1. Rummy 91 कथा: फर्श पर पड़ा नाम
कैंची नवीन के उपनाम के आखिरी अक्षर पर अटक गई। क्लब प्रबंधक धरम ने कपड़ा तानकर फिर काटा।
“अब ठीक से क्लब की हो गई।”
NAVEEN लिखी पट्टी कुर्सी के पाए के पास गिर गई। चालीस साल का नवीन प्रस्तुति कक्ष में खड़ा था। आसपास दो स्वयंसेवक नई पोशाकें खोल रहे थे। उसने कहे अनुसार पुरानी टीम शर्ट लौटा दी थी। यह उम्मीद नहीं की थी कि नए खिलाड़ियों के सामने नाम काटा जाएगा।
उसी शर्ट में उसने शहर का रमी खिताब जीता था। माँ की आखिरी बीमारी में तीन चयन प्रतियोगिताएँ छूटीं। फिर उनकी मृत्यु के बाद बचे सामान्य बिल चुकाने के लिए एक साल शाम की शिफ्टें कीं।
धरम ने इसे घटती प्रतिबद्धता कहा।
“कभी महत्व था, इसलिए हमेशा जगह खाली नहीं रख सकते।”
एक स्वयंसेवक पट्टी उठाने झुका। नवीन पहले पहुँच गया। उँगलियाँ उधड़े अक्षरों पर बंद हो गईं।
बाहर कई मिनट स्कूटर पर बैठा रहा। उसे चालू नहीं किया। शर्ट जा चुकी थी, लेकिन उसका आकार कंधों पर रह गया था। अदृश्य कपड़ा, जो अब छोटा पड़ गया था।
रात को नाम की पट्टी दराज़ में रखी। पास पिछले खिताब की स्कोर शीट थी।
वह दोनों एक के ऊपर एक रखने वाला था।
फिर अलग किए। एक उस मुकाबले की थी जिसे उसने जीता था। दूसरी उस काम की थी जो किसी ने उसके साथ किया था।
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2. खराब वापसी
तैयार होने से पहले नवीन छोटी सप्ताहांत प्रतियोगिता में उतर गया। कैंची का तुरंत जवाब चाहिए था।
वह ऐसे खेला जैसे हर हाथ वही आखिरी हाथ हो जिसे लोग याद रखेंगे। खराब शुरुआत महँगे इनकार में बदली—ड्रॉप नहीं करेगा। अच्छी शुरुआत जल्दबाजी की घोषणा तक पहुँची, जिसे अंतिम जाँच में खुद रोक पाया। पत्ते फिर जमाए, लेकिन ध्यान बिखर चुका था।
वह आखिरी स्थानों के पास रहा।
पुराना विरोधी कार्तिक बाहर मिला। “तुम हर बार कमरे को जीतने की कोशिश कर रहे थे।”
नवीन लगभग पलटकर जवाब देने लगा। कार्तिक अभी उसे हराकर आया था। आलोचना में लिपटी दया देने की कोई जरूरत नहीं थी।
“मेरा खेल इतना खुला था?”
