1. PX777: भावना ने पदक गिने
भावना ने विरोधी खिलाड़ियों से पहले पदक गिने। विजेता पक्ष के लिए तीन, उपविजेताओं के लिए तीन। स्थापित मोहल्ला क्लब की कप्तान के रूप में उसने आयोजक को बता दिया था कि अपनी टीम की पुरस्कार तस्वीर किस मेज के पास करवाएगी।
फिर फरजाना, निर्मला और प्रीति आईं। एसोसिएशन की कमीजें स्थानीय दर्जी ने सिली थीं। प्रीति का नाम जेब के ऊपर थोड़ा तिरछा था। भावना ने तीनों को देखकर पूछा कि त्योहार समिति को गलती से भेज दिया गया है क्या।
चवालीस वर्षीय फरजाना ने टीम प्रविष्टि दी। बावन वर्षीय निर्मला ने तीन वैध स्ट्राइकर अपने डिब्बों में पंजीकरण मेज पर रखे। सत्ताईस वर्षीय प्रीति ने पूछा कि बोर्ड आवंटन कहाँ देखना है।
भावना बोली, “बाद में नाश्ता बाँटने में मदद कर देना। देखने के लिए अनुभवी खिलाड़ी बहुत होंगे।” तीनों स्थानीय महिला टीम प्रतियोगिता के फाइनल में क्वालिफाई हुई थीं। परिणामों पर उनके नाम थे। फिर भी टिप्पणी प्रवेश हॉल में फैली। पहले दौर न देखने वाले लोग भी हँसे।
फरजाना ने टीम सूची पर उँगली रखी। “मेजें घोषित करते समय हमारे नाम इस्तेमाल कीजिएगा।” भावना ऐसे मुस्कराई जैसे छोटा उपकार कर रही हो। उसने उस हॉल में कई समारोह सँभाले थे। दोपहर के अंत तक कठिन काम माइक्रोफोन में तीन नाम बोलना होने वाला था, बिना समिति शब्द जोड़े।
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2. PX777 कथा: तीन मेजें, तीन खिलाड़ी
टीम प्रतियोगिता में तीन स्वतंत्र सिंगल्स मेजें थीं। हर मेज पर तीन में दो बोर्ड जीतने का मैच होता। प्रकाशित कैरम प्रक्रिया लागू थी। दो मेजों के मैच जीतने वाली टीम मुकाबला जीतती। कप्तान पहले तैयारी करवा सकती थी, खेलते समय शॉट नहीं बता सकती थी।
पहली मेज पर फरजाना और भावना थीं। निर्मला के सामने शोभा थी, जो सही निशाने लगाती और आसान वापसी कम देती थी। प्रीति का मुकाबला रितिका से था। पहले अभ्यास कार्यक्रम में उसकी आक्रामक गति ने प्रीति को अस्थिर किया था।
तीन महीने पहले एसोसिएशन टीम पहली मैत्री प्रतियोगिता की हर मेज हार गई थी। उन्हें लगा था कि वर्षों का अनौपचारिक खेल सीधे प्रतियोगिता में काम आएगा। दर्शकों के सामने वैध सेटअप, स्ट्राइकर नियंत्रण और क्वीन संबंधी निर्णय बिगड़ गए।
भावना वहाँ मौजूद थी। बाद में उसने बोर्ड त्योहार की शामों के लिए रखने और लीग की जगह प्रशिक्षित खिलाड़ियों को देने का सुझाव दिया। उसने यह तब कहा जब एसोसिएशन सदस्य पास में कुर्सियाँ समेट रहे थे।
फरजाना तीन हार वाले पत्र घर लाई। अगली बैठक में शिकायत शुरू होने से पहले मेज पर रख दिए। “नौ तरह से हारी हैं। पहले एक एक तरीका लेते हैं।” निर्मला ने पतले कट चुने। प्रीति ने सफल पॉकेट के बाद नियंत्रण। फरजाना ने स्ट्राइकर फाउल के बाद अपनी सोच। तीनों ने चुनाव अपने नाम के पास लिखा।
