WW9 Game: मैंने भाई का नाम अपने ऊपर लिखा
WW9 Game

WW9 Game: मैंने भाई का नाम अपने ऊपर लिखा

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

WW9 Game की मौलिक कैरम कहानी: माँ की देखभाल करने वाले भाई को बाहर रखने वाले छोटे भाई की नज़र से अंतिम बोर्ड और सार्वजनिक हार।

1. WW9 Game कहानी: भाई दूसरी कुर्सी पर बैठा

मुझे लगा भरत हाथ नहीं मिलाएगा। उसने हाथ लिया, छोड़ा और कैरम बोर्ड के सामने बैठ गया। उसका संयम गुस्से से ज्यादा अस्थिर कर रहा था। भाई पचपन का था, मैं उनचास का। छह साल माँ की देखभाल उसने की। मैं पारिवारिक क्लब चलाता और खुद को व्यस्त बेटा कहता। माँ की मृत्यु से समझ अचानक नहीं आई। नियंत्रण बनाए रखने के नए कारण मिले।

बहुत आयोजन छूटने पर उसका नाम सक्रिय सूची से हटाया। अधिकतर अनुपस्थिति तब हुई जब मैंने उसे माँ के पास रहने को कहा था। सालगिरह पर उसने खुली चुनौती श्रृंखला में प्रवेश माँगा। मैंने कहा बिस्तर के पास धैर्य और बोर्ड का हुनर अलग हैं। लोग हँसे। मैंने वहीं कहा था जहाँ लोग हँस सकें।

अब वह शुरुआती मैच जीतकर मेरे सामने फ़ाइनल में था। आयोजक ने स्ट्राइकर रखा और प्रारूप समझने की पुष्टि की। घोषित नियमों में तीन गेम में दो जीतने थे। भरत ने सतह देखी, मेरा चेहरा नहीं।

मैं महीनों समझाता रहा कि कमरे की इस तरफ उसका स्थान क्यों नहीं। वह ऐसी चीज़ लेकर आया जिसे काटना कठिन था: वह मैच जिसका अधिकार खेलकर लिया था। मैंने अपनी कुर्सी ठीक की। उसकी चुप्पी को कमजोर जवाब समझने की आदत थी। आज उस चुप्पी के सामने बोर्ड था, और अगली बारी में मुझे वास्तव में अच्छा शॉट लगाना पड़ता।

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2. जिन वर्षों को अनुपस्थिति कहा

अधिकारी पहला बोर्ड लगा रहा था। तीन साल पुराना फोन याद आया। भरत ने एक शाम माँ के पास बैठने को कहा ताकि क्लब मैच खेल सके। मैंने आपूर्तिकर्ता आने को बताया। वह दोपहर आ चुका था। शाम मैं क्लब में भाई को अविश्वसनीय बता रहा था। तब झूठ छोटा लगा। इतना कहा कि आखिर वर्णन जैसा सुनने लगा।

युवा उम्र में भरत मुझसे अच्छा खेलता था। संपर्क सही था, धैर्य चिढ़ाता था। उसके घर रहने में मैं सुधरा। किए अभ्यास का श्रेय उचित था। जो अभ्यास उसे नहीं करने दिया उसका नहीं।

माँ के बाद वह पुराने सामान के साथ आया। पंजीकरण समाप्त बताने से पहले नाश्ता व्यवस्थित करने को कहा। उसने काम किया, फिर खुले प्रवेश के नियम माँगे। मुझे लगा शोक से खेल पर भावुक हो गया है।

अब फ़ाइनल से पहले अनुमत तैयारी में सतह जाँच रहा था। आंदोलन मापे हुए थे। दर्शक के लिए प्रभावशाली शॉट नहीं। मैंने सोचा अभ्यास का समय कहाँ मिला। उत्तर साफ होना चाहिए था। छह साल में पहली बार मैं किसी और के नाम पर उसकी शामें नहीं ले रहा था।