“पत्ते नहीं। मन की हालत थी।”
घर जाकर नवीन ने सबसे खराब डील दोबारा लगाई। पहली बारी में न प्योर सीक्वेंस था, न जुड़े समूह। बीस अंक खोना अपमान लगा, इसलिए जल्दी निकलने का मौका नहीं लिया। बाद में कहीं अधिक खोए।
उसने समीक्षा का फोल्डर बनाया। पहली फाइल में चतुर फिनिश नहीं था। वह पल था जहाँ रुकना चाहिए था।
फिर नाम की पट्टी दराज़ में वापस रखी।
वह उसे अभ्यास में नहीं ले जाएगा। समझ गया था कि तेरह पत्तों पर एक पुरानी बहस का वजन भी रख देने से क्या होता है। अगली कोशिश में उसे सिर्फ सामने वाला हाथ पढ़ना था।
3. सपने से पहले दो फैसले
तैयारी हाथों की पहचान से शुरू हुई। जीतती घोषणा सोचने से पहले वह पूछता कि क्या इस हाथ पर और चालें लगानी चाहिए, और कौन सा सुधार राय बदलने का कारण होगा।
खराब हाथ खेलने लायक बन सकता था। अच्छा हाथ जाल बन सकता था। फैसला जीवित रहना चाहिए था।
वह अनुभवी खिलाड़ी एस्थर के साथ अभ्यास करता। वह पहले नहीं बताती कि डील जीतने के लिए है या छोड़ने के लिए। कभी अटपटा हाथ एक उपयोगी ड्रॉ से लचीला हो जाता। कभी सुंदर समूह होते लेकिन जरूरी सीक्वेंस तक भरोसेमंद रास्ता नहीं होता।
अगला पत्ता देखने से पहले नवीन को अपनी वजह बतानी होती।
उन्होंने जोकर को समूहों के बीच बदलने का अभ्यास भी किया। नवीन उसे दिए पहले काम से चिपक जाता था। प्राकृतिक पत्ता उस समूह को पूरा कर देता तो जोकर कहीं और अधिक उपयोगी हो सकता था।
हर नई जमावट के बाद एस्थर सारे पत्ते गिनवाती। मन में दोनों समूह सही दिखने से एक पत्ता दोनों का हिस्सा नहीं बन जाता।
शुरू में अभ्यास धीमा था। फिर फैसले अधिक सही हुए, लेकिन यांत्रिक नहीं हुए।
वह गलत ड्रॉप, देर से ड्रॉप और जिन हाथों में लड़ना चाहिए था उनकी अलग सूची बनाता। तीसरी सूची देखकर आश्चर्य हुआ। उसे लगा था लापरवाही सुधारने का मतलब हर कठिन लड़ाई छोड़ना है।
दूसरे महीने के अंत तक वह छोटा नुकसान स्वीकार करके यह देखना बंद कर चुका था कि किसने देखा। अगली डील पर उसकी निगाह पहले पहुँचने लगी।
4. प्रतिद्वंद्वी अपनी जगह कमाता है
नवीन की पहली क्वालिफाइंग प्रतियोगिता कार्तिक जीता। न नाटकीय घोषणाएँ कीं, न विरोधी को परेशान करने वाली बातचीत।
वह खुले पत्तों की पसंद देखता, योजना जल्दी बदलता और दो उपयोगी जमावटें तब तक बचाता जब तक नई ड्रॉ एक को साफ बेहतर न कर दे।
अपने मुकाबले में नवीन ने उसे ऐसा सेट तोड़ते देखा जो पूरा लग रहा था। दो चाल बाद उसी सेट का पत्ता सही सीक्वेंस में काम आया। बाकी हाथ उसके आसपास नया बना था।
नवीन हारा, लेकिन इस बार स्कोर विरोधी की ताकत बता रहा था, उसके अपने दिमाग का शोर नहीं।
उसने बाद में डील देखने को कहा। ट्रेन से पहले कार्तिक बीस मिनट बैठ गया।
एक डिस्कार्ड पर मतभेद हुआ। किसी ने दूसरे को बेवकूफ नहीं बताया। नवीन ने घर जाकर कई संभावित अगली ड्रॉ के सामने दोनों योजनाएँ जाँचीं।
