1. YY9: वह दस्तखत जिसने मुझसे कप छीन लिया
मैंने तरुण की तरफ देखने से पहले ड्रॉ पर दस्तखत किए। उस समय मुझसे यही क्रम निभ सका। पहले परिणाम पर्ची का छोटा चौखाना, फिर वह आदमी जिसके आधे अंक ने हमारी टीम से चैंपियनशिप छीन ली थी।
मेरा नाम लक्ष्य है। उम्र चौंतीस वर्ष। उस सीजन में मैं तरुण को दो बार हरा चुका था और इस बाजी का आखिरी घंटा तीसरी जीत तैयार करने में लगा चुका था। मेरी रानी उसके राजा के पास पहुँच गई थी। उसके समर्थकों की फुसफुसाहट बंद हो गई थी। हमारे एक साथी ने खाली ट्रॉफी केस उठाकर कुर्सी पर रख दिया था।
तभी तरुण ने मुझे शह देना शुरू किया।
पहली शह पर लगा कि वह अंत टाल रहा है। दूसरी पर मैंने राजा की ऐसी चाल खोजना शुरू किया जिससे यह टालना खत्म हो। जब उसने निर्णायक को बुलाया, तब मुझे मालूम था कि स्कोरशीट पर क्या लिखा जाएगा। फिर भी मैंने उसे पूरा पढ़ा।
बाकी तीन बोर्डों पर सामने वाली टीम दो अंक ले चुकी थी। मेरी जीत मैच को दो-दो पर बराबर करके घोषित टाईब्रेक तक पहुँचाती। उसका ड्रॉ अंतिम स्कोर ढाई-डेढ़ कर देता। मेरे बोर्ड पर उपलब्ध सबसे छोटा नतीजा उसकी पूरी टीम को ऊपर उठाने के लिए पर्याप्त था।
तरुण ने ट्रॉफी केस की ओर इशारा नहीं किया। उसने निर्णायक से परिणाम की एक प्रति उनके चौथे बोर्ड के खिलाड़ी को देने को कहा। वह बाहर खड़ा था और उसके चेहरे पर आँसू थे।
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2. जिस आधे अंक को उन्होंने फेंक दिया था
छह महीने पहले मैंने दूसरी टीम को तरुण के उसी आधे अंक के साथ दाग जैसा व्यवहार करते देखा था।
वह तैंतीस वर्ष का लेखा सहायक था। पुणे के एक छोर से दूसरे तक उसके बैग में खाने का डिब्बा और शतरंज की घड़ी साथ जाते थे। उसका पुराना कप्तान राघव उसे भरोसेमंद कहता था। व्यवहार में इसका अर्थ था अतिरिक्त मोहरे उठाना, ट्रेन का समय देखना और जिस बोर्ड पर बड़े व्यक्तित्व बैठना न चाहें, वहाँ बैठ जाना।
एक लीग मैच में तरुण ने एक प्यादा कम रहते हुए सत्तर चाल तक हाथी का एंडगेम बचाया था। अंत में ऐसा स्थान आया जहाँ विरोधी राजा बगल से मिलने वाली शहों से बचता तो अपना आखिरी प्यादा छोड़ता। ड्रॉ सही नतीजा था। लेकिन उनकी टीम बाकी दो बोर्ड पहले ही हार चुकी थी। राघव को ऐसा किस्सा चाहिए था जो उसकी अपनी हार से शुरू न हो।
उसे तरुण की स्कोरशीट में वह किस्सा मिल गया।
कागज उठाकर उसने कहा, “एक और बहादुर आधा अंक। कुछ लोग पूरी टीम को डूबते देखकर भी खुश रहते हैं कि उनके जूते सूखे रह गए।”
मैं इतना पास था कि खाने के डिब्बे पर तरुण की उँगलियाँ कसते देख सकूँ। कोई हँसा। फोटो के लिए जगह बनाते हुए एक साथी ने उसकी कुर्सी हटा दी। तरुण घड़ियाँ पकड़े पिछली कतार में खड़ा रह गया।
मैं उस एंडगेम को समझता था। मुझे पता था कि उसने उपलब्ध जीत ठुकराई नहीं थी। फिर भी चुप रहा। राघव मेरे क्लब के काम आता था, और उसका विरोध करने से आसान चुप रहना था। उस शाम अगली टीम सूची से तरुण का नाम गायब हो गया। फोटो उसके बिना प्रकाशित हुई।
3. चार खिलाड़ी, जिनकी हार अलग हो सकती थी
जिस टीम ने आखिर हमें हराया, उसकी शुरुआत किसी भाषण से नहीं हुई थी। शुरुआत दीवार की घड़ी की टूटी मिनट वाली सुई को लेकर बहस से हुई थी।
