1. SH7 कथा: निलंबन के नीचे लिखा नाम
सलीम का नाम पूरे साल सूचना पट पर रहा। लिखा था कि उसने चलती रमी बाजी में साथी को सलाह दी, फिर पूछने पर इनकार किया। आधिकारिक रिकॉर्डिंग ने विवाद खत्म किया था। निलंबन सही था।
वह बयालीस का था। बस अड्डे के पास जूते ठीक करता और छोटे खिलाड़ियों को वर्षों से साफ परिणाम की अहमियत बताता था। फैसला आया तो उसकी वयस्क बेटी ने नोटिस तह करके प्रतियोगिता के पत्तों के पास रख दिया।
“कौन सी बात सोची थी कि मुझे नहीं पता चलेगी?”
उसके पास देने लायक जवाब नहीं था। पुराने कप्तान रोहित ने सुनिश्चित किया कि क्लब सुने। घटना दोहराता, कभी सही, कभी ऐसी छोटी बातें जोड़ता जिनसे लगे सलीम कोई ईमानदार फैसला कर ही नहीं सकता।
निलंबन में सलीम दूसरे नाम से प्रतिबंधित आयोजन में नहीं गया। काम किया, जहां अनुमति थी निजी अभ्यास किया और पूरा समय खत्म होने दिया। बहाली के बाद पहली अर्जी की पात्रता मंजूर हुई। पुरानी टीम का बुलावा नहीं आया।
क्लब के बाहर रोहित मिला। उंगलियों पर जूता पॉलिश के निशान देखे।
“इन हाथों से कोई उपयोगी काम ही करते रहो।”
वापसी के पहले मैच से पहले सलीम ने सार्वजनिक नल पर हाथ धोए। धीरे पोंछे, सूची जांची और अपने नाम की तय सीट पर बैठा। सामने पत्ते रखे थे। उसने कुर्सी ठीक की और अधिकारी की घोषणा सुनी। इस बार बोलने का समय आने तक मुंह बंद रहा।
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2. बिना उधार बहाने वाला साल
प्रतिबंध के दौरान सलीम ने घटना लिखी। असहज हिस्से हटाए नहीं। साथी को पत्ता फेंकते देखा था। बोल पड़ा था। चुनौती मिलने पर कहा शब्द दूसरी मेज के लिए थे। दूसरे फैसले ने नियम उल्लंघन को ऐसे झूठ में बदला जिसे दूसरों से बचवाना चाहता था।
अनुमत क्लब प्रक्रिया से प्रभावित खिलाड़ियों को माफी भेजी। कुछ ने स्वीकार किया। एक ने उत्तर नहीं दिया। सलीम ने जवाब बिना वाला संदेश रखा। क्षमा मांगने का दूसरा दबाव नहीं डाला।
निजी अभ्यास बदला। वह हमेशा सही पत्ता देखने वाले आदमी की छवि से चिपक गया था। ऐसे अभ्यास किए जिनमें खिलाड़ी का हर फैसला पूरा होने के बाद ही हाथ देख सकता था। चुप रहना कठिन था। यह देखना भी कि दूसरा कभी उसकी मन की सलाह से बेहतर रास्ता खोजता है।
अपने पत्तों में तेजी से चतुर घोषणा करने के बजाय संरचना और संभावित दंड जांचे। लिखे विवरण से हाथ बनाए। कई संभावित ड्रॉ परखे। तेईस साल की बेटी यास्मिन कुछ सत्रों का समय रखने को राजी हुई। हर शाम हौसला नहीं देती थी।
उसने पूछा क्या उसे लगता है लौट सकता है। यास्मिन बोली, “पहले लौटो। फिर ठीक से लौटते रहो।”
उसने कैलेंडर पर प्रतिबंध खत्म होने की तारीख लिखी। उससे पहले की तारीखों में अभ्यास जारी रखा। जब कोई सही फैसला मिला, कॉपी में वजह लिखी। जब गलत निकला, उसी पन्ने पर सुधार किया।
3. फरवरी: आसपास खाली जगह वाली कुर्सी
बहाली के पहले आयोजन में खिलाड़ियों ने बातचीत और सलीम के बीच एक कुर्सी खाली रखी। वह हिचक समझता था। समझने से चुप्पी का दर्द कम नहीं हुआ। चार बाजियां खेलकर छोटे मैदान के बीच में रहा। तीसरी में संकरे अंत के पीछे भागने के बजाय कमजोर हाथ का जोखिम घटाया। चौथी में प्राकृतिक समूह परिवर्तन चूका और ज्यादा अंक लगे।
दोनों परिणामों पर हस्ताक्षर किए। बाहर रोहित ने पूछा अधिकारियों को उसका मुंह देखना याद रहा या नहीं। सलीम ने पर्ची बैग में रखी।
“उन्होंने मेज देखी।”
घर जाकर छूटा परिवर्तन बनाया। संभावित सेट के लिए रोका पत्ता दूसरा क्रम बढ़ा सकता था। पहली व्यवस्था को विकल्प के बजाय वादा मान लिया था। अगले महीने अलग व्यवस्थाएं सचमुच दूर रखकर देखने का अभ्यास किया। एक पत्ता दो कल्पित जगह नहीं रह सकता था।
अगली बाजी बुलते ही बातचीत खत्म करने का अभ्यास भी किया। दोस्ताना चर्चा पत्ते चालू होने से पहले रुकती, किसी उपयोगी वाक्य के बीच नहीं।
दूसरे आयोजन में एक खिलाड़ी पूरा हुआ हाथ मिलाने पास बैठा। सलीम ने जवाब दिया। अधिकारी ने अगला दौर घोषित किया तो पत्ते हटा दिए। उस आदमी ने देखा। भरोसे पर कोई भाषण नहीं हुआ। दोनों खेले।
वापसी में सलीम ने नई कॉपी में तारीख लिखी। एक तरफ सुधरा फैसला था, दूसरी तरफ आज की गलती। बीच में खाली जगह छोड़ी, जिसे अगले अभ्यास के बाद भरना था।
4. मई: वह अंक जो खुद ठीक कराता है
मई में स्कोर लिखने वाले ने सलीम की एक हार गलत उतारी। उससे आठ दंड अंक कम रहते। हस्ताक्षर से पहले सलीम ने अंतर बताया। मूल पत्ते जांचे गए और ज्यादा अंक लिखे गए। तालिका में एक स्थान खो दिया।
रोहित ने सुना तो इसे दिखावा कहा। सलीम को ऐसी बात की उम्मीद थी। सही अंक वाली पर्ची लेकर घर लौटा। असली काम अभी खेले जाने वाले हाथों में था। परिणाम बेहतर हो रहे थे, अधीरता गई नहीं थी।
एक करीबी आयोजन में उपयोगी जोड़ खत्म होने के बाद भी बड़ा पत्ता पकड़े रखा। कीमत चुकाई। केवल हार नहीं, चुनाव दर्ज किया। यास्मिन ने रसोई की मेज पर कॉपी पढ़ी।
“पता था कि खराब है?”
“दूसरी बारी तक पता था।”
“फिर रखा क्यों?”
“चाहता था अगला पत्ता पिछला फैसला सही साबित कर दे।”
उसने वाक्य पर उंगली रखी। “यही लिखो।”
उसने लिखा। गर्मियों के बीच तक कई साफ प्रतियोगिता रिकॉर्ड, उपयोगी जीत और सामान्य हारें जमा थीं। खिलाड़ी फिर उसके फैसलों पर बात करने लगे। कुछ अभ्यास का बुलावा अभी भी ठुकराते थे। उसने हर इनकार को नया मुकदमा मानना छोड़ा। आने वालों के साथ तय समय खेलता रहा।
कॉपी मोटी हुई। कोई पास आता तो प्रवेश पत्र छिपाने जैसे नहीं लगते थे। अगली तारीख लिखने के लिए उसने पुराना पन्ना मोड़ा। यास्मिन ने घड़ी निकाली और पूछा आज कौन सा हाथ फिर जांचना है।
5. अगस्त: अलग तरह का संयम
अगस्त में एक युवा वयस्क ने मदद मांगी। परिणाम दर्ज होने और मेज खाली होने के बाद दोनों ने पूरा हुआ हाथ देखा। वह जोकर रखने का एक आसान नियम चाहता था। सलीम ने दो हाथ दिखाए। एक में लचीला रखना कई रास्ते मजबूत करता था। दूसरे में सेट में लगाने से दूसरी जगह जरूरी प्राकृतिक क्रम बचता था। जवाब पूरे हाथ पर निर्भर था।
अपने अगले आयोजन में उसे अच्छे दिखते समूह को बचाने और खराब विकसित हो रहे हाथ का जोखिम घटाने के बीच चुनना पड़ा। कम जोखिम चुना। बाजी थोड़े नुकसान से हारी। दो बाजी बाद बहुत मजबूत संरचना खेलते रहने को उचित बनाती थी। प्राकृतिक क्रम बचाए, जोकर बदला और वैध घोषणा पूरी की। दोनों फैसलों का फर्क नोट किया।
रोहित अपने सेमीफाइनल में सबसे कम अंक लेकर शहर के फाइनल पहुंचा। दूसरे समूह से सलीम पहुंचा। फाइनल दस बाजियों का था। सबसे कम कुल दंड अंक खिताब देते।
घोषणा के समय रोहित ने पूछा कि पत्ता बताने के लिए कोई फुसफुसाने वाला चाहिए क्या। सलीम ने आधिकारिक सूची देखी।
“दस बाजियां।”
वह दुकान बंद होने से पहले लौट गया। ठीक किए जूते की अंतिम सिलाई बाकी थी। काम पूरा किया, हाथ धोए और अगली शाम के अभ्यास पत्ते लगाए। यास्मिन ने सूची की फोटो देखी। रोहित के नाम के नीचे उसके पिता का नाम था। उसने तारीख अपने फोन में लिख ली।
6. पहली नौ बाजियां
रोहित मजबूत फाइनल खिलाड़ी था। क्रम जल्दी विकसित करता और अलग पड़े आकर्षक समूह को समय पर छोड़ देता। दूसरी बाजी में प्राकृतिक विस्तार इतनी जल्दी पहचाना कि सलीम से एक बारी पहले पूरा कर गया।
सलीम ने चौथी में जीत से उत्तर दिया। खुला पत्ता छोड़ा था जो दूसरे अनिश्चित पत्ते के बाद ही उपयोगी दिखता। बाद के बंद ड्रॉ ने अलग, ज्यादा लचीली व्यवस्था को सहारा दिया। नौ बाजियों तक कोई दूसरे को केवल भाग्यशाली नहीं कह सकता था।
दसवीं से पहले रोहित के बयालीस दंड अंक थे। सलीम के अट्ठावन। सोलह पीछे। अंतिम वैध जीत चाहिए थी और रोहित के बचे पत्तों से इतना नुकसान कि अंतर पलटे।
यास्मिन सभागार के पीछे थी। सीजन में पहले दो छोटे आयोजन देख चुकी थी। इस बार ऐसी जगह रही जहां सलीम बारियों के बीच उसका चेहरा नहीं पढ़ सके। रोहित ने तेरह पत्ते लगाए और मुसकराया।
“पूरा साल, इस दिन के लिए।”
सलीम ने शुद्ध क्रम की संभावनाएं देखीं। धड़कन उंगलियों तक महसूस हो रही थी। पत्ते क्षण भर मेज पर टिकाए, फिर जमाए। पहले ड्रॉ ने प्राकृतिक क्रम सुधारा। रखा और बाकी हाथ से कम संबंध वाला अलग पत्ता फेंका।
बाजी आकार लेने लगी। उसने सामने वाले के खुले चुनाव दर्ज किए, लेकिन नजर वापस अपने समूह पर लाई। बाहर कोई खांसा। अधिकारी ने पत्तों की बारी बताई। सलीम ने अगला कार्ड उठाने से पहले सुनिश्चित किया कि वही उसका समय है।
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7. शब्द जिन्हें बाहर नहीं आने देता
पास की विश्लेषण मेज पर दर्शक ने संभावित पत्ते के बारे में जरूरत से तेज फुसफुसाया। सलीम ने “रानी” सुना और पुरानी आदत से मुड़कर सुधारने की इच्छा हुई। आंखें अपने पत्तों पर रखीं। अधिकारी ने दर्शकों को शांत रहने कहा। वह बिना टिप्पणी अपनी बारी पर ड्रॉ लेने लगा।
हाथ में अब दो प्राकृतिक क्रम और सातों का पूरा सेट था। दो प्राकृतिक रानियां और छपा जोकर दूसरा उपयोगी समूह थे। एक बड़ा पत्ता बाहर था। उसने संभावित विस्तार देखे। प्राकृतिक पत्ता क्रम लंबा कर सकता था। अलग सूट की तीसरी रानी जोकर वाला सेट बढ़ा सकती थी। एक ही संकरे अंत के लिए पूरा क्रम तोड़ना जरूरी नहीं था।
रोहित ने खुला पत्ता लिया और जल्दी समूह बदला। सलीम को उठाना दिखा, छिपे समूह नहीं। उसने अपने पत्ता फेंकने के विकल्प वास्तविक उपलब्ध जानकारी से मिलाए। लचीली संरचना बचाई और बेकार पत्ता जाने दिया।
कई बारियों तक घोषणा नहीं हुई। अंतिम अनचाहा पत्ता हुकुम का बादशाह था। उसे रखना तभी ठीक था जब पूरा होने के व्यावहारिक रास्ते बने रहें। सलीम हर नई चाल पर यह जांचता रहा।
उसने कमरे से बदला हुआ मानने की मांग नहीं की। बंद ढेर से अगला पत्ता लिया और खुद देखा। उंगलियां अब स्थिर थीं। रानी की आकृति सामने आई। उसने तुरंत बोलने के बजाय उसे बाकी पत्तों के पास रखकर अंतिम बनावट जांची।
8. तेरह पत्ते, फैसले का एक मालिक
हुकुम की रानी ने बड़ी व्यवस्था पूरी की। सलीम ने उसे दिल की रानी, चिड़ी की रानी और छपे जोकर के पास रखा। चार पत्तों का वैध सेट। प्राकृतिक रानियों के सूट अलग थे।
हुकुम का शुद्ध क्रम चार, पांच, छह था। दूसरा प्राकृतिक क्रम ईंट का नौ, दस, गुलाम। बचा सेट दिल, ईंट और चिड़ी के सातों का था। तीन, तीन, तीन और चार।
हुकुम का बादशाह अलग किया। फेंकने के बाद तेरह गिने। समूह फिर जांचे। जोकर एक बार इस्तेमाल था। कोई प्राकृतिक पत्ता दो जगह नहीं गिना। उसने घोषणा की।
अधिकारी का पहला क्रम खत्म होने से पहले रोहित की मुसकराहट गई। चार पत्तों वाले रानी के सेट को खास ध्यान से देखा। जांच के दौरान सलीम के हाथ शांत रहे। घोषणा स्वीकार हुई।
रोहित के बचे दंड पच्चीस थे। कुल बयालीस से सड़सठ। सलीम अट्ठावन पर रहा। अंत में नौ अंक का अंतर। अधिकारी ने कुल पढ़े और पर्ची बीच रखी। सलीम ने हस्ताक्षर से पहले जोड़ जांचा। रोहित ने भी।
न अनुकूल नकल की गलती थी, न दूसरी सीट से सलाह, न विवादित समूह। फैसले सलीम ने किए थे। उसी नाम से परिणाम के नीचे हस्ताक्षर किए जो निलंबन के नोटिस पर आया था।
अधिकारी ने पर्ची उठाई। यास्मिन भीड़ से आगे आई, लेकिन निरीक्षण की जगह खाली छोड़ी। सलीम ने कलम वापस रखी और पहली बार दर्शकों की ओर देखा।
9. बिना बच निकलने वाला वाक्य
प्रस्तुति से पहले रोहित खड़ा हुआ।
“एक अच्छा फाइनल पुरानी बात नहीं मिटाता।”
सलीम ने उसे देखा।
“मैंने सलाह दी और उसके बारे में झूठ बोला। निलंबन पूरा किया। आज तुम अट्ठावन सड़सठ हारे।”
आवाज ऊंची नहीं की। तीनों बातें साथ खड़ी रहीं। आखिरी को पहली से इनकार नहीं बनाया जा सकता था। यास्मिन पास आई। उसने हमेशा भरोसा होने की बात नहीं कही। हस्ताक्षर वाली पर्ची लेकर अंक पढ़े, जैसे साल भर अभ्यास नोट पढ़े थे।
“हर समूह जांचा।”
“हां।”
उसने वापस दी और तस्वीर के लिए पास खड़ी हो गई। कई खिलाड़ियों ने बधाई दी। जिसने माफी का जवाब नहीं भेजा था, उसने छोटा हाथ मिलाया। सलीम ने भाषण मांगे बिना स्वीकार किया।
किनारे रोहित किसी से कह रहा था कि अंतिम ड्रॉ भाग्यशाली था। सुनने वाले ने बाकी नौ बाजियों का पूछा। रोहित ने समझाना बंद किया।
सलीम ने हाथ पोंछने का तौलिया, बाद के विश्लेषण के पत्ते और कॉपी रखी। अधिकारी प्रस्तुति जमा रहा था। कप लेने बढ़ा तो खुद रुक गया। बुलाए जाने का इंतजार किया।
नाम आया तो यास्मिन फोन उठा चुकी थी। उसकी तस्वीर में स्कोर बोर्ड भी था। सलीम सीधा खड़ा रहा। रोहित दूसरे किनारे उपविजेता की पर्ची लिए था। इस बार दर्शकों में हंसी नहीं थी। अधिकारी ने दोनों के हाथों में प्रमाणपत्र रखे और अंतिम तालियां शुरू हुईं।
10. अगली अर्जी
अगली सुबह सलीम ने दुकान सामान्य समय खोली। कप पॉलिश और गोंद से दूर ऊंची शेल्फ पर था। ग्राहक ने परिणाम की तस्वीर से पहचानकर पूछा कि मोहल्ले के वयस्क समूह को खेल सिखाएगा क्या। सलीम ने काम के बाद सामुदायिक कमरे का सत्र स्वीकार किया। पूरे हुए हाथ देखेंगे, घोषणा का अभ्यास करेंगे। अगला जूता लेने से पहले तारीख लिखी।
शाम पुराना निलंबन नोटिस नए परिणाम वाली फाइल में रखा। यास्मिन देख रही थी।
“इसे रख रहे हो?”
“हां।”
उसने सिर हिलाया और पूछा अगली स्थिति कौन सी है। सलीम फाइनल की छठी बाजी का गलत खेला हाथ लाया। दो फेंकने वाले पत्तों की तुलना की। संभावित परिणाम जांचे और बेहतर व्यवस्था मिली। यास्मिन ने घड़ी फिर लगा दी।
अगली प्रतियोगिता के प्रवेश पत्र में नाम और पंजीकरण संख्या मांगी गई। सलीम ने भरी। कर्मचारी ने वर्तमान पात्रता जांची और मेज दी। वह नए खिलाड़ी के पास बैठा।
“यहां पहला आयोजन?” उसने पूछा।
“नहीं।”
पत्ते बंटे। सलीम ने तेरह गिने, पहली बारी का इंतजार किया और अपने फैसलों पर ध्यान रखा। बाहर यास्मिन ने परिवार समूह में शुरुआत का समय भेजा। फिर देखने के लिए फोन रख दिया।
पहला पत्ता खुले ढेर पर आया। सलीम ने उसे अपने हाथ से मिलाया, उपयोग नहीं दिखा तो बंद ढेर से लिया। अगली पंक्ति लिखने के लिए कॉपी मैच के बाद खुलनी थी। अभी पूरी बाजी सामने थी।
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