एक सप्ताह बाद वैसा फैसला प्रतियोगिता में आया। उसने अधिक लचीली जमावट चुनी और क्वालिफायर की अंतिम मेज़ तक पहुँचा।
प्रतियोगिता नहीं जीती। शहर की चैंपियनशिप के लिए पर्याप्त रैंकिंग अंक मिल गए।
धरम ने क्लब की जगह का प्रस्ताव भेजा। नया समझौता करना था और रिज़र्व का पद स्वीकार करना था।
नवीन ने संदेश दो बार पढ़ा। फिर व्यक्तिगत खिलाड़ी के रूप में पंजीकरण किया।
फॉर्म में नाम पूछा गया। उसने हर अक्षर खुद टाइप किया। जमा करने से पहले इस बार किसी और की अनुमति नहीं माँगी।
5. आगे होना भी दबाव है
चैंपियनशिप का फाइनल बारह डील का था। कम कुल पेनल्टी वाला जीतता। नवीन और कार्तिक उन रोशनियों के नीचे सामने बैठे जिनमें पत्ते असामान्य रूप से सफेद दिख रहे थे।
धरम दर्शकों में था। नई क्लब टीम के साथ आया था। उसका कोई खिलाड़ी फाइनल में नहीं पहुँचा था।
नवीन की शुरुआत बेहतर हुई। उसने शुरुआती ड्रॉप के नियम से खराब हाथ छोड़ा। फिर मजबूत सीक्वेंस और लचीले बाकी समूह बनाकर कई खेले गए हाथ जीते।
छह डील के बाद बोर्ड पर नवीन 34 और कार्तिक 62 था।
अट्ठाईस अंक की बढ़त।
उस दिन पहली बार नवीन सचमुच डरा।
पीछे रहते काम साफ था। अब कप, तस्वीरें और उसे उठाते देखते धरम की कल्पना आ रही थी। अगला फैसला जिस जगह होना था, वहाँ भविष्य भीड़ करने लगा।
कार्तिक ने गति का बदलाव देखा। सातवीं डील में उपयोगी खुला पत्ता उठाया, जल्दी नई जमावट की और नवीन का अधिक महत्वाकांक्षी ढाँचा बनने से पहले हाथ पूरा कर लिया।
नवीन की पेनल्टी बयालीस थी। कुल छिहत्तर हुआ और बढ़त बदल गई।
दर्शक हिले।
धरम ने बाँहें मोड़ लीं। नवीन ने आँख के कोने से देखा। पुरानी शर्ट फिर कंधों के आसपास कसती महसूस हुई।
उसने स्कोर पर नज़र रखी, लेकिन अगली गड्डी पकड़ते समय उँगलियाँ कुछ अधिक सख्त थीं। कार्तिक ने कुछ नहीं कहा। उसे बातचीत से मिले लाभ की जरूरत नहीं थी।
6. कार्तिक कुछ वापस नहीं देता
आठवीं डील ने दिखाया कि कार्तिक फाइनल में क्यों था।
उसने लुभावना खुला पत्ता नहीं लिया क्योंकि उससे विकल्प कम हो जाते। बंद गड्डी से उठाया। बाद में प्राकृतिक सीक्वेंस पूरा करके जोकर दूसरे समूह के लिए मुक्त किया। उसकी घोषणा साफ और इतनी तेज थी कि नवीन के अठारह अंक रह गए।
नवीन चौरानवे पर पहुँचा, सामने बासठ।
दो डील में अट्ठाईस आगे से बत्तीस पीछे हो गया था।
नौवाँ हाथ खराब था। बिखरे पत्तों में दूर की संभावनाएँ थीं। अगर बहुत चाहता तो उन्हें तर्क जैसा बता सकता था।
और वह बहुत चाहता था।
धरम देख रहा था। फाइनल निकल रहा था। अब ड्रॉप करता तो बोर्ड पर अंतर और बुरा लगता।
नवीन ने जारी रखने का वास्तविक कारण फिर खोजा। सिर्फ दर्शक मिले।
उसने शुरुआती ड्रॉप लिया। बीस अंक जुड़े। 114 के सामने 62।
हॉल में फुसफुसाहट चली। किसी ने इसे आत्मसमर्पण कहा।
कार्तिक चुप रहा। समझ रहा था कि निर्णय बड़े नुकसान से बचाता है, लेकिन नवीन के पास बहुत कम जगह छोड़ता है।