3. निर्मला की पतली रेखा
निर्मला कठिन कट से बचती थी। आसान केंद्रीय स्थिति साफ कर देती, फिर आखिरी मुश्किल गोटी को कई बार बिना स्पष्ट उद्देश्य हल्का खिसकाती। मजबूत विरोधी उन्हीं बारियों में अपना रंग समाप्त कर देते।
अभ्यास एक गोटी और वैध बेसलाइन स्थान से शुरू हुआ। हर कोशिश में संपर्क कोण थोड़ा बदलता। वह गोटी और बाद का स्ट्राइकर दोनों देखती। पॉकेट सफल हो लेकिन स्ट्राइकर दूसरे पॉकेट की तरफ जाए तो साफ सफलता दर्ज नहीं होती।
सुधार बराबर गति से नहीं आया। एक शाम दस में सात उपयोगी कोशिशें हुईं। दो शाम बाद वही लाइन बार बार चूकी। गिनना बंद करने का मन हुआ। फरजाना ने अगला शॉट दोहराने से पहले बल का अंतर बताने को कहा।
निर्मला ने बहानों की सूची के बजाय सरल चित्र बनाए। दोनों तरफ से और सामुदायिक केंद्र के उपलब्ध बोर्डों पर अभ्यास किया। अलग गति का मतलब था कि परिचित स्ट्रोक पर भरोसा करने से पहले सतह देखनी होगी।
पहले क्वालिफाइंग मुकाबले में शुरुआती बोर्ड हारा, अगले दोनों जीते। आखिरी शॉट वही कट था जिससे बचती थी। हस्ताक्षर करते समय इतना ध्यान था कि प्रीति को स्ट्राइकर डिब्बा याद दिलाना पड़ा।
अगली सुबह एसोसिएशन सूचना बोर्ड पर उसका नाम था। भावना ने परिणाम को उत्साहजनक कहा। निर्मला ने सावधानी से चुना शब्द सुना और फिर भी अगला अभ्यास सत्र बुक किया। उसके चित्रों में अब केवल सफल कोण नहीं, चूक के बाद बची स्थिति भी बनने लगी थी।
4. प्रीति ने बारी खत्म होने देना सीखा
प्रीति की समस्या सफलता के बाद शुरू होती। एक पॉकेट के बाद अगला शॉट लेना अनिवार्य लगता, चाहे कोण खराब हो। जोर बढ़ता, उपयोगी गोटियाँ बिखरतीं और विरोधी को आसान रास्ते मिलते। कमरे को पहला शानदार शॉट याद रहता। अंक पत्र में उसके बाद की बात दर्ज होती।
उसने ऐसे क्रमों का अभ्यास किया जिनमें दूसरा निर्णय पहले से महत्वपूर्ण था। कभी सही प्रयास नियंत्रित स्थिति सुधार था। कभी हमला जारी रखा जा सकता था, लेकिन संपर्क के बाद स्ट्राइकर कहाँ जाएगा, यह देखना जरूरी था।
फरजाना और निर्मला बारी बारी विरोधी बनीं। आसान गलतियाँ देकर खराब स्थिति नहीं बचाती थीं। प्रीति ने विरोधी की अच्छी लगातार बारी देखना सीखा, बिना अपने अगले अवसर से पहले बदला लेने वाला शानदार शॉट तय किए।
क्वीन पर खास अनुशासन चाहिए था। वास्तविक कवर के बिना लेना बार बार अवसर बर्बाद करता। अब वह प्रयास तय करने से पहले अपनी रंग की उपलब्ध गोटियाँ देखती।
सेमीफाइनल में रितिका दर्शक क्षेत्र से देख रही थी। प्रीति कठिन शॉट चूकी, अगली बारी शांत लौटी और बाद का बोर्ड दो साधारण पॉकेट से समाप्त किया। रितिका ने चूक के बाद पुरानी जल्दबाजी की अपेक्षा की थी।
बाद में प्रीति ने शौचालय के शीशे में कमीज का टेढ़ा नाम देखा। कपड़ा जितना सीधा हो सकता था किया और अगली सुबह के अभ्यास बोर्ड लगाने लौट आई। अगले सत्र में उसी मिस से पहले का निर्णय दोहराया गया।
