1. YY GAME: एक गेम पीछे
दीवार पर बाहर खेले पहले चरण का परिणाम था: साजिद और पॉल एक गेम, अरुण और केतन दो। चार सप्ताह बाद वापसी का मुकाबला शुरू हुआ तो नामों के साथ वह कमी मौजूद थी।
स्थानीय डबल्स चुनौती का प्रकाशित प्रारूप दो चरणों वाला था। हर चरण बेस्ट ऑफ थ्री गेम। दोनों चरणों के कुल में अधिक गेम जीतने वाला जोड़ा विजेता। कुल बराबर होता तो पहले से तय अलग निर्णायक गेम आता।
साजिद और पॉल अतिरिक्त गेम के बिना परिणाम केवल तभी तय कर सकते थे जब वापसी का चरण दो-शून्य जीतें।
पॉल ने सूचना दो बार पढ़ी। अड़तीस साल का था। गोदाम में बदलती पालियों में काम करता था। एक साल दिखावा किया था कि साजिद उसके फोन का उत्तर देता है या नहीं, अब फर्क नहीं पड़ता।
साजिद छत्तीस का था। वही स्ट्राइकर केस लाया था जो झगड़े से पहले इस्तेमाल करते थे। जिप में छोटी डोरी लगाकर मरम्मत की थी।
पुराना समन्वयक गणेश विरोधी जोड़े के पास खड़ा था। उसने कहा था कि इनकी दोस्ती समय-सारिणी असुविधाजनक होने तक ही टिकती है। अपमान में थोड़ा सच था। दोनों ने एक-दूसरे को निराश किया था। गणेश ने एक असफल यात्रा को उनकी क्षमता का स्थायी विवरण बना दिया था।
अरुण ने पहले जीत चुके खिलाड़ी की शांति से स्ट्राइकर रखा। केतन ने सतह जाँची। भावुक पुनर्मिलन आसान बनाने का इरादा किसी का नहीं था।
पॉल साजिद के सामने बैठा। जगह, गोटियाँ और मैच क्रम जाँचे। इस बार कोई महत्वपूर्ण बात अनुमान पर नहीं छोड़ी जाएगी।
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2. वह यात्रा जो पूरी नहीं हुई
पिछले साल रात की बस का संपर्क छूटने से समय पर क्वालिफायर पहुँचने का मौका गया था। साजिद समझता था कि पॉल ने बदला प्रस्थान स्थान पुष्टि कर लिया है। पॉल समझता था कि साजिद ने आयोजक का संदेश पढ़ लिया है।
किसी ने दूसरे से नहीं पूछा।
प्रवेश समय बंद होने के बाद पहुँचे। गणेश ने नियम अनुसार पंजीकृत विकल्प उतार दिए थे। बात वहीं समाप्त कर सकता था। इसके बजाय इंतजार करते खिलाड़ियों से बोला कि बस नहीं सँभाल सकते तो डबल्स बोर्ड सँभालने का नाटक क्यों करते हैं। उनके सामने ही बिना इस्तेमाल की टीम कमीजें दूसरे जोड़े को दे दीं।
लौटते समय पॉल ने साजिद को दोष दिया। साजिद ने कहा कि पॉल को पहुँचने से ज्यादा खुद सही होना पसंद है। बहस तब तक चली जब तक कंडक्टर ने धीमा बोलने को नहीं कहा। फिर साथ खेलना बंद कर दिया।
पॉल मनोरंजन कमरे में अकेले अभ्यास करता और साजिद की वह टोक याद आती जो लापरवाह क्वीन प्रयास पर मिलती थी। साजिद सिंगल्स खेलने लगा। बोर्ड जीतने के बाद भी सामने खाली जगह नहीं भरती थी।
सबसे खराब मुलाकात पुराने क्लब के बाहर हुई। गणेश ने साजिद से अतिरिक्त बोर्ड अंदर ले जाने को कहा। फिर आगंतुक से बोला कि पूर्व खिलाड़ी ढुलाई में अब भी उपयोगी हैं।
पॉल पास था। साजिद को बोर्ड रखकर जाते देखा। दो दिन खुद से कहा कि बोलना असहज होता। तीसरे दिन फोन किया। बस से शुरुआत नहीं की।
“मुझे कुछ कहना चाहिए था,” कहा।
