सेबेस्टियन बोतल खोल रहे थे, तभी बेटे ने कहा कि उसे कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ी।
ढक्कन फिसला। उन्होंने दोबारा कोशिश की, जबकि वह खुल चुका था।
काउंटर के ऊपर टेलीविजन पर एड्रियन हल्के रंग के सोफे पर अपने ससुर के साथ बैठा था। साक्षात्कार लेने वाला बचपन की सुविधाओं और केवल क्रिकेट पर ध्यान देने की आजादी के बारे में पूछ रहा था।
“खुशकिस्मत था,” एड्रियन बोला। “अच्छे स्कूल, ठीक कोचिंग, हर चीज का इंतजाम था। डैड हमेशा कहते थे, बस खेल पर ध्यान दो।”
वह पास बैठे आदमी की तरफ मुड़ा। काउंटर के आखिर में पुराने ग्राहक ने प्लेट पर नमक छिड़कना रोक दिया। सेबेस्टियन ने बोतल रख दी। ध्यान नहीं रहा कि गिलास दिया ही नहीं है।
अगला सवाल था कि परिवार की कारोबारी पृष्ठभूमि से पेशेवर खेल समझने में मदद मिली क्या। ससुर जवाब देने लगे।
वास्को के उस छोटे बार का जिक्र नहीं हुआ जहाँ सेबेस्टियन के अँगूठे पर अभी बोतल खोलने वाले औजार से दूसरी खरोंच लगी थी।
* * *
जगह का नाम लास्ट ओवर था। सेबेस्टियन और उनकी पत्नी लूर्देस उनतीस साल से चला रहे थे। टेलीविजन क्रिकेट के लिए था, रेडियो सुबह के लिए। पंखा बदलना चाहिए या नहीं, इसकी बहस तीन बरसातों से चल रही थी।
बेटा स्कूल से पहले आखिरी मेज पर होमवर्क करता था। लूर्देस सामान देने वालों के भुगतान गिनते हुए उसकी वर्तनी सुधारती थीं। सेबेस्टियन अतिरिक्त चाबी रखते थे क्योंकि एड्रियन अपनी अक्सर खो देता था।
कोचिंग के पैसे अपने आप इंतजाम हो जाने से नहीं आए थे। देर तक खुली शामों, टलती मरम्मत और उस उधार से आए थे जिसकी बात दोनों धीरे करते थे, ताकि लड़का खुद को खर्च का बिल न समझे।
उसमें प्रतिभा थी। इसलिए खर्च सही लगना आसान और रोकना कठिन हो गया। बेहतर टीमों के साथ जाने लगा तो सेबेस्टियन अँधेरे में बस तक छोड़ते और लौटकर बार खोलते। एक बार सिंक के पास खड़े-खड़े सो गए। लूर्देस ने गिरने से पहले गिलास पकड़ लिया।
दोनों ने उस दृश्य को सार्वजनिक जीवन-कथा का हिस्सा बनाने को नहीं कहा था। उसकी जगह सोफा आ जाएगा, यह भी नहीं सोचा था।
* * *
कई साल ग्राहक कुछ इस कारण भी आते थे कि दीवार पर एड्रियन की तस्वीरें लगी थीं। किसी को गर्व था। कोई कहना चाहता था कि उसके पिता को जानता है। सेबेस्टियन दोनों बातों का आनंद लूर्देस से ज्यादा लेते थे। मौसम के सवाल को कैच की कहानी बना सकते थे।
लूर्देस कभी याद दिलातीं कि दूसरे लोगों के बच्चे भी कुछ करते हैं। वह हँसते और फिर कहानी आगे बढ़ाते।
एड्रियन की शादी तनया से हुई तो नया सूट बनवाया। उसके पिता का होटल और मेहमाननवाजी का सफल कारोबार था। सूट में सेबेस्टियन को गर्मी लगती थी। स्वागत समारोह में खुले दरवाजे के पास खड़े होने का बहाना खोजते रहे।
कैमरों के सामने एड्रियन ने ससुर का परिचय उस व्यक्ति के तौर पर दिया जिसने सब संभव किया। फोटोग्राफर ने सेबेस्टियन को साथ आने को कहा तो प्रचार सहायक बोली, पहले मुख्य परिवार की तस्वीर हो रही है।
सेबेस्टियन पीछे हट गए। लूर्देस से कहा, बुरा नहीं लगा। उन्होंने नया सूट देखा और कहा, यह बात दोबारा मत कहना।
* * *
बाद में लास्ट ओवर के बाहर लगी शादी की तस्वीर एड्रियन के दफ्तर से आई थी। उसमें एड्रियन, तनया और उसके माता-पिता थे। किनारे पर सेबेस्टियन का हाथ बेटे के कंधे पर बचा था। तस्वीर इस तरह काटी गई थी कि सेबेस्टियन खुद उसमें दिखाई नहीं देते थे।
उन्होंने देखा था। कैसे नहीं देखते?