5. वापस आने वाली गोटी
फरजाना की कमजोरी कभी पूरा टीम मुकाबला छीन चुकी थी। स्ट्राइकर फाउल पर निर्णायक की प्रक्रिया से पहले पॉकेट की अपनी रंग की गोटी लौटाई गई। उसने उसे ऐसे देखा जैसे अपमान हो। कठिन शॉट से तुरंत मिटाना चाहा।
चूक हुई, स्थिति पर नियंत्रण गया और विरोधी ने समाप्त कर दिया। वापसी में उपलब्ध कोणों से अधिक उसे अन्याय वाला अनुभव याद था।
प्रशिक्षण में झटका सामान्य बनाया गया। चुनी अभ्यास स्थितियों में फाउल की स्थिति बनाई जाती और लागू प्रक्रिया के अनुसार देय गोटी लौटती। लक्ष्य चुनने से पहले फरजाना को सभी बची गोटियाँ फिर देखनी होतीं।
लौटी गोटी अपने आप पहला लक्ष्य नहीं होती थी। कभी दूसरे पॉकेट से बेहतर रास्ता खुलता। कभी अपनी एक गोटी से दूसरी को छुआकर संयोजन शॉट लिया जा सकता था। दूसरी पॉकेट होती और पहली बाद की समाप्ति के लिए बचती।
फरजाना ने संपर्क ध्यान से दोहराए। उपयोगी संयोजन में बल का अनुमान और स्ट्राइकर का सुरक्षित रास्ता जरूरी था। टक्कर के बाद संभावित स्थिति नहीं बता सकती तो दूसरा प्रयास चुनती।
आखिरी सप्ताह तक निर्मला लौटाई गोटी मुश्किल मगर वैध जगह रख सकती थी और फरजाना का चेहरा नहीं बदलता था। प्रीति अभ्यास की शर्तों के अनुसार समय देखती। “फिर?” उसने पूछा। फरजाना ने पूरा बोर्ड देखा। “अलग जगह से।” निर्मला ने गोटी बदली। इस बार भी फरजाना ने उसे तुरंत पहला निशाना नहीं बनाया।
6. भावना को अपेक्षित परिणाम मिला
फाइनल में शोभा ने निर्मला को दो बोर्ड से शून्य हराया। स्कोर स्पष्ट था, हालांकि दोनों बोर्डों में सही समाप्ति करनी पड़ी। बेहतर कटों से निर्मला खेल में बनी रही। शोभा ने बची स्थितियाँ अधिक अच्छी सँभालीं।
निर्मला ने पत्र पर हस्ताक्षर किए और सिर उठाकर बाहर आई। फरजाना या प्रीति को सलाह नहीं दे सकती थी। दर्शक सीमा के पीछे खड़ी होकर उनकी स्वतंत्र बाजियाँ देखने लगी।
पहला टीम अंक देखकर भावना सहज हुई। फरजाना के खिलाफ उसका शुरुआती बोर्ड भी अच्छा गया था। क्वीन लेकर सही कवर किया और फरजाना की आखिरी दो सफेद तक पहुँचने से पहले समाप्त कर दिया।
तीन में दो मेजें स्थापित क्लब के पक्ष में लग रही थीं। भावना फिर पुरस्कार कार्यक्रम सोचने लगी। तभी प्रीति ने रितिका के खिलाफ दूसरा बोर्ड जीतकर अपनी मेज बराबर कर दी। पहली मेज पर फरजाना को नियंत्रित कट मिला। अतिरिक्त बारी लेकर बची स्थिति समाप्त की और अपना मैच भी बराबर किया।
एक मेज खत्म थी। दो निर्णायक बोर्ड बाकी थे। निर्धारित विराम में भावना ने निर्मला की तरफ देखा। उम्मीद थी कि हारी खिलाड़ी शर्मिंदा लगेगी। निर्मला स्कोरर के पास खड़ी बिना संकेत दिए बाकी बोर्ड देख रही थी।
एसोसिएशन का एक मैच गया था। दोनों चल रहे मैचों में उसकी खिलाड़ी अभी मुकाबले में थीं। नए बोर्ड लगने लगे। भावना अपनी कुर्सी पर लौटी और स्ट्राइकर उठाकर उँगलियों के बीच घुमाने लगी।