उसने स्ट्राइकर अपनी तरफ रखा। मैंने निगाह हटाई। मेरे पास पुराने वर्षों की हर घटना का तर्क तैयार था, लेकिन सामने की स्थिति उन तर्कों को अंक नहीं देती। खेल शुरू होने वाला था। उसने केवल पूछा कि लाइट का प्रतिबिंब ठीक है या नहीं। मुझे साधारण सवाल का साधारण उत्तर देना पड़ा।

3. दवा दुकान के ऊपर कमरा

बाद में पता चला कि भरत दवा दुकान के ऊपर वयस्क समूह में गया था। सीढ़ी तंग, कुर्सियाँ अलग और खिलाड़ी गलतियों पर सीधे बोलते थे। वह भूला चैंपियन नहीं गया। ऐसा व्यक्ति गया जो दोहराव के बिना याद की क्षमता अधिक मानता था।

शुरुआती गेम खराब थे। याद के आसान कट अधिक जोर से मारता। शॉट के बाद स्थिति देखे बिना कठिन गोटी पूरा करना चाहता। समूह सहमति से ऊपर से अभ्यास रिकॉर्ड करता और स्ट्राइकर का वास्तविक रास्ता देखता। भरत को रिलीज़ पर हाथ की बदलती दिशा बार बार देखना बुरा लगा। फिर भी अभ्यास किया।

बस कंडक्टर प्रणेश ने साधारण स्थितियाँ दोहराईं, जब तक अच्छे संपर्क और संयोग के परिणाम का अंतर समझा सके। फिर कोण बदला ताकि केवल याद की हरकत न रहे। गोटियों के क्रम और क्वीन कवर पर काम किया। क्वीन शानदार हो तब भी छूटा कवर छूटा ही रहता।

मैंने एक दिन पूछा अब भी ऊपर शामें खराब करता है। उसने हाँ कहा और आगे चला गया। छोटे उत्तर को शर्म माना। फ़ाइनल बोर्ड पर समझ आने लगा कि शायद बचत थी। वह उपयोगी शब्द ऐसे व्यक्ति पर खर्च करना छोड़ चुका था जो गलत समझने पर अड़ा था।

मुझे उसके अभ्यास की तारीखें तब नहीं मालूम थीं। अब उसके ठहराव में वे दिख रही थीं। वह कठिन लाइन देखकर केवल इच्छा नहीं कर रहा था। कुछ जाँच रहा था जिसका नाम और कारण होगा। मुझे उसे रोकने के लिए खेलना था, टिप्पणी करना काफी नहीं था।

4. पहला गेम मेरा था

पहला गेम मैंने जीता। यह बात कहानी में रखना चाहता हूँ, क्योंकि मुझे कभी गंभीर विरोधी न बताकर बाकी आसान हो जाता। अच्छा खेला। शुरुआती नियंत्रण मजबूत था। भरत की दो स्थितिगत गलतियों का फायदा लिया। उसने गलत समय क्वीन ली और कवर नहीं किया। क्वीन लौटी और अवसर मैंने लिया। कई शॉट पर तालियाँ मिलीं। जरूरत से ज्यादा आनंद लिया।

गेम बाद कहा कि नए खिलाड़ियों को सिखाने में अब भी मदद कर सकता है। उसने उत्तर से पहले पानी पिया। “एक और गेम है।” मैं प्रस्ताव को दयालुता बनाकर दोहराने वाला था। अधिकारी ने बुला लिया।

दूसरे गेम में भरत बदला। केवल बोर्ड छोटा करने की संभावना से कठिन रास्ता नहीं चुना। अच्छा अवसर मिला तो कठिन गोटी हटाई और सरल गोटी ऐसी स्थिति के लिए छोड़ी जहाँ उपयोगी हो। बदलाव दिखा, लेकिन सोचा दबाव पर अधीरता लौटेगी। मेरे काम आने जितनी जल्दी नहीं लौटी।

गेम करीब हुआ। भरत ने छोटे अंतर से दो बोर्ड लिए। व्यवस्था सही हुई तो क्वीन कवर साफ पूरा किया। दूसरा गेम उसका था। पहली बार शाम में जीत को उदारता से कैसे बताऊँ, उसकी जगह हार के बारे में सोचना पड़ा।

