1. PE7 Game कथा: बत्तीसवीं चाल पर रुकी बाजी
अरुण की आखिरी नोटबुक आधे वाक्य पर खत्म होती थी। भाई की मृत्यु के छह हफ्ते बाद मेहुल को वह अस्पताल के छुट्टी वाले लिफाफे के नीचे मिली। बत्तीसवीं चाल नीली स्याही में लिखी थी। पास लिखा था: अगर वजीर बगल से शह दे, तो पहले जांचो—
आगे कुछ नहीं था। मेहुल पैंतीस साल का था। आखिरी लंबी बातचीत में इसी स्थिति पर उसका अरुण से झगड़ा हुआ था। अरुण निष्क्रिय बचाव पर अड़ा था। मेहुल ने कह दिया था कि हार से इतना डरता है कि बिसात नहीं दिखती। फोन खराब ढंग से बंद हुआ। बीमारी ने बात ठीक करने के लिए अगली शाम नहीं दी।
पारिवारिक बैठक में चाची ने पूछा था कि मेहुल को हमेशा सही साबित होना क्यों जरूरी था। उसके लिए किसी ने जवाब नहीं दिया। वह नोटबुक पुराने अभ्यास कक्ष ले गया। उम्मीद थी पूर्व प्रशिक्षक सतीश अधूरी बाजी समझने में मदद करेगा।
सतीश ने पन्ने पर नजर डाली और वापस धकेल दिया।
“तुम्हारा भाई बहुत अधूरी बाजियां छोड़ गया। उन्हीं में पूरी जिंदगी मत लगाना।”
वयस्क खिलाड़ियों ने सुना। एक ने नोटबुक पहुंचने से पहले कप हटा लिया, जैसे खड़े आदमी से ज्यादा मेज की रक्षा जरूरी हो।
मेहुल किताब घर ले आया। अरुण की पत्नी नीला ने पूछा कुछ उपयोगी मिला या नहीं। उसने कहा अभी नहीं। नीला ने बिसात के पास दीपक रखा। बोली कि जब तक मिले नहीं, इसे यहीं रहने दो।
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2. अप्रैल: पहला गलत जवाब
मेहुल ने वाक्य वैसे पूरा करने की कोशिश की जैसे अरुण करता। सावधान राजा चाल चुनी, मोहरे लगाए और आक्रमण का सहज जवाब चलाया। छह चाल में स्थिति टूट गई।
उसने आक्रमण करने वाले का दूसरा जवाब चुना। उससे बचाव बेहतर दिखा, लेकिन समस्या कमजोर करके। तीन शाम यही गलती दोहराई। वह चाहता था कि नोटबुक में अंतिम समझदारी छिपी मिले और फोन की वह बातचीत याद आनी बंद हो जाए।
चौथी शाम नीला सामने बैठी।
“यह उसकी चाल थी?”
“हां।”
“अच्छी थी?”
मेहुल ने जल्दी जवाब नहीं दिया। फिर कहा नहीं।
“तो वही लिखो।”
उसने लिखा कि निष्क्रिय पीछे हटना केंद्रीय धक्के के बाद हारता है। नीचे अरुण की मूल गणना जस की तस रखी। मजबूत जवाब दूसरी स्याही में जोड़ा। पन्ने की तारीफ करना कठिन, इस्तेमाल करना आसान हो गया।
उसने अधूरी स्थितियों की सूची बनाई। आक्रमण, बचाव, हाथी के अंत और दो ऐसी बाजियां जिनका मूल्यांकन बहस के बाद छोड़ दिया गया था। हर चित्र को केवल अपने लिए छोड़ा संदेश मानने के बजाय उसने पूरे सीजन का काम बनाया। एक समूह उठाकर धीरे धीरे जांचना था।
अप्रैल में पुराने बचाव की आदत दोहराकर अभ्यास बाजी हार गया। इस बार नीला को यह बताने से पहले कि स्थिति कितनी दुर्भाग्यपूर्ण लगी थी, उसने हार दर्ज की।
नीला ने पन्ना पढ़ा। फिर पूछा कि उसी स्थिति को दोबारा कब खेलेगा। मेहुल ने अगली शाम का समय लिखा और पत्ते की तरह मुड़े कागज को नोटबुक में सीधा रखा।
3. जून: साथ न देने वाला प्रतिद्वंद्वी
जून तक जिला केंद्र के तीन वयस्क खिलाड़ियों के साथ नियमित अभ्यास तय हो गया। नोटबुक से लाए पदों में वे बारी बारी आक्रमण करते। निर्देश था कि सबसे मुश्किल जवाब खोजें, चाहे मेहुल का सुंदर विचार टूट जाए।
एक स्थिति में उसने प्यादा चलाकर शह की रेखा रोकी। सुरक्षित लगी, जब तक विरोधी ने आक्रमण नए कमजोर खाने पर नहीं मोड़ दिया। दूसरी में सबसे खतरनाक मोहरा बदल दिया। उसके बाद समझ आया कि बचा प्यादों का अंत हार रहा है।
बचाव की चाल चुनने से पहले उसने नए सवाल शुरू किए। वास्तविक धमकी क्या है? मैं कौन सी शह दे सकता हूं? आक्रमण का कौन सा मोहरा बिना रक्षा है? अदला बदली के बाद किसका राजा सक्रिय होगा?
