Pick11: जिस भाई को सहायक कहा, उसके जवाब में चार बोर्ड
Pick11

Pick11: जिस भाई को सहायक कहा, उसके जवाब में चार बोर्ड

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

Pick11 कहानी: हकलाहट के कारण पारिवारिक टीम से हटाया अरुण नई टीम में खेलता है। चार बोर्डों के फाइनल में कठिन हाथी बचाव और साथियों की जीत परिणाम बनाते हैं।

1. Pick11 कहानी: पास पर लिखा दूसरा शब्द

अरुण का कप्तान वाला पास छप चुका था। छोटे सौतेले भाई ने तस्वीर के बीच से उसे फाड़ दिया। प्रतीक ने पंजीकरण की मेज़ के पास ऐसा किया, जहाँ पारिवारिक शतरंज टीम के बाकी लोग देख सकते थे।

“हमें ऐसा आदमी चाहिए जो घड़ी खत्म होने से पहले वाक्य पूरा कर सके,” उसने कहा।

अरुण अड़तालीस वर्ष का नक्काशीकार था। जीवन भर हकलाहट रही थी और वर्षों के प्रतियोगी परिणाम भी। पिछला सीज़न टीम को उसी ने संभाला था। छत्तीस वर्ष के प्रतीक ने हाल में प्रशासन लिया। उसने तय किया कि सार्वजनिक परिचय पहले हो चुके काम से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

बदले पास पर सहायक लिखा था।

अरुण ने वापस किया तो भाई ने कहा कि बाकी लोगों को असहज न करे। सामान उठा सकता है, दौरों के बाद बाज़ियाँ समझा सकता है। खेलने की जगह किसी और को दी जा चुकी थी।

अरुण ने पूछना चाहा कि फैसला किसने मंजूर किया। पहली आवाज अटक गई। प्रश्न पूरा होने से पहले प्रतीक बोला।

“देखा?”

कई साथियों ने नीचे देखा। एक ने उपकरण का बक्सा खींचा, जैसे उसे हटाने से दृश्य साफ हो जाएगा।

अरुण ने फटे पास के दोनों हिस्से जेब में रखे। सहायक वाला बैज मेज़ पर छोड़कर बाहर चला। गेट पर टीम की बस थी। वह उसके पास से पैदल गुज़रा। हाथ में वह स्कोरबुक थी जिसमें पिछले वर्ष भाई की सबसे अच्छी तैयारी उसी की लिखावट में थी।

ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी चाहिए? नीचे अपनी पसंद की कम्युनिटी चुनें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

2. साधारण पन्ने पर चार नाम

दूसरी टीम का निमंत्रण सुमि से आया। उनतालीस वर्ष की लेखाकार कई बार अरुण के सामने खेल चुकी थी। उसने जिला टीम चैंपियनशिप के लिए उपलब्धता पूछी। अरुण ने बोर्ड पूछा।

“दूसरा। पहले पर मैं। तीसरे पर इमरान। चौथे पर लीला।”

प्रचार, यात्रा या संबोधन से पहले उसने असली खेलने की योजना दी। चार कामकाजी वयस्क नहर के पास मनोरंजन कक्ष में अभ्यास करते थे। पिछली बार शुरुआती समूह में थोड़े अंतर से बाहर हुए थे। इस बार सही तैयारी चाहते थे।

पहली बैठक में सुमि ने चार कागज़ रखे। सबने अच्छे से संभाली स्थितियाँ और बचने वाली स्थितियाँ लिखीं। अरुण ने हाथी के अंत दोनों तरफ लिखे। बेहतर अंत में गतिविधि बना सकता था। खराब अंत में सक्रिय बचाव जल्दी छोड़ देता था।

उनतीस वर्ष के बस चालक इमरान ने माना कि शुरुआती चालें चुनने में बहुत समय लगता है। चवालीस वर्ष की शिक्षिका लीला हाथी बचे रहने पर पास हुए प्यादे का उपयोग सुधारना चाहती थी।