खुद को समझाया कि फ्रेम के आकार के लिए ऐसा किया होगा। फिर भी टाँग दी। लूर्देस ने काँच साफ करने से मना कर दिया। ग्यारह महीने वह खुद करते रहे। कपड़ा लेकर ऊपर खिंचते और ग्राहक देखते।
टेलीविजन वाला साक्षात्कार सुनकर वही याद असहनीय हो गई। पुराने ग्राहक पिंटो ने पूछा, आवाज कम कर दें? सेबेस्टियन ने सिर हिला दिया। सुनना चाहते थे कि कार्यक्रम खत्म होने से पहले एड्रियन उनका जिक्र करता है या नहीं।
नहीं किया। विज्ञापन के बीच एक युवा ग्राहक ने छिपी पारिवारिक दौलत पर मजाक किया। इतनी हँसी नहीं आई कि बात हल्की हो सके।
सेबेस्टियन आखिर छूटा हुआ गिलास ले आए।
* * *
बंद करने के बाद बेटे को फोन किया। एड्रियन ने कार से उठाया। बोला, इंटरव्यू उसके करियर के नए दौर के बारे में था, इतिहास की पूरी कक्षा नहीं।
“तुमने डैड कहा।”
“मेरे ससुर हैं।”
“जानते थे वे क्या पूछ रहे थे।”
एड्रियन ने कहा, टेलीविजन को साफ कहानी चाहिए। छोटा बार उसकी टीम की बनाई छवि उलझाता है। शराब बेचने वाली जगहों के बारे में लोग धारणाएँ बना लेते हैं।
सेबेस्टियन ने दोपहर साफ की हुई शेल्फ देखी।
“फीस भरनी होती थी तब धारणाएँ नहीं बनती थीं।”
बेटे ने साँस छोड़ी।
“हर सफलता को अपना कर्ज मत बना दीजिए।”
सेबेस्टियन चुप हो गए। जानते थे कि अपने किए का जिक्र कभी ज्यादा कर देते हैं। गर्व माँग में बदल सकता है। लेकिन टेलीविजन पर बोला वाक्य फिर भी झूठ था।
उन्होंने सुधारने को कहा। बेटे ने कहा, व्यस्तता कम होगी तो बात करेंगे।
* * *
अगली सुबह सेबेस्टियन ने शादी वाली तस्वीर उतार ली। एक पल समझ नहीं आया कहाँ रखें। गोदाम में रखना गुस्सा लगता था। शयनकक्ष में रखना उसी अपमान की रखवाली का दूसरा तरीका।
लूर्देस ने लेकर अलमारी में रख दी। बाद में तय करेंगे।
“बैठो,” उन्होंने कहा।
वह उसी आखिरी मेज पर बैठे जहाँ एड्रियन होमवर्क करता था। लूर्देस ने विस्तार की पुरानी योजना सामने रखी। पास का खाली भंडार-कमरा जरूरी इंतजाम और काम पूरा होने पर उनके परिसर का हिस्सा बन सकता था। हवा बेहतर आएगी, बैठने की जगह बढ़ेगी और वह दोपहर का खाना चला सकेंगी जिसे शाम की तैयारी से लड़कर बनाना पड़ता था।
कोचिंग के लिए टाला था। फिर यात्राओं के लिए। फिर शादी के लिए।
सेबेस्टियन ने कहा, पैसे पूरे नहीं हैं।
