति दी।

जोसेफ राजी थे। निशा ने मूल फाइल दी और बताया कि कैमरा कहाँ रखा था।

अमन ने उसी रात वीडियो नहीं डाला।

डालना चाहता था।

हर उस स्क्रीन पर पूरी बात फेंक देना चाहता था जिस पर माँ का चेहरा दिखाया गया था।

पहले उसने लीला से बात की। वह अलग-अलग आयोजनों की मेजबानी करती थी और एक बार उसे कमेंट्री का काम दे चुकी थी।

उसने पूछा कि वीडियो जारी करके क्या हासिल करना चाहता है।

“दिखाना कि मैंने वह नहीं किया।”

“उसके बाद?”

अमन के पास जवाब नहीं था।

लीला वयस्क खिलाड़ियों का छोटा तीन पत्ती प्रदर्शन मैच आयोजित कर रही थी। उसका लाइव प्रसारण होना था। नियमित सह-प्रस्तोता उपलब्ध नहीं था।

उसने सह-प्रस्तोता का काम और उसका मेहनताना बताया।

अमन को हँसी आने लगी।

“मेरा नाम खोजकर देखा है?”

“हाँ।”

“फिर?”

“लंबी रिकॉर्डिंग भी देखी है।”

उसने पूछा कि क्या मैच के बीच नाटकीय खुलासा करवाना चाहती है।

“नहीं। काम करवाना चाहती हूँ। वीडियो की बात बाद में करेंगे तो अलग से बताए गए हिस्से में।”

अमन ने काम स्वीकार कर लिया।

* * *

आयोजन से पहले विक्रम को पता चल गया।

पहला संदेश दोस्ताना था।

अच्छा है कि फिर काम शुरू कर रहे हो।

दूसरे में पूछा कि चैनल की कोई रिकॉर्डिंग उसके पास है या नहीं।

अमन ने कहा कि जिस सामग्री का इस्तेमाल होगा, संबंधित अनुमति के साथ होगा।

तीसरा संदेश आधी रात को आया।

यह भी सोचना चाहिए कि शुरुआत किसने करवाई थी।

अमन रसोई की मेज पर बैठा उसे पढ़ता रहा।

सायरा पानी लेने आईं।

“काम?”

“पुराना काम।”

“जवाब देने से नींद आएगी?”

“नहीं।”

“तो सुबह।”

सुबह विक्रम ने संयुक्त सफाई देने का प्रस्ताव रखा।

शब्दों में अब भी गलतफहमी थी। राघव की मूल टिप्पणी का जिक्र अब भी नहीं था।

अमन ने मना कर दिया।

विक्रम ने उसे एहसानफरामोश कहा।

अमन ने संदेश अपने रिकॉर्ड में रखा और दिन भर उसकी सूचनाएँ बंद कर दीं।

माँ की सूचनाएँ बंद नहीं कीं।

वह अब साधारण चीजों की तस्वीरें भेजती थीं। टपकता नल। पड़ोसी की बिल्ली। बाजार से लाने वाले चाय के पैकेट की तस्वीर।

अमन समझ रहा था।

फोन पर अब उस वीडियो के अलावा भी कुछ आता था।

* * *

लाइव प्रसारण के दिन वह डेढ़ घंटा पहले पहुँचा।

लीला ने कार्यक्रम का क्रम दिया।

उसका नाम लीला के बराबर लिखा था।

सहायता वाले हिस्से में नहीं।

किसी और के आने तक जगह भरने वाले नाम की तरह नहीं।

पहला अभ्यास खराब हुआ।

परिचय जल्दी पढ़ गया। बदले हुए नियम समझाते समय कह दिया कि यह तो जाहिर है।

फिर रुका।

“मैंने समझाया ही नहीं तो जाहिर कैसे होगा।”

लीला ने सिर हिलाया और आगे बढ़ गई।

किसी ने उसकी गलती का मजाक बनाकर कमरे को नहीं हँसाया।

प्रसारण से पहले उसने दर्शकों की चैट देख ली।

कुछ लोग पहचान चुके थे।

एक ने वही पुराना वाक्य लिखा।

दूसरे ने पूछा कि आयोजकों ने उसे क्यों रखा है।

लीला ने बताया कि निगरानी करने वाली टीम धमकी और निजी अपशब्द सँभालेगी। सामान्य आलोचना नहीं मिटाई जाएगी।

फिर चैट की स्क्रीन उसकी कुर्सी से दूसरी तरफ कर दी।

“दो खिलाड़ियों को सुनना है तुम्हें।”