तय ब्रेक में नवीन ने पानी पिया और अपनी समीक्षा पर्ची पर एक वाक्य लिखा। मेरे पास अभी तीन हाथ हैं, पिछली तीन डील का कर्ज नहीं।
मेज़ पर लौटने से पहले पर्ची मोड़ दी। उस वाक्य को दोहराने के बजाय अब पत्तों पर उसका असर दिखाना था।
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7. वह हाथ जिसमें लड़ना चाहिए
दसवीं डील में वास्तविक ढाँचा मिला। प्योर सीक्वेंस पूरा था। दूसरे सीक्वेंस के एक से अधिक रास्ते थे। बाकी पत्ते दोनों रन तोड़े बिना बदल सकते थे।
नवीन खेला।
एक ड्रॉ ने सुंदर जोड़ी बचाने या सीक्वेंस बढ़ाने का चुनाव दिया। उसने सीक्वेंस बढ़ाया। हाथ का पुराना रूप बचाने से अधिक लचीलापन जरूरी था।
कार्तिक ने दबाव रखा। खुले पत्ते की पसंद सुधार बता रही थी। नवीन ने एक सार्वजनिक पत्ते से पूरे छिपे हाथ की कहानी नहीं बना ली। संभावित खतरा देखा, झूठी निश्चितता नहीं गढ़ी।
अगली ड्रॉ दूसरे समूह में मदद करती थी। उसने पत्ता बदला, तेरह गिने और ऐसा डिस्कार्ड चुना जिससे शर्तें सही रहीं।
तीन टर्न बाद घोषणा की।
कार्तिक के चौबीस अंक जुड़े। वह छियासी पर था। नवीन 114 पर रहा।
अट्ठाईस पीछे। दो डील बाकी।
अगला हाथ कठिन था। दूसरा सीक्वेंस पूरा करने के लिए तीन पत्तों का सेट तोड़ना पड़ा। उससे नया समूह अधूरा रह गया। नवीन ने नई समस्या चुनी क्योंकि उसके दो उचित रास्ते थे। पुरानी जमावट एक पत्ता माँगती थी।
कार्तिक लगभग पहले पूरा हो गया। एक कड़ी न मिलने से एक टर्न और रुका।
नवीन की ड्रॉ आई। घोषणा से पहले समूह जाँचे।
कार्तिक पर पैंतीस अंक लगे।
114। 121।
बढ़त लौट गई थी। लेकिन अगली उलटफेर से उसे सिर्फ सात अंक अलग कर रहे थे।
8. सात अंक छिपने की जगह नहीं
आखिरी डील से पहले नवीन ने अधिकारी से दोनों कुल अंक पढ़ने को कहा। कमरे का शोर सात को आरामदेह संख्या में न बदल दे।
शुरुआती ड्रॉप बीस जोड़ देता। कार्तिक मैच जीत जाता। लापरवाह अधूरा हाथ भी वही कर सकता था।
ऐसा कोई नियम नहीं था कि आगे वाला हमेशा पीछे हटे। इस हाथ को उसकी अपनी योग्यता पर परखना था।
नवीन को पान के पाँच, छह और सात से प्योर सीक्वेंस मिला। चिड़ी के आठ और नौ के साथ मुद्रित जोकर था। अलग सूट के तीन राजा, अलग सूट के तीन दो और अकेला हुकुम का गुलाम था।
तेरह पत्ते। कई सही समूह थे, लेकिन तेरहों पत्तों की पूरी घोषणा नहीं थी। अकेले गुलाम की जगह नहीं बनी थी।
कार्तिक ने उठाया और छोड़ा। चेहरा स्थिर रहा। बढ़त बदलने के बाद वह दर्शकों के लिए निराशा का प्रदर्शन किए बिना लौट आया था।
नवीन उसका सम्मान करता था। इससे फाइनल ऐसी कहानी नहीं बन सकता था जिसमें सिर्फ वही लड़ना जानता है।
उसने जोकर की जगह फिर देखी। अभी वह चिड़ी का सीक्वेंस पूरा कर रहा था। प्राकृतिक दस आए तो जोकर वहाँ से निकलकर राजाओं के सेट में चौथा पत्ता बन सकता था। अकेला गुलाम छोड़ा जा सकता था।