“तो अपना देखो कि क्या है,” लूर्देस बोलीं। “वह क्या भेज सकता है, यह नहीं।”
* * *
उनके पास वह संग्रह भी था जिसे सेबेस्टियन ने एड्रियन के जन्म से पहले शुरू किया था। हस्ताक्षर वाले बल्ले, कार्यक्रम पुस्तिकाएँ, पुरानी तस्वीरें और कभी सामर्थ्य होने पर दूसरे संग्रहकर्ताओं से खरीदी चीजें।
कुछ की बाजार में कीमत थी। कुछ केवल उनके लिए मूल्यवान थीं। दोनों में फर्क जानते थे, कभी न जानने का नाटक करते थे। बरसों से संग्रह ताले वाली अलमारी में था। सोचा था पूरा बेटे को देंगे। एड्रियन ने एक बार कहा था कि बार से ज्यादा अच्छे किसी दफ्तर में लगेंगे।
अब सेबेस्टियन ने अलमारी खोलकर सेवानिवृत्त खिलाड़ी के हस्ताक्षर वाला बल्ला निकाला। खरीदने का दिन याद था। बेचने वाले की रसोई। बात करते रह जाने से छूटी बस।
बेचना नहीं चाहते थे। लूर्देस ने आसान फैसला होने का दावा नहीं किया। कपड़ा लाईं। दोनों एक-एक चीज मेज पर रखते गए।
एड्रियन की अपनी ट्रॉफियाँ नहीं छुईं। उसकी थीं। बेचने के लिए जिन चीजों को देख रहे थे, वे सेबेस्टियन का निजी संग्रह था। कहाँ से लिया था, उसका रिकॉर्ड भी था।
* * *
सेबेस्टियन ने कोई अभियान नहीं बनाया था। तस्वीरें फिर भी लोगों तक पहुँचने लगीं। पिंटो ने बार के शुरुआती वर्षों की तस्वीरें सँभाल रखी थीं। स्थानीय पत्रकार मीना बंदरगाह के आसपास बदलावों के बीच टिके मोहल्ले के कारोबारों पर लिख रही थी। एड्रियन का इंटरव्यू देखा था। उस कहानी और ग्राहकों की बताई कहानी का अंतर पूछा।
पिंटो ने कहा, कुछ छापने से पहले परिवार से पूछे।
सेबेस्टियन लगभग मना कर चुके थे। नहीं चाहते थे कि अजनबी उनकी निराशाएँ पुरानी बोतलों की तरह इकट्ठी करें। लूर्देस ने मीना से पूछा कि लेख में क्या होगा। उसने सवाल दिखाए।
उन्होंने कारोबार और बेटे के शुरुआती क्रिकेट को सहारा देने वाले काम पर बात करने की सहमति दी। असंबंधित निजी रिकॉर्ड नहीं दिए। तस्वीरों की तारीखें थीं, लोगों को पहचानने वाले मौजूद थे। जिन हिस्सों पर बात की, उन्हें स्कूल का पत्राचार और पुराना हिसाब सहारा देते थे। मीना ने एड्रियन के प्रतिनिधियों से जवाब माँगा।
सेबेस्टियन ने जोर दिया कि लूर्देस का काम भी आए। अपनी कहानियों में वह खुद भी उन्हें बहुत समय से छोड़ते आए थे।
* * *
लेख छपने से पहले एड्रियन का फोन आया।
“लोगों को हथियार क्यों दे रहे हैं?”
