XX7: दो बहनें और वह हाथ जिसने सीट बदल दी
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XX7: दो बहनें और वह हाथ जिसने सीट बदल दी

काल्पनिक कहानी · पात्र और घटनाएँ कहानी का हिस्सा हैं।

XX7 की मौलिक रमी कहानी: पल्लवी अकेले प्रवेश करती है, दो क्वालिफायर पार करती है और चार खिलाड़ियों के फाइनल में छह लगातार पान को दो प्योर सीक्वेंस में बाँटती है।

1. XX7: वह बहन जिसने बगल में बैठना छोड़ दिया

आठ साल तक हर अभ्यास में पल्लवी रीना के बाईं ओर बैठती थी। वह पत्ते सजाती, कठिन हाथ लिखती और बाकी लोगों के चले जाने के बाद हर पाठ की अधूरी बात खोजती। कोई समूह की तारीफ करता तो रीना मुस्कराती। कोई सीक्वेंस नहीं समझता तो पल्लवी फिर से समझाना शुरू करती।

यह व्यवस्था एक पंजीकरण फॉर्म पर समाप्त हुई।

पल्लवी इकतीस वर्ष की थी, रीना सैंतीस की। नागपुर की एक पुरानी हाउसिंग सोसायटी के भोजन कक्ष में दोनों ने मिलकर शाम का रमी समूह बनाया था। लेकिन शहर की आमंत्रण प्रतियोगिता खुली तो रीना ने क्लब के नाम भेजते समय छोटी बहन का नाम छोड़ दिया। पूछने पर कहा कि पल्लवी खुद खेलने से अधिक खिलाड़ियों की सहायता करने में अच्छी है।

उसने यह बात उसी समय कही जब पल्लवी अभ्यास के रजिस्टर लेकर कमरे में आ रही थी।

नया सदस्य यह समझकर हँसा कि बहनों में स्नेह वाला मजाक हो रहा है। रीना ने हँसी चलने दी। फिर उसने पल्लवी से कहा कि प्रतियोगिता वाले दिन पीछे रहकर नए खिलाड़ियों की कक्षा ले। उसके हाथ की सूची में छह ऐसे लोग थे जिनकी पहली वैध घोषणा पल्लवी ने धैर्य से जाँची थी।

पल्लवी ने रजिस्टर मेज पर रखे। हर कवर पर अपनी लिखावट देखी। उसने कागज नहीं फाड़े। अपनी निजी कॉपी उठाई, अंतिम तारीख से पहले अलग पंजीकरण कराया और आयोजक से एक सवाल किया।

“पहले चरण में क्या मुझे बहन से अलग मेज मिल सकती है?”

आयोजक ने कहा कि ड्रॉ तय करेगा। पल्लवी ने स्वीकार किया। अब उसे उस जगह खेलना सीखना था जहाँ उसका अपना नाम उसे बैठाएगा।

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2. रसोई की खाली जगह

रीना ने बहस की उम्मीद की थी। पल्लवी की अनुपस्थिति ने उसे अधिक परेशान किया।

पहले सप्ताह अभ्यास सामान्य चला, जब तक एक खिलाड़ी ने नहीं पूछा कि उसके तेरह पत्तों से वैध हाथ क्यों नहीं बन रहा। रीना को एक प्योर सीक्वेंस, एक सेट और कुछ अच्छे जोड़ दिखे। उसने जल्दी समझाया। खिलाड़ी ने बताया कि प्रदर्शन में वही एक सात दो अलग समूहों में इस्तेमाल हो गया था।

पल्लवी होती तो पत्ते मेज छूने से पहले गलती पकड़ लेती।

रीना ने उदाहरण सुधारा। फिर बगल की खाली कुर्सी देखी और उस व्यक्ति पर नाराज हुई जो अब काम अपने ऊपर लेने के लिए मौजूद नहीं था।