मोहरे छूने से पहले संभावित चालें लिखता। पहली नजर में मिली राहत के बजाय आगे की स्थितियों की तुलना करता। काम धीरे हुआ। कई शाम सभी प्रस्तावित हल कटे हुए लेकर लौटा। नीला ने पूरी किताब हल हुई या नहीं पूछना छोड़ दिया। पूछती कि आज कौन सी स्थिति सबसे मजबूत परीक्षा में टिकी।
एक टिकी। वजीर को बीच में रखकर शह रोकना और उसी चाल से दूसरी दिशा में शह देना। अब आक्रमणकारी राजा भी गणना का हिस्सा बनता था।
यह अंतिम अधूरा पन्ना नहीं था। पहले का अभ्यास था जिसे अरुण ने प्रश्नचिह्न लगाकर छोड़ दिया था। मेहुल ने पास दूसरा प्रश्नचिह्न बनाया। बाकी हफ्ता उसके जवाब की जांच में बीता। हर बार सामने वाले को सबसे कठिन बचाव चुनने दिया।
4. अगस्त: सही सवाल पूछकर भी हारना
सीजन के बीच मेहुल ने मजबूत खुली प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। दो बाजियां जीतीं, एक बराबर रही। फिर तनाव भरी बाजी में अपने पलटवार के भीतर विरोधी की बचाव संभावना चूककर हार गया।
सतीश ने नतीजे की सूची देखी।
“अभी भी भाई के बचे कागजों में लगे हो?”
मेहुल ने पर्ची उसी पुरानी मोड़ पर तह की। “अभी भी खेल रहा हूं।”
उसके पास प्रशिक्षक को चुभने लायक कोई तीखा जवाब नहीं था। वापसी में वाक्य इतना घूमता रहा कि जरूरी स्थिति मुश्किल से याद आ रही थी। उसने बस में चालों की किताब खोली और एक एक चाल से बाजी फिर बनाई।
पलटवार का विचार उचित था। उसे लागू करने में गलती हुई, क्योंकि बीच की शह जांचना छूट गया। उसने यह अंतर लिख दिया। अगले अभ्यास में उसने विरोधियों से कहा कि जैसे ही वह कोई मजबूर करने वाला क्रम बताए, बीच में अपनी शह खोजें। कई ऐसी मिलीं जो उसने नहीं देखी थीं।
अब हर संभावित चाल के बाद एक खाली पंक्ति छोड़ी जाती। उसमें सबसे मजबूत बीच का जवाब लिखना था। नीला ने अरुण के पन्नों में यह नया ढांचा जुड़ते देखा।
“उसे लाल स्याही से चिढ़ होती।”
“मेरी कॉपी पर खूब लगाता था।”
पहली बार अरुण को याद करके हंसी आई और तुरंत बुझी नहीं। उस रात मेहुल अंतिम अधूरे पन्ने पर लौटा। निष्क्रिय बचाव अब भी हारता था। उसने उसे बचाने की कोशिश बंद कर दी। कल के अभ्यास के लिए दूसरी संभावना लिखी।
5. अक्टूबर: प्रशिक्षक का सबसे अच्छा खिलाड़ी
सीजन चैंपियनशिप के आखिरी दौर में मेहुल का सामना सतीश के सबसे मजबूत वयस्क खिलाड़ी विक्रम से हुआ। अंक स्थिति साफ थी। जीत मेहुल को पहले स्थान पर लाती। बराबरी पर विक्रम आगे रहता।
विक्रम उनतीस का था और अपनी बढ़त कमाकर आया था। पहल संभालता, सही समय पर आक्रमण दूसरी ओर बदलता और दर्शकों की उम्मीद के कारण अच्छी स्थिति में जल्दबाजी नहीं करता था।
खेल से पहले सतीश उसके पीछे खड़ा होकर बोला कि मेहुल दबाव में भावुक हो जाता है। मेहुल ने कुर्सी जांचते समय बात सुनी। चाल पर्ची बिसात के पास रखी और शुरुआत की घोषणा का इंतजार किया।
