1. Rumble Rummy — वह भाई जिसके पास कुछ नहीं था
सगाई के खाने पर बीरेन चिल्लाया नहीं। मुस्कराकर फोटोग्राफर से इंतज़ार करने को कहा। फिर रीता के परिवार की ओर मुड़ा। “मेरे भाई ने आपको घर का वादा किया है। पहले इसे बताना चाहिए कि जिस पलंग पर सोता है, वह भी इसी परिवार का है।”
निखिल मिठाई के बंद डिब्बे के पास खड़ा था। उनतीस साल की उम्र तक वह चार वर्षों से हर महीने अपनी तनख्वाह का हिस्सा बड़े भाई को देता आया था। माँ की बंद हुई मसालों की दुकान के कर्ज चुकाने में मदद करता था। उसने कभी उन पैसों की घोषणा दावत में करने को नहीं कहा। उम्मीद केवल इतनी थी कि उनका अस्तित्व मिटाया न जाए।
उसने बोलना चाहा तो बीरेन ने घरेलू हिसाब की कॉपी मेज़ पर रख दी। “सब इसमें है।” पन्नों में सप्लायर और उधार देने वालों को भुगतान था। खाते में पहले किसकी तनख्वाह आई, वह नहीं था। रीता ने निखिल को देखा, फिर अपने पिता को। किसी ने निखिल का वाक्य पूरा नहीं सुनना चाहा। अगली दोपहर तक सगाई खत्म हो गई।
निखिल इंदौर के घर से दो कमीजें, स्टील की प्लेट और रमी की कॉपी लेकर निकल गया। माँ ने बैग में कंबल रखना चाहा। उसे एक और ऐसी चीज़ नहीं चाहिए थी जिसे बाद में उधार कहा जा सके।
तीन महीने बाद शहर के फाइनल में वह बीरेन के सामने बैठा था। बीच में दूसरा हिसाब था। उसमें हर योगदान सही नाम के सामने लिखना जरूरी था।
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2. पिता की मेज़ पर सीखे नियम
दोनों भाइयों ने पिता की मोड़ने वाली मेज़ पर रमी सीखी थी। बीरेन आठ साल बड़ा था। हर नियम ऐसे समझाता जैसे उसी ने लिखा हो। निखिल ने बचपन में वे बातें मानीं। बड़े होकर बिल, तनख्वाह और परिवार की क्षमता पर वही लहजा मानता रहा।
अब साइकिल मरम्मत की दुकान के ऊपर किराए के कमरे में उसने पुराना अभ्यास हाथ बनाया। पान के चार, पाँच और छह साथ रखे। उस अभ्यास में पाँच वाइल्ड रैंक था। आदत से उसने पाँच अलग कर दिया। बीरेन हमेशा कहता था कि वाइल्ड पत्ता कभी प्योर सीक्वेंस का हिस्सा नहीं हो सकता।
वाचनालय में प्रतियोगिता स्वयंसेवक शालिनी ने उसे ऐसा करते देखा। उसने अपने भरोसे पर नियम मानने को नहीं कहा। आयोजन का छपा नियम पत्र लाकर दिया। तय वाइल्ड रैंक का पत्ता लगातार एक ही सूट की सीक्वेंस में अपने प्राकृतिक स्थान पर इस्तेमाल हो सकता था। गायब पत्ते की जगह लगाया छपा जोकर ऐसी सीक्वेंस को प्योर नहीं बनाता।
निखिल ने अनुच्छेद दो बार पढ़ा। पान के चार और छह के बीच पान का पाँच वास्तविक प्राकृतिक पत्ता था। वह किसी और पत्ते की नकल नहीं कर रहा था। उसे सुधार से कहीं अधिक गुस्सा आया। मोड़ने वाली मेज़ का एक छोटा नियम वर्षों बिना जाँच के चलता रहा था।
शालिनी ने पत्र उसके पास छोड़ दिया। उसने उदाहरण कॉपी किया और बगल में नियम का स्रोत लिखा। इस बार उसे केवल बोलने वाले की उम्र याद रखने की जरूरत नहीं थी।
3. तनख्वाह खाली जगह नहीं है