माँ ने पूछा कि क्या बहनों में झगड़ा हुआ है। रीना ने पल्लवी को जरूरत से ज्यादा संवेदनशील बताया। पल्लवी ने अपने अलग पंजीकरण की बात कही और खाने के समय उस पर बहस करने से मना किया। माँ की अपॉइंटमेंट के संदेश दोनों अब भी भेजती थीं। दिलचस्प हाथों की तस्वीरें भेजना बंद हो गया।

यह कमी पल्लवी की अपेक्षा से अधिक चुभी। कोई उपयोगी जमावट दिखती तो उसका अंगूठा बहन की चैट की ओर बढ़ता। खेल का बड़ा हिस्सा उसने उसी मेज पर सीखा था। कोई बड़ा पत्ता एक ड्रॉ और रखना है या नहीं, यह सोचते समय अब भी रीना की आवाज सुनाई देती थी।

पहले स्वतंत्र अभ्यास मैच में उसने दो अलग-थलग तस्वीर वाले पत्ते बहुत देर पकड़े रखे। दूसरा सीक्वेंस नहीं बना और भारी नुकसान हुआ। बगल में कोई नहीं था जिसका भरोसा उधार ले सके। बस से लौटते समय उसने रीना के बारे में कुछ लिखने से पहले अपनी गलतियाँ लिखीं।

3. चार लोगों का अलग समूह

पल्लवी को छियालीस वर्ष की प्रयोगशाला सुपरवाइजर मोहिनी और दो ऐसे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास मिला जिन्हें बहनों के इतिहास में रुचि नहीं थी। फरीद बदलती शिफ्टों में काम करता था। उषा सीधे कह देती थी कि समझाना बहुत लंबा हो गया है।

वे पहले पूरा डील खेलते, फिर निर्णयों पर बात करते। जब पल्लवी सोच रही हो, कोई हाथ बढ़ाकर उसके पत्ते फिर से नहीं सजा सकता था। यह आजादी शुरू में असहज लगी। उसने दूसरों के फैसले समझाते हुए इतनी शामें बिताई थीं कि खुद अनिश्चित निर्णय लेना खुली कमजोरी जैसा लगता था।

मोहिनी समीक्षा में पहले वह जानकारी अलग करती जो उस समय दिखी थी, और वह जो हाथ खुलने के बाद पता चली। विरोधी खुले ढेर से छह उठाए तो उसके लिए छह का कुछ उपयोग हो सकता था। बाकी हाथ उससे दिखाई नहीं देने लगता। एक खिलाड़ी के लिए बेकार छोड़ा राजा आगे दूसरे के काम आ सकता था।

पल्लवी की कॉपी में दो कॉलम बने: उस समय उपलब्ध जानकारी, बाद में सामने आई जानकारी। दूसरा कॉलम बार-बार पहले के बारे में गढ़ी उसकी चतुर कहानियाँ तोड़ देता था।

वे बेतरतीब रखे हाथों से भी अभ्यास करते। रन सेट के बीच मिलाए जाते। छोटे पत्ते तस्वीर वाले पत्तों के पास रखे जाते। काम था पूरे तेरह भौतिक पत्ते देखना, संभावित समूह पहचानना और किसी एक पत्ते को दो बार गिने बिना योजना चुनना।

शुरू में पल्लवी पत्तों को साफ कतार बनाने की जल्दी करती। हर समीक्षा के बाद उषा जानबूझकर क्रम बिगाड़ देती। “हाथ खोजो,” वह कहती। “सुंदर कतार बाद में बन जाएगी।”

4. छह पत्तों का साथ रहना जरूरी नहीं

एक गुरुवार मोहिनी ने लगातार छह पान के पत्ते मेज पर रखे और पूछा कि पल्लवी उनसे कितने सीक्वेंस बना सकती है।

“एक लंबा सीक्वेंस,” उसने कहा, फिर रुक गई।

पत्ते आठ से राजा तक थे। उसने 8♥, 9♥ और 10♥ एक तरफ किए। दूसरी तरफ J♥, Q♥ और K♥ साथ रह गए। दो अलग प्राकृतिक रन बने थे। हर पत्ता एक बार इस्तेमाल हुआ। किसी समूह को जोकर की जरूरत नहीं थी।