किसी को बड़ा पद दिए बिना पन्ने पढ़े गए। अरुण स्थिति समझाते हुए एक शब्द पर रुका। किसी ने उसकी जगह पूरा नहीं किया। सुमि ने बोर्ड घुमाया ताकि चारों देख सकें। उसने वाक्य पूरा किया, फिर चाल दिखाई।

3. हाथी को काम करते रहना है

पहले अभ्यास मुकाबले में अरुण की कमजोरी खुली। हाथी के अंत में एक प्यादा कम था। उसने हाथी अपने राजा के पीछे रख दिया और प्रतीक्षा की। हमलावर का हर मोहरा सुधरता रहा। अरुण के खाने कम होते गए।

सुमि ने सक्रिय रक्षक हाथी से स्थिति फिर खेली। उपयोगी दूरी से शह दी, राजा पास आया तो फाइल बदली और हमलावर को खतरों के उत्तर में चालें लगानी पड़ीं। सटीकता चाहिए थी, मगर रक्षक के लिए काम मौजूद था।

अरुण ने वे स्थितियाँ अभ्यास कीं जिनमें राजा पास हुए प्यादे के सामने रह सकता था। हाथी को आड़ी पंक्ति में रखकर विरोधी राजा का आगे बढ़ना रोकना सीखा। प्यादा उस बाधा को तोड़ने लायक बढ़े तो पीछे से शह के लिए व्यवस्था बदलनी थी।

समय महत्त्वपूर्ण था। जल्दी बदलने पर राजा बढ़ जाता। देर करने पर प्यादा और राजा जुड़ जाते। उसने अलग फाइलों पर प्यादा रखकर वही प्रकार खेला, ताकि याद किया चित्र हर प्रश्न का उत्तर न दे।

कभी लीला हमलावर बनती। इमरान घड़ियाँ संभालता। सुमि एक चीज़ बदलकर पूछती कि योजना अब भी काम करती है क्या।

कठिन बचाव के बाद स्थिति पूरी स्थिर होने से पहले अरुण मुस्कराने लगा। लीला ने नया खतरा खोजकर जीत लिया। उसने मोहरे फिर रखे। पहले की उपयोगी चालें समीक्षा से मिटाईं नहीं।

4. चार घड़ियाँ, एक परिणाम

टीम चार बोर्डों पर पूरा मुकाबला अभ्यास करती। पहले तैयारी और बाद में विश्लेषण साझा था। खेलते समय हर खिलाड़ी स्वतंत्र फैसला करता। साथी के आशावादी चेहरे से सामने की स्थिति का मूल्यांकन नहीं हो सकता था।

पहले अभ्यास मैच में इमरान जल्दी जीता। अरुण ने परिणाम देखा और ऐसी स्थिति से ड्रॉ दिया जिसे ठीक तरह आगे खेल सकता था। बाद में लीला हारी। टीम का नतीजा हाथ से गया।

अंत में खत्म हुए बोर्ड को दोष देने के बजाय समय देखा गया। सुमि ने पूछा कि ड्रॉ देते समय अरुण वास्तव में क्या जानता था। उसे एक साथी का परिणाम पता था। बाकी का अनुमान था।

अगले अभ्यास में बाकी बोर्ड अनिश्चित थे तो उसने संतुलित बाज़ी जारी रखी। बहादुरी दिखाने को झूठी जीत की संभावना नहीं बनाई। स्थिति साफ होने तक उपयोगी चालें करता रहा।

चैंपियनशिप के शुरुआती दौर सफलता और सुधार दोनों लाए। टीम समूह से निकली, नज़दीकी क्वार्टरफाइनल बचाया और लीला की सावधान जीत से सेमीफाइनल जीता। अरुण ने जीतें और कठिन ड्रॉ दिए। एक हार भी हुई जिसे बाकी ने संभाला।

फाइनल की जोड़ी प्रतीक के पारिवारिक क्लब से बनी। दूसरे बोर्ड पर अरुण अपने भाई से खेलता।

सुमि ने यात्रा का विवरण दिया। अरुण के नाम के पास वही शब्द था जो बाकी के पास था—खिलाड़ी।