अलग रहने का पहला महीना तंग और असुविधाजनक था। पंखा खड़खड़ाता था। निखिल बाल्टी में कपड़े धोता और खिड़की के पास खड़े होकर खाता। अकेली कुर्सी पर अभ्यास का उधार बोर्ड रखा रहता था। बीरेन ने फोन करके पूछा कि रोज की तरह रकम क्यों नहीं आई। निखिल ने कहा कि दुकान की बची जिम्मेदारी में अपना तय हिस्सा देगा, लेकिन अलग मदों का हिसाब और पहले से तय रकम चाहिए। उसे अपनी जिंदगी की योजना भी बनानी है।
बीरेन ने इसे स्वार्थ कहा। निखिल ने फोन खत्म किया, इससे पहले कि बात फिर ऐसी परीक्षा बन जाए जिसमें वह केवल असफल हो सकता था। अगला अभ्यास खराब गया। उसने चार बड़े पत्ते इसलिए रखे क्योंकि साथ में ताकतवर दिखते थे। वे पूरा वैध सेट नहीं थे। शालिनी ने कहा कि जो हाथ में है और जो आने की उम्मीद है, उन्हें अलग करो। निखिल बिना खुशी के हँसा और छाँटना शुरू किया।
तेजी से पहले हाथ की जाँच हुई। तेरह वास्तविक पत्ते गिनो। प्राकृतिक प्योर सीक्वेंस पहचानो। दूसरी सीक्वेंस देखो। बाकी हर समूह वैध हो। कोई पत्ता दो बार न गिना जाए। फिर अलग बनावटों की तुलना करो।
गलतियाँ हुईं। एक बार कागज़ पर उसी ईंट को सीक्वेंस और सेट दोनों में लगाया। दूसरे दिन एक सूट की दो प्रतियाँ सेट में सही मान लीं। सुधार कॉपी में रहे। घरेलू खाते की तरह यह किताब उसका हिस्सा गायब करने से सम्मानित नहीं बनती थी।
4. मन में रखे बदले की कीमत
स्थानीय क्वालिफायर में निखिल को पता चला कि बीरेन की याद भी हाथ बिगाड़ सकती है। सामने बैठे खिलाड़ी ने बड़े पत्ते को उसी तेज ढंग से छोड़ा जिस तरह उसका भाई छोड़ता था। निखिल ने उसे सजा देने का फैसला किया। अनुमान से उपयोगी समझा पत्ता रोक लिया और अपनी बनती सीक्वेंस तोड़ दी। प्रतिद्वंद्वी ने बिल्कुल दूसरे रास्ते से घोषणा की। निखिल ने अपनी गढ़ी कहानी से बचाव की भारी कीमत दी।
बाद में उसने शालिनी से कहा कि अभ्यास के नमूना हाथ किसने खेले थे, पहले न बताए। नाम हटने पर बनावट साफ दिखती थी। वह स्वीकार कर पाता कि बीरेन से जुड़ी समझी जाने वाली चाल कभी सही भी होती है। उसे पसंद आने वाली सावधानी कभी अच्छे हाथ को बर्बाद करती है।
उन्होंने अकेली घोषणाओं की जगह पूरे अंक वाले मुकाबले खेले। एक सुंदर जीत तीन लापरवाह हार नहीं मिटाती। निखिल ने गुस्से में भी अपना नुकसान लिखना सीखा। अगला हाथ उसकी अपनी स्थिति पर देखना सीखा।
एक दोपहर माँ वाचनालय आईं। फिर वही कंबल लाई थीं। इस बार बोलीं, “यह मेरा उपहार है। इसके साथ कोई हिसाब नहीं है।” उसने ले लिया। वह अंतिम दो अभ्यास डील तक बैठीं। उन्होंने तुरंत समझौता करने की सलाह नहीं दी। जाते समय प्रकाशित स्कोर नियम देखने को कहा। निखिल ने उन्हें कॉपी के पास रखा और ऐसे समझाया जैसे किसी नए खिलाड़ी को समझाता। माँ ने बीच में टोका नहीं। पहली बार उसकी पूरी बात खत्म होने दी।
5. सात डील, बड़े भाई का विशेष हक नहीं