मोहिनी ने बाकी हाथ बदल दिया। अब दूसरे सीक्वेंस की जगह दो अधूरे सेट थे। पल्लवी को सोचना था कि छह पान अलग बाँटने के बाद किसी सेट को बढ़ाने से पूरा घोषित हाथ बन सकता है या नहीं। बन सकता था। लंबी कतार को एक ही समूह बनाए रखने की जिद करती तो वह ऐसे दूसरे सीक्वेंस की तलाश करती रहती जो दूसरे बँटवारे में पहले से मौजूद था।

उन्होंने पूरी शाम यही आसान हल नहीं दोहराया। फरीद ने एक पान हटा दिया। उषा ने बीच में अंतर डाल दिया। मोहिनी ने अंक वही रखकर सूट बदल दिया। अचानक दिख रहे दो सीक्वेंस अब दो सीक्वेंस नहीं थे। हर बार वास्तविक पत्ते जाँचना जरूरी था।

पल्लवी विश्लेषण से पहले और बाद की जमावट की तस्वीरें लेने लगी। सुधार लंबे रन के बारे में नया अंधविश्वास नहीं था। पत्ते सही हों तो हाथ को फिर से बनाना सीखना था।

उस रात वह तस्वीर लगभग रीना को भेज ही देती। इसके बजाय अभ्यास समूह के लिए प्रिंट निकाला और अभ्यास के नीचे चारों नाम लिखे। अगले सप्ताह वह कागज हाशिये में तीन अलग टिप्पणियों के साथ वापस आया।

5. पहली मेज को उसकी कहानी से मतलब नहीं था

आमंत्रण प्रतियोगिता में दो क्वालिफाइंग चरण थे। प्रत्येक चरण में चार खिलाड़ियों की मेज पर छह डील होते। सबसे कम कुल पेनल्टी वाले खिलाड़ी घोषित स्थानों पर आगे जाते। अगले चरण में अंक नए सिरे से शुरू होते। फाइनल की अलग, पहले से प्रकाशित शर्त थी: चार फाइनलिस्टों में जो पहले दो वैध घोषणाएँ करेगा, वही चैंपियन होगा।

पल्लवी ने अंतिम शर्त दो बार पढ़ी। रीना हमेशा नियंत्रित कम नुकसान की श्रृंखला को महत्व देती थी। यहाँ फाइनल तक पहुँचने के लिए वह अनुशासन जरूरी था, लेकिन फाइनल जीतने के लिए दो पूरे हाथ चाहिए थे।

पहली मेज की शुरुआती डील में पल्लवी को अट्ठाईस पेनल्टी अंक मिले। वह दो संभावित रन के बीच चुन ही रही थी कि सामने वाले ने घोषणा कर दी। उसे रीना का काल्पनिक फैसला सुनाई दिया: समझाने में अच्छी, खेलने में धीमी।

दूसरे हाथ की बनावट खराब थी, लेकिन निर्णय बेहतर था। उसने अलग पड़ा बड़ा पत्ता जल्दी छोड़ा और एक साथ तीन सुंदर संभावनाएँ पूरी करने की कोशिश बंद की। दूसरे खिलाड़ी की घोषणा पर उसके बचे पत्तों की पेनल्टी आठ थी। उसने छोटी हार को विजय समझे बिना अंक लिखे।

चौथी डील वह जीती और छठी तक क्वालिफाई करने का मौका बचा रहा। आखिरी डील में बने वैध समूहों पर ध्यान दिया, खुले पत्तों का नुकसान घटाया और कुल मिलाकर अपनी मेज पर दूसरे स्थान से आगे पहुँची। आयोजक ने अगले चरण की सूची में उसका नाम लिखा।

हॉल के दूसरे छोर पर रीना पहले स्थान से निकली थी। पानी के पास दोनों मिलीं। रीना ने पूछा कि अगला चरण समझने में सहायता चाहिए क्या। पल्लवी ने कहा कि मोहिनी के साथ समीक्षा पहले ही तय कर चुकी है।