मैंने पानी की बोतल उठाई। बाहर लोग तीसरे गेम की बात कर रहे थे। उनकी आवाज़ में आश्चर्य था, लेकिन दया नहीं। मेरे भाई को अब वापसी का मेहमान नहीं, मुझे हरा सकने वाला खिलाड़ी माना जा रहा था।

5. गेमों के बीच उसने क्या किया

ब्रेक में भरत पानी की मेज़ के पास अकेला बैठा। मुझे लगा नया समूह भाषण या खास योजना देगा। प्रणेश ने स्कोर पर थोड़ी बात की और हट गया। अगले बोर्ड में कोई निर्देश या दर्शक का संकेत नहीं था।

भरत ने उँगलियाँ फैलाईं और स्ट्राइकर हथेली पर समतल रखा। माँ धातु की प्लेट साफ है या नहीं देखते वही हरकत करती थी। समानता अचानक लगी। मैंने बीमारी से भाई की अनुपस्थिति समझाई, फिर अनुपस्थिति को उसके विरुद्ध प्रमाण बनाया। तर्क इसलिए काम करता था क्योंकि दोनों सिरों पर मेरा नियंत्रण था।

अब अधिकारी निर्णायक गेम लगा रहा था। उस तर्क में उपयोगी स्ट्रोक नहीं था। ध्यान जमाने की कोशिश की। भरत ने पूछा पिछला गेम खत्म होने पर सतह जाँची गई थी या नहीं। पुष्टि मिली। उसने स्वीकार किया। बहाना नहीं खोज रहा था। महत्वपूर्ण शर्त जाँच रहा था।

समझ आया कि ब्रेक में उसके खेल के बदलाव से अधिक चेहरा देखता रहा। उसने समय दोबारा खेलने की तैयारी में लगाया। लौटने पर अंतर पहली गेम की तालियों से छोटा था और स्वीकारना चाहता उससे बड़ा।

मैंने अपने बैठने की दूरी बदली। यह साधारण सुधार पहले भी कर सकता था। मगर मैं भाई की मनःस्थिति का अनुमान खेल रहा था, वास्तविक बोर्ड नहीं। अब मुझे अपनी उँगलियों और सामने की गोटियों पर लौटना पड़ा। वह तब तक तैयार बैठा था।

6. गेम मेहनत बना

निर्णायक गेम चमकदार सफाई से नहीं खुला। बोर्ड और छोटी बढ़त बँटती रही। भरत नियंत्रित था। मैं इतना सही था कि दबाव बना रहे। पहला गेम वाला तेज ओपनिंग फिर किया। इस बार उसने अपनी रफ्तार नहीं बढ़ाई। बदली व्यवस्था देखी और उपयोगी लाइन चुनी। एक कठिन कट चूका। मैंने अवसर लेकर बोर्ड जीता।

अगला उसका बेहतर था। पिछली चूक को रिलीज़ बदले बिना सामान्य पॉट पूरे किए। जिस भावनात्मक खुलाव की उम्मीद थी, नहीं मिला। एक समय कवर रास्ता खराब होने से क्वीन छोड़ी। मैंने अगले अवसर पर ली और कवर चूका। क्वीन नियम से लौटी। गलती मेरी थी। उसका इनकार केवल पहले वही गलती करने से बचा था।

दर्शक पीछे किसी को क्रम समझा रहा था। वे भरत के निर्णय पर बात कर रहे थे, छह साल बाहर रहने पर नहीं। तेज तालियों से अधिक मेरे अभिमान को लगा। स्कोर पास रहा। आगे दोनों के पास जीत संभव मानने की वजह थी। किसी के पास लापरवाही को हानिरहित दिखाने का अंतर नहीं।

भरत ने एक सामान्य पॉट के लिए स्ट्राइकर रखा। मैं उसके जल्दी करने की आशा करने लगा। यही पहली स्पष्ट स्वीकारोक्ति थी कि सही गति से खेलते उसे रोकना कठिन हो रहा है। मैंने यह किसी से कहा नहीं। अपनी बारी में गोटी पर ध्यान लगाया। मगर अब उसकी चूक की जरूरत महसूस हो रही थी, केवल अपनी श्रेष्ठता का भरोसा नहीं था।