दोनों भाई अलग अलग क्वालिफाई करके शहर की आमने सामने वाली चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुँचे। सात डील खेलनी थीं। सबसे कम कुल पेनल्टी वाला जीतता। अधिक व्यक्तिगत डील जीतना कुल अंकों की जगह नहीं ले सकता था।
बीरेन वही कमीज पहनकर आया जो सगाई वाले खाने पर पहनी थी। निखिल ने देखा, देखने पर खुद से चिढ़ा और अपनी कुर्सी ठीक की। माँ दर्शक सीमा के पीछे बैठी थीं। रीता नहीं आई थी।
पहली डील बीरेन ने जीती। निखिल ने उपयोगी सीक्वेंस बचाई थी, मगर बाकी हाथ बिखरा रहा। अट्ठाईस अंक लगे। अधिकारी ने लिखा तो बीरेन ने माँ की ओर देखा। निखिल ने अपनी हस्ताक्षरित पंक्ति देखी। दूसरी डील में प्योर सीक्वेंस और दूसरी बनाने का उपयोगी रास्ता मिला। उसने धैर्य से पत्ते लिए, अलग पड़ी बेगम छोड़ी और हाथ पूरा किया। बीरेन को पच्चीस अंक लगे। कुल अट्ठाईस और पच्चीस था। केवल तीन का अंतर।
ब्रेक में बीरेन ने पहले की एक बारी का जिक्र किया। “अब समझे कि मैं वह पत्ता रखने को क्यों कहता था?”
निखिल जानता था कि सलाह ठीक थी। उसने यही कहा। बीरेन बहस से जितना अस्थिर होता, उससे अधिक इस जवाब से हुआ। निखिल उपयोगी बात मान सकता था, बिना पूरी बातचीत का नियंत्रण भाई को दिए। उसने पानी पिया, अपनी कॉपी बंद की और अगली डील का इंतज़ार किया। आज कोई फैसला केवल घर में बड़ा होने से सही नहीं हो जाता था।
6. बार बार बदलती बढ़त
तीसरी डील बीरेन ने जीती। निखिल के बत्तीस अंक जुड़े और कुल साठ हुआ। तुरंत पीछा करने की बेचैनी आई। भाई पच्चीस पर था। चौथी डील जल्दी जीतना ही सही जवाब लग रहा था। मगर उस हाथ को धीमा फैसला चाहिए था। लगभग बने बड़े सेट को बचाना था या उसी जोकर से दूसरी सीक्वेंस सुरक्षित करनी थी।
निखिल ने पहले सीक्वेंस चुनी। बाद में प्राकृतिक पत्ते से सेट पूरा हुआ। इस चुनाव ने विकसित होते हाथ को उपयोगी वैध दिशा में रखा था। सिर्फ देखने में मजबूत नहीं बनाया था। उसने घोषणा की। बीरेन के चौंतीस जुड़कर उनसठ हुए। अब केवल एक अंक का अंतर था।
पाँचवीं डील निखिल के लिए खराब गई। दूसरी संभावित राह बहुत देर पकड़े रहा। उसकी उपयोगिता कम होने के बाद भी बड़े पत्ते साथ रखे। बीरेन पूरा कर गया। निखिल की पेनल्टी बयालीस थी। अपने चुने हुए खुले नुकसान के लिए उसने पत्तों को दोष नहीं दिया।
छठी डील में वैसी ही इच्छा आई, मगर इस बार वह रुका। अतिरिक्त बड़ा पत्ता पहले छोड़ा और छोटे पत्तों के दो जुड़े समूह रखे। हाथ पूरा किया। बीरेन को बत्तीस अंक लगे। सातवीं से पहले निखिल एक सौ दो पर था। बीरेन इक्यानवे पर। बड़ा भाई ग्यारह अंक आगे था।
निखिल को अंतिम हाथ से क्रम बदलना था। पिछली जीतों ने मुकाबला संभव रखा था। वे अभी उसका फाइनल नहीं जीती थीं। उसने स्कोर पर नजर दौड़ाई और नई डील के लिए खाली हाथ आगे रख दिए।
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7. पान का पाँच