अमन ने मेज की तरफ देखा।

दोनों खिलाड़ियों को समय के बारे में कुछ पूछना था।

उसने जवाब दिए।

कुछ मिनट वह भूल गया कि उसका चेहरा कैसा दिख रहा होगा।

* * *

पहले परिचय के बीच माइक खरखराने लगा। अमन ने बदलने तक इंतजार किया, फिर वह हिस्सा दोहराया जो दर्शक नहीं सुन पाए थे। बाद में कम बोलने वाली एक खिलाड़ी अंकों पर अपनी आपत्ति समझाने लगी। अमन ने माइक उसके पास किया और बात पूरी होने दी।

एक बार गिनती गलत घोषित कर दी।

लीला ने सुधारा।

उसने धन्यवाद कहा और सही गिनती दोहराई।

उसे आदत से लगा कि अब कोई मजाक करेगा। लीला अगली बात पर बढ़ चुकी थी।

विराम में जोसेफ भतीजी के साथ आए।

किसी से भिड़ने की तैयारी करके नहीं आए थे। कपड़े के थैले में साफ कमीज थी। गरमी में बस के सफर से पहनी हुई कमीज भीग गई थी।

“कहाँ बदल सकता हूँ?” उन्होंने पूछा।

अमन ने कमरा दिखाया।

थैला देखकर उसका गला भर आया।

इतने दिनों से जोसेफ स्क्रीन पर दुखी चेहरा बन गए थे, जिसके सहारे अजनबी दूसरे आदमी को सजा दे सकते थे।

यहाँ उन्हें अपने कॉलर की चिंता थी।

मैच के नतीजे के बाद अमन ने खिलाड़ियों को बधाई दी। टीम का धन्यवाद किया।

आयोजन का प्रसारण खत्म हुआ।

छोटे विराम के बाद अलग बातचीत शुरू हुई, जिसका विषय पहले बता दिया गया था। जो दर्शक रुकना चाहें, उनके लिए।

अमन ने दोनों पैर जमीन पर सीधे रखे।

* * *

उसने आरोप लगाकर शुरुआत नहीं की।

कहा कि एक छोटी क्लिप ने पुराने आयोजन की बातचीत का गलत अर्थ दिखाया। अब संबंधित अनुमति के साथ उसका पूरा संदर्भ दिखाया जा रहा है।

फिर प्रसारण सँभाल रही मेज की तरफ देखा।

“कृपया पूरी क्लिप चलने दीजिए।”

उन्नीस सेकंड बीते।

जहाँ अधिकतर दर्शकों को वीडियो खत्म होने की आदत थी, वह जगह पीछे चली गई।

जोसेफ ने सवाल पूरा किया। राघव ने जवाब दिया।

फिर अमन कैमरे के सामने आया।

इस बार वाक्य के साथ वे सारे शब्द थे जो छोटी क्लिप के लिए असुविधाजनक थे।

रिकॉर्डिंग खत्म हुई तो स्टूडियो शांत था।

अमन जोसेफ की तरफ मुड़ा।

“कुछ कहना चाहेंगे?”

जोसेफ ने कफ सीधा किया।

“हाँ। मैंने नियम पूछा था। अमन मुझे जवाब दिलाने की कोशिश कर रहा था।”

वह रुके।

“उसकी माँ के घर जाने को मैंने किसी से नहीं कहा था।”

अमन ने नजर झुका ली।

यह वाक्य भी लोगों तक जाने वाला था।

इस बार पहुँचने के लिए उसमें से कुछ काटना जरूरी नहीं था।

* * *

लीला ने पूछा कि पहली क्लिप फैलने के बाद क्या हुआ।

अमन ने अतिरिक्त भुगतान के बिना काम करते रहने की माँग बताई। बाद में सफाई देने का वादा बताया।

जिन संबंधित संदेशों को साझा कर सकता था, उनमें से केवल जरूरी हिस्से दिखाए। असंबंधित विवरण हटा दिए गए।

उसने यह नहीं कहा कि पुराने चैनल के हर आदमी ने मिलकर वीडियो काटने की योजना बनाई थी।

उसे यह पता नहीं था।

किसके पास पूरी रिकॉर्डिंग थी, उसने क्या माँगा था और जवाब क्या मिला था, वह बता सकता था।

फिर लीला ने पूछा कि पहले ही दिन अपनी पूरी बात क्यों नहीं बता दी।

अमन ने जोसेफ की तरफ देखा।

“लगता रहा कि पहले कोई बड़ा आदमी बोलेगा। कोई जिसके दर्शक मुझसे ज्यादा हों।”