सेबेस्टियन इमारत के काम का अनुमान देख रहे थे।
“उसने पूछा यहाँ क्या किया।”
“पता है उसका क्या बनाएगी।”
“तुमने क्या बनाया, पता है।”
बेटे ने कहा, पुराना उधार चुका दिया गया था। सेबेस्टियन ने माना। कारोबार से बरसों पहले चुका दिया गया था। इसका मतलब यह नहीं था कि कभी लिया ही नहीं।
तनया फोन पर आई। बोली, समझती है कि भावनाएँ आहत हुई हैं, लेकिन खबर का असर चल रही बातचीतों पर पड़ सकता है।
लूर्देस ने फोन लिया।
“किस तथ्य को बदलने को कह रही हो?”
तनया ने कहा, वह मतलब नहीं है।
“तो अपने पति को पत्रकार का जवाब देने दो।”
उन्होंने फोन सेबेस्टियन को वापस दिया। एड्रियन को ऐसी कोई और बात नहीं कहनी थी जो दोनों सुनें।
* * *
मीना के लेख में जवान सेबेस्टियन की तस्वीर थी। दो किट बैग उठाए थे। पास बस के बगल में एड्रियन नाश्ता कर रहा था। दूसरी में लूर्देस काउंटर के पीछे थीं। हिसाब के पास स्कूल की किताबें खुली थीं। नीचे उनका नाम था।
लेख ने एड्रियन की प्रतिभा कम नहीं की। बताया कि उस प्रतिभा को मैदान तक पहुँचाने में परिवार ने क्या खर्च किया।
साक्षात्कार बनाने वाली कंपनी ने सामग्री जाँची और ऑनलाइन संस्करण में स्पष्टीकरण जोड़ा। एड्रियन का प्रचार परिचय सुधरा। बचपन को ससुर के कारोबार ने सहारा दिया था, ऐसा संकेत हटा दिया गया।
जिन लोगों ने चमकदार इंटरव्यू साझा किया था, उन्होंने सुधार भी साझा किया। कुछ ने एड्रियन का ऐसा मजाक उड़ाया जिससे सेबेस्टियन को खुशी नहीं हुई। कुछ लास्ट ओवर में फोन लेकर आए, मानो वह उनके लिए नाराज पिता का अभिनय करेंगे।
उन्होंने काउंटर की रिकॉर्डिंग रोकने को कहा। फिर उन ग्राहकों को सामान दिया जिन्होंने वास्तव में कुछ मँगाया था।
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बिक्री में सुधार वाली खबर से ज्यादा समय लगा। पहला खरीदार प्रचार के कारण पूरी अलमारी सस्ते में लेना चाहता था। सेबेस्टियन ने लौटा दिया। एक विशेषज्ञ ने चीजों के बारे में प्रमाणित की जा सकने वाली बातों और उचित माँगी जा सकने वाली कीमतों को समझने में मदद की। जिन दो वस्तुओं को वह कीमती मानते थे, उनकी कीमत उम्मीद से बहुत कम थी।
नवीनीकरण की योजना छोटी की। फिर लूर्देस और ठेकेदार के साथ देखी। हवा और सुरक्षित आने-जाने का काम रखा। सजावट का पैनल टाला। साधारण कुर्सियाँ चुनीं।
बिक्री के तय खर्चों के बाद तीन हस्ताक्षर वाले बल्लों और दो कार्यक्रम पुस्तिकाओं से दो लाख चालीस हजार रुपये आए।
सेबेस्टियन ने विवरण में रकम गिनी। फिर अलमारी में खाली हुए सहारे गिने। लूर्देस पास बैठी रहीं, जब तक बाकी सामान रखने के लिए तैयार नहीं हुए। साथ लिए फैसले के हर हिस्से से खुश होने को नहीं कहा।
अगली सुबह उन्होंने काम की पहली तय किस्त दी।
* * *
अगले शनिवार एड्रियन वीडियो बनाने वाली टीम के प्रबंधक के साथ आया। सेबेस्टियन तुरंत समझ गए कि अचानक दिखने वाली इस मुलाकात की योजना बनी है। बेटे ने पुरानी टीम की जैकेट पहनी थी, जो बरसों से घर पहनकर नहीं आया था। प्रबंधक नमस्ते से पहले रोशनी देख रहा था।
लूर्देस ने पूछा, कैमरा लाए हैं?
