NB9: गोद लिए बेटे ने वजीर देकर फाइनल में मात लगाई
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NB9: गोद लिए बेटे ने वजीर देकर फाइनल में मात लगाई

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

NB9 की मौलिक शतरंज कथा: परिवार में किनारे किया कुणाल मजबूत भाई से भिड़ता है और मजबूर वजीर बलिदान से दो रेखाएं खोलकर ऊंट की मात लगाता है।

1. NB9 कथा: तस्वीर के किनारे का लड़का अब इकतीस का है

सबसे पुरानी तस्वीर में कुणाल सोफे के किनारे दोनों जूते सटाकर खड़ा था। आठ साल का। ग्यारह साल के ध्रुव ने कंधे पर बांह रखी थी। दूसरे हाथ में शतरंज का प्यादा छिपा था। पिता ने तस्वीर उस दिन ली थी जब कुणाल गोद लिए बेटे के रूप में घर आया।

तेईस साल बाद शहर क्लब की वर्षगांठ में परिवार का प्रतिनिधि चुनते समय चाचा वीरेंद्र ने उसी तस्वीर की ओर इशारा किया।

“वंश ध्रुव आगे ले जाता है। कुणाल मेहमानों के साथ आ सकता है।”

कुणाल दरवाजे में खड़ा था। ध्रुव ने भी सुना। उसने महत्वपूर्ण आयोजन से पहले बहस टालने जैसी बात कही। कमरे ने उसे जवाब मान लिया। कुणाल दोपहर के खाने से पहले चला गया।

इकतीस की उम्र में अपना किराये का घर और काम था। फिर भी वाक्य उसे उसी बच्चे में बदल देता था जो कभी अपनी अलमारी तय होने का इंतजार करता था। वर्षगांठ में गंभीर आमंत्रण शतरंज प्रतियोगिता थी। प्रवेश योग्यता परिणामों से था। दोनों भाइयों ने स्थान पाया। फाइनल तक वही दोनों बचे।

वीरेंद्र ने दर्शक से कहा कि शतरंज परंपरा का उचित उत्तराधिकारी बोर्ड पर फैसला करेगा। कुणाल ने सुना। अधिकारी घड़ियां देख रहा था। उसने हाथी बाकी मोहरों के पास रखा।

ध्रुव ने उस पार देखा। इस बार उसे पता नहीं था क्या कहना है। कुणाल ने अपनी चाल पर्ची सीधी की और आरंभ का इंतजार किया।

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2. जहां गुस्सा चूकता है, काम शुरू होता है

प्रतियोगिता से पहले महीनों में कुणाल ने देखा कि गुस्सा अभ्यास शुरू करा सकता है और भीतर की बाजी बिगाड़ सकता है। क्लब के खिलाड़ी पर जल्दी हमला किया, पर्याप्त मुआवजे बिना बलिदान दिया और हार गया। पर्ची पर लिखा कि ऐसा खेल चाहता था जो जवाब जैसा दिखे।

फिर सुंदर पहली चाल के बजाय मजबूर करने वाले जवाब पढ़े। हर शह वाले बलिदान पर वैध उत्तरों की सूची बनती। हमलावर को मारना, रेखा रोकना या राजा चलाना। तीनों जांचने के बाद ही संयोजन पर भरोसा करता।

सेवानिवृत्त वयस्क जोसेफ ऐसी स्थितियां देता जहां सुंदर बलिदान एक शांत बीच की चाल से टूटता। कुणाल पहले उसे अस्वाभाविक बचाव कहता था। जोसेफ वही चलता और जीतता।

रंग बदले। अब कुणाल खुद बचाव खोजता। राजा के भागने के खाने लिखे। किसी मोहरे से नियंत्रित खाना और अपने ही मोहरे से घिरा खाना अलग पहचाना। मारने वाला प्यादा हटे तो पहले बंद रेखा खुल सकती थी।

अपनी चाही जीत चाल से पहले छूटा जवाब दर्ज करता। घर में पुरानी तस्वीर मेज पर उलटी थी। कठिन शाम के बाद सीधी की तो बचपन में ध्रुव की बांह दिखी। याद आया वह हाथ गर्म था। वयस्क चुप्पी इसलिए भी चोट करती थी क्योंकि पहले का स्नेह असली था।