6. फाइनल से पहले महँगा पाठ

दूसरा क्वालिफायर लगभग पल्लवी की यात्रा समाप्त कर देता।

अच्छी शुरुआत के बाद वह ऐसे हाथ से चिपक गई जिसमें दो अधूरे सीक्वेंस और लगभग पूरा दिखता एक सेट था। उसने उपयोगी लगता पत्ता खींचा, दो बार जमावट बदली और अलग पड़ी रानी रख ली क्योंकि उससे जुड़ी संभावना छोड़ना अच्छा नहीं लग रहा था। अगली घोषणा किसी और की थी। बाहर पड़े बड़े पत्तों ने भारी पेनल्टी बना दी।

ब्रेक में उसने मोहिनी से यह दिलासा नहीं माँगा कि वह आगे जाने की हकदार है। दोनों ने उस रानी को देखा। उसे रखने के पक्ष में कोई खास जानकारी नहीं थी। पल्लवी एक विचार की रक्षा इसलिए कर रही थी क्योंकि वह विचार उसका अपना था।

बची डीलों में हर ड्रॉ के बाद उसने पूरा हाथ देखा। हर बड़ा पत्ता अपने आप नहीं फेंका। एक राजा प्राकृतिक रन पूरा करता था, इसलिए रहा। दूसरी डील का अकेला राजा गया। अंक से अधिक जरूरी उस वास्तविक पत्ते का काम था।

अंतिम क्वालिफाइंग डील में वैध घोषणा करके वह फाइनल पहुँची। रीना दूसरी मेज से आगे आई। चवालीस वर्ष के रेलवे क्लर्क केशव और तीस वर्ष की फिजियोथेरेपिस्ट इला बाकी दो सीटों पर पहुँचे।

पहली बार बहनें आमने-सामने बैठेंगी। कोई नया खिलाड़ी समझाने के लिए नहीं पुकारेगा और मेज पर साझा कॉपी नहीं होगी। रीना ने पल्लवी की कुर्सी लाने की पेशकश की। पल्लवी ने धन्यवाद दिया और कुर्सी खुद रखी।

फाइनल तब तक चलेगा जब तक किसी खिलाड़ी की दो वैध घोषणाएँ न हो जाएँ। चार सक्षम खिलाड़ी ऐसे मुकाबले में बैठे जिसकी लंबाई पहले कोई नहीं बता सकता था। पल्लवी ने अपने सामने पत्तों के लिए जगह साफ की और दोनों हाथ मेज के किनारे रखे।

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7. डराने की बारी सबको मिलती है

पहली डील रीना जीती।

उसने जल्दी प्योर सीक्वेंस बनाया, असुविधाजनक बड़े जोड़े को छोड़ा और बाकी खिलाड़ियों से पहले दूसरा रन पूरा कर लिया। घोषणा साफ थी। खुले समूह देखते हुए पल्लवी ने बहन की सबसे अच्छी खूबी पहचानी: सही योजना चुनने के बाद रीना दूसरी संभावनाओं की सुंदरता में उलझना रोक सकती थी।

उसे जरूरी दो घोषणाओं में से एक मिल गई। अगली ही डील जीतना जरूरी नहीं था। उसे सिर्फ इतना चाहिए था कि किसी और की दो जीत होने से पहले उसकी एक और हो जाए।

दूसरी डील केशव जीता। दोनों बहनों पर कमरे का ध्यान लगा देखकर भी उसने अपने पत्ते शांत सटीकता से सँभाले। उसके पूरे हाथ में चार पत्तों का प्राकृतिक सीक्वेंस था, जिसके बारे में दिखने से पहले किसी बहन के पास जानने का आधार नहीं था।

तीसरी पल्लवी जीती। उसने न फिट होने वाला बड़ा पत्ता छोड़ा, बाद में मिले पत्ते से वास्तविक रन बढ़ाया और घोषणा से पहले अंतिम तेरह जाँचे। रीना समूहों को जरूरत से कुछ अधिक देर देखती रही। फिर बोली, “वैध है।”