प्रबंधक ने कहा, बस स्वाभाविक पारिवारिक दृश्य चाहिए। घर लौटने की छोटी फिल्म हाल की खबरों का रुख ठीक कर सकती है।
“कैसा रुख?” लूर्देस ने पूछा।
एड्रियन बोला, मदद करने आए व्यक्ति पर हमला किए बिना बात कर सकते हैं। सेबेस्टियन ने प्रबंधक को देखा।
“हमारी मदद करने को किसने कहा?”
आदमी ने एड्रियन की तरफ देखा। उत्तर मिल गया।
सेबेस्टियन ने कहा, शूटिंग नहीं होगी। बेटे को माता-पिता से बात करनी है तो खाने पर रुक सकता है। प्रबंधक अपने खाने का अलग इंतजाम कर सकता है।
दोनों नहीं रुके।
* * *
जाने से पहले एड्रियन ने आधी खाली अलमारी देखी।
“ऊपर वाला हस्ताक्षर वाला बल्ला कहाँ है?”
“बेच दिया।”
वह देखता रह गया।
“बताना चाहिए था। अकादमी के उद्घाटन में काम आता।”
सेबेस्टियन को बेचने वाले की रसोई फिर याद आई। छूटी हुई बस। वे साल जिनमें सोचा था कि एड्रियन कभी उस कहानी को सुनना चाहेगा।
“तुम्हारे उद्घाटन का इंतजार नहीं कर रहा था वह।”
एड्रियन ने पूछा, मरम्मत के लिए कितने चाहिए? वह और ससुर जो संस्था बना रहे हैं, उससे काम जोड़ा जाए तो पाँच लाख का इंतजाम कर सकता है। नई जगह पर संस्था का नाम होगा। शुरुआत के कार्यक्रम में दिखाई जाएगी।
लूर्देस ने जवाब देने से पहले शर्तें देखने को कहा। एड्रियन बोला, बेटे की तरह बात कर रहा है, व्यापारी की तरह नहीं।
“तो नाम अभी से क्यों तय है?” उन्होंने पूछा।
वह कुर्सी से जैकेट उठाने लगा। विदाई हल्की करने के लिए सेबेस्टियन उसके पीछे बाहर नहीं गए।
* * *
परिसर के इंतजाम और जरूरी अनुमतियाँ पूरी होने के बाद काम शुरू हुआ। कई हफ्ते लास्ट ओवर में सुबह धूल की गंध रहती थी। सेबेस्टियन सामान हटाते, सॉकेट की जगह पर बहस करते और समझते कि कुर्सी चुनना तब मुश्किल है जब एक मिनट से ज्यादा बैठकर देखना हो।
लूर्देस दोपहर के खाने के व्यंजन थोड़ी मात्रा में आजमातीं। पिंटो ने एक की शिकायत की। अगले दिन लौटकर पूछा, आज फिर बन रहा है क्या?