उसने तस्वीर पास रखी। उसी अभ्यास में एक रक्षक बढ़ाकर स्थिति फिर बनाई। इस बार बलिदान नहीं चलता था। उसने क्यों नहीं चलता, पूरा कारण लिखा और अगले सवाल पर गया।

3. दूसरी तस्वीर में बिसात है

दूसरी तस्वीर स्कूल के प्रदर्शन की थी। दोनों तब बच्चे थे। बिसात साफ दिखती थी, इसलिए वयस्क अभ्यास फाइलों तक बची रही। ध्रुव जीता था। कुणाल बगल में उस चाल की ओर इशारा कर रहा था जो बड़े लोग चूक गए थे। पिता ने पीछे स्थिति लिखी थी।

वर्षों तक लौटकर देखते कि बलिदान सचमुच मजबूर करता है या केवल आकर्षक है। फाइनल से पहले ध्रुव ने पीछे का फोटो भेजा। पूछा बचाव वाली चाल याद है क्या। कुणाल ने क्रम और बाद में मिला सुधार भेजा। धन्यवाद आया। फिर दूसरा संदेश लिखने का निशान दिखा और बिना संदेश गायब हो गया।

कुणाल फोन रखकर ऐसे अभ्यास पर लौटा जिसमें दो ऊंट राजा के अलग रास्ते रोकते थे। एक ऊंट की राह अपना वजीर रोक रहा था। उसे शह के साथ हटाने से विकर्ण खुल सकता था, बशर्ते मजबूर वापसी मार में विरोधी प्यादा भी रास्ते से हटे।

मोहरे जोड़कर और हटाकर ढांचा परखा। एक भागने का खाना रोकता घोड़ा पूरा नतीजा बदल देता। दूसरे खाने पर खड़ा रक्षक हाथी अपने राजा को कैद कर सकता था।

उसने केवल जीत वाली तस्वीर याद नहीं की। जोसेफ अतिरिक्त बचाव वाली स्थितियां देता। कुणाल को बताना होता कि वही बलिदान वहां क्यों हारता है। हर उत्तर के पास भागने के खानों का नक्शा लिखा।

एक शाम पूरी गणना सही लगी, मगर आखिरी बीच की चाल छूट गई। उसने पन्ने पर लाल निशान लगाया और अगले दिन सबसे पहले उसी स्थिति को फिर जांचा।

4. ध्रुव उससे बचाव करवाता है

फाइनल में ध्रुव उसी सटीकता से खेला जिसका कुणाल बचपन से सम्मान करता था। जगह ली और कुणाल के मोहरे जुड़ने से पहले घोड़े से केंद्र पर दबाव डाला।

कुणाल ने आकर्षक आक्रमण छोड़ दिया। पहली शह को ध्रुव ऊंट बीच में रखकर रोक सकता था। इसके बजाय अपना ऊंट ऐसे विकर्ण की ओर विकसित किया जो केंद्रीय प्यादे हटने पर उपयोगी होता। खेल तीखा हुआ। दोनों राजा वजीर वाले पंख की ओर गए।

मजबूर करने वाली अदला बदलियों में सामग्री का संतुलन बदला। ध्रुव ने गणना करके वजीर दिया और बदले में कुणाल के दोनों हाथी तथा कई प्यादे लिए। स्थिति ठहरने से पहले कुणाल ने ध्रुव का एक हाथी भी मार लिया।

अब कुणाल के पास वजीर, दो ऊंट और घोड़ा था। ध्रुव के पास हाथी, घोड़ा और पांच प्यादे। कुणाल के अपने प्यादे अदला बदलियों में खत्म हो गए थे। खुले राजाओं की समस्या केवल सामग्री के जोड़ से नहीं समझ आती थी।

खाली चाल मिलती तो ध्रुव का हाथी खतरनाक होता। कुणाल के ऊंटों को खुली रेखाएं चाहिए थीं। एक की राह अपना वजीर रोक रहा था। किनारे वीरेंद्र ने कहा ध्रुव स्वाभाविक रूप से मजबूत रहा है। कुणाल ने आखिरी शब्द सुना, फिर काले राजा के आसपास खाने गिने।