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7. जिस बोर्ड पर नियंत्रण समझा

देर के एक बोर्ड में दोनों उन्नीस अंक पर थे। क्वीन सहित सही समाप्ति गेम तय कर सकती थी, मगर वास्तविक क्रम उसका साथ दे। मैंने अच्छी शुरुआत कर अपनी गोटियाँ घटाईं। भरत की अधिक असुविधाजनक फैली थीं। लगा महत्वाकांक्षी शॉट या निष्क्रिय बारी में चुनने को मजबूर कर सकता हूँ।

उसने तीसरा रास्ता पाया: नियंत्रित कट, जिससे कठिन गोटी डली और बाकी व्यवस्था उपयोगी रही। असाधारण नहीं दिखा। अगली बारी क्या हो सकती थी, बदल दिया। मैंने पॉट किया, अगला थोड़ा चूका। मेरी तीन गोटियाँ बचीं।

भरत इस बोर्ड में अपनी गोटी पहले डाल चुका था, इसलिए सही अवसर पर क्वीन लेने की अनुमति थी। उसने तुरंत नहीं ली। कवर और बाद में बची गोटियाँ देखीं। मैं उसे लाइनें तुलना करते देखता रहा।

वर्षों उसके धैर्य को धीमापन कहा था। सामने वह अवसर खत्म होने से पहले सूचना का उपयोग लग रहा था। उसने क्वीन डाली। फिर हाथ हटाया, दोबारा जमा और कवर की तैयारी की।

मैं चाहता था उसे पहले गेम की चूक याद आए। उसे वैसी चूकों के बाद का अभ्यास याद आ रहा था। यही अंतर मेरी पकड़ से बाहर था। मैं पुराने भरत को उकसा सकता था, लेकिन सामने बैठे खिलाड़ी ने उन पुराने क्षणों पर काम किया था। उसने उँगली रखी। मेरी तीन गोटियाँ अभी भी अपनी अगली बारी चाहती थीं।

8. कवर और आख़िरी गोटी

कवर गोटी गिरी। भरत ने क्वीन का क्रम सही पूरा किया। बोर्ड खत्म नहीं था। उसका काम बचा था और मेरी तीन गोटियाँ अगली बारी चाहती थीं। उसकी एक गोटी की सीधी लाइन थी, दूसरी को सावधान कट चाहिए। उसने क्रम देखा।

कठिन पहले ली। संपर्क साफ था, दूसरी उपलब्ध रही। जोर से बिखराव नहीं हुआ। अनिश्चितता की भरपाई ताकत से नहीं की। आख़िरी शॉट आसान था। मेरे लिए यही इंतज़ार खराब बनाता। असंभव होता तो हुनर की सामान्य सीमा से उम्मीद रखता। अब विश्वसनीय खिलाड़ी को बार बार अभ्यास की चीज़ पर चूकना चाहता था।

भरत ने स्ट्राइकर रखा और छोड़ा। आख़िरी गोटी पॉकेट में गई। स्ट्राइकर सतह पर रहा। अधिकारी ने बोर्ड जाँचा। मेरी तीन गोटियों से उसे तीन अंक मिले। क्वीन सही कवर की थी और बोर्ड उन्नीस से शुरू किया था, इसलिए तीन और। छह ने उसे पच्चीस पहुँचाया। निर्णायक गेम खत्म। मैच भी।

भरत स्कोर देख रहा था। मैं उन तीन गोटियों को जिन्हें दूसरी बारी में डालने की उम्मीद थी। वह बारी अब नहीं थी।

कमरे में तालियाँ हुईं। मैंने स्ट्राइकर छोड़ दिया और हाथ मेज़ से हटाए। हार की घोषणा से पहले ही गणना साफ थी। मेरे पास कोई सवाल था तो केवल वही कि इसे कितनी जल्दी साधारण खेल का परिणाम मानूँ, परिवार के अधिकार की अवज्ञा नहीं।