चौथी डील इला की रही। पहले तीन हारने के बाद उसने लुभावना जोड़ा छोड़कर दूसरा सीक्वेंस पूरा किया। अंतिम ड्रॉ नए हाथ में फिट हुआ। बहनें अपनी अगली योजना चुन रही थीं, तभी उसने पत्ते जाँचे, अनावश्यक पत्ता छोड़ा और समूह खोल दिए।

अब चारों खिलाड़ियों की एक-एक घोषणा थी। पाँचवीं डील किसी को भी खिताब दे सकती थी। दर्शकों ने आखिर सिर्फ बहनों की चर्चा बंद की। स्कोरबोर्ड पर चार नामों के सामने एक था। पल्लवी ने इला की जमावट याद रखी और नई डील के लिए हाथ खाली कर दिए।

8. लंबी कतार फिर सामने आई

पल्लवी का पाँचवाँ हाथ बिखरा हुआ शुरू हुआ। धीरे-धीरे सुधरा, लेकिन तुरंत साफ नहीं हुआ। उसके पास लगातार कुछ पान आए, फिर उनसे जुड़ने वाला एक और पान मिला। सामने रीना ने खुले ढेर से पत्ता लिया और उन पत्तों में रख दिया जिन्हें पल्लवी देख नहीं सकती थी।

पल्लवी ने चुनाव याद किया, उसके आसपास पूरा छिपा समूह नहीं गढ़ा। रीना करीब हो सकती थी। केशव उससे भी करीब हो सकता था। अभी जीती इला के चेहरे से कोई उपयोगी बात नहीं मिल रही थी।

आखिर पल्लवी के पास ये तेरह पत्ते थे: 8♥, 9♥, 10♥, J♥, Q♥, K♥; 3♣, 3♦, 3♠; 7♣, 7♦, 7♠; और A♦।

शुरू में उँगलियों ने छह पान साथ ही रखे। बगल में तीन-तीन पत्तों के दो सेट थे। इन समूहों से बाहर सिर्फ इक्का था। लेकिन वैध घोषणा में कम से कम दो सीक्वेंस चाहिए थे, जिनमें एक प्योर हो।

उसने पान अलग किए: 8♥–9♥–10♥ और J♥–Q♥–K♥। दोनों प्योर सीक्वेंस थे। दोनों सेट पहले से वैध थे। अब बारह पत्ते समूहों में थे और एक अनचाहा इक्का बचा था। कोई उपयोगी पत्ता एक समूह बढ़ा सकता था और इक्के को बाहर जाने दे सकता था।

अगला ड्रॉ 3♥ था।

वह लंबी कतार का कोई गायब पान पूरा नहीं करता था। वह बाकी तीन तिक्कों के साथ जुड़कर अलग सूटों वाला चार पत्तों का सेट बनाता था। पल्लवी ने उसे वहाँ रखा, दोनों अलग पान रन जाँचे और A♦ की ओर हाथ बढ़ाया।

रीना उसकी उँगलियों को देख रही थी। पत्ता छोड़ा जाने वाला था, यह दिख रहा था। उसका कारण पत्ते खुलने के बाद ही दिखेगा।

9. दो प्योर सीक्वेंस, दो सेट

पल्लवी ने A♦ छोड़ा और घोषणा की।

उसने पहले 8♥–9♥–10♥ दिखाए, फिर J♥–Q♥–K♥। बगल में 3♣–3♦–3♠–3♥ और 7♣–7♦–7♠ रखे। तीन और तीन और चार और तीन: तेरह वास्तविक पत्ते, हर एक सिर्फ एक बार इस्तेमाल हुआ। पान के दोनों समूह अलग प्योर सीक्वेंस थे। दोनों सेट में समान अंक और अलग सूट थे।