विक्रम ने तीखी संरचना चुनी। मेहुल ने विकास से जवाब दिया। शुरुआती प्यादा छोड़ दिया जिसे मारने से मोहरे बिखर जाते। पहली अदला बदली के बाद विक्रम के पास ज्यादा जगह थी। मेहुल की स्थिति संकरी, लेकिन ठोस थी।
उसने घोड़े से केंद्रीय खाना चुनौती में लिया। फिर हाथी उस फाइल पर रखा जो आगे खुल सकती थी। अगर उसे बंद प्यादे के पीछे छोड़ देता तो आक्रमण आने पर बचाव निष्क्रिय रहता।
विक्रम ने देखा और तैयारी का क्रम बदला। हमला करने वाला प्यादा बढ़ाने से पहले वजीर राजा की ओर लाया। मेहुल ने चाल लिखी। मन में अरुण की आवाज आई कि राजा जल्दी पीछे हटना चाहिए।
उसने फिर बिसात देखी। जल्दी पीछे हटने पर एकमात्र उपयोगी जवाबी शह का रास्ता चला जाता। उसने हाथ राजा से दूर रखा और दूसरी संभावनाएं गिनीं।
6. आक्रमण वास्तविक हो जाता है
विक्रम ने प्यादे का ऐसा धक्का दिया जिसे मेहुल अनदेखा नहीं कर सकता था। एक तरफ से मारने पर राजा की ओर रेखा खुलती। दूसरी तरफ से मारने पर कमजोर प्यादा बनता और विक्रम को मजबूत खाना मिलता।
मेहुल ने दूसरा नुकसान चुना। सक्रिय मोहरों के साथ कमजोरी बचाई जा सकती थी। खुली राजा रेखा लगातार आपात चालें मांगती। फिर भी विक्रम ने दबाव बढ़ाया। वजीर अंदर आया, ऊंट बिसात काटने लगा और हाथी केंद्र से जुड़ने की धमकी देने लगा।
मेहुल को तीन अलग समस्याएं हल करनी थीं। उन्हें एक ही घबराहट में नहीं मिलने देना था। उसने कमजोर प्यादा तत्काल हमले से हटाया, हाथी का संबंध वजीर से रखा और घोड़ा बेहतर करने के लिए छोटी मजबूर करने वाली शह दी। विक्रम ने सही जवाब दिया और आक्रमण वापस शुरू किया।
सभागार के किनारे सतीश बांहें मोड़े खड़ा था। नीला उससे कई पंक्ति पीछे थी। वह स्थिति का मूल्यांकन नहीं कर सकती थी। मगर गंभीर गणना शुरू होने पर मेहुल का आसपास के लोगों को देखना बंद करना पहचानती थी।
बारह मिनट बचे थे। सहज पीछे हटने से राजा एक चाल सुरक्षित होता। अगली चाल विक्रम का हाथी अंदर घुसता। मेहुल ने खतरा साफ होने तक वह रास्ता देखा, फिर मन में काट दिया।
अब उसने ऐसा जवाब खोजा जिसमें विक्रम को भी सवाल का उत्तर देना पड़े। उसकी नजर पहले अपनी शहों पर गई, फिर दोनों वजीरों के बीच खुल रही रेखाओं पर।
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7. शह का जवाब देने वाली शह
विक्रम ने वही वजीर शह दी जिसकी तैयारी कर रहा था। वह मेहुल की स्थिति में पीछे पड़े एक ढीले मोहरे पर भी हमला करती थी। साधारण राजा चाल से मोहरा खुला छूटता और आक्रमण जारी रहता।
मेहुल ने राजा नहीं चलाया। अपने वजीर को शह देने वाले वजीर और राजा के बीच रखा। नए खाने से उसका वजीर दूसरी रेखा पर विक्रम के राजा को शह दे रहा था।