9. जो नाम दर्ज करना पड़ा

मैं अब भी क्लब सचिव था। अंतिम परिणाम रिकॉर्ड में जाना था। आयोजक ने प्रकाशन से पहले वर्तनी जाँचने को कहा। मैंने विजेता खाने में भाई का नाम लिखा। महीनों सूची को अपनी पसंद के उसके रूप के अनुसार व्यवस्थित करता रहा था। अब परिणाम ने जगह दी और मेरा काम सही दर्ज करना था।

पुष्टि के बाद भरत ने हाथ मिलाया। बोर्ड पर भाषण नहीं दिया। इससे सामान्य पारिवारिक झगड़ा बताना कठिन हुआ। पुरस्कार पर मैंने कहा वापसी ने चौंका दिया। बोलने को बुलाए जाने पर उसने माइक्रोफोन लिया और वाक्य का एक हिस्सा सुधारा।

“महीनों से अभ्यास कर रहा हूँ। जो नहीं आए, उनके लिए नया हो सकता है।”

कई सदस्य मेरी ओर देखे। उपयोगी उत्तर नहीं था। उसने ऊपर के समूह को नाम से धन्यवाद दिया। बहिष्कार को मजबूत बनाने के लिए धन्यवाद नहीं दिया। मेहनत उसके बावजूद हुई थी।

बाद में पुरानी टीम जगह पूछी। बोला खुलेगी तो प्रकाशित चयन प्रक्रिया देखेगा। अभ्यास के लोग पहले से हैं। जवाब दर्शक के लिए किया बदला नहीं था। मेरे द्वारा उसे अपनी अनुमति के बाहर खेल बनाना सिखाने का व्यावहारिक परिणाम था।

मैंने सिर हिलाया। उसे रोकने का दूसरा आग्रह नहीं किया। कुछ महीने पहले उसी दरवाज़े पर वह प्रवेश नियम पूछता था और मैं मेहमान की तरह उत्तर देता था। आज वह विजेता था, और उसे रखने के लिए मुझे वैसी स्पष्ट व्यवस्था चाहिए थी जो किसी और खिलाड़ी को देनी पड़ती।

10. जो फोन आखिर किया

अगली सुबह भरत को फोन किया। दबाव, परिवार की जिम्मेदारी और गलतफहमी पर व्याख्या तैयार थी। उसने उठाया तो छोड़ दी। वह शाम बताई जब माँ के पास रहने से मना किया था। फिर दूसरी। माना कि उसकी उपस्थिति कठिन बनाकर उसे अविश्वसनीय कहा। उसने बिना मुझे समाप्त करने में मदद दिए सुना।

“मालूम है,” बोला।

उत्तर उचित था। स्वीकार से उसे नई सूचना नहीं मिली। मेरे छिपने की एक जगह कम हुई। उसने फिर निकट होने का वादा नहीं किया। अगले सप्ताह चाय पर मिलने को कहा। उस शाम अभ्यास था। मैंने दिया समय स्वीकार किया।

क्लब में खिलाड़ी सूची सुधारी और पूरा फ़ाइनल परिणाम भेजा। ऐसी कटी तस्वीर नहीं थी जिससे उसकी जीत समारोह का उपहार लगे। बाद में आख़िरी बोर्ड की तीन गोटियाँ उपकरण बैग में मिलीं। मैंने अभ्यास सतह पर रखीं और अंतिम पॉट से पहले वाला कठिन कट कोशिश किया। चूक गया।

इस बार पाउडर या बोर्ड को दोष नहीं दिया। स्थिति फिर जमाई। ऊपर सूचना में भाई का नाम मेरे से आगे था। मैंने दूसरी कोशिश की। वह भी नहीं गिरी। तीसरी में संपर्क थोड़ा बेहतर था।

मुझे अचानक उसका छोटा उत्तर याद आया: हाँ, ऊपर अभ्यास करता हूँ। उसमें शर्म नहीं थी। काम था। मैंने अगली बारी के लिए स्ट्राइकर रखा। उसे इस परिणाम तक पहुँचाने वाली शामें अब मैं अपनी चूक के सामने थोड़ा समझ सकता था, भले देर से।

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