तरुण ने गुरुवार की शाम के लिए एक छोटा वाचनालय खोजा था। छत्तीस वर्ष की स्कूल प्रशासक सायरा लंबे अभ्यास मैच चाहती थी। इकतालीस वर्ष का जोसेफ ओपनिंग पर काम करना चाहता था, क्योंकि बीसवीं चाल से पहले उसकी बाजियाँ बिगड़ जाती थीं। अट्ठाईस वर्ष का नील समझना चाहता था कि किसी साथी की हार देखते ही उसकी अपनी चालें तेज क्यों हो जाती हैं।
तरुण तीनों काम करना चाहता था। जगह सिर्फ दो बोर्डों की थी।
उन्होंने समय बाँटा और पहले ही सप्ताह बाँटा हुआ समय टूट गया। जोसेफ देर से आया। नील जल्दी चला गया। सायरा ने कहा कि वह एक और शाम दूसरों की अनदेखी बाजी का विश्लेषण सुनते हुए नहीं बिताएगी। तरुण लगभग फिर उसी पुराने ढंग में लौट गया था जहाँ सब सामान भी वही उठाता और हर बात के लिए माफी भी वही माँगता।
इसके बजाय उसने चार कामों के ऊपर चार नाम लिखे। हर खिलाड़ी अपनी हार का एक स्थान लाएगा। हर किसी को बिना टोके समय मिलेगा। घड़ियाँ, ओपनिंग की तैयारी और कमरा बंद करने की जिम्मेदारी बारी-बारी से आएगी। कोई न आ सके तो बाकी तीन अभ्यास करेंगे।
यह सब मुझे बाद में उनकी तारीख लगी कॉपियों से पता चला। उस समय मैंने वाचनालय के नाम से दर्ज नई टीम देखी और मान लिया कि वह बड़े क्लबों से निकाले गए खिलाड़ियों का ठिकाना है।
पहला अभ्यास मैच मेरी बात सही साबित करता लगा। वे साढ़े तीन-आधे से हारे। तरुण ने एकमात्र ड्रॉ बनाया। इस बार किसी ने हँसने के लिए उसकी स्कोरशीट नहीं उठाई।
4. बचाव की कीमत
उनके अभ्यास में दुख सहने का सुंदर वर्णन पर्याप्त नहीं था। विश्लेषण में तरुण किसी स्थान को कठिन कहता, तो सायरा पूछती कि वह कौन-सी चाल खेलने वाला है।
उसमें हर प्यादे को बचाने की आदत थी, मानो एक प्यादा खोना राघव की बात सही कर देगा। इससे उसके मोहरे ऐसे खानों से बँध जाते जिन पर विरोधी बार-बार हमला कर सकता था। एक अभ्यास में उसने वजीर वाले पंख का अतिरिक्त प्यादा पकड़े रखा और अपने राजा को उसी की सुरक्षा के पीछे कैद होने दिया। दोबारा वही स्थान खेलते हुए उसने प्यादा लौटाया, हाथी सक्रिय किया और किसी चमत्कारी राहत की प्रतीक्षा किए बिना ड्रॉ निकाला।
यह अंतर उसे पहली हार से अधिक खला। वर्षों तक वह जिद को अपना सबसे मजबूत गुण मानता रहा था। अब साथी दिखा रहे थे कि वही जिद कितनी बार विरोधी को स्थिर निशाना दे देती है।
तीखे स्थानों में वे पकड़ने की चालों से पहले शहें देखते थे। लेकिन हर शह को उपयोगी नहीं मानते थे। राजा को सुरक्षित दिशा में धकेलने वाली शह अंतिम मौका खो सकती थी। कोई शांत खाना एक प्यादे से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता था। एक ही स्थान पर वे बारी-बारी हमलावर बनते, ताकि तरुण बचाव के रास्ते उस खिलाड़ी के सामने खोजे जो सचमुच उन्हें खत्म करने की कोशिश कर रहा हो।
एक बरसाती गुरुवार को वह तीन बार लगातार शह का रास्ता चूक गया। हर बार जोसेफ को राजा निकालने का खाना मिला, क्योंकि तरुण ने शहों का गलत क्रम चुना था। वाचनालय के कर्मचारी को मेज चाहिए होने तक बोर्ड लगा रहा।