उसने घोड़ा सुधारा। ध्रुव ने अपना घोड़ा केंद्र में रखा। दोनों आगे झुके और संभावित शहें जांचने लगे। कुणाल ने पहले राजा की सुरक्षा देखी, फिर बंद विकर्ण पर आंख रोकी।

5. तीसरी तस्वीर अंतिम संस्कार के बाद की थी

पिता की मृत्यु के समय कुणाल चौबीस का था। तीसरी तस्वीर प्रार्थना सभा के बाद की थी। थका परिवार बैठक की कुर्सियों के आसपास कसकर खड़ा था। वीरेंद्र ने कुणाल से पीछे जाने को कहा, वहां ज्यादा जगह है। ध्रुव आधा कदम हिला, लेकिन बगल में पर्याप्त जगह नहीं बनाई।

कुणाल को पूरी तस्वीर से ज्यादा वह छोटी हरकत याद थी। चुनाव बनने से पहले छोड़ा हुआ लगभग चुनाव। अंतिम संस्कार के बाद मां ने पिता का पुराना लकड़ी का शतरंज डिब्बा उसे दिया। ढक्कन ठीक से बंद नहीं होता था। घर छोड़कर अपने फ्लैट में उसे ले गया।

अंतों के अभ्यास में वही डिब्बा इस्तेमाल किया। हर बार हाथी साथ रखे और टेढ़ी कुंडी फंसने तक ढक्कन धीरे दबाया। फाइनल में डिब्बा कुर्सी के नीचे था।

ध्रुव ने घोड़े बदलने का प्रस्ताव दिया। उससे उपयोगी आक्रमणकारी हटता। कुणाल ने सहज दिखती सरलता स्वीकार करने से पहले परिणाम देखा। अपने घोड़े के बिना राजा का एक रास्ता खुलता। केवल ऊंट विचाराधीन जाल पूरा नहीं करते।

उसने मना किया। वजीर ज्यादा सक्रिय खाने पर लाया। तुरंत बलिदान नहीं था। खास काम के लिए मोहरा बचा रहा था। ध्रुव ने नए खतरे देखे। हाथी राजा के पास था। केंद्र का घोड़ा वजीर का सीधा रास्ता रोकता दिखता था।

दोनों खेलते रहे। कुर्सी के नीचे पुराने डिब्बे में मारे गए हाथी साथ पड़े थे। बिसात पर एक ऊंट वजीर के विकर्ण छोड़ने का इंतजार कर रहा था। कुणाल ने उसकी पूरी रेखा देखी, फिर राजा के पास बचे प्यादे को। उस प्यादे की एक चाल दो अलग रास्ते बदल सकती थी।

6. हर भागने का खाना किसी के जिम्मे

कुणाल का वजीर c4 पर आया। ऊंट f4 और f1, घोड़ा f6, राजा a1 पर। ध्रुव का राजा c8, हाथी d8, घोड़ा c6 और प्यादे a7, b7, f7, g7, h7 पर थे। दूसरा कोई मोहरा नहीं बचा था।

c6 का घोड़ा वजीर और राजा के बीच था। b7 का प्यादा उसकी रक्षा करता था। पहली नजर में उसे मारने से वजीर जाता। कुणाल ने देखा कि मार क्या बदलेगी।

f4 का ऊंट b8 और c7 रोकता था। f6 का घोड़ा d7 रोकता था। काले हाथी ने d8 अपने राजा के लिए घेरा था। b7 पर प्यादा दूसरे रास्ते में था।

वजीर घोड़ा मारकर शह दे तो राजा चल सकता है क्या? हाथी बीच में आ सकता है? कोई प्यादा रोक सकता है? कुणाल हर वैध उत्तर अलग जांचता रहा। अपनी चाही चाल पर नहीं रुका। b7 का प्यादा c6 पर वजीर मार सकता था। वही अकेला जवाब था।

वजीर c4 छोड़ता तो f1 के ऊंट का e2, d3, c4 और b5 होते a6 तक जाने का रास्ता खुलता। प्यादा b7 छोड़ता तो a6 से वही ऊंट b7 होते हुए c8 के राजा को शह दे सकता।