जहाँ सुरक्षित था, इस्तेमाल हो सकने वाले हिस्से से काम जारी रखा। जिन दिनों काम के कारण जरूरी था, बंद किया। छूटी आमदनी भी खर्च का हिस्सा थी। सेबेस्टियन ने उसे लिखा। ऐसा नहीं मान लिया कि पहले हथौड़े से ही मरम्मत अपने पैसे निकालने लगी है।
एक दोपहर एड्रियन के दफ्तर से परिवार की तस्वीरों का डिब्बा आया। कोई संदेश नहीं था। लूर्देस ने कई पहचानीं जो शादी के बाद उन्हें मिली ही नहीं थीं।
पुराना फ्रेम खोले बिना उन्होंने तस्वीरें रख दीं।
* * *
नया कमरा खुलने वाले पहले रविवार मीना पूरा हुआ काम खींचने आई। कारोबार पर छोटा अगला लेख वादा किया था, पारिवारिक आरोपों का दूसरा दौर नहीं।
सेबेस्टियन ने दाढ़ी दो बार बनाई क्योंकि एक जगह छूट गई थी। लूर्देस ने साफ कमीज का कॉलर बार-बार छूने से रोका।
साढ़े ग्यारह बजे एड्रियन अकेला आया। लोगों ने देखा। एक ग्राहक ने फोन उठाया। लूर्देस ने दरवाजा न रोकने को कहा। एड्रियन पुराने ग्राहकों से सँभलकर मिला। आम तौर पर उससे पहले पहुँच जाने वाले लोगों के बिना उम्र कुछ ज्यादा लग रही थी।
मीना ने पूछा, माता-पिता के नए कमरे पर कुछ कहना चाहता है? उसने कहा, खुशी है कि परिवार इसे कर सका।
“आपने आर्थिक मदद की?” उसने पूछा।
एड्रियन ने सेबेस्टियन की तरफ देखा। पुराना निमंत्रण था—जवाब सुविधाजनक बना दीजिए, लोगों को उदार बात मान लेने दीजिए।
सेबेस्टियन ने हाथ की ट्रे रख दी।
* * *
“लूर्देस और मैंने पैसे दिए,” उन्होंने कहा। “संग्रह का हिस्सा बेचा। अपनी बचत लगाई। काम की योजना हम दोनों ने बनाई।”
आवाज स्थिर थी। कोचिंग की फीस नहीं गिनाई। कमरे को पुराना झगड़ा फिर सुनने पर मजबूर नहीं किया।
मीना ने उत्तर लिखा। फिर लूर्देस से पूछा, उनके लिए किस हिस्से का सबसे ज्यादा महत्व था?
“रसोई की जगह,” लूर्देस बोलीं और दिखाने ले गईं।
एड्रियन नई मेजों के पास खड़ा था। एक पल सेबेस्टियन को लगा, चला जाएगा। इसके बजाय पूछा, माँ ने खाना खाया है?
“अभी नहीं।”
“मदद करूँ?”
सेबेस्टियन ने साफ गिलासों की तरफ इशारा किया।
“अंदर रखने हैं। रखने से पहले पूछ लेना कहाँ।”
एड्रियन उठाकर ले गया। किसी ने नए कमरे के पीछे खड़े व्यक्ति के तौर पर उसका परिचय नहीं दिया।
* * *
वह खाने पर रुका। भोजन, काम और बीमार रहे रिश्तेदार की बात हुई। बाकी बातें इससे नहीं सुलझीं। टेलीविजन वाला इंटरव्यू कैसे हुआ था, समझाने लगा तो लूर्देस ने कहा, किसी और दिन बात करेंगे जब ग्राहक न सुन रहे हों। भूलने की पेशकश नहीं थी। बातचीत की जगह वह तय कर रही थीं।
जाते समय एड्रियन ने पूछा, अगला मैच देखेंगे?
सेबेस्टियन ने कहा, पहले से कुछ तय हुआ नहीं टकराया तो टेलीविजन चलेगा। बेटे ने यह पूछे बिना जवाब मान लिया कि उससे महत्वपूर्ण क्या हो सकता है।
शाम को सेबेस्टियन ने बाहर फीका बोर्ड हटाकर नया लगाया, जिसे लूर्देस ने जाँचा था। लास्ट ओवर के नीचे दोनों के नाम थे। बगल में एड्रियन की तस्वीर नहीं थी।
अंदर नया पंखा भरी मेजों पर हवा पहुँचा रहा था। सेबेस्टियन जरूरत से ज्यादा देर नीचे खड़े रहे। उस कमरे को देखते रहे जिसे आधी कामकाजी जिंदगी टालते आए थे।
काउंटर से लूर्देस ने बुलाया। चार नंबर मेज पर बिल चाहिए था।
उन्होंने उठाया और देने चले गए।