अगले सप्ताह तरुण वही स्थान फिर लाया। उसे वह भागने वाला खाना मिल गया था जिसे पहले रोकना जरूरी था। किसी ने ताली नहीं बजाई। सायरा ने हमलावर पक्ष लिया और उससे प्रतिरोध के सामने पूरा बचाव साबित करवाया।
5. मैंने उसे सही खेलकर हराया था
हमारी पहली लीग मुलाकात मेरे लिए कोई नैतिक पाठ नहीं थी। मैंने अच्छा खेला और जीता।
तरुण ने संकुचित स्थान स्वीकार किया, सक्रियता के लिए प्यादा देने का मौका छोड़ा और मेरे घोड़े को ऐसे मजबूत खाने पर जमने दिया जहाँ से वह उसे हटा नहीं सकता था। मैंने दोनों हाथी एक फाइल पर लगाए, दूसरी कमजोरी बनाई और अपने अनुकूल एंडगेम में मोहरे बदले। मेरे किसी नाटकीय इशारे पर नहीं, मेरे राजा के प्रवेश वाले खाने तक पहुँचने पर उसने हार मानी।
दर्शकों में राघव बैठा था। बाहर आने पर उसने पूछा कि क्या तरुण ने एक और वीरतापूर्ण ड्रॉ माँगा था। मैं बिना जवाब दिए मुस्करा दिया। कई बार चाहता हूँ कि उस याद को बेहतर बना सकूँ। मुस्कान अब भी वहीं है।
दूसरी बाजी अधिक कठिन थी। तरुण ने वही प्यादा दिया जिसे पहले छोड़ने से मना किया था। उसके हाथी सक्रिय हुए और उसने समय की कमी तक मुकाबला बराबर रखा। फिर उसने जल्दी में शह दी, मेरे राजा को सुरक्षित खाने पर पहुँचा दिया और अपना अंतिम उपयोगी टेम्पो खो दिया। मैंने एंडगेम जीता। बाद में उसने ठीक उस शह से पहले वाला स्थान देखने को कहा।
मैंने कहा कि उसे साहस से अधिक कुछ चाहिए था। उसने जवाब दिया, “हाँ। दूसरी चाल। तुम अपनी दिखाओ।”
यह उत्तर मेरे लिए सुविधाजनक नहीं था। मैं श्रेष्ठ बने रहने को तैयार था और अब सचमुच काम कर रहा था। हमने चालीस मिनट दो हाथी चालों की जाँच की। एक हारती थी। दूसरी सावधानी से बचाती थी।
उसने दोनों रास्ते लिखे। उनके नीचे यह नहीं लिखा कि पुराने कप्तान ने उसके साथ कितना अन्याय किया था। मैंने उस अनुपस्थिति को क्षमा समझ लिया। वह केवल उसकी शाम का शतरंज के लिए रखा हुआ हिस्सा था।
6. लगभग हाथ से निकला सेमीफाइनल
वाचनालय की टीम अपने समूह में दूसरे स्थान पर रहकर सेमीफाइनल पहुँची। उस रास्ते में एक मामूली अंतर की जीत, एक बराबर मैच और ऐसी हार शामिल थी जिसमें जोसेफ ने खुले हमले में अपनी रानी खो दी थी। वे अजेय होने की कहानी लेकर नहीं आए थे।
सेमीफाइनल में सायरा पहले जीती। फिर नील बराबर एंडगेम हार गया, क्योंकि उसने ऐसा प्यादा ब्रेक जबरन चलाया जो था ही नहीं। जोसेफ की बाजी संतुलित थी। तरुण बेहतर था, लेकिन नील को कुर्सी से उठते देखकर उसने अनावश्यक खतरे लेने शुरू कर दिए।
बाद में उसने बताया कि उसी समय पुराना कमरा उसके सामने लौट आया था। राघव के हाथ में कागज, हँसी और खिसकाई गई कुर्सी। उसे लगा कि एक ही मोहरों के सेट से पूरी टीम की जीत पैदा करनी है।
तुरंत चाल चलने के बजाय उसने अपनी घड़ी का समय इस्तेमाल किया। स्थान फिर देखा। अतिरिक्त प्यादा सुरक्षित था; विरोधी का सक्रिय हाथी तत्काल समस्या था। तरुण ने एक जोड़ी हाथी बदले, दूसरा सक्रिय रखा और बचाव करते राजा को पासर से दूर किया। अपना राजा खोले बिना उसने जीत हासिल की।
जोसेफ ने ड्रॉ बनाया। ढाई-डेढ़ ने उन्हें फाइनल में पहुँचा दिया।
बाद में नील ने अपनी हार के लिए तीन बार माफी माँगी। तीसरी माफी सायरा ने उसकी स्कोरशीट हाथ में देकर रोक दी। उन्हें वह ठीक चाल चाहिए थी जहाँ उसने योजना बदली थी। अब तैयारी के लिए फाइनल था, और उसकी तैयारी करने वाली टीम में नील अब भी शामिल था। किसी ने उसकी कुर्सी नहीं हटाई।