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7. प्रीति ने टीम स्कोर बदला
निर्णायक बोर्ड में रितिका ने जल्दी हमला करके व्यावहारिक बढ़त बनाई। प्रीति ने अच्छा पॉकेट लिया, फिर वह ज्यादा ताकत वाला अगला शॉट नहीं चुना जो पहले बिगाड़ता था। नियंत्रित प्रयास से व्यवस्था सुधरी, मगर कोई गोटी नहीं गिरी। बारी समाप्त हुई।
रितिका अब भी चुनाव का दंड दे सकती थी। एक गोटी निकाली, अगली पतली लाइन चूकी। प्रीति साफ रास्ते के साथ वापस आई और उसका इस्तेमाल किया।
अपनी आखिरी गोटी से बोर्ड बंद करने से पहले क्वीन सुरक्षित करनी थी। उसने भरोसेमंद कवर अवसर का इंतजार किया, क्वीन निकाली और सही कवर किया। बची सफेद के लिए जोरदार रिबाउंड के बजाय सीधा कट था। उसने कट लगाया। रितिका के पत्र में दो बोर्ड से एक की हार दर्ज हुई।
टीम मुकाबला एक एक मेज पर था। फरजाना ने अपनी मेज पर आधिकारिक घोषणा सुनी। वह प्रीति से क्या करना है पूछने के लिए नहीं मुड़ी। भावना के खिलाफ उसका निर्णायक बोर्ड स्वयं कठिन था।
फरजाना पिछली बारी में क्वीन लेकर सही कवर कर चुकी थी। उसकी दो सफेद बची थीं। भावना की तीन काली थीं। दोनों के पास वास्तविक अवसर थे।
फरजाना ने बगल के रास्ते की सफेद चुनी और मारा। गोटी बाहर रही। स्ट्राइकर आगे बढ़ता हुआ पॉकेट में गिर गया। निर्णायक फाउल की प्रक्रिया लागू कर रहा था। भावना स्थिर बैठी रही। पहले निकाली सफेद में से एक अब वापस आती।
8. फिर तीन सफेद
देय गोटी लौटाकर निर्णायक की प्रक्रिया के अनुसार रखी गई। फरजाना को अब दो के बजाय तीन सफेद समाप्त करनी थीं। पहले की अलग बारी में नियम से कवर की क्वीन सुरक्षित रही। यह उसके बाद का अलग फाउल था।
भावना ने लौटी गोटी देखकर पुराना मैत्री मैच याद किया। फरजाना ऐसे ही दंड को तुरंत मिटाने दौड़ी थी। उसे वही गुस्सा और यह साबित करने की जिद अपेक्षित थी कि फाउल से कुछ नहीं बदला।
फरजाना ने पहले दूसरी जगह देखी। एक मूल सफेद का सीधा पॉकेट था। उसे हटाने के बाद लौटी गोटी और दूसरी मूल सफेद से संयोजन संभव दिखता था। उसने संभावित स्थिति जाँची और भावना की बारी पूरी होने दी।
भावना ने पहली काली साफ निकाली। अगली भी गिर गई। उसकी आखिरी काली बची। पतला कट मेज और पूरा टीम फाइनल समाप्त कर सकता था। उसने ध्यान से निशाना लिया। गोटी पॉकेट की तरफ गई, बाहर के किनारे से लगी और बोर्ड पर रह गई।
बारी खत्म होने के बाद भी भावना की उँगलियाँ एक पल बेसलाइन के ऊपर रहीं। फरजाना की जीत के बीच अब भी तीन सफेद थीं। उनमें लौटाई गोटी केंद्र के पास दिखाई दे रही थी।
फरजाना ने आसान मूल सफेद के लिए स्ट्राइकर रखा। लौटे दंड पर पहला हमला नहीं किया। पीछे निर्मला ने अपना हस्ताक्षरित हार पत्र तह करके बैग में रखा। प्रीति पास चुप खड़ी रही। दोनों ने शॉट खिलाड़ी के लिए छोड़ा।