3. अभ्यास से पहले समझौता
वापसी का पहला सत्र असहज था। दोनों को लगता कि दूसरा चूके स्ट्रोक को पुरानी यात्रा का प्रमाण बना देगा।
इसके बजाय व्यावहारिक जिम्मेदारियाँ लिखीं। पॉल सीधे यात्रा विवरण पुष्टि करेगा। साजिद प्रवेश कागज जाँचेगा। निकलने से पहले दोनों एक ही जानकारी देखेंगे। बाद में कोई नहीं कह सकेगा कि मुझे लगा तुम्हें पता है।
खेल के लिए अलग समझौता था। गलतियों की समीक्षा खेल के बाद होगी। प्रतियोगिता में साथी की चाल को इशारे या टिप्पणी से निर्देशित नहीं करेंगे।
अलग और साथ दोनों तरह अभ्यास किया। पॉल क्वीन तभी लेने पर काम करता जब वास्तविक कवर बचे। साजिद असुविधाजनक बेसलाइन जगहों से सीधे स्ट्रोक पर। जहाँ सटीक संपर्क चाहिए, वहाँ नाटकीय जोर घटाता।
एक अभ्यास में अलग पॉकेट के पास दो सफेद रखे। पहला ज्यादा जोर से निकालने पर दूसरा बिगड़ सकता था। साजिद तब तक दोहराता जब तक पहला निकालकर अगले के लिए उपयोगी जगह न छोड़ सके।
पॉल पूरे सफल क्रम गिनता, अकेली भाग्यशाली पॉकेट नहीं। पहला गिरा मगर अनावश्यक संपर्क से दूसरा कठिन हुआ तो अभ्यास असफल था।
बदले में साजिद ऐसी क्वीन पॉकेट की प्रशंसा नहीं करता जिसके बाद यथार्थवादी कवर न हो। पॉल चिढ़ता क्योंकि क्वीन प्रगति दिखती थी। फिर दोनों वास्तव में जीते बोर्डों की तुलना करते।
दोस्ती एक बातचीत में नहीं लौटी। थकी शामों में छोटे वादे पूरे करने से लौटी, जब तोड़ना दोनों के लिए आसान था। कभी केवल समय पर संदेश भेजना भी उतना ही जरूरी अभ्यास बन गया जितना सही स्ट्राइकर रखना।
4. बाहर का चरण हारे
अरुण और केतन ने पहला चरण दो-एक से जीता। साजिद और पॉल ने शुरुआती गेम लिया, दूसरा खोया और निर्णायक वापस नहीं पा सके।
विरोधी बोर्ड की गति बदलने में अच्छे थे। अरुण सटीक सीधे पॉकेट से शुरुआती गोटियाँ साफ करता। केतन भीड़ वाली स्थितियाँ अंधा जोर लगाए बिना सँभालता। लगातार बारियों पर अलग समस्याएँ देते।
निर्णायक गेम में पॉल ने यह जाँचे बिना क्वीन ली कि बचे सफेद उचित कवर देते हैं या नहीं। क्वीन गई, कवर चूका और नियम के अनुसार केंद्र में लौटी। बाद में अरुण की तरफ ने बेहतर अवसर लिया।
साजिद का भी हिस्सा था। पहुँच में सफेद पर ज्यादा जोर लगाया, दूसरी गोटी बिगाड़ी और अगली बारी पहले स्ट्रोक की गलती ठीक करने में लगी।
बाद में गणेश बोला कि पुराना जोड़ा अब भी दोष बाँटना जानता है। पॉल बोलने वाला था। खेल क्षेत्र के बाहर साजिद ने बीच में स्कोरशीट रख दी।
“छठे बोर्ड पर मेरा जोर।”
“उससे पहले मेरी क्वीन,” पॉल ने कहा।
दोनों की समीक्षा की। किसी एक गलती पर पूरी हार नहीं लादी।
वापसी के चरण तक चार सप्ताह थे। कमी वास्तविक थी। हार में उपयोगी जानकारी भी वास्तविक थी।
बस में पॉल ने अगली रवानगी जोर से जाँची। साजिद ने वही समय-सारिणी देखी। दर्शक को छोटी बात लगती। दोनों ने छोटा नहीं माना। जिस यात्रा पर एक-दूसरे का भरोसा टूटा था, अब उसी तरह की यात्रा में बिना आरोप जानकारी साझा कर रहे थे।