अधिकारी ने हाथ जाँचा और घोषणा की पुष्टि की। पल्लवी की दूसरी जीत ने फाइनल समाप्त कर दिया। रीना, केशव और इला की एक-एक थी। पल्लवी की दो।

कुछ क्षण रीना छह पान को ऐसे देखती रही जैसे कोई परिचित दरवाजा दूसरी जगह पहुँच गया हो। वर्षों पहले उसने पल्लवी को सीक्वेंस पहचानना सिखाया था। वर्षों की आदत और अधिकार से उसने खुद को यह उम्मीद भी सिखाई थी कि छोटी बहन पत्ते व्यवस्थित करेगी और निष्कर्ष उसे मिलेगा।

केशव ने चैंपियन को बधाई देकर चुप्पी तोड़ी। इला झुककर पान का बँटवारा देखने लगी, फिर मुस्कराकर पल्लवी का हाथ पकड़ा। रीना तब तक बैठी रही जब तक अधिकारी ने परिणाम रजिस्टर की पुष्टि करने को नहीं कहा।

उसने अपना नाम लिखा। फिर ऊपर की पंक्ति देखी, जहाँ पल्लवी ने किसी क्लब का उपसर्ग लगाए बिना और किसी दूसरे की स्वीकृति के लिए जगह छोड़े बिना दस्तखत किए थे।

“यह जमावट कब देखने लगी?” रीना ने पूछा।

“आज से पहले,” पल्लवी ने कहा।

उत्तर क्रूर नहीं था। लेकिन उसमें रीना के लिए खुद को जोड़ने की जगह नहीं थी। अभ्यास ऐसे कमरे में हुआ था जहाँ वह कभी नहीं गई थी, ऐसे लोगों के साथ जिनके नाम उसने कभी पूछे नहीं थे।

10. कॉपी दूसरे हाथ में

आयोजक ने तैयारी में सहायता देने वालों के नाम पूछे तो पल्लवी ने मोहिनी, फरीद और उषा से शुरुआत की। फिर उन स्वयंसेवकों के नाम लिए जिन्होंने पुराने सोसायटी समूह को चलाए रखा था: कमरा खोलने वाले, लाइट ठीक करने वाले, और दोनों बहनें न आ सकें तो पहली उलझी डील सिखाने वाले लोग।

रीना वर्षों से उस समूह को अपनी चलाई हुई चीज बताती आई थी। नाम सुनते हुए उसे सुनाई दिया कि “मैं” शब्द के अंदर कितना कुछ गायब हो गया था।

पल्लवी ने बहन को रस्मी आलिंगन के लिए आगे नहीं बुलाया। परिणाम पत्र लिया, कॉपी उठाई और बाकी फाइनलिस्टों के साथ फोटो में खड़ी हुई। हर खिलाड़ी अपने नाम के पास था।

एक सप्ताह बाद रीना पुराने समूह के रजिस्टर लेकर नए अभ्यास कक्ष में आई। उसने स्वयंसेवकों के नाम सत्रों के रिकॉर्ड में जोड़े थे और मूल रजिस्टर लाई थी ताकि पल्लवी जाँच सके। कुछ नाम अब भी छूटे थे। पल्लवी ने दो तारीखों पर उँगली रखी। रीना ने छूटे नाम अपने हाथ से लिखे।

रीना ने पूछा कि समूह की घोषणा में बहनों की साझा जीत लिख सकते हैं क्या। पल्लवी ने फाइनल के अलग स्कोर और सुधरा रजिस्टर सामने रखा।

“हमारा काम इस किताब में है। यह खिताब इस शीट पर है।”

रीना ने दोनों पढ़े। घोषणा में चैंपियन के पास पल्लवी का नाम लिखा, फिर समूह के विवरण के नीचे स्वयंसेवकों का योगदान। दोनों की तरफ से हस्ताक्षर करने के बजाय कलम आगे दी। पल्लवी ने तारीखें जाँचकर अपने दस्तखत किए। पहली बार दोनों रिकॉर्ड किसी बहन को मिटाए बिना एक बात कह रहे थे।

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