9. चुना हुआ क्रम
फरजाना ने पहली सफेद नियंत्रित स्ट्रोक से निकाली। स्ट्राइकर बोर्ड पर सुरक्षित रहा। गोटी हटने से वही रास्ता खुला जिसे भावना के खेलते समय उसने देखा था।
दो सफेद बचीं। एक लौटी देय गोटी थी। दूसरी मूल सफेद पॉकेट के करीब थी। लौटी गोटी पर कठिन सीधा पॉकेट लिया जा सकता था। फरजाना ने इसके बजाय मापे हुए संयोजन में उसे पहला संपर्क बनाया।
स्ट्राइकर लौटी सफेद से लगा। उसने दूसरी सफेद को छुआ और उपलब्ध पॉकेट की ओर भेजा। दूसरी गिर गई। पहली बोर्ड पर सँभालने योग्य स्थिति में रही। स्ट्राइकर किसी पॉकेट में नहीं गया।
एक सफेद बची। वही जो फाउल पर लौटी थी। फरजाना ने नया कोण देखा। वह अब वह कठिन निशाना नहीं था जिस पर उसने गुस्से में हमला करने से इंकार किया था। उसने वैध स्ट्राइकर स्थान ठीक किया और नियंत्रित कट चुना। भावना संपर्क बिंदु को देखती रही।
सफेद गिर गई। स्ट्राइकर बोर्ड पर रुका। निर्णायक ने अंतिम बोर्ड और मेज मैच की पुष्टि की। फरजाना दो बोर्ड से एक जीती थी। प्रीति की पहले की जीत जोड़कर एसोसिएशन टीम ने फाइनल दो मेज से एक जीता।
भावना ने तीसरी मेज देखी, फिर दूसरी। अंतिम पत्र में निर्मला की हार, प्रीति की जीत और फरजाना की जीत थीं। जिसे उसने समिति सदस्य कहा था, वह निर्णायक परिणाम पर स्थिर हाथ से हस्ताक्षर कर रही थी।
10. माइक्रोफोन में तीन नाम
फाइनल से पहले भावना ने पदक वितरण में मदद की जिम्मेदारी ली थी। विश्वास था कि अपनी विजेता साथियों का परिचय देगी। अब आयोजक ने उसके हाथ में पूरा परिणाम और माइक्रोफोन दिया।
उसने एसोसिएशन का नाम बोला। फिर खिलाड़ियों को पढ़ना पड़ा। फरजाना, निर्मला और प्रीति। प्रीति आगे आई तो उसकी कमीज की टेढ़ी सिलाई दिखाई दे रही थी। नाम जानने के लिए किसी को उसे पढ़ने की जरूरत नहीं थी।
निर्मला ने अपना पदक लिया। उसने अपनी मेज हारने की बात छिपाने की कोशिश नहीं की। शोभा ने बेहतर कटों की तारीफ की और अगला अभ्यास मैच पूछा। निर्मला ने डायरी खोलकर तारीख दी।
प्रीति ने टीम ट्रॉफी उस मेज पर रखी जो भावना की तस्वीर के लिए तय थी। फरजाना ने आयोजक से पास में तीनों पूरे परिणाम रखने को कहा। महिलाएँ साथ खड़ी हुईं। विरोधी दूसरी तरफ आए।
अगली एसोसिएशन बैठक में खेल कार्यक्रम त्योहार की जिम्मेदारियों से पहले आया। तीन अभ्यास समय बुक हुए, अलग कमजोरियों पर काम के लिए। फरजाना के पन्ने पर स्ट्राइकर फाउल था। प्रीति के पन्ने पर वापसी से पहले की धैर्य वाली बारी। निर्मला ने वे दोनों बोर्ड लिखे जो शोभा जीती थी।
भावना ने वापसी टीम मुकाबले का औपचारिक निमंत्रण भेजा। इस बार संदेश में तीन खिलाड़ियों के नाम थे। फरजाना ने पढ़कर साथियों से तारीख पूछी और स्वीकार किया। पदक दीवार पर टँगे थे। नीचे बोर्ड तैयार थे।
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