5. तीसरा बोर्ड पहले समाप्त होता है

फाइनल में बाकी बोर्डों पर विकास पूरा होने से पहले इमरान की बाज़ी तीखी हो गई। प्रतिद्वंद्वी ने गतिविधि के लिए प्यादा दिया। इमरान ने लिया और ऐसे राजा का बचाव करने लगा जिसके सुरक्षित खाने घट रहे थे।

अपनी बाज़ी में उठने पर अरुण को केवल टुकड़े दिखे। दूसरे बोर्ड पर लौटा, जहाँ प्रतीक केंद्रीय प्यादों की बहुलता से दबाव बना रहा था। भाई की तैयारी अच्छी थी। ढीले प्यादे के कारण असुविधाजनक रक्षा या खराब अंत में अदला-बदली चुननी थी।

अरुण ने अंत चुना। मध्यखेल के खतरों से अधिक साफ बचाव के साधन समझ रहे थे। जल्द उनकी ज़रूरत पड़ती।

तीसरे बोर्ड पर इमरान मजबूर करने वाली शह चूक गया और सामग्री खोई। उपयोगी प्रतिरोध समाप्त होने तक लड़ा, फिर हार मानी। पारिवारिक क्लब एक-शून्य आगे था।

प्रतीक ने खत्म बोर्ड की ओर देखा। “नई टीम को कोई स्थिर आदमी खोजना चाहिए था,” उसने मोहरों से अलग एक क्षण में कहा।

अरुण ने घड़ी देखी और बैठ गया। अगली चाल में निष्क्रिय बचाव की तरफ हटने के बजाय हाथी सक्रिय रखा।

इमरान स्कोर लेकर बाहर गया। चेहरा सफेद था। चौथे बोर्ड पर लीला ध्यान में थी। पहले पर सुमि दबाव बनाना शुरू कर रही थी। तीन बाज़ियाँ बाकी थीं। हर एक का अपना प्रश्न था।

6. चौथा बोर्ड उत्तर देता है

लीला को हाथी बदलने का प्रस्ताव मिला। उससे पास हुए प्यादे की ताकत बदल जाती। उसने बचे राजाओं के रास्ते जाँचे और मना किया। हाथी रखने से सामने के राजा को काट सकती थी और अपना राजा पास ला सकती थी।

अरुण उसके लिए गणना नहीं कर सकता था। अपनी सीट से इतना दिखा कि वह सोच रही थी, फिर हाथी सक्रिय फाइल पर आया। वह अपने बोर्ड के खतरे पर लौटा।

प्रतीक ने प्यादा जीता और स्थिति और सरल की। अब आगे बढ़े केंद्रीय प्यादे के खिलाफ हाथी का अंत था। अरुण का राजा उसके सामने पहुँच सकता था, पर अगली चालें सही करनी थीं।

उसने राजा का रास्ता खुला रखा और हाथी से सामने वाले राजा को रोका। प्रतीक ने अपने हाथी से रक्षक हाथी भगाना चाहा। अरुण ने जरूरी शह की दूरी छोड़े बिना उसकी जगह बदली।

चौथे बोर्ड पर लीला ने आखिर अपनी तैयार शर्तों पर हाथी बदले। राजा निर्णायक खाने पर पहले पहुँचा। सामने वाले ने गिना, एक आखिरी प्यादा चाल की और हार मान ली।

एक-एक।

लीला ने पर्ची पर हस्ताक्षर किए और हट गई। बचे साथियों को सुझाव नहीं दिया। इमरान पास खड़ा हुआ। उसने एक बार कंधा छुआ, फिर दोनों बाधा के पीछे से देखने लगे।

अरुण ने परिणाम सुना था। भाई का राजा पास आते भी देखा था। अगली हाथी शह तालियों के आधार पर नहीं चुनी जा सकती थी।

नई गतिविधियों और ऐप अपडेट के लिए अपना पसंदीदा चैनल देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

7. पहला बोर्ड दूसरा निशाना बनाता है

सुमि की बाज़ी धीरे विकसित हुई थी। सामने वाला कमजोर प्यादा हाथी और ऊँट से बचाकर स्थिति छोटी रख रहा था। गंभीर हमला चुनने से पहले सुमि ने दूसरी तरफ दूसरा निशाना बनाया।