5. चार सप्ताह का सामान्य काम
महीना उत्सव की कल्पना में नहीं बिताया। पहले चरण ने जो दो गलतियाँ दिखाईं, उन पर काम किया।
पॉल क्वीन और कवर के क्रम अलग स्थितियों में अभ्यास करता। अपनी पहले से पॉकेट हुई गोटियों की संख्या बदलती। पात्रता और कवर के नियम हर बार सही रखते। पहचानने लगा कि कभी क्वीन अकेली छोड़ना बेहतर फैसला है।
साजिद ने अलग गति वाले बोर्डों पर काम किया। वापसी का स्थान मनोरंजन कमरे जैसा होगा, मान नहीं सकता था। अभ्यास के प्रत्येक समूह से पहले अनुमति वाले समय में नियंत्रित स्ट्रोक की दूरी समझता।
गेम के अंत का हिसाब भी देखा। अपना स्कोर बाईस या अधिक हो चुका हो तो सही कवर की गई क्वीन भी तीन अतिरिक्त अंक नहीं देती। उस समय अपनी गोटियाँ साफ करते हुए सामने की कितनी बचीं, वह दर्शकों को महत्वपूर्ण दिखने वाली क्वीन से अधिक निर्णायक हो सकता है।
एक नकली अंतिम स्थिति में पॉल क्वीन कवर करके जीत के पर्याप्त अंक घोषित कर बैठा। साजिद ने शुरुआती तेईस दिखाए। क्वीन बोनस नहीं था। बोर्ड फिर लगाया और वास्तविक काम खेला।
वापसी से एक सप्ताह पहले पॉल की पाली बदल गई और सत्र छूटा। साजिद को जल्दी बताया, उपलब्ध समय भेजा और अभ्यास पूरा किया। साजिद ने उसे यह प्रमाण नहीं बनाया कि कुछ नहीं बदला।
भरोसा संशोधन वाली समय-सारिणी बना। यह माँग नहीं कि सामान्य जीवन कभी बाधा न डाले। अगली बार दोनों कमरे में मिले तो अनुपस्थिति का हिसाब नहीं माँगा गया। सीधे वही कठिन दो-सफेद स्थिति फिर रखी गई।
6. वापसी का पहला गेम
वापसी में दोनों को दो बार जीतना था। पहला गेम तैयारी की तरह नहीं ले सकते थे।
अरुण ने मजबूत शुरुआत की। एक शुरुआती बोर्ड पर कई काले निकाले। कठिन अगली चाल चूकने पर बारी समाप्त हुई। साजिद ने दो नपे सफेद निकाले। स्कोर तेजी से चल रहा था, इसलिए भीड़ पर अंधा जोर लगाने का लालच नहीं लिया।
पॉल का महत्वपूर्ण योगदान बाद के बोर्ड में आया। क्वीन की संभावना थी, कवर भरोसेमंद नहीं। सीधा सफेद चुना। अगली बारी तक स्थिति सुधरी तो वास्तविक कवर के साथ क्वीन ली और पूरा किया।
उनकी तरफ बोर्ड जीता। क्वीन के अंक की पात्रता अभी थी। तीन अंक इसलिए जुड़े क्योंकि कवर भी किया, बोर्ड भी जीता और उससे पहले स्कोर बाईस से कम था।
गेम करीबी रहा। केतन के कठिन कट ने विरोधियों को बनाए रखा। अरुण ने एक ढीले स्ट्रोक का लाभ लिया। साजिद और पॉल ने कई बारियों से परिणाम बनाया, लगातार एक लंबी सफाई से नहीं।
पच्चीस-बीस से गेम जीते। दोनों चरणों का कुल अब दो-दो गेम। वापसी में एक और जीत पूरी चुनौती तीन-दो से तय करती।
अनुमति वाले विराम में गणेश ने अरुण और केतन से समय लेकर खेलने को कहा। समझदार सलाह थी। पॉल ने पानी पिया। साजिद ने आधिकारिक गेम स्कोर देखा और अतिरिक्त स्ट्राइकर छुए बिना केस रख दिया।
अगले गेम के लिए उसे नई वस्तु की नहीं, उसी काम को फिर सही करने की जरूरत थी। सामने वाले भी अब उसके पहले गेम के उत्तर जान चुके थे।
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7. तेईस-तेईस
दूसरा गेम धैर्य की लड़ाई बना। विरोधियों ने साजिद को वही आसान शुरुआती संपर्क नहीं दिए। केतन नियंत्रित स्ट्रोक रखता और गोटियाँ ऐसी जगह छोड़ता जहाँ लापरवाह सफाई नई परेशानी बनाती।
साजिद कठिन सफेद चूका। पॉल ने सामने से नाराजगी का संकेत नहीं दिया। अगली बारी में उपलब्ध उपयोगी चाल ली और स्थिति सँभालने योग्य रखी।
छह बोर्ड बाद साजिद और पॉल तेईस-इक्कीस से आगे थे। आठवें बोर्ड की सीमा पास थी, लेकिन कोई भी पहले पच्चीस पहुँच सकता था।
सातवाँ बोर्ड अरुण और केतन जीते। दो विरोधी सफेद बचे और क्वीन बोनस नहीं था। स्कोर तेईस-तेईस।
अगला बोर्ड गेम तय करता, जब तक परिणाम बराबर होकर आयोजन की घोषित आगे की प्रक्रिया जरूरी न बनाए। गोटियाँ लगाने से पहले सभी काम जानते थे।
पॉल को अभ्यास में तेईस से क्वीन बोनस गिनने की गलती याद आई। अब काल्पनिक अभ्यास नहीं था। इस स्कोर पर दोनों तरफ के लिए तीन क्वीन अंक अनुपलब्ध थे।
फिर भी क्वीन के नियम ठीक रखने थे। अपनी गोटियाँ विरोधी से पहले साफ करनी थीं। पच्चीस तक जाने के अंक बोर्ड पर बची विरोधी गोटियों से आने थे।
अरुण ने केतन को देखा, फिर बोर्ड पर लौटा। आत्मविश्वास टूटा नहीं था। बाहर का निर्णायक गेम जीते थे और यहाँ दो अंक वापस लिए थे। साजिद और पॉल को पूरी क्षमता वाले प्रतिद्वंद्वियों से गेम छीनना था। दोनों ने बैठने की जगह ठीक की। इस बार जीत की गणना आसान थी, उसे पैदा करना कठिन।
8. तीन अंकों के बिना क्वीन
अंतिम बोर्ड अभ्यास के आकार में नहीं बना। गोटियाँ असमान खुलीं। वैध टक्कर से एक उपयोगी सीधा रास्ता बंद हुआ। दूसरा तब खुला जब केतन ने कठिन काला निकाला और पास का समूह विरोधी गोटी पॉकेट किए बिना सरकाया।
आखिर पॉल ने क्वीन निकाली और अगली चाल में सफेद से सही कवर किया। स्कोरबोर्ड नहीं देखा। तेईस पर बोर्ड जीतने पर भी क्वीन बोनस नहीं था। कवर इसलिए जरूरी था कि क्वीन का काम वैध रूप से पूरा हो और बाकी सफेद साफ किए जा सकें।
खेल आगे चला। निर्णायक बारी तक दोनों तरफ दो-दो गोटियाँ बचीं। अरुण ने असुविधाजनक कोण से काले की कोशिश की। पॉकेट किनारे लगा और अगली बारी में गंभीर खतरा बने रहने जितना पास रुक गया।
साजिद की बारी आई।
पहले सफेद का सीधा रास्ता था। अतिरिक्त आगे की गति दूसरे सफेद को बिगाड़ सकती थी। उसने इसी तरह की समस्याओं का अभ्यास किया था, ठीक इसी विन्यास की भविष्यवाणी नहीं।
स्ट्राइकर रखा। संपर्क के लिए जरूरी जितना ही जोर दिया। पहला सफेद निकला। दूसरा अपनी उपयोगी जगह रहा।
पॉल सामने स्थिर बैठा। न उँगली दिखाई, न पॉकेट की ओर सिर हिलाया। साजिद को अपना भरोसा खुद देना था।
एक सफेद बाकी। दो काले बाकी। परिणाम गिनने जितना पास था और चूकने जितना दूर भी। साजिद ने पिछले सफल स्ट्रोक को देखकर जल्दबाजी नहीं की। अगला पत्ता नहीं, अगला कोण अलग था; उसके लिए हाथ फिर नए सिरे से जमाना था।
9. दूसरा स्ट्रोक
साजिद ने बेसलाइन पर दूसरी वैध जगह स्ट्राइकर रखा। सही संपर्क हो तो आखिरी सफेद सीधे निकल सकता था। ज्यादा जोर रास्ता चौड़ा नहीं करता। उसने साँस ली और स्ट्रोक किया।
सफेद इच्छित लाइन पर गया और गिर गया। स्ट्राइकर आगे गया, लेकिन न काला पॉकेट हुआ, न स्ट्राइकर खुद पॉकेट में गया।
सफेद साफ थे। दो काले बचे। अंपायर ने दो अंक दिए, क्वीन बोनस नहीं।
पच्चीस-तेईस। दूसरा गेम उनका। वापसी का चरण दो-शून्य। दोनों चरण मिलाकर तीन-दो उनके पक्ष में। अतिरिक्त निर्णायक गेम की जरूरत नहीं थी।
पॉल आधा उठ गया, फिर अंपायर की जाँच पूरी होने तक बैठ गया। साजिद हँसा क्योंकि वह भी लगभग यही करने वाला था। परिणाम पक्का होने पर ही सामने हाथ मिलाया, फिर दोनों विरोधियों से।
अरुण ने कहा कि पहले सफेद ने दूसरे को ठीक जरूरी जगह छोड़ा। साजिद ने धन्यवाद दिया। यह उस खिलाड़ी की सटीक प्रशंसा थी जो जानता था कि बारी कितनी आसानी से अलग खत्म हो सकती थी।
केतन ने पुरस्कार के बाद संपर्क फिर दिखाने को कहा। पॉल ने साजिद को देखे बिना हाँ कहा, फिर खुद सुधारा।
“इतनी देर रुक रहे हैं?”
साजिद ने दोनों की मंजूर यात्रा योजना देखी। “चालीस मिनट हैं।”
सवाल सामान्य था। उत्तर भी। वापस मिली चीजों में यह भी था। पॉल को अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी, लेकिन साथी की जानकारी जानने की जरूरत थी। इस बार उसने वही पूछ लिया।
10. वह बस जिसमें साथ चढ़े
गणेश ने परिणाम को पुराने क्लब के प्रशिक्षण का प्रमाण बताना शुरू किया। पॉल ने कहा कि तैयारी बतानी है तो बाहर की हार और मनोरंजन कमरे के चार सप्ताह भी शामिल करे।
साजिद उत्तर का इंतजार नहीं करता रहा। अनुमति लेकर केतन के साथ आखिरी दो सफेदों की स्थिति लगाई और दोनों पक्षों से खेली। अरुण ने थोड़ा अलग बचाव विन्यास दिखाया जिससे सफाई कठिन होती। वह रूप भी आजमाया। सचमुच कठिन था।
उनके पास केवल सफल स्ट्रोक की तस्वीर नहीं थी। उसके पहले और बाद की संभावना देखने का समय था। केतन ने फिर पूछा कि पहले सफेद पर जोर कितना कम किया था। साजिद ने खेलकर दिखाया। दूसरी कोशिश थोड़ी चूकी तो सभी ने नई स्थिति फिर देखी।
चालीस मिनट पूरे होने लगे तो पॉल ने समय देखा और कहा कि निकलना चाहिए। साजिद ने केस समेटा। किसी ने दूसरे पर समय-सारिणी की ज्यादा चिंता करने का आरोप नहीं लगाया।
बस स्टॉप जल्दी पहुँचे। बैठने का समय था। साजिद चाय लाया, पॉल ने बोर्ड बैग रखा। ट्रॉफी पैरों के बीच लिपटी थी ताकि धातु की सीट से न टकराए।
कुछ देर सातवें बोर्ड की बात की, जो विरोधी जीते थे। फिर पॉल ने कहा कि छूटी यात्रा को इस परीक्षा में बदलना गलत था कि कौन दोस्त ज्यादा परवाह करता है। साजिद ने माना कि उसने भी वही किया।
बस आई। चढ़ने से पहले मंजिल जाँची। अंदर मंगलवार के अभ्यास की बात हुई। एक की जल्दी पाली, दूसरे की देर की थी। दूसरी शाम चुनी।
पॉल ने समय सेव किया। साजिद ने सुधरा केस बंद करके बीच में रखा। साझा याद दिलाने वाला संदेश आया तो दोनों ने फोन उठाकर पुष्टि की।
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