कुणाल ने नई स्थिति में फिर राजा के भागने के खाने गिने। फिर बीच में रोकने वाली चाल खोजी। गणना पूरी होने तक हाथ नहीं हिला। ध्रुव शांत बैठा था। कुणाल ने आखिरी बार अपने राजा को देखा और सुनिश्चित किया कि उसकी चाल किसी दूसरी शह को अनदेखा नहीं कर रही।

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7. वजीर हटता है, ऊंट पहुंचता है

कुणाल ने वजीर से c6 का घोड़ा मारा और शह दी। ध्रुव ने वजीर देखा, फिर राजा के आसपास के खाने। f4 के ऊंट के कारण b8 या c7 नहीं जा सकता था। f6 का घोड़ा d7 रोकता था। d8 पर अपना हाथी, b7 पर अपना प्यादा था।

हाथी c7 पर बीच में नहीं आ सकता था। कोई दूसरा मोहरा भी शह नहीं रोकता था। ध्रुव ने b7 से c6 पर प्यादा लाकर वजीर मारा।

कुणाल ने f1 का ऊंट a6 पर रखा। मात।

ऊंट a6, b7 और c8 की रेखा पर राजा को मार रहा था। दूसरा ऊंट अभी भी b8 और c7 रोकता था। घोड़ा d7 रोकता था। d8 का हाथी अपने राजा को घेर रहा था और b7 पर बीच में नहीं आ सकता था। c6 का प्यादा न ऊंट मार सकता था, न शह की रेखा बंद कर सकता था।

ध्रुव ने घड़ी रोकने से पहले हर संभावना देखी। कुणाल इंतजार करता रहा। a6 का ऊंट नहीं छुआ। वजीर मारे मोहरों में था। सबसे मजबूत मोहरा फेंकती दिखी चाल ने घोड़ा हटाया, उसका रक्षक प्यादा खिसकाया और अपने ऊंट का रास्ता साफ किया था।

ध्रुव ने हाथ दिया। अब पदोन्नति या जीत में बदलने वाला कोई अंत बाकी नहीं था। अंतिम खाना उस ऊंट ने लिया जो लगभग पूरी बाजी खुला विकर्ण मिलने की प्रतीक्षा करता रहा था। कुणाल ने हाथ मिलाया, फिर दोनों ने आखिरी स्थिति कुछ पल वहीं रहने दी।

8. भाई अपना जवाब खुद लिखता है

अधिकारी ने चाल पर्चियां जांचीं और कुणाल की जीत दर्ज की। ध्रुव ने तुरंत हस्ताक्षर किए। कुछ पल दोनों बैठे रहे। घर की आखिरी गंभीर बाजी इस बहस पर खत्म हुई थी कि कुणाल ज्यादा सावधान था या नहीं। आज जीत उस गणना से आई जिसे ध्रुव ने पूरा जांचने को मजबूर किया था।

“घोड़ा मारने से पहले हर भागने का खाना जांच लिया था?”

“फिर जांचा था।”

ध्रुव हल्का मुसकराया। “जाहिर है।”

वीरेंद्र तैयार सफाई लेकर पहुंचा। बोला ध्रुव उदार रहा होगा, शायद पारिवारिक अवसर का असर हुआ। ध्रुव उसकी तरफ मुड़ा।

“मैं जीतने की कोशिश कर रहा था।”

चाचा रुका।

“जितना अच्छा बचाव कर सकता था किया। कुणाल ने संयोजन बेहतर गिना।”

शब्द आधा कदम देर से नहीं आए। मेज पर बोले गए, जबकि स्थिति सबके देखने के लिए खड़ी थी। वीरेंद्र ने दर्शकों की तरफ देखा। कई उसे देख रहे थे। उसने कड़े ढंग से बधाई दी। नाम नया सा सुनाई दिया।

कुणाल ने हाथ मिलाया, फिर अंतिम हस्ताक्षर मांगते अधिकारी की ओर लौटा। कागज के बाद मां पास आई। कंधे को छुआ। रक्त या परंपरा पर कुछ नहीं कहा।

“रविवार को डिब्बा घर लाना। कुंडी ठीक करनी है।”

कुणाल ने सिर हिलाया। ध्रुव ने बुलावा सुना और उसकी जगह जवाब नहीं दिया। मां ने कप के पास रखी पर्ची सीधी की। इस बार नाम पूरा दिखाई दे रहा था।