रक्षक मोहरे दोनों जगह सहज नहीं संभाल सकते थे। हाथी खिसका तो सुमि छोड़ी फाइल में घुसी। प्यादा जीता। फिर ऐसा साधनपूर्ण बचाव मिला जिसमें केवल सामग्री गिनना पर्याप्त नहीं था।

दूसरे बोर्ड पर अरुण का हाथी उस पंक्ति में था जो प्रतीक के राजा को सीधे आगे आने से रोकती थी। पास हुआ प्यादा यह व्यवस्था बदल सकता था। अरुण ने राजा खतरे के सामने रखा और प्यादे के बढ़ने की प्रतीक्षा की।

प्रतीक ने उसे बढ़ाया।

अरुण ने उद्देश्य समाप्त होने के बाद पुरानी बाधा जारी नहीं रखी। हाथी को हमलावर राजा की स्थिति के पीछे पहुँचाया और अब उपयोगी लाइनों पर शह शुरू कीं। राजा हाथी की ओर आया तो वह इतनी दूर खिसका कि शह असरदार रहें।

भाई की भौंहें सिमट गईं। दर्शक अतिरिक्त प्यादा देखकर लगभग जीत मान रहे थे। बोर्ड पर हर सुधार से राजा पर नई शह आती या प्यादा आवश्यक समर्थन के बिना छूटता।

सुमि अभी काम कर रही थी। अरुण को उसका सीधा बैठना और सावधानी से हाथी हिलाना दिखा। वह अपने सामने के अंत में रहा।

8. आखिरी बोर्ड अभी जारी है

सुमि की बाज़ी बाकी रहते प्रतीक ने ड्रॉ माँगा। यह स्वीकार करना था कि अतिरिक्त प्यादा वैसी जीत नहीं दे रहा जैसी उसने सोच ली थी। उत्तर देने से पहले अरुण ने स्थिति देखी। बचाव सही था। उससे जिम्मेदारी से अधिक निकालने का रास्ता नहीं दिखा।

उसने स्वीकार किया।

डेढ़-डेढ़। पहला बोर्ड बाकी।

बाज़ी इतनी लंबी चली थी कि पारिवारिक क्लब के साथी बाधा के पीछे इकट्ठे थे। दूसरे बोर्ड के परिणाम से यह उम्मीद समाप्त हुई कि अतिरिक्त प्यादा सुमि की बढ़त की भरपाई कर देगा। प्रतीक ने टीम की कुर्सियों के पास बक्से पर लगे सहायक बैज को देखे बिना ड्रॉ पर हस्ताक्षर किया।

अरुण इमरान और लीला के पास गया। किसी ने चाल नहीं फुसफुसाई। सुमि को स्थिति खुद जीतनी थी।

उसने हाथियों की एक जोड़ी बदली, सक्रिय हाथी रखा और रक्षक राजा को पास हुए प्यादे तक आने से रोका। प्रतिद्वंद्वी को शह का क्रम मिला। सुमि राजा को तैयार आश्रय में ले गई और पूरे रास्ते प्यादा सुरक्षित रहा।

शह समाप्त हुईं। उसके हाथी ने रक्षक को पदोन्नति के रास्ते से हटने पर मजबूर किया। प्यादा आगे बढ़ा।

प्रतिद्वंद्वी ने हार मानी तो इमरान ने चेहरा ढक लिया। लीला ने कलाई पकड़कर हाथ नीचे किया, ताकि वह सुमि को खड़ा होते देख सके।

9. ढाई के नीचे चार हस्ताक्षर

अंतिम स्कोर ढाई-डेढ़ था। सुमि और लीला जीती थीं। इमरान हारा था। अरुण ने ड्रॉ किया था। चार परिणामों से टीम की चैंपियनशिप बनी।