जोसेफ ने सिर हिलाया।

“मुझे फोन कर सकते थे। मैं वहाँ था।”

अमन लगभग माफी माँगने ही वाला था।

दोनों हँस पड़े।

किसी ने उस हँसी को काटकर दूसरे वाक्य के साथ नहीं जोड़ा।

* * *

सफाई आरोप से धीमी फैली।

यह पहली निराशा थी।

कुछ अकाउंटों ने पुरानी पोस्ट हटाई। कुछ ने लंबी रिकॉर्डिंग जोड़ दी। कुछ ने कुछ नहीं बदला, क्योंकि उनके दर्शकों को गुस्सा करके मजा आया था।

पुराने चैनल ने आखिर सुधार डाला। माना कि छोटी क्लिप में अमन के शब्दों का संदर्भ हटा दिया गया था। अगली प्रचार पोस्ट के ऊपर सुधार पिन किया गया। हॉल ने चैनल की अगली रिकॉर्डिंग टाल दी और पूछा कि उनके अतिथि को इस तरह क्यों दिखाया गया। अब विक्रम अमन को एडिटिंग की कुर्सी पर बिठाकर मामला दबा नहीं सकता था।

राघव ने जोसेफ से माफी माँगी। बयान में अपने कठिन सप्ताह की चिंता अब भी कुछ ज्यादा थी।

जोसेफ ने पढ़कर फोन रख दिया।

लीला ने पूछा कि जवाब देना चाहेंगे।

“नहीं। दाँत के डॉक्टर के पास जाना है।”

अमन हँसा, फिर समझा कि वह सच कह रहे हैं।

अमन हर काम रद्द करके अजनबियों की बहस देखता रहता था। जोसेफ ने क्लिनिक जाने वाली बस पूछी। पाँच मिनट दोनों उसी रास्ते की बात करते रहे।

घर पर गेट के पास खड़े रहने वाला पड़ोसी ऊपर आया।

बोला कि सब गलतफहमी में आ गए थे।

सायरा ने चाय नहीं पूछी।

“हमसे भी पूछ सकते थे,” उन्होंने कहा।

वह एक मिनट और खड़ा रहा।

फिर चला गया।

* * *

अमन ने उधार के उपकरणों से अपना छोटा कार्यक्रम शुरू किया। हर रिकॉर्डिंग का निशा को तय मेहनताना मिलता था। रोज वीडियो बनाने का खर्च नहीं था। उन्होंने एक दोपहर की बुकिंग में दो एपिसोड तैयार किए और गलतियाँ सुधारने के लिए भी समय रखा।

पहले कार्यक्रम में जोसेफ आए। दूसरे अतिथि भी ताश के शौकीन थे। दोनों की शायद ही किसी बात पर सहमति हुई। बस इतना तय था कि कुर्सियाँ ज्यादा आरामदेह होनी चाहिए थीं।

सात मिनट बाद जोसेफ रेलवे कॉलोनी में बनाए गए एक घरेलू नियम का किस्सा सुनाने लगे। अमन ने टाइमर देखा और उँगली उठाई। पुराने चैनल में अब तक कोई मजेदार आखिरी वाक्य चाहिए होता।

जोसेफ रुक गए। “बहुत लंबा हो गया?”

अमन ने हाथ नीचे कर लिया।

“आप बता रहे थे कि नियम बदलना क्यों पड़ा।”

निशा का कैमरा चलता रहा। बाहर स्कूटर तेज आवाज के साथ चालू हुआ। वे उसके जाने तक रुके। फिर जोसेफ ने अपना वाक्य वहीं से शुरू किया जहाँ छोड़ा था।

अमन सुनता रहा। उसके पन्ने पर आगे के तीन सवाल लिखे थे। आज उन सबको पूछ लेना जरूरी नहीं लग रहा था।

टाइमर ग्यारह मिनट पार कर गया। बातचीत अब भी चल रही थी।

🎁 ऐप अपडेट • ऑफ़र • कम्युनिटी

✅ ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी देखें।

🔐 हमारे चैनल के एक्सक्लूसिव ऑफ़र।

📲 नए ऐप के मुफ़्त रिवॉर्ड अपडेट—सब एक जगह!

🔥 अभी जुड़ें, ऑफ़र देखें और उपलब्ध मुफ़्त रिवॉर्ड क्लेम करें!

टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप