1. STARS UU7 कथा: स्थायी पता नहीं
गेस्टहाउस के कर्मचारी ने रेखा से शहर का पता पूछा।
उसने उस आवासीय गृह का नाम बताया जहाँ पली थी। आदमी ने फॉर्म से सिर उठाया।
“वह इमारत गिर गई।”
“जानती हूँ।”
“तो परिवार कहाँ है?”
बयालीस की उम्र में भी साधारण सवाल इतनी जल्दी जमीन खींच ले, उससे नफरत थी। सूरत का वर्तमान पता दिया और दो रात के पैसे जमा किए। पालने में मदद करने वाली महिला के अंतिम संस्कार के लिए जबलपुर आई थी। यह समझाने नहीं कि खाली कमरे के साथ कोई इंतज़ार क्यों नहीं कर रहा।
लौटते समय पुराना मनोरंजन हॉल दिखा। पोस्टर में ईशान नए साथी के साथ कैरम ट्रॉफी पकड़े था।
बीस साल पहले उसका साथी था। क्वालिफायर के आयोजकों से कहा था कि रेखा हट गई है। वह उसके खरीदे टिकट लेकर गलत बस स्टैंड पर इंतज़ार करती रही। स्थल पहुँची तो सीट पर दूसरा था।
बाद में उसने गलतफहमी कहा। फिर लोगों को बताया उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
हॉल का दरवाज़ा खुला। ईशान ने पहचाना।
“अभी भी अकेले सफर?”
रेखा ने उसके पीछे बोर्ड देखे।
“नहीं। हमेशा नहीं।”
तथ्य बनने से पहले यह इच्छा थी। वह दरवाज़े पर नहीं रुकी। सड़क पार करते समय पोस्टर पीछे रह गया, लेकिन उसकी तस्वीर दिमाग से नहीं गई।
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2. खाली सीट पर बैठा खिलाड़ी
अगली सुबह चाय की दुकान के बाहर पवन मिला। अंतिम संस्कार में देखा था, लेकिन नहीं जानता था कि बात करना चाहेगी या नहीं।
चालीस की उम्र में चेहरे की कुछ तीक्ष्णता गई थी, सवालों की सीध नहीं।
“हॉल में गई थीं?”
“क्यों? एक और सीट लेनी है?”
उसने चोट स्वीकार की। पुराने क्वालिफायर में ईशान के बताए हटने पर वही बदली खिलाड़ी बनकर बैठा था। उससे पहले भी प्रतिद्वंद्वी थे। रेखा ने वर्षों उसे ईशान के पास उसी निजी विश्वासघात के खाते में रखा।
“आयोजकों से उसने जो कहा, मैंने माना। तुमसे पूछना चाहिए था।”
वह पहले सफाइयाँ सुन चुकी थी। इसमें यह दावा नहीं था कि नुकसान उसकी कल्पना है।
उसने छह सप्ताह बाद शुरू होती वयस्क डबल्स श्रृंखला बताई। नियमित साथी शहर छोड़ गया था। ऐसा साथी चाहिए था जो हर शॉट सीधा छोड़े जाने की माँग किए बिना कठिन तरफ खेल सके।
“मेरा खेल याद है?”
“उससे हारना याद है।”
उत्तर ने पल भर रोका।
दोपहर सार्वजनिक हॉल में तीन अभ्यास बोर्ड खेले। रेखा का स्पर्श पुराना पड़ गया था। विचार खत्म नहीं थे। पवन के नियंत्रित स्ट्रोक ऐसी स्थितियाँ बनाते जिन्हें अभी समझ सकती थी।
अगले दिन सूरत लौटी तो टिकट वाले बटुए में कार्यक्रम मोड़कर रखा था। उसने किसी को अभी वापसी का वादा नहीं दिया। लेकिन कागज़ फेंका भी नहीं।
3. छह सप्ताह बाद दूसरी यात्रा
रेखा छोटा बैग और अपना स्ट्राइकर लेकर लौटी। बीच के हफ्तों में काम के बाद मोहल्ले के हॉल में अभ्यास किया था। कभी अकेले, कभी ऐसे लोगों के साथ जिन्हें ईशान का पता नहीं था।
अनजान होना मददगार था। चूका शॉट चूका शॉट था, चरित्र की पुरानी कहानी का सबूत नहीं।
शानदार रिबाउंड से पहले सामान्य पॉकेट की गति दोहराई। सिर्फ गिरी गोटी से स्ट्रोक आँकने के बजाय स्ट्राइकर सुरक्षित छोड़ने पर काम किया।
पवन अपनी तरफ से छोटे वीडियो भेजता। वह अपनी तरफ से लौटाती। एक ही जमावट एक सीट से रास्ता और दूसरी से बाधा हो सकती थी।
पहले आधिकारिक मैच में आमने-सामने बैठे। बोर्ड के दौरान कुछ नहीं बोला। निर्णयों को फुसफुसाहट या इशारे के बिना टिकना था।
पहला गेम हारे। रेखा भरोसेमंद कवर के बिना क्वीन के पीछे गई और कीमत दी। हार के बाद पवन इतना सावधान हुआ कि जरूरी मौके छोड़े।
ब्रेक में उसे लगा पूछेगा लौटकर आई ही क्यों।
उसने खाली मेज़ पर उँगलियों से असफल क्वीन प्रयास बनाया।
“कवर नहीं था।”
“जानती हूँ।”
“तो क्वीन लेने से पहले बनाते हैं।”
मैच हारे, लेकिन जाने से पहले अगला कार्यक्रम बुक किया। हार का कारण सामने था। उसे पुराने बस स्टैंड तक खींचकर ले जाने की जरूरत नहीं थी।
4. पुरानी कहानी की कीमत
गेस्टहाउस की बस में रेखा ने बताया कि छूटे क्वालिफायर के बाद क्या हुआ।
ईशान की कहानी तेजी से गई। मुश्किल साथी। गायब हो जाने वाली महिला। गृह में पली लड़की जो ठीक टीम में नहीं टिक सकती। बाईस की उम्र में क्लब दफ्तर में उसके लिए लड़ने वाला परिवार नहीं था। तथ्य खत्म होने से पहले ताकत खत्म हुई।
दूसरे शहर काम के लिए गई। कैरम कभी-कभार का खेल बना, जिस पर गंभीर बात करने से मना करती थी।
पवन ने अधिक लड़ना चाहिए था कहे बिना सुना।
“मैंने नतीजे का उपयोग किया। जगह कैसे खाली हुई, नहीं पूछा।”
“यह व्यवस्था करना अलग है।”
“हाँ। इसलिए यह कुछ भी नहीं, ऐसा नहीं हो जाता।”
बस चौराहे पर धीमी हुई। लोग बंद स्कूटर के आसपास से निकले।
“मैं नहीं चाहती फाइनल उस दिन का मुकदमा बने।”
“तो बोर्ड पर बैठे लोगों से खेलेंगे।”
उसने सिर हिलाया।
एक क्वीन गिरने से अतीत नहीं सुलझता। हो चुका था। बदल यह सकता था कि बाद की हर जगह ईशान की कहानी तय करे या नहीं।
गेस्टहाउस में गिर चुकी इमारत समझाए बिना वर्तमान पता दिया।
कर्मचारी ने लिखा और चाबी दी। वह कमरे में गई, बैग रखा और अगले मैच तक के दिनों का हिसाब किया। लौटने का फैसला अब केवल पुराने अपमान को जवाब नहीं था। खेलने की वास्तविक योजना भी थी।
5. साझेदारी का आकार
अगले चार महीने यात्राओं, रिकॉर्डिंग और हमेशा अच्छे न रहे मैचों में बीते।
रेखा ने साथी के लिए उपयोगी गोटी छोड़ना सीखा, बिना माने कि बीच का विरोधी उसे जस का तस रखेगा। पवन ने बदलने पर समायोजन सीखा। योजनाबद्ध शॉट संभावना था, बोर्ड के मानने योग्य आदेश नहीं।
क्वीन और कवर के पैटर्न हर बार गोटियाँ थोड़ा बदलकर दोहराए। छोटी रुकावट सही क्रम बदल सकती थी।
रेखा ने क्वीन को साहस का प्रमाण मानना छोड़ा। कभी लेना सही था। कभी दूसरी गोटी पहले साफ करने से बाद का कवर बनता। कभी छोड़कर बोर्ड सुधारना सही था।
पवन की कमजोरी अलग थी। दबाव में ताकत इतनी कम करता कि गोटी पॉकेट से पहले रुकती। उँगली छोड़ना रिकॉर्ड किया और सफल स्ट्रोक को डर वाले स्ट्रोक से मिलाया।
काम सामान्य और दोहराव वाला था। साझेदारी अलग हुई क्योंकि किसी ने दूसरे की गलती से पुराना कर्ज वसूल नहीं किया।
चैंपियनशिप सप्ताहांत तक पहुँचने के लिए पर्याप्त मैच जीते।
ईशान की जोड़ी आसानी से क्वालिफाई हुई। नया साथी आलोक तकनीकी रूप से मजबूत था। पुराने विश्वासघात में उसका हिस्सा नहीं था।
रेखा खुद को याद दिलाती रही। दो अच्छे खिलाड़ियों को हराने में एक से नफरत करने से अधिक ध्यान लगेगा। उसने आलोक के पिछले मैच का वीडियो देखा और ऐसे कोण लिखे जिन्हें अगली बार अभ्यास में रखना था।
6. तीसरी वापसी
उस सत्र तीसरी बार जबलपुर आई तो सीधे हॉल गई। गेस्टहाउस पंजीकरण के बाद भी मिल सकता था।
ईशान ने पवन के पास नाम देखकर हल्की हँसी की।
“पुरानी चयन गलती का उपयोग करने का तरीका मिल गया।”
रेखा से पहले पवन बोला। “तुमने कहा था वह हट गई। नहीं हटी थी।”
पंजीकरण स्वयंसेवक ने ऊपर देखा। ईशान की मुस्कान कस गई।
रेखा ने कागज़ रखे। “इस सप्ताहांत के मैचों के लिए आए हैं।”
आज की जगह कमाने के लिए अजनबियों के सामने पूरा इतिहास प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं थी।
सेमीफाइनल कठिन था। दूसरी तरफ ईशान और आलोक खेल रहे थे। वहाँ की हर ताली ध्यान खींचती।
रेखा शॉट के क्रम पर लौटी। महत्वपूर्ण बोर्ड में उपलब्ध गोटी डाली, दूसरी कवर के लिए बचाई और कमजोर संभावना वाला क्वीन प्रयास नहीं लिया जिससे विरोधियों की बाकी गोटियाँ खुलतीं।
स्थिति पवन तक पहुँची तो उसने खत्म किया।
वे फाइनल पहुँचे।
ईशान भी आया। इस बार पवन के पास की जगह पूरे सत्र से मिली थी। अनुपस्थिति की किसी और की कहानी से नहीं।
रेखा अधिकारियों के बुलाने से पहले बैठी और अंगूठे से स्ट्राइकर का किनारा जाँचा। सामने उसी पुराने साथी का चेहरा था। लेकिन अपने सामने रखा स्ट्राइकर, अपना नाम और तय सीट आज उसके नियंत्रण में थे।
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7. जिस क्वीन के पीछे भागने की उम्मीद थी
पहला गेम ईशान और आलोक जीते। तालमेल अच्छा था। आलोक के कोण वे स्थितियाँ हल कर देते जिन्हें रेखा रुकावट मानती। साफ रन मिले तो ईशान निर्मम था।
ब्रेक में पुराना निष्कर्ष बनने लगा। लौटकर पता चला कि जगह कभी उसकी थी ही नहीं।
उसने पवन से सीधे कहा।
उसने प्रोत्साहन नहीं दिया। हारा बोर्ड दिखाया। “उस रिबाउंड में तुमने उसकी आखिरी दो गोटियाँ खोल दीं।”
विशेष कारण मददगार था। खराब चुनाव बदल सकता था। पूरे जीवन का फैसला विरोधी बनकर नहीं खेला जा सकता।
दूसरे गेम में ईशान ने क्वीन आसान रखी, संभावित कवर कठिन। रेखा ने निमंत्रण पहचान लिया।
दूसरी गोटी डाली और पहले कवर का रास्ता सुधारा। क्वीन आखिर ली तो अगला स्ट्रोक पहले तैयार उद्देश्य रखता था।
पवन ने बाद का बोर्ड दो नियंत्रित कट से पूरा किया। दूसरा गेम उनका हुआ।
एक-एक।
ईशान ने पानी माँगा। आलोक चुपचाप मेज़ देख रहा था।
रेखा ने स्कोर मानने की अनुमति किसी चेहरे में नहीं खोजी। उसने उसे बनाने वाले बोर्ड देखे थे। अब तीसरे गेम के लिए अपनी सीट पर बैठी और बचे काम को अलग देखा। पहला गेम हारना न मिटा था, न तीसरा पहले से जीत लिया गया था।
8. अठारह के सामने बाईस
निर्णायक गेम में रेखा और पवन अठारह, ईशान और आलोक बाईस पर थे।
हारा बोर्ड मैच खत्म कर सकता था। पर्याप्त मजबूत जीत उसे उनकी तरफ खत्म कर सकती थी। अंक महत्वपूर्ण थे, लेकिन उन्हें कैसे पहुँचना है, गोटियाँ तय करतीं।
मुख्य बोर्ड में उनकी पाँच गोटियाँ और विरोधियों की चार सतह पर थीं। क्वीन सुरक्षित नहीं हुई थी।
रेखा की बारी में सीधा पॉकेट था। उसने लिया। स्ट्रोक के बाद क्वीन उपलब्ध और साफ कवर पहुँच में था।
रास्ता जाँचने जितना रुकी, फिर क्वीन डाली और तैयार गोटी से कवर किया।
अपनी तीन गोटियाँ बचीं।