9. कैमरा इस बार क्या लेता है

फोटोग्राफर ने भाइयों को कप के पास खड़ा किया। दोनों खड़े हुए। लेकिन कुणाल ने मोहरे हटने से पहले अंतिम बोर्ड की तस्वीर भी मांगी। उसके लिए a6 का ऊंट किसी की मुसकराहट के कोण से ज्यादा जरूरी था।

दूसरी तस्वीर के लिए बलिदान से पहले की स्थिति लगाने ध्रुव रुका। काला घोड़ा c6 और प्यादा b7 पर वापस रखा, फिर कुणाल को रास्ता दिखाने की जगह दी। वीरेंद्र दूसरे समूह के पास चला गया था। पारिवारिक परंपरा की उसकी कहानी कमरे के बीच नहीं रही।

बोर्ड समेटा तो ध्रुव ने पुराना लकड़ी का डिब्बा उठाया।

“बैठक में बोलना चाहिए था।”

कुणाल इंतजार करता रहा।

“पापा के अंतिम संस्कार के बाद भी। समझता था वह क्या कर रहा है।”

दूसरा वाक्य ज्यादा कठिन था। कुणाल सुन सकता था। उसने कहा हां। ध्रुव ने जवाब नरम करने को नहीं कहा। दोनों हाथों से डिब्बा लौटाया।

साथ बाहर निकले। फाटक पर कुणाल ने मां को रविवार की पुष्टि की। फिर परिवार के बाकी लोगों के आसपास अपना समय जमने का इंतजार करने के बजाय ध्रुव को समय बताया।

“ग्यारह बजे। अगर दूसरी बाजी खेलना चाहो।”

ध्रुव ने फोन पर अंतिम स्थिति देखी।

“आऊंगा। कुंडी के लिए पेचकस भी लाऊंगा।”

कुणाल ने डिब्बा बैग में रखा। दोनों अलग रास्ते जाने से पहले एक पल रुके। इस बार ध्रुव ने उसके कंधे पर पूरा हाथ रखा, आधा कदम नहीं बढ़ाया।

10. ढक्कन जो ठीक से बंद होता है

रविवार को ध्रुव खाने की मेज पर कुंडी ठीक करता रहा। कुणाल मोहरे छांट रहा था। मां चाय लाई। दोनों बहस कर रहे थे कि पुरानी लकड़ी फाड़े बिना कौन सा पेंच फिट होगा। दूसरी कोशिश के बाद डिब्बा ठीक बंद हुआ।

कुणाल ने तीन पुरानी तस्वीरें पास रखीं। स्कूल वाली तस्वीर के पीछे लिखा पद स्याही और फीकी होने से पहले उतारना चाहता था। ध्रुव ने सावधानी से लिखा। पिता का सुधार भी रखा। फिर सबसे पुरानी तस्वीर सीधी की।

“प्यादा छिपाना याद है।”

“सोचा था खेल मांगने में शर्माऊंगा।”

“शर्मा रहे थे।”

“खाने के बाद नहीं।”

दोनों हंसे। मां कप रखकर उन्हें बोर्ड के पास छोड़ गई। नई बाजी में कुणाल ने काले मोहरे चुने। ध्रुव ने केंद्र का प्यादा बढ़ाया। शुरुआत फाइनल दोहराने या जीत से परिवार पर किसे क्या कहने का अधिकार मिला, इससे नहीं हुई।

सुधरा डिब्बा पास खुला था। a6 वाला ऊंट अपने शुरुआती खाने पर था, दूसरा विकर्ण खोजने को तैयार। वीरेंद्र का फोन आया तो मां दूसरे कमरे से बोली। कहा दोनों बेटे खेल रहे हैं, बाद में बात करेंगे।

कुणाल ने वाक्य सुना। ध्रुव की चाल देखी, घोड़े की ओर हाथ बढ़ाया और घड़ी दबाई। सामने वाला अगली संभावना जांचने लगा। मेज पर पुरानी तस्वीरें रखी थीं, लेकिन खेल के लिए अब दोनों बराबर जगह घेरे बैठे थे। मां ने लौटकर खाली कप उठाए और धीरे दरवाजा खुला छोड़ दिया।

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