अंतिम डील में पाँच वाइल्ड रैंक था। निखिल के शुरुआती हाथ में पान के 4–5–6 थे। उसने तीनों साथ रहने दिए। पाँच अपने पड़ोसियों के बीच प्राकृतिक काम कर रहा था। किसी गायब पत्ते की जगह नहीं ले रहा था।
उसके पास हुकुम के 9–10–J, चिड़ी और ईंट के दो सात, चार अलग सूट के बादशाह और पान की बेगम भी थी। तीन जमा तीन जमा दो जमा चार जमा एक, कुल तेरह। बादशाहों का चार पत्तों का सेट पूरा था। हुकुम की दूसरी प्राकृतिक सीक्वेंस भी थी। केवल सात की जोड़ी और अलग बेगम पूरे समूह के बाहर थे। पान या हुकुम का सात उस सेट को पूरा कर सकता था। अन्य पत्तों से अलग बदलाव संभव थे, लेकिन उसने संभावनाओं को वादा नहीं माना।
बीरेन ने खुला पत्ता लिया और तेजी से दूसरा छोड़ा। निखिल ने बंद गड्डी से असंबंधित पत्ता उठाया। जाँचा कि उससे कुछ बदलता है या नहीं, फिर निकाल दिया। दर्शकों को केवल पत्तों की पीठ दिख रही थी। पीछे कोई नहीं जानता था कि पुराने विवाद वाला नियम उसके सबसे बाएँ समूह में बैठा है।
अगले चक्कर में निखिल ने एक पल बादशाहों का सेट तोड़कर बड़े पत्तों का बोझ घटाने पर सोचा। फिर समूह जाँचे। पूरा वैध सेट वास्तविक काम कर रहा था। विकल्प के बिना तोड़ना नई समस्या पैदा करता। उसने उसे रखा और अपनी अगली वैध बारी का इंतज़ार किया। हाथ का वजन देखकर उसके काम को नकारना ठीक नहीं था।
8. जिसे अनुमति नहीं चाहिए थी
बीरेन ने बंद गड्डी से पत्ता लिया और सामान्य से देर तक पकड़े रहा। निखिल को सात पकड़ती उँगलियों में अपनी धड़कन महसूस हुई। भाई पूरा होने के पास हो सकता था। वह केवल दो डिस्कार्ड में फैसला भी कर सकता था। किसी संभावना से बंद पत्ते दिखाई नहीं देने लगते।
पान की बेगम अभी अकेली थी। उपयोगी नया पत्ता मिलने पर वह उसे छोड़कर बनावट सुधारेगा। केवल निर्णायक दिखने के लिए अनावश्यक फेरबदल नहीं करेगा। बारी लौटी तो उसने पान का सात उठाया। चौदह गिने। बेगम अलग की। बाकी तेरह को बिना किसी पत्ते को दो जगह रखे जाँचा। पान चार, पाँच, छह। हुकुम नौ, दस, गुलाम। चिड़ी, ईंट और पान के सात। चारों सूट के बादशाह।
उसने बेगम छोड़ी और घोषणा की। अधिकारी की जाँच पूरी होने से पहले बीरेन झुक गया। “प्योर सीक्वेंस नहीं है। पाँच वाइल्ड है।”
निखिल पर पुराना दबाव लौटा। जल्दी, उलझकर, माफी माँगते हुए समझाने की इच्छा हुई। उसने हाथ स्थिर रखे और अधिकारी से प्रकाशित नियम देखने को कहा। अधिकारी ने पान वाले समूह पर इशारा किया। हर पत्ता उसी सूट में अपने प्राकृतिक स्थान पर था। पान का पाँच यहाँ वास्तविक पाँच था। समूह प्योर था। हुकुम का क्रम भी प्योर था। सेटों में अलग सूट थे।
घोषणा सही थी। बीरेन की आपत्ति ने एक भी पत्ता नहीं बदला था। निखिल ने कार्डों को दोबारा छुआ नहीं। उन्हें अपनी तरफ से अतिरिक्त सफाई की जरूरत नहीं थी।
9. हिसाब में आखिर क्या दिखा