सुमि ने रखी जाने वाली प्रति पर चारों से हस्ताक्षर माँगे। इमरान अपने हारे बोर्ड के पास झिझका। उसने कलम उसके हाथ में रखी। कप की ओर बढ़ने से पहले उसने नाम लिखा।

विरोधी कप्तान होने के कारण प्रतीक को मैचपत्र की पुष्टि करनी थी। उसकी नज़र अरुण के आधे अंक पर रुकी। फिर कुल के नीचे हस्ताक्षर किए।

पुरस्कार पर आयोजक ने अरुण से पूछा कि अंत कैसे बचाया। पहली आवाज वैसे ही अटकी जैसे महीनों पहले पंजीकरण की मेज़ पर अटकी थी। इस बार कमरा प्रतीक्षा करता रहा।

अरुण ने साँस ली। “हाथी...” से शुरू किया और अपने समय में बात पूरी की। हाथ से पंक्ति की बाधा दिखाई, फिर पीछे की शह में बदलाव। सुमि विश्लेषण बोर्ड पास लाई ताकि दर्शक खाने समझ सकें।

प्रतीक समूह के किनारे खड़ा था। लोग विराम गिनने की जगह प्रदर्शन देख रहे थे। यह उसे दिखाई दे रहा था।

बात खत्म हुई तो लीला ने कप चारों के बीच रखा। तस्वीर से पहले अरुण से उसे उठाकर हटाने को किसी ने नहीं कहा। एक हैंडल इमरान ने पकड़ा, दूसरा अरुण ने।

10. वह कागज़ जो रखता है

भवन खाली होने पर प्रतीक इस्तेमाल न हुआ सहायक पास लेकर आया। शायद उसे फेंकने के लिए लाया था, मगर शुरुआत नहीं तय कर पा रहा था।

अरुण ने पुराने कप्तान पास के दोनों हिस्से निकाले। पूरे सीज़न साथ रखे थे। प्रतीक ने फटी तस्वीर से नई टीम के परिणाम तक देखा।

“घड़ी वाली बात में गलत था,” उसने कहा।

“मेरे बारे में गलत थे।”

वाक्य में अरुण की इच्छा से थोड़ा अधिक समय लगा। उसने पूरा कहा।

प्रतीक ने पारिवारिक क्लब लौटने को पूछा। अरुण ने बताया कि अगला अभ्यास कहाँ होगा। सुमि, इमरान और लीला उधार वाला बोर्ड लेकर दरवाज़े पर इंतज़ार कर रहे थे।

घर में उसने फटा पास लिफाफे में रखा। चैंपियनशिप का पन्ना बाहर रखा। उस कार्यमेज़ के ऊपर लगाया जहाँ धातु पर नाम उकेरता था।

अगली सुबह ट्रॉफी की प्लेट बनाने वाले ने पूछा कि धातु पर उकेरने से पहले चार नाम कौन जाँचेगा। प्रतीक आदत से जवाब देने लगा। अरुण ने एक उँगली उठाई।

उसने नाम खुद पढ़े, हर नाम को जरूरी समय दिया। कारीगर रुका रहा। अंतिम वर्तनी जाँचे जाने तक प्रतीक कार्यमेज़ के पास खड़ा था।

बनी प्लेट पर अरुण का नाम साथियों के साथ था। उसने साफ अक्षरों पर अँगूठा फेरा। लिफाफे का फटा पास अब तय नहीं कर सकता था कि वह मेज़ की किस तरफ होगा।

आगे जानना चाहते हैं? ऐप की जानकारी और साझा ऑफ़र की शर्तें चैनल पर देखें।
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप

🎁 ऐप अपडेट • ऑफ़र • कम्युनिटी

✅ ऐप लिंक और मौजूदा ऑफ़र की जानकारी देखें।

🔐 हमारे चैनल के एक्सक्लूसिव ऑफ़र।

📲 नए ऐप के मुफ़्त रिवॉर्ड अपडेट—सब एक जगह!

🔥 अभी जुड़ें, ऑफ़र देखें और उपलब्ध मुफ़्त रिवॉर्ड क्लेम करें!

टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप
टीजी चैनलWhatsApp चैनलWhatsApp ग्रुप