यह एक रास्ता था। गड्डी का वादा नहीं।
वह इंतज़ार करते हुए दूसरे उपयोगी सुधार भी देखता रहा।
9. जोकर का काम बदला
कार्तिक ने खुले ढेर से पत्ता लिया और हाथ बदला। हरकत छोटी थी। लेकिन उसकी तेजी बता रही थी कि पत्ते का स्पष्ट काम था।
नवीन की अगली ड्रॉ उपयोगी नहीं थी। उसने छोड़ दी। नाटकीय फिनिश के लिए प्योर सीक्वेंस तोड़ने का लालच रोका।
कार्तिक ने फिर उठाया। एक पल उसका हाथ मेज़ की ओर बढ़ा। फिर उसने जाँचा और एक पत्ता दूसरी जगह किया। वह पास था। पास होना घोषणा नहीं था।
नवीन ने बंद गड्डी से अगला पत्ता उठाया।
चिड़ी का दस।
पहली इच्छा दिखता परिणाम तुरंत बोल देने की थी। उसने अभ्यास वाली जमावट पूरी की।
दस चिड़ी के आठ और नौ के साथ लगा। मुद्रित जोकर उस प्राकृतिक सीक्वेंस से निकलकर तीन राजाओं के साथ चार पत्तों के सेट में गया। पान के पाँच, छह और सात प्योर रहे। तीन दो दूसरे सेट में थे। हुकुम का गुलाम डिस्कार्ड बना।
तीन पत्ते। तीन पत्ते। चार पत्ते। तीन पत्ते।
तेरह।
उसने घोषणा की।
अधिकारी ने दोनों सीक्वेंस, प्राकृतिक सेटों के अलग सूट और जोकर की नई भूमिका जाँची। हाथ सही था।
कार्तिक ने अपने अधूरे पत्ते रखे। उनसे जो भी पेनल्टी जुड़ती, उसका कुल नवीन से पहले ही अधिक था। फाइनल तय हो चुका था।
नवीन ने घोषणा दो बार सुनी। पहले अधिकारी से। फिर भीड़ से, जो उसका नाम दोहरा रही थी। इस बार किसी ने उसके नाम का आखिरी अक्षर नहीं काटा।
10. हर अक्षर उसका है
कार्तिक ने हाथ मिलाया। निराशा छिपाए बिना मुस्कराया।
“नौवीं डील में ड्रॉप सही था। उम्मीद थी तुम पीछा करोगे।”
“सातवीं और आठवीं तुमने महँगी कर दीं।”
“करनी ही थीं।”
अधिकारी शीट पूरी कर रहे थे और दोनों साथ खड़े रहे। नवीन के लिए जरूरी था कि जिसे हराया उसने अच्छा खेला। आसानी से मिली ट्रॉफी किसी सवाल का जवाब नहीं देती।
पुरस्कार के समय धरम बाँह पर नई क्लब शर्ट रखकर आगे आया। फोटोग्राफर उसकी हरकत की ओर मुड़ा।
“हमें हमेशा पता था तुम्हारे अंदर एक और जीत बची है।”
नवीन ने शर्ट देखी, फिर देने वाला हाथ।
“उसे उस खिलाड़ी के लिए रखिए जिसने पहनने की सहमति दी हो।”
धरम के पीछे हटने तक फोटोग्राफर ने कैमरा नीचे किया।
नवीन ने सादी शर्ट में कप उठाया। हर तस्वीर में वही था। व्यक्तिगत खिलाड़ी जिसने बढ़त खोई, गलत लड़ाई छोड़ी और सही हाथ जीते।
घर पर समीक्षा का फोल्डर खोलकर अंतिम स्कोर शीट अभ्यास फाइलों के पास रखी। पहली खराब प्रतियोगिता नहीं हटाई। वह रिकॉर्ड में रही।
फिर दराज़ खोली।
कटी हुई पट्टी वहीं थी। उसने उसे किसी उधार की टीम पोशाक पर नहीं, अपने खेल के बैग के अंदर सिला।
हर अक्षर अभी भी मौजूद था। सिलाई धीमी थी। आखिरी टाँका लगाकर उसने बैग बंद किया और अगले अभ्यास के लिए मेज़ पर रख दिया। अब उस नाम को किसी क्लब की अलमारी में जमा नहीं करना था।
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