सभागार जैसे बिसात के और पास आ गया। चाल वैध थी, जवाब मजबूर करती थी और पहली नजर में दिखते पीछे हटने से बहुत दूर थी। विक्रम को अपनी शह का जवाब देना पड़ा। ढीला मोहरा जीतने का दिखता रास्ता अब उपलब्ध नहीं था, क्योंकि उसका राजा हमले में था।
मेहुल ने वजीर मारने का क्रम पहले गिना था। उसका हाथी वापसी में मारकर शह देता। बचाव में बंधे रहने के बजाय सक्रिय पहुंचता। अदला बदली से विक्रम का सबसे मजबूत आक्रमणकारी हटता और अगली रेखा पर वापस जीता जा सकने वाला प्यादा मिलता।
विक्रम ने राजा चलाकर वजीर रखने पर विचार किया। उससे अपने खुले राजा पर ज्यादा खतरनाक आक्रमण मिलता। उसने फिर विकल्प जांचा, फिर वजीर मार दिया। मेहुल ने हाथी से वापस मारा और शह दी।
विक्रम ने राजा हटाया। अब ढीला मोहरा बच सकता था। सक्रिय हाथी कमजोर प्यादा लेकर बेहतर अंत की ओर बढ़ता। दर्शकों के पीछे सतीश ने बांहें खोलीं। रस्सी की तरफ एक कदम बढ़ाया, फिर वहीं रुक गया।
8. अंत में समाया पूरा सीजन
जवाबी शह ने खेल की दिशा बदली थी। काम खत्म नहीं हुआ था। विक्रम ने अंत में भी जोर लगाया। बचे मोहरे सक्रिय रखे, पीछे से प्यादे पर हमला किया और ऐसी अदला बदली खोजी जिसमें मेहुल का छोटा लाभ गायब हो जाए।
मेहुल ने पहली अदला बदली नहीं की। उससे उसका राजा जरूरी हिस्से से बहुत दूर रहता। उसने प्यादों की संरचना तय करने से पहले राजा को करीब लाया। कमजोर प्यादा वापस जीता, फिर दूसरे हिस्से में दूसरा निशाना बनाया।
विक्रम का हाथी उसकी रक्षा को गया तो मेहुल अपने हाथी को बचे प्यादों के पीछे लाया। दर्शक अब एक ही नाटकीय धमकी से खेल नहीं समझ सकते थे। बेहतर खाने, ठुकराई अदला बदलियां और राजा के सहारे तक रोकी गई एक प्यादा चाल से दबाव जमा हुआ।
मेहुल ने उन महीनों में यही धैर्य सीखा था जब पूरी शाम से सिर्फ एक सुधरी गणना मिलती थी। विक्रम ने अंतिम जाल रखा। एक प्यादा खुला छोड़ा। लेने पर हाथी बगल से शह देता और बराबरी लायक सामग्री वापस जीतता।
मेहुल ने प्यादा नहीं लिया। राजा को शह की रेखा से हटाया, फिर वही धमकी लौटाई। इस बार हाथी दोनों कमजोरियां समय पर नहीं बचा सकता था।
विक्रम लगभग तीन मिनट बिसात देखता रहा। फिर घड़ी रोक दी। मेहुल ने तभी सिर उठाया जब मोहरों के ऊपर से हाथ उसकी ओर आया। उसने हाथ मिलाया। नीला ने पीछे गहरी सांस छोड़ी और फोन निकालने से पहले कुछ पल उसे देखती रही।
9. अधूरे वाक्य को जवाब मिलता है
नतीजे पर हस्ताक्षर के बाद सतीश मेज पर पहुंचा।
“वह जवाबी शह। अभ्यास में ऐसी बातें किया करते थे।”
मेहुल ने जवाब देने से पहले चालों की किताब बैग में रखी।
“बहुत बातें करते थे।”