एक तुरंत उपलब्ध थी। नियंत्रित ताकत से डाली। दो और अलग कोण माँग रही थीं।
शानदार जारी रन का लालच था। दोनों खुद साफ करती तो कहानी सरल होती। छोड़ी गई खिलाड़ी लौटकर सब अकेले खत्म करती है।
बोर्ड को उस कहानी से मतलब नहीं था।
उसने स्थिति बनाने वाला स्ट्रोक लिया जिससे अगला रास्ता सुधरे, लेकिन बची गोटियाँ बिखरकर ईशान को आसान अवसर न दें।
कोई गोटी नहीं गिरी। टर्न समाप्त हुआ।
सामने पवन के हाथ स्थिर थे। समझ दूसरी जगह बनी थी।
अब विरोधी की बारी पार करनी थी। रेखा ने न निगाह से लाइन बताई, न सिर हिलाया। अपनी तरफ से उसने काम किया था। अगला फैसला पवन को अपनी सीट से पढ़ना था।
9. जगह जिसे अकेले नहीं बचाना पड़ा
ईशान ने बची गोटी पर कठिन कोण लिया। साफ पॉकेट मिलता तो आगे जारी रखने का अवसर था।
थोड़े अंतर से चूका। गोटी किनारे से लगी और बोर्ड पर रही। रेखा के रन के बाद से चार विरोधी गोटियों में कोई नहीं हटी थी।
पवन की बारी आई।
दो बची अपनी गोटियों में पहली रेखा की बनाई स्थिति के कारण उसकी तरफ से पहुँच में थी। अभ्यास वाली गति ली। न गुस्से में मारा, न डर में स्ट्रोक छोटा किया।
गोटी गिरी।
आखिरी को संकरा कट चाहिए था। स्ट्राइकर रखा, लाइन जाँची और अनुमत समय में स्ट्रोक पूरा किया।
रेखा ने गोटी गायब होते देखी। बोर्ड समाप्त घोषित होने तक नहीं हिली।
चार विरोधी गोटियाँ बचीं। सही कवर हुई क्वीन के साथ सात अंक मिले। अठारह पच्चीस हुआ।
मैच उनका था।
पल भर सिर्फ कुर्सी की खरोंच सुनाई दी। ईशान औपचारिकता पूरी होने से पहले खिसका, फिर खुद रुका। आलोक ने पवन को, फिर उसे बधाई दी।
ईशान ने दोनों को साथ देखा।
बीस साल पहले अनुपस्थिति में बोलकर टीम से हटाया था। इस नतीजे में इतने गवाह और इतना असली खेल था कि अपनी कहानी से नहीं बदला जा सकता था।
रेखा ने शीट पर हस्ताक्षर किए। पवन ने पास किए। इस बार दो नाम साथ आने से किसी तीसरे का नाम छिपकर नहीं हटाया गया था।
10. सामने के दरवाज़े से जाना
पुरस्कार के बाद ईशान आया। शुरुआत गलतफहमी शब्द से की।
रेखा ने हाथ उठाया। “तुमने कहा था मैं हट गई। नहीं हटी थी। उसे छोटा मत करो।”
उसने बैग समेटते लोगों को देखा। किसी ने उसके चुनाव को अधिक दयालु शब्द में नहीं बदला।
“तुमसे बात करनी चाहिए थी।”
“सच बोलना चाहिए था।”
बेहतर वाक्य का इंतज़ार नहीं किया। दिन में उसकी आवाज़ पर्याप्त रही थी।
पवन सामने के दरवाज़े पर बोर्ड केस लिए था। पूछा शहर छोड़ने से पहले पुराने आवासीय गृह की जगह देखना चाहेगी?
“कल। आज खाना चाहिए।”
वे उसी चाय दुकान गए जहाँ पहली मुलाकात हुई थी। कप देखकर मालिक ने बड़ी मेज़ खाली की। रेखा हँसी और सब जैसा खाना माँगा।
बाद में गेस्टहाउस में कर्मचारी ने पूछा एक रात और चाहिए?
“हाँ।”
उसने नाम के सामने लिखा। अपना पता फॉर्म पर पहले से था।
रेखा ने ट्रॉफी बिस्तर के पास रखी और सूरत की मित्र को फोन किया। मित्र आखिरी बोर्ड का हर विवरण चाहती थी।
रेखा पहले सामान्य पॉकेट से शुरू हुई। आगे के लिए वह जरूरी था।
पहली बार पूरी कहानी सुनाई और शुरुआत उस दिन से नहीं की जब कोई पीछे छोड़ गया था। उस रात वर्णन का पहला निर्णय उसका अपना था, और आखिरी गोटी किसी ऐसे साथी ने डाली थी जिसके साथ वह फिर खेलना चाहती थी।
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