बीरेन के अधूरे बचे पत्तों के चौबीस अंक बने। उसके इक्यानवे से एक सौ पंद्रह हुए। निखिल एक सौ दो पर रहा। सात डील का फाइनल उसने तेरह अंक से जीता। माँ ने एक पल आँखें बंद कीं। निखिल नहीं जानता था कि उन्हें राहत थी, शर्म थी या थकान। उसने उनकी अभिव्यक्ति को अपने स्कोर का हिस्सा नहीं बनाया।
बीरेन ने खुद नियम पढ़ने को कहा। अधिकारी ने वही प्रकाशित पत्र दिया जो मुकाबले से पहले उपलब्ध था। उसने चुपचाप अनुच्छेद पढ़ा। फिर तेरह पत्ते देखे। कुछ भी उसके छोटे भाई की स्वीकृति पर निर्भर नहीं था।
परिणाम को दोनों हस्ताक्षर चाहिए थे। बीरेन ने नाम लिखा। निखिल ने बगल में हस्ताक्षर किए। उसे सगाई की मेज़ वाला घरेलू खाता याद आया। वह पूरा बताकर रखा गया था क्योंकि गायब हिस्सा ऐसे व्यक्ति का था जिसे चुप कराना आसान था।
सम्मान के समय उससे निर्णायक हाथ पूछा गया। उसने वाइल्ड रैंक के प्राकृतिक उपयोग और कारण के बिना बने समूह को न तोड़ने की बात समझाई। माइक्रोफोन से रीता को वापस आने की माँग नहीं की। माँ को बड़े बेटे के खिलाफ गवाह नहीं बनाया।
बीरेन ने बाहर बात करने को कहा। निखिल मान गया। बैग, अभ्यास कॉपी और अभी जीते परिणाम की प्रति साथ ली। अब वह बातचीत में खाली हाथ नहीं पहुँचता था। बाहर बैठने से पहले उसने माँ के लिए पानी मँगाया। जीत ने उसे उनकी थकान से अनजान नहीं किया था। फिर भाई से कहा कि बाकी हिसाब के लिए पूरा समय अलग रखेंगे।
10. पहला साझा पन्ना
अगले रविवार वे परिवार की खाने वाली मेज़ पर नहीं, वाचनालय में मिले। निखिल ट्रांसफर के रिकॉर्ड लाया। बीरेन सप्लायर की रसीदें और बचे भुगतान की सूची लाया। माँ दुकान के आखिरी महीनों के अपने अंक लाई थीं। पूरा हिसाब सगाई वाले खाते से अधिक खराब भी था और अधिक न्यायपूर्ण भी।
बीरेन ने कुछ ऐसे खर्च उठाए थे जिनका जिक्र नहीं किया था। निखिल की कई रकम परिवार शब्द में गायब हो गई थीं। माँ ने भी ऐसे फैसले किए थे जिन्हें कोई बेटा बदल नहीं सकता था। उन्होंने तथ्य अलग अलग लिखे। निखिल ने ऐसा निश्चित हिस्सा माना जिसे वह नियमित दे सके। अपना किराए का कमरा रखा। बीरेन ने दावत के व्यवहार के लिए माफी माँगी। साथ में यह नहीं जोड़ा कि इरादा अच्छा था। निखिल ने सुना, मगर भूलने का वादा नहीं किया।
रीता का कोई संदेश नहीं आया था। निखिल ने पुराना सगाई निमंत्रण मोड़कर पूरे किए हिसाब के नीचे रख दिया। निकलने से पहले बीरेन ने रमी की कॉपी देखी और पूछा कि अगले सीजन के टीम आयोजन पर विचार करेगा क्या।
“हम खिलाड़ी की तरह अभ्यास करेंगे,” निखिल बोला। “मेरा हाथ तुम मेरे लिए तय नहीं करोगे।”
बीरेन ने सिर हिलाया। दोनों के काम का समय देखकर तारीख रखी। पहली बैठक में निखिल ने डील की। खुले अभ्यास हाथ को बदलने के लिए बीरेन का हाथ बढ़ा। फिर रुका। पूछा कि निखिल कौन सी बनावट सोच रहा था। निखिल ने समझाया। फिर पत्ते आगे करके कहा कि बेहतर रास्ता दिख रहा हो तो दिखाए। नई कॉपी दो नामों से शुरू हुई। कोई नाम दूसरे की पंक्ति पर नहीं लिखा गया।
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