प्रशिक्षक ज्यादा अपनापन मिलने का इंतजार करता रहा। नहीं मिला। नीला मेहुल के पास खड़ी थी। विक्रम अभी भी स्थिति देख रहा था। उसने पूछा क्या वजीर बीच में रखने की चाल तैयार करके आए थे।
“ढांचे का अभ्यास था। स्थिति नई थी।”
मेहुल ने छोड़ा गया पीछे हटना और शह के साथ वापसी मार समझाई। विक्रम ने वजीर बदलने से पहले सोचा हुआ बचाव दिखाया। दोनों ने जांचा, जब तक आक्रमणकारी राजा के खतरे पर सहमति नहीं हुई।
सतीश ने शामिल होते हुए कहा कि देखने के बाद जीत वाला विचार स्पष्ट ही लगता है। मेहुल उसकी तरफ मुड़ा।
“अप्रैल में आपने इन पन्नों को बचे कागज कहा था। मैंने पूरा सीजन जांचा। यह एक जवाब है।”
विक्रम ने प्रशिक्षक और किताब को देखा। सतीश चुप रहा। प्रस्तुति में मेहुल ने कप पकड़ा और किसी की अगली प्रतिक्रिया खोजने के लिए सभागार नहीं देखा। नीला ने एक तस्वीर ली, फिर फोन नीचे कर लिया।
निकलते समय उसने पूछा कि उसके घर खाना खाएगा या नहीं। अरुण की बिसात अभी मेज पर थी। मेहुल ने कहा हां, पहले एक नोट पूरा करना है। नीला ने हल्का बैग ले लिया। उसने विश्लेषण के लिए साथ लाई बिसात उठाई और दरवाजे की ओर चला।
10. नीली स्याही, लाल स्याही
नीला के घर मेहुल ने नोटबुक बत्तीसवीं चाल पर खोली। अरुण की नीली लिखावट में अधूरा वाक्य था। उसने ऐसे पूरा नहीं किया जैसे भाई को जवाब हमेशा से मालूम रहा हो। नीचे अपनी लिखावट में लिखा: पहले मजबूर करने वाले जवाब जांचो, ऐसी शह भी जो शह की रेखा रोकती है।
फिर पुरानी स्थिति का पूरा विश्लेषण जोड़ा। वह चैंपियनशिप वाली स्थिति से अलग थी। सवाल उपयोगी था, सही चाल तक पहुंचने का रास्ता दूसरा।
मेहुल खाना परोस रहा था। नीला पन्ना पढ़ती रही।
“हारने वाली गणना भी रखी है।”
“उसकी जगह यहीं है।”
उसने नोटबुक का किनारा छुआ और धीरे बंद कर दी। बाद में फोन वाले झगड़े की बात हुई। मेहुल ने वह वाक्य दोहराया जो कहना नहीं चाहता था। नीला ने एक शाम का जिक्र किया जब अरुण शिकायत कर रहा था कि छोटा भाई किसी स्थिति को छोड़ता ही नहीं। आवाज में नाराजगी और गर्व दोनों थे।
दोनों कुछ देर चुप बैठे। जाने से पहले मेहुल ने नई बाजी पुरानी नोटबुक के पास रखी। वजीर की जवाबी शह पर घेरा था। उसके बाद विक्रम का सबसे मजबूत बचाव और लंबा अंत दर्ज था।
नीला ने दीपक खिसकाया ताकि दोनों पन्ने रोशनी में आएँ। उसने पूछा, कॉपी वापस अलमारी में रखनी है क्या? मेहुल ने नीली लिखावट और लाल सुधार देखे।
“आज रात खुली रहने दो।”
उसने खाली प्लेटें हटा दीं। जाने से पहले मेहुल ने नई बाज़ी के नीचे तारीख लिखी। ऊपर भाई के शब्द दिखते रहे। नीला ने दोनों नाम पढ़े। दरवाज़े पर शुभरात्रि कहकर वह एक बार छाया की ओर मुड़ते पन्ने को सीधा करने लौटा। आखिर गया तो किसी रंग की स्याही ढकी नहीं थी।
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