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7. मेरे पहले समाप्त हुए तीन बोर्ड
फाइनल में हमारी टीम को मजबूत माना जा रहा था। मेरी रेटिंग अधिक थी, तरुण के खिलाफ हाल में दो जीत थीं और काले मोहरों से मुझे परिचित ओपनिंग मिली थी। उसने संयमित संरचना चुनी। मुझे जगह मिली, लेकिन उसके यहाँ कोई साफ कमजोरी नहीं बनी।
एक बार मैं जरूरत से आगे बढ़ा। उसने तुरंत केंद्र को चुनौती दी। मुझे राजा वाले पंख का विचार छोड़कर ऐसी रानी अदला-बदली की गणना करनी पड़ी जिसे मैं चाहता नहीं था। कई चालों तक बाजी हम दोनों की बराबर थी।
दूसरे बोर्ड पर सायरा ने ऊँट का एंडगेम दोनों पंखों की कमजोरियाँ बनाकर जीता। तीसरे पर जोसेफ हारा; विरोधी ने अतिरिक्त एक्सचेंज को जीत में बदला। नील का बोर्ड आश्चर्य था। उसने लुभावना प्यादा छोड़ दिया, राजा सुधारा और लंबा एंडगेम जीता जिसे छह महीने पहले वह जल्दबाजी में खेल देता।
उनकी टीम दो-एक आगे थी। हमारी स्थिति पर कोई तरुण को सलाह नहीं दे सकता था और किसी ने कोशिश भी नहीं की। पूरे हो चुके नतीजे दिख रहे थे। उसे आधा अंक चाहिए था; मुझे पूरा।
उसके आरामदायक बचाव में बैठने से पहले मैंने बाजी का रूप बदला। उसके राजा तक पहुँचने के बदले उसे अतिरिक्त प्यादा लेने दिया। रानियाँ बोर्ड पर रहीं। सावधानी से गिनी गई एक शृंखला में दोनों हाथी हटे और बाद की अदला-बदली में छोटे मोहरे भी निकल गए।
खाली हुआ बोर्ड भरे हुए बोर्ड से अधिक खतरनाक था। मेरी रानी एक चाल में दूर पहुँच सकती थी। उसके राजा के पास बहुत कम जगह थी। जब मेरी रानी दूसरी पंक्ति में उतरी, वह कुर्सी से पीछे टिका और छत देखने लगा।
8. जिस शह की गणना मैंने गलत की
वह स्थान आज भी मेरे घर के छोटे बोर्ड पर रखा है। सफेद खेल रहे तरुण का राजा h1 पर, रानी h5 पर और प्यादे g2 तथा h2 पर थे। मेरा राजा g8 पर, रानी a2 पर और प्यादा g7 पर था। सफेद की चाल थी।
धमकी साफ थी। मुझे एक खाली चाल मिलती तो ...Qa1+ के बाद Qd1 से रोकना पड़ता, फिर ...Qxd1 मात होती। उसके अपने प्यादों ने राजा के रास्ते रोके हुए थे और मेरी रानी पहली पंक्ति पर कब्जा कर लेती। इस स्थान तक आते समय मैंने कई रानी शहें देखी थीं। उन्हें गलत शुरुआती खाने से देखा था।
तरुण ने Qe8+ खेला।
मेरा राजा f8 या h8 नहीं जा सकता था, क्योंकि उसकी रानी आठवीं पंक्ति को नियंत्रित करती थी। e8 का विकर्ण f7 रोकता था। g7 पर मेरा अपना प्यादा था। Kh7 ही अकेला वैध जवाब था। a2 की रानी न उसकी रानी पकड़ सकती थी, न f8 पर बीच में आ सकती थी।
मैंने Kh7 खेला और h5 वाली शह का इंतजार किया, जिसे मैंने समाप्त हो जाने वाला रास्ता समझा था।
Qh5+ आया। रानी की लाइन ने h-फाइल पर राजा का रास्ता बंद कर दिया। g6 विकर्ण से हमला झेल रहा था। g7 पर अपना प्यादा अब भी खड़ा था। a2 से मेरी रानी h6 पर बीच में नहीं आ सकती थी। Kg8 मजबूरी था।
बोर्ड फिर उसी स्थान पर पहुँच गया जहाँ चार अर्धचाल पहले था। उसकी रानी e8 तक जाकर लौट आई थी। मेरा राजा h7 जाकर लौट आया था। मेरी मात की धमकी शानदार थी, पास थी और इस्तेमाल करना असंभव था। मैं उसे चलने के लिए आवश्यक एक भी खाली बारी हासिल नहीं कर सकता था।
9. उसने अपना आधा अंक माँगा
तरुण ने मेज के पार ड्रॉ का प्रस्ताव नहीं रखा। वह जिस आधार पर दावा करेगा, उसमें कोई संदेह न रहे इसलिए उसने क्रम दोहराया।
Qe8+, Kh7। Qh5+, Kg8।
इन दो पूरे चक्रों के बाद शुरुआती स्थान तीसरी बार आ चुका था। हर बार सफेद की चाल और वही वैध संभावनाएँ थीं। तरुण ने घड़ियाँ रोकीं और तीन बार स्थान दोहरने के आधार पर ड्रॉ का दावा करने के लिए निर्णायक को बुलाया। निर्णायक ने स्कोरशीट और दोहराया स्थान जाँचा। परिणाम की पुष्टि हुई।
पिछले कई मिनट मैं उन शहों में से किसी एक का अलग उत्तर खोज रहा था। कोई उत्तर था ही नहीं। उसे मानने से इनकार करके मैं अपना बचाव बेहतर नहीं कर सकता था।
रस्सी के बाहर राघव ने आधे अंक के लिए खेलने के बारे में कुछ कहा। कमरा इतना शांत था कि बात हमारी मेज तक पहुँची। तरुण अब भी घड़ी के पास खड़ा था। वह पलटा। उस दिन पहली बार मैंने उसके चेहरे पर गुस्सा देखा जो उसकी आवाज को निगल नहीं रहा था।
“बाकी बोर्ड गिनो,” उसने कहा।
निर्णायक ने ढाई-डेढ़ घोषित किया। अंतिम शहें देखना सहन न होने के कारण बाहर गया नील दरवाजे से भीतर आया। जोसेफ ने उसका कंधा पकड़ा। गले मिलने के बीच कागज खो न जाए, इसलिए सायरा ने परिणाम प्रति अपने हाथ में ले ली।
मैंने दस्तखत किए। मेरे नाम के पास आधा अंक था। तरुण के नाम के पास भी उतना ही था। लेकिन हम दोनों में सिर्फ एक ने अपनी टीम की जरूरत पूरी की थी।
10. फोटो की कुर्सी
पुरस्कार देते समय आयोजकों ने विजेता कप्तान को बुलाया। तरुण बाकी तीनों खिलाड़ियों को साथ ले गया। नील जोसेफ के पीछे खड़ा होने लगा, शायद सेमीफाइनल की अपनी गलती अब भी ढो रहा था। सायरा ने उसे सामने खींच लिया।
मुझे अपने क्लब की मैच रिपोर्ट के लिए छोटा विवरण देना था। शुरू करने से पहले राघव ने “हार से बच निकला” वाला वाक्य सुझाया। मैंने उसे इस्तेमाल नहीं किया।
मैंने राजा की दोनों मजबूर चालें बताईं। नील की जीत और सायरा का एंडगेम बताया। फिर कहा कि महीनों पहले मैंने तरुण को ड्रॉ वाला स्थान बचाते देखा था और जब किसी ने उसे कायरता कहा, मैं चुप रहा था। मैंने अपनी चुप्पी को अपना फैसला कहा। कमरे को बात समझने के लिए तरुण की स्वीकृति में हिलती गर्दन की जरूरत नहीं थी।
उसने ट्रॉफी ली, फिर जोसेफ को पकड़ा दी और टीम फोटो के लिए चौथी कुर्सी खोजने चला गया। इस बार कोई घड़ियाँ उठाए कतार के पीछे नहीं खड़ा रहा।
बाद में मैं हमारी आखिरी बाजी का बोर्ड लगाकर उसके पास गया। जानना चाहता था कि उसने e8 पहली बार कब देखा। उसने स्थान देखा, मेरी रानी को हमले के पुराने रास्ते पर पीछे रखा और लगातार शह शुरू होने से कई चाल पहले पहुँचा।
“यहाँ,” उसने कहा। “तब तक पूरा साबित नहीं किया था।”
हॉल के कर्मचारी कुर्सियाँ जमा करने लगे, तब तक हम विश्लेषण करते रहे। हमारे बीच बोर्ड पर मेरी रानी अब भी मात की धमकी दे रही थी। तरुण की रानी पहले ही उस एक खाने की ओर निकल चुकी थी जहाँ से वह धमकी हमेशा प्रतीक्षा